कोरोना नहीं है
कोरोना नहीं है
रोना नहीं है
रोना नहीं है
आॅक्सीजन की कमी नहीं है
फैक्ट्रियों में पड़ी हुई हैं
बहुत सारी भरी हुई हैं
टैंकरों से आ रही है
हवाई जहाज भी ला रही है
बेड की कमी नहीं है
दवाएं भी हैं भरपूर
ब्लैक में नहीं मिल रही हैं
सफेदपोशों के यहां मिल रही है
कोविड अस्पतालों के बाहर भीड़ नहीं है
इक्का दुक्का ही दिख रहे हैं
चीख चिल्ला नहीं रहे हैं
हंस हंस कर बातें कर रहे हैं
होंठों पर बिखरी है मुस्कान
देखो खाली पड़ा है कितना श्मशान
चिंताओं का नहीं कोई नामोनिशान
बेवजह लोग फैला रहे हैं निगेटिविटी
देखो कितने मुस्कुरा रहे हैं सेलिब्रिटी
आपको दु:ख है तो आत्मनिर्भर बन जाइए
स्वावलंबी बन काम चलाइए
सरकार सरकार न चिल्लाइए
कोई मरे भी तो ग़म न करें
धैर्यशील और संयमित बने रहें
युग पुरुष कहलाएंगे
बेवजह चीखने चिल्लाने वाले
राष्ट्रद्रोही हो जाएंगे
कुछ इस तरह हम लोग
आसानी से कोरोना को हरा पाएंगे।
विश्व कविता दिवस ( World Poetry Day ) अल्फाज़ का जामा तो मैंने पहनाया था जज्बात को ,एहसासों को तो मैंने ही पिरोया था दिल से निकाल पन्नों पर तो मैंने उकेरा था तुझसे कैसे ये मेरे रूबरू हुये मेरे ही दिल में रहे और चोरी किये या था तुझको पता कि ये थे…
अपना हिंदुस्तान अलग है ( Apna hindustan alag hai ) हम सब तो हैं भारतवासी वे रखते पहचान अलग। अपना हिन्दुस्तान अलग है उनका हिन्दुस्तान अलग।। वे उड़ते एरोप्लेन से हम सब उनके रन वे हैं। वे मक्खन हम मठा सरीखे हम पर अमर बेल वे है।। वे तो हैं…
बुद्ध वाणी ( Boudha Bani ) सुन प्राणी बुद्ध की वाणी बुद्ध शरण गच्छामि सुन प्राणी धम्म शरण गच्छामि संघ शर्ण गच्छामि सुन प्राणी चार आर्य सत्य दुख कारण निदान वह मार्ग जिससे होता दुख का पूर्ण निदान पंचशील प्रमुख जान हत्या चोरी व्यभिचार असत्य मधपान अष्टांगिक मार्ग के जीवन सुखमय बनाने के सोपान…
कर्म से तू भागता क्यों ? क्या बंधा है हाथ तेरे कर्म से तू भागता क्यों? पाव तेरे हैं सलामत फिर नहीं नग लांघता क्यों? नाकामियों ने है डराया वीर को कब तक कहां ? हार हिम्मत त्याग बल को भीख है तू मांगता क्यों ? मानता तू वक्त का सब खेल है बनना…
बसंत ऋतु के आगमन पर ( Basant ritu ke aagman par ) मदिर से है बसंत, आये हैं जी पाहुने से सखि पिया बिन मोहे, कछु न सुहावत है।। खखरा के पात उड़, उड़ आये द्वारे आज पवन के झौकन भी, जिया को जगावत है।। अमुआ के बौर वाली, वास है सुवास आली महुआ…
प्रधान ( Pradhan ) गांव में होता यह प्रधान का पद, मुखियां गांव का होता यह पद ! पांच साल यह जन सेवा करता, गांवों का विकास यही करवाता !! काम होते है सब इनके ही हाथ, देख-रेख एवं समय के अनुसार ! जो कोई करता है अच्छा काम, सम्मानित करता उसको ये गांव…