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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • शौर्य
    कविताएँ

    शौर्य | Kavita

    ByAdmin April 23, 2021

    शौर्य ( Shaurya )   बढ़ चले मतवाले रण में पराक्रम दिखलाने को अरि दल से लोहा लेने को वंदे मातरम गाने को   वीर वसुंधरा जननी वीरों की शौर्य साहस से भरपूर बारूद की भाषा में करते मंसूबे दुश्मन के चूर   डटकर रहते सीमा पर समर के वो सेनानी तलवारों की पूजा होती…

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  • तू तल्ख़ करनी मुझसे बात छोड़ दें
    शेरो-शायरी

    Ghazal | तू तल्ख़ करनी मुझसे बात छोड़ दें

    ByAdmin April 23, 2021

    तू तल्ख़ करनी मुझसे बात छोड़ दें ( Tu talkh karni mujhshe baat chhod den )     तू तल्ख़ करनी मुझसे बात छोड़ दें! करनी ग़मों की ये बरसात छोड़ दें   देकर मुझे वफ़ा का नाम तू मगर मेरा  कहीं  न  तू  ये हाथ छोड़ दें   तू प्यार की ख़िज़ां कर रोज़…

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  • मजबूरी/ लाचारी
    कविताएँ

    मजबूरी/ लाचारी | Kavita

    ByAdmin April 23, 2021

    मजबूरी/ लाचारी ( Majboori )   सबको रखना दूरी है यह कैसी मजबूरी है कालचक्र का कैसा खेल कोई शक्ति आसुरी है   मजदूर आज मजबूर हुआ थककर चकनाचूर हुआ लहर कोरोना कैसी आई अपनों से भी दूर हुआ   मजबूर आज सारी दुनिया मुंह पर मास्क लगाने को सावधान रहकर जग में डटकर कदम…

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  • Positive Kavita
    कविताएँ

    पाज़िटिव कविता! | Vyang

    ByAdmin April 23, 2021

    पाज़िटिव कविता! ( Positive Kavita : Vyang )   कोरोना नहीं है कोरोना नहीं है रोना नहीं है रोना नहीं है आॅक्सीजन की कमी नहीं है फैक्ट्रियों में पड़ी हुई हैं बहुत सारी भरी हुई हैं टैंकरों से आ रही है हवाई जहाज भी ला रही है बेड की कमी नहीं है दवाएं भी हैं…

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  • आजमाया करें
    कविताएँ

    आजमाया करें | Kavita

    ByAdmin April 23, 2021

    आजमाया करें ( Aajmaya Karen )   बेवजह बात को ना बढाया करे, मुझसे जब भी मिले मुस्कुराया करे। सारी दुनिया के रंजो व गम भूल कर, दो घडी आँख मुझसे मिलाया करे।   आरजू जो दबी सी सनम दिल में है, आप मुझसे कभी ना छुपाया करे। आइने सा ये चेहरा मेरा है सनम,…

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  • रहनुमा
    कविताएँ

    रहनुमा | मार्गदर्शक | Kavita

    ByAdmin April 23, 2021

    रहनुमा ( मार्गदर्शक ) ( Rahnuma )   रहनुमा कोई मिल जाए राह मेरी आसां हो जाए मेरी मंजिल का ठिकाना मुझको भी नसीब हो जाए   मार्गदर्शक बता दे रस्ता कोई खता न मुझसे हो जाए भटक  रहा  हूं  बियावान में हाथ पकड़ कोई राह दिखाये   अंधकार का अंत नहीं है रहनुमा का…

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  • देख रहा हूँ मैं हंसी यारों नज़ारें गांव में
    शेरो-शायरी

    देख रहा हूँ मैं हंसी यारों नज़ारें गांव में | Ghazal

    ByAdmin April 22, 2021

    देख रहा हूँ मैं हंसी यारों नज़ारें गांव में ( Dekh raha hun main hansi nazare gaon mein )     देख रहा हूँ मैं हंसी यारों नज़ारें गांव में आ रही देखो गुलों की वो बहारें गांव में   चाहता हूँ एक कोई तो बने साथी मेरा जो हंसी मुखड़े की देखी है कतारें…

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  • भटकता मन
    कविताएँ

    भटकता मन | Kavita

    ByAdmin April 22, 2021

    भटकता मन ( Bhatakta man )   भटकते मन में मेरे आज भी, कुछ आस जिन्दा है। भरा  है  चाहतों  से  शेर मन पर, प्यास जिन्दा है।   उसी  को  टूट  कर चाहा, खुदी को ही भुला करके, अधुरी चाहतों का अब भी कुछ,एहसास जिन्दा है।   किसी को चाहना और वो मिले, ये सच…

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  • हारना हमको नहीं गवारा
    कविताएँ

    हारना हमको नहीं गवारा | Kavita Harna Humko Nahi

    ByAdmin April 22, 2021February 8, 2023

    हारना हमको नहीं गवारा ( Harna Humko Nahi Gavara )   जोश जज्बा रखकर चलते हैं तूफानों   में   हम   पलते  हैं हिम्मत बदले विपरीत धारा हारना  नहीं  हमको  गवारा   संस्कार कुछ ऐसे पाये हैं लक्ष्य  साधने  हम आए हैं अटल इरादे मानस हमारा हारना नहीं हमको गवारा   तूफानों से भीड़ सकते हैं आंधियों …

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  • नज़रों का सच
    कविताएँ

    नज़रों का सच | Kavita

    ByAdmin April 22, 2021

    नज़रों का सच ( Nazron Ka Sach )   देखती  है  जो  नज़रे वो होता नहीं, चाहती है जो नज़रे वो दिखता नहीं। मन को छू जाए जज़्बात होंठो पे हो, आसूं बनके बहे मानता मन नहीं ।।   भीड़  को  देखा  राहों  पे बढ़ते हुए, दे  के  धक्का  बगल  में संभलते हुए। आंख  में …

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