• अटल के इरादे

    अटल के इरादे टलना मैंने सीखा नहीं,जिगर शेर-सा मैं रखता हूं।कायर नहीं जो पीठ दिखाऊं,अटल इरादे मैं रखता हूं।। प्रहरी हूं मैं भारतवर्ष का,तन हिमालय-सा मैं रखता हूं।तूफानों से ना कोई डर मुझे,अटल इरादे मैं रखता हूं।। सत्य,अहिंसा,शांति का,मूलमंत्र स्वीकार मैं करता हूं।मानवता की राह चलने का,अटल इरादे मैं रखता हूं।। शत्रु की सांसे मैं…

  • महिमा | Mahima

    महिमा नारी संसार का मूल स्थान हैनारी वचन है वन्दन है और–मां भगवती का वरदान है! नारी देश की प्रगति का आधार हैनारी ओम् है अन्नपूर्णा है और–मां दुर्गा का अवतार है! नारी खेतों में लहलहाती फसल हैनारी श्रम है साधना है और —मां सीता का संबल है! नारी घर – परिवार की शान हैनारी…

  • बागेश्वरी साहित्य परिषद की मासिक काव्य गोष्ठी में काव्य का रंगारंग आयोजन

    बागेश्वरी साहित्य परिषद साली चौका द्वारा दिसंबर 2024 की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन शानदार ढंग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना से हुई, जिसे परिषद के अध्यक्ष श्री धनराज विश्वकर्मा ने बड़े ही श्रद्धा भाव से प्रस्तुत किया। इसके बाद गरिमा विश्वकर्मा ने अपनी शानदार रचना से सभा को मंत्रमुग्ध…

  • लोकगायन भूरदेव भूरा गोत्र

    लोकगायन भूरदेव भूरा गोत्र भूरदेव धोले घोडे अस्वार रे भूरदेव बडो सोबीतोभूरदेव तारे ने मारे माया लागी रे भूरदेव बडो सोबीतोभूरदेव तारो ने मारो जीव एक, भूरदेव बडो सोबीतोभूरदेव केडयां कटारी बांधी रळ रे भूरदेव बडो सोबीतोभूरदेव केडया कणदोरो जणमण रे भूरदेव बडो सोबीतोभूरदेव हाथा भोरीनां जणमण रे भूरदेव बडो सोबीतोभूरदेव काने कठोरा जणमण रे…

  • दिल्लगी अच्छी नहीं है

    दिल्लगी अच्छी नहीं है यक़ीं मानो मिरे जानी नहीं हैं।ज़ियादा दिल्लगी अच्छी नहीं है। किसी पर मालो-दौलत के जबल हैं।किसी पर एक भी रत्ती नहीं है। दसों कर डाले उसको फ़ोन लेकिन।वो आने के लिए राज़ी नहीं है। ख़ुशी से सैंकड़ों मेह़रूम हैं,पर।ग़मों से कोई भी ख़ाली नहीं है। हज़ारों राज़ पोशीदा हैं इसमें।हमारी बात…

  • कुल्हड़ | Kulhar

    कुल्हड़ प्यारे कुल्हड़ बनते प्यारी मिट्टी सेतिलक करते सब प्यारी मिट्टी सेकुम्हार बनाए प्यारे होते कुल्हड़जब देखें सब मन भाए कुल्हड़ चाय के कुल्हड़ सबको होते प्यारेयार दोस्त सब मिलकर पीते सारेकुल्हड़ की चाय सबको होती प्यारीखुश होकर चाय पीएं जनता सारी कुल्हड़ शुद्धता के सदा ही होते प्रतीकबनाएं कुम्हार कुल्हड़ मिट्टी करके बारीककुल्हड़ सबके…

  • उसे पास बुलाते क्यों हो

    उसे पास बुलाते क्यों हो टूटने है जो मरासिम वो निभाते क्यों होदूर जाता हो उसे पास बुलाते क्यों हो। वक्त माकूल नहीं हो तो बिगड़ती चीज़ेंदौर-ए-तूफाॅं में चिराग़ों को जलाते क्यों हो। तुम हमारे हो फ़कत है ये नवाज़िश हम परबस गिला ये है कि एहसान जताते क्यों हो। आइना सबको दिखाकर के गिनाकर…

  • खोया है विश्वास

    खोया है विश्वास : नवगीत फटे-पुराने कपड़े उनके,धूमिल उनकी आस।जीवन कुंठित है अभाव में,खोया है विश्वास।। अवसादों की बहुतायत है,रूठा है शृंगार।अंग-अंग में काँटे चुभते,तन-मन पर अंगार।।मन विचलित है तप्त धरा है,कौन बुझाये प्यास। चीर रही उर पिक की वाणी,काॅंपे कोमल गात।रोटी कपड़ा मिलना मुश्किल,अटल यही बस बात।।साधन बिन मौन हुआ उर,करें लोग परिहास। आग…

  • बढ़ई का इतिहास

    बढ़ई का इतिहास प्राचीन सभ्यता से जुड़ा हुआ है बढ़ई का इतिहास,कुशल कारीगरी शिल्प-कला है कारपेंटर के पास।करतें है इनके हृदय भगवान विश्वकर्मा जी निवास,फर्नीचर के कामों में यह लोग कर रहें है विकास।। छिल-छिलकर यह काठ को अद्भुत चीजें बना देते,ना देखा ना सोचा किसी ने मनमोहक रूप दे देते।दिल में उम्मीद लिए यह…

  • युग द्रष्टा अटल – काव्य संग्रह

    संपादक – डॉ जसप्रीत कौर फ़लक ,लुधियाना पंजाब समीक्षक- डॉ गुलाब चंद पटेल गांधी नगर गुजरात अटल जी एक उच्च कोटी के कवि थेऔर मूल्य आधारित विचार धारा से चलनेवाले सिद्धांतवादी नेता के साथ संवेदनशील राज नेता थे । इनके लिए डॉ जसप्रीत कौर फ़लक का यह काव्य संग्रह अटल जी के व्यक्तित्व को उजागर…