धूल को फूल बनाने वाले

धूल को फूल बनाने वाले

धूल को फूल बनाने वाले

धूल को फूल बनाने वाले
राग औ रंग सजाने वाले

अब नही साथ निभाने वाले
लाख कसमें वो उठाने वाले

सब खरीद्दार ही निकले देखो
रूह तक आज वो जाने वाले

कर रहे बात यहां उल्फ़त की
दिल में वो आग लगाने वाले

कुछ नही पास हमारे अब है
रंक से आज बताने वाले

क्या लिया लूट बताओ हमसे
लाश के ढेर लगाने वाले

तू मिला देख प्रखर से आखें
क्यों छुपा आज डराने वाले

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • पानी पानी हर तरफ़

    पानी पानी हर तरफ़ दिख रहा है आज हमको पानी पानी हर तरफ़कर रहा है ख़ूब बादल मेहरबानी हर तरफ़ बेतकल्लुफ़ होके दोनों मिल न पाये इसलिएबज़्म में बैठे थे मेरे खानदानी हर तरफ़ तोड़कर वो बंदिशें वादा निभाने आ गयाकर रहे थे लोग जब के पासबानी हर तरफ तेरे जैसा दूसरा पाया नहीं हमने…

  • गमज़दा दिल | Ghamzada Shayari

    गमज़दा दिल ( Ghamzada dil )    फूल शबनम छोड़ कर कुछ और ही मौज़ू रहे अब सुखन में भी ज़रा मिट्टी की कुछ खुशबू रहे। हो चुकी बातें बहुत महबूब की बाबत यहां ज़िक़्र उनका भी करें जो मुल्क़ का बाज़ू रहे। गमज़दा दिल कर सकूं आज़ाद ग़म की क़ैद से काश मेरे पास…

  • कहां होती | Kahan Hoti

    कहां होती ( Kahan Hoti )   रवैये में लचक कोई मुरव्वत ही कहां होती कभी सरकार की हम पर इनायत ही कहां होती। जो बातिन है वो ज़ाहिर हो ही जाया करता है इक दिन असलियत को छुपाने की ज़रूरत ही कहां होती। मेरी तकलीफ़ में जगती है वो शब भर दुआ करती हो…

  • पहली दफ़ा | Pehli Dafa

    पहली दफ़ा ( Pehli Dafa )   जबसे तुम्हें देखा है जीने की हसरत हुई है, पहली दफ़ा ख़ुद से हमको मोहब्बत हुई है, सुन ज़रा तू ऐ मेरे हमराज़ ऐ मेरे हम-नशीं, तेरे आने से मुर्दा-ए-दिल में हरकत हुई है, तू पास है दिलमें जश्न-ए-बहारां हर रोज़ है, तेरे बिन तो फ़क़त ख़िजाँ की…

  • तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दी

    तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दी तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दीबुलंदी की हर इक निशानी लुटा दी ख़ुदा ने सँवारा सजाया चमन कोगुलों पे सभी मेहरबानी लुटा दी फ़िजाओं में नफ़रत का विष घोल कर केमुहब्बत की सारी कहानी लुटा दी ख़ज़ाना किया सारा खाली उन्होंनेकि हासिल हुई राजधानी लुटा दी करें रोज़ क़ुदरत…

  • चाहने वाले कितने | Ghazal Chahane Wale

    चाहने वाले कितने ( Chahane Wale Kitne ) रिन्दो से पूछो न पत्थर हैं उछाले कितने मत गिनो टूटे हैं मय के यहाँ प्याले कितने जोर तूफ़ान का तो शोर कभी लहरों का सीने में ग़म के समंदर है सँभाले कितने कौन सुनता है ग़रीबों की यहाँ पर देखो नज़रें डालो ज़रा पैरों में हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *