Kavita | गुनाह
गुनाह ( Gunaah ) सद्भावों की पावन गंगा सबके मन को भाए वाणी के तीखे बाणों से कोई घायल ना हो जाए प्रेम के मोती रहा लुटाता खता यही संसार में कदम बढ़ाता फूंक फूंक कर कहीं गुनाह ना हो जाए कोई अपना रूठ ना जाए रिश्तो के बाजार में घूम…
गुनाह ( Gunaah ) सद्भावों की पावन गंगा सबके मन को भाए वाणी के तीखे बाणों से कोई घायल ना हो जाए प्रेम के मोती रहा लुटाता खता यही संसार में कदम बढ़ाता फूंक फूंक कर कहीं गुनाह ना हो जाए कोई अपना रूठ ना जाए रिश्तो के बाजार में घूम…
दबे हुए अरमान ( Dabe hue armaan ) हर बार देख कर तुमकों क्यों,अरमान मचल जाते है। तब भाव मेरे आँखों मे आ, जज्बात मचल जाते है। मन कितना भी बाँधू लेकिन, मनभाव उभर जाते है, दिल की धडकन बढ जाती है,एहसास मचल जाते है। क्या ये मेरा पागलपन है, या तेरे…
संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान गाइडलाइन जारी कर दी दिल्ली बड़ा-बड़ा फरमान संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान 2 मुंह पर मास्क दो गज दूरी बचा लेगी तेरी ज्यान संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान 2 संकट रो खोटो टाइम है सोच समझ…
दबंग कोरोना ( Dabang Corona ) ये हाल है और पूछते हैं कि क्या हाल है? अरे यह कोरोना है दबंग हैं सब इससे तंग है। धर लेता तो नहीं देखता धनी निर्धन सरकारों की भी परीक्षा लेता है देखो वह झूठ कितना बोलता है उनकी पोल पट्टी सब खोलता है अफसरों की हनक…
कहां मुश्किल अगर वो साथ में करतार आ जाए ( Kahan Mushkil Agar Wo Sath Mein Kartar Aa Jaye ) कहां मुश्किल अगर वो साथ में करतार आ जाए। लगे कश्ती किनारे हाथ ग़र पतवार आ जाए।। निभाना होता है मुश्किल ये जीवन साथ में यारो। दिलों के बीच में जब भी कोई…
इस भीड़ की सच्चाई ( व्यंग्य ) ( Is bheed ki sachai : Vyang ) ये कोरोना फैला नहीं रहे हैं भगा रहे हैं, देश को गंभीर बीमारी से बचा रहे हैं। देखते नहीं सब कितना जयघोष कर रहे हैं? समझो कोरोना को ही बेहोश कर रहे हैं? अजी आप लोग समझते देर से…
रात काली रही ( Raat Kaali Rahi ) रात काली रही दिन उजाला भरा, बीतीं बातों पे चिन्तन से क्या फायदा। वक्त कैसा भी था, दुख से या सुख भरा, बीतें लम्हों पे चिन्तन से क्या फायदा। जब उलझ जाओगे, बीतीं बातों में तुम, आज की मस्तियाँ ग़म मे ढल जाएगी। …
पापी पेट की खातिर ( Papi pet ke khatir ) वो चिड़िया रोज सवेरे है आती करने चीं चीं चीं चीं मधुर स्वर लहरियां उसकी मेरे मीठे स्वप्न पर,भारी है पड़ती। जाग जाता हूं फटाफट उसके लिए दाना पानी रख आता हूं फुदक फुदककर है खाती कभी जलपात्र में नहाती मानो मुझे हो रिझाती…
मुक्तक ( Muktak ) निर्भय रहकर जो जीवन जीता है धीरज धरकर जो गमों के घूंट पीता है कर्म प्रधान है इस चराचर जगत में आत्मा अजर अमर कहती गीता है वक्त और हालात जिंदगी जीना सिखाते हैं कौन अपना कौन पराया सब बताते हैं संघर्षों से ही फौलाद बनते हैं इरादे मन…
मय दानव ( महाभारत ) ( May Danava ) खाण्डव वन में मय दानव ने, इन्द्रप्रस्थ रच डाला। माया से उसने धरती पर,कुछ ऐसा महल बनाया। अद्भुत उसकी वास्तु शिल्प थी,कुछ प्रतिशोध भरे थे, जिसके कारण ही भारत में, महाभारत युद्ध कराया। कौरव ने जब खाण्डव वन को, पाण्डवों को दे डाला।…