कोरोना नहीं है
कोरोना नहीं है
रोना नहीं है
रोना नहीं है
आॅक्सीजन की कमी नहीं है
फैक्ट्रियों में पड़ी हुई हैं
बहुत सारी भरी हुई हैं
टैंकरों से आ रही है
हवाई जहाज भी ला रही है
बेड की कमी नहीं है
दवाएं भी हैं भरपूर
ब्लैक में नहीं मिल रही हैं
सफेदपोशों के यहां मिल रही है
कोविड अस्पतालों के बाहर भीड़ नहीं है
इक्का दुक्का ही दिख रहे हैं
चीख चिल्ला नहीं रहे हैं
हंस हंस कर बातें कर रहे हैं
होंठों पर बिखरी है मुस्कान
देखो खाली पड़ा है कितना श्मशान
चिंताओं का नहीं कोई नामोनिशान
बेवजह लोग फैला रहे हैं निगेटिविटी
देखो कितने मुस्कुरा रहे हैं सेलिब्रिटी
आपको दु:ख है तो आत्मनिर्भर बन जाइए
स्वावलंबी बन काम चलाइए
सरकार सरकार न चिल्लाइए
कोई मरे भी तो ग़म न करें
धैर्यशील और संयमित बने रहें
युग पुरुष कहलाएंगे
बेवजह चीखने चिल्लाने वाले
राष्ट्रद्रोही हो जाएंगे
कुछ इस तरह हम लोग
आसानी से कोरोना को हरा पाएंगे।
किसान! ( Kisaan ) ( 3 ) हर तरफ होता किसान हि किसान है फिर भी किसान हि क्यों बेपहचान है गर्मी हो या ठंडी गुजर रही सब खेतों में हर मौसम में जूझ रहा वही नादान है दाना दाना चुगकर करता जीवन यापन तब हि हर महलों में पहुँच रहा राशन है जीवन प्यासा…
ज़िंदगी पढ़ा देती पाठ ( Zindagi padha deti path ) जिनके दिलों में नही होती गांठ, उनके होता सदा घर में ही ठाठ, जिनके दिलों में होती है ये गांठ, उन्हें ज़िंदगी पढा़ देती यह पाठ।। इसलिए तो में कहता हूं भाईयो, ना रखो दिल में गांठ और आंट। ये बोल-बुलाई जाऐगी तेरे साथ,…
उसूल ( Usool ) हर हर मोड़ पर तुम्हें साथी नहीं मिलेंगे परिचितों के कुनबे में पहचान तुम्हें ही बनानी होगी कुछ के साथ तुम्हें चलना होगा और कुछ को अपने साथ चलाना होगा जन्म से पहले तुम्हें कौन जानता था शुरुआत तुम्ही ने की थी कभी मुस्कराकर कभी रोकर लोग जुड़ते गए तुमसे…
महज ( Mahaj ) महज रख देते हाथ कंधों पे, दर्द ए पीर सब हवा हो जाती, ना गम का होता ठिकाना कहीं, ना हालत कहीं ये बिगड़ पाती। महज तेरे आ जाने से ही सही, खुशियां भी मेरे घर चली आई, खिल उठा दिल का सारा चमन, मन की बगिया सारी हरसाई। महज…
कह देना चाहिए ( Kah dena chahiye ) जीवन में कह देना चाहिए हां बहुत प्यार करते हैं हम बच्चों को बहुत डांटते गुस्सा तो कभी चिल्लाते हैं हर काम पर उनके हम सदा कमियां निकालते हैं पर वह कब बड़े हो जाते हैं वह बिगड़ ना जाए इसलिए हम प्यार का इजहार करने…
चांद भी फीका पड़ जाए ऐसा रूप मैंने देखा ( Chand bhi fika pad jaye aisa roop mein ne dekha ) चांद भी फीका पड़ जाए ऐसा रूप है मैंने देखा उतरी हो अप्सरा कोई या भाग्य की किस्मत रेखा मधुर मधुर मुस्कान बिखेरे छैल छबीली चले चाल महक उठता मधुबन सारा मन के…