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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • वृक्ष कहे तुमसे
    कविताएँ

    Kavita | वृक्ष कहे तुमसे

    ByAdmin April 18, 2021September 17, 2023

    वृक्ष कहे तुमसे ( Vriksh Kahe Tumse )   मन  में  यदि हो सेवा भाव हर अवसर पर वृक्ष लगाओ वृक्ष  लगाकर  इस धरती को उसकी धरोहर तुम लोटाओ।।   माना  बन  नहीं  सकता  है पहिले  जैसा  ये  बतावरण छोटे छोटे पौधो को लगाकर आस पास को शुद्ध बनाओ।।   हमको दिया है उस ईश्वर…

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  • तेरा दर मुझे लागे प्यारा
    कविताएँ

    Kavita | तेरा दर मुझे लागे प्यारा

    ByAdmin April 18, 2021

    तेरा दर मुझे लागे प्यारा ( Tera dar mujhe lage pyara )   दीन दुखियों को तेरा सहारा सजा   मां  दरबार  तुम्हारा सबकी  झोली  भरने  वाली तेरा  दर  मुझे  लागे   प्यारा   विघ्न हरणी मंगल करणी हे सुखदाता कष्ट निवारा यश कीर्ति वैभव की दाता तेरा  दर  मुझे  लागे प्यारा   सिंह पर हो सवार…

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  • जबसे नजरें मिला के रखा है
    शेरो-शायरी

    जबसे नजरें मिला के रखा है | Nazre Shayari

    ByAdmin April 18, 2021February 9, 2023

    जबसे नजरें मिला के रखा है ( Jab se nazre mila ke rakha hai )   जबसे नजरें मिला के रखा है। हाल  कैसी  बना  के रखा है।। बहार  बनके  तुम  चले  आते, हमने गुलशन सजा के रखा है।। डूब जायेगा तेरा सारा ज़मीर इतने आंसू बहा के रखा है।। कोई  रकीब  ही  दुवा  कर …

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  • दिल नहीं माना कभी कोई ग़ुलामी
    शेरो-शायरी

    Ghazal | दिल नहीं माना कभी कोई ग़ुलामी

    ByAdmin April 18, 2021April 18, 2021

    दिल नहीं माना कभी कोई ग़ुलामी ( Dil Nahi Mana Kabhi Koi Gulami )     दिल नहीं माना कभी कोई ग़ुलामी। देनी आती ही नहीं हमको सलामी।।   सीधे-सादे हम तो है उस रब के बंदे। राह सीधी जो चले सन्मार्ग-गामी।।   गलतियों से क्यूं डरे हम इस जहां में। कौन जिसमें है नहीं…

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  • बने कातिल झुका ली है हया से ये नज़र जब से
    शेरो-शायरी

    Ghazal | बने कातिल झुका ली है हया से ये नज़र जब से

    ByAdmin April 18, 2021April 18, 2021

    बने कातिल झुका ली है हया से ये नज़र जब से ( Bane katil jhuka li hai haya se ye nazar jab se )     बने  कातिल  झुका ली  है हया से ये नज़र जब से। नहीं कुछ होश बाकी है हुआ दिल पे असर तब से।।     नज़र हम से मिलाओ तो…

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  • चुनाव क्यों न टले
    कविताएँ

    Kavita Neta Ji | चुनाव क्यों न टले नेता जी कहें

    ByAdmin April 17, 2021February 9, 2023

    चुनाव क्यों न टले : नेता जी कहें ( Chunav Kyon Na Tale : Neta JI Kahen )   एक महीने का भाग दौड़, पांच साल मौज ही मौज। लूटो कूटो जनता पर टूटो, दाना दुनका कभी कभार छींटों। चढ़ें हवाई जहाज ठहरें होटल ताज है अपना तो राज ही राज! गाड़ियों की है लंबी…

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  • कागज की कश्ती
    कविताएँ

    Kavita Kagaz ki Kashti | कागज की कश्ती

    ByAdmin April 17, 2021February 9, 2023

    कागज की कश्ती ( Kagaz ki kashti )   कागज की कश्ती होती नन्हे  हाथों  में  पतवार कौन दिशा में जाना हमको जाने वो करतार आस्था विश्वास मन में जाना  है  उस  पार बालपन का भोलापन क्या जाने संसार   भाव भरी उमंगे बहती नन्हे  बाल  हृदय  में चंचल मन हिलोरे लेता बालक के तन…

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  • ग्लोबल वार्मिंग
    निबंध

    Global warming par nibandh | ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध

    ByAdmin April 17, 2021December 7, 2022

    निबंध : ग्लोबल वार्मिंग ( Global Warming : Essay In Hindi ) मानव ही नही संपूर्ण भूमंडल के ऊपर वर्तमान में जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा है। जलवायु परिवर्तन एक ऐसी समस्या है जो पर्यावरण से संबंधित सभी समस्याओं का मूल स्रोत है। ग्लोबल वार्मिंग (भूमंडलीय तपन) वास्तव में 18 वीं सदी की औधोगिक…

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  • Wah re zindagi
    कविताएँ

    Kavita | वाह रे जिन्दगी

    ByAdmin April 17, 2021April 17, 2021

    वाह रे जिन्दगी ( Wah re zindagi )   भरोसा तेरा एक पल का नही, और नखरे है, मौत से ज्यादा।   जितना मैं चाहता, उतना ही दूर तू जाता, लम्हां लम्हां खत्म होकर तू खडा मुस्कुराता। वाह रे जिन्दगी…. भरोसा तेरा एक पल का नही, और नखरे हैं मौत से ज्यादा। बाँध कर सांसों…

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  • आधुनिकता
    कविताएँ

    आधुनिकता | Aadhunikta

    ByAdmin April 17, 2021June 7, 2023

    आधुनिकता ( Aadhunikta )   चाँद की हो गई, दुनिया दीवानी । तारों में बसने लगे, शहरे हमारी ।। ख्वाहिश  पूरी  हुई , इंसानो  की । दुनिया छोड़ दी,घर बनाने के लिए ।।   जल हो गई, प्रदूषित भारी । ज़हर  बन  गई, प्राणवायु ।। जिए  तो  जिए कैसे इंसान । नरक बन गई, धरती…

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