• बदल रहा है जीवन का ही सार

    बदल रहा है जीवन का ही सार कहने को तो बदल रहा है,जीवन का ही सार। यूं तो शिक्षा के पंखों से,भरकर नयी उड़ान।बना रही हैं आज बेटियां,एक अलग पहचान।फिर भी सहने पड़ते उनको,अनगिन अत्याचार।कहने को तो बदल रहा है,जीवन का ही सार। तोड़ बेड़ियां पिछड़ेपन की,बढ़ने को हैं आतुर।इधर-उधर मन के भीतर पर,बैठा है…

  • भावपूर्ण श्रद्धांजलि : पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह

    पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह डॉ मनमोहन गुरुमुख सिंह,महान अर्थतज्ञ डॉक्टर सिंह। पी एचडी कैंब्रिज विश्वविद्यालय से,डी. फिल ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से। अर्थशास्त्र के एक महान प्राध्यापक रहे,वाणिज्य उद्योग मंत्रालय के सलाहकार रहे। प्रणेता भारत की आर्थिक विकास के,बने रहे गवर्नर भारतीय रिजर्व बैंक के। भारत के महान अर्थमंत्री,प्रधानमंत्री रहे,अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के सलाहकार रहे। पद्म…

  • मुझको मुझ सा दिखता है

    मुझको मुझ सा दिखता है पिंजरे में ख़ुश रहना कैसा दिखता हैदेखो आ कर मुझको मुझ सा दिखता है ये कैसा आलम है मेरी नींदोँ काख़्वाब है फिर भी टूटा फूटा दिखता है आँख समंदर, गाल भंवर और बाल फ़लक़आशिक़ को भी जाने क्या क्या दिखता है रंग नहीं दिखते हैं जिसको दुनिया केक्या उसको…

  • मैं रमेश जैन B.A. बना नही

    उन दिनों अक्सर कई घरों के बाहर नेम प्लेट पर नाम के साथ उनकी डिग्री भी लिखी रहती थी.. मै बड़ी ही हसरतों के साथ उन को देखता था और मन मे एक अजीब तरह सी गुदगुदी महसूस करता था। डिग्री वाला व्यक्ति बड़े ही अभिमान के साथ घर के बाहर निकलता था.. नेम प्लेट…

  • मेरी कलम से | डॉ. बी.एल. सैनी

    सप्ताह के सात रंग सोमवार का सूरज संग नया उत्साह लाए,आलस्य मिटे, कर्म का दीप जगमगाए।जीवन की डगर पर पहला कदम बढ़े,सपनों का कारवां उम्मीद से जुड़े। मंगलवार ऊर्जा का संचार करे,परिश्रम की ज्योति हर ओर भर दे।कठिन राहें भी सरल बन जाएं,साहस से हर मंज़िल कदमों में आएं। बुधवार का दिन सिखाए सादगी,ज्ञान की…

  • मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं

    मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैंलगा के ताज को ठोकर खड़े हैं न थामा हाथ भी बढ़कर किसी नेयूँ तन्हा हम शिकस्ता-तर खड़े हैं करूँ कैसे तुम्हारा मैं नज़ाराज़माने में सौ दीदा-वर खड़े हैं शजर आता न कोई भी नज़र अबबशर सब धूप में थक -कर खड़े हैं मिरे ज़हनो गुमाँ…

  • सभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले

    सभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले सितम ही सहते रहे वो तो ला-मकाँ निकलेसभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले न कल ही निकले न वो आज जान-ए-जाँ निकलेकि चाँद ईद के हैं रोज़ भी कहाँ निकले तबाही फैली कुदूरत की हर तरफ़ ही यहाँकहाँ कोई भी मुहब्बत का आशियाँ निकले रहे-वफ़ा में न…

  • देश आखिर है क्या बला?

    देश आखिर है क्या बला? कुछ जाहिलों के लिए जमीन का टुकड़ाकुछ गोबर गणेशों के लिए उनके आकाकुछ सिरफिरों के लिए उसमें बसे लोगकुछ घाघ लोगों के लिए बिजनेस का अड्डाजिन्होंने खोद दिया गरीबों के लिए खड्डा आका घाघ लोगों से मिलकर –जाहिल और गोबर गणेशों को रोज घास चराता हैटीवी पर हर वक्त पीपली…

  • प्यार की ताकत | Pyar ki Taqat

    प्यार की ताकत प्यार की ताकतकोई गणितज्ञ आज तकनाप नहीं पाया है।यह ख़ुशबू की तरह है,जो आँखों से नहीं दिखतीबस इसको महसूस कियाजा सकता है प्यार की ताकतकोई शासक आज तककुचल नहीं पाया है।यह मिट्टी में गिरे बीज की तरह हैथोड़ी सी अनुकूल परिस्थिति पाते हीकहीं से भी फूटकरअपनी राह खोज लेता है। प्यार की…

  • ईश्वर से शिकायत

    सत्संग चल रहा था। गुरुजी अपने भक्तों के प्रश्नों के उत्तर बारी बारी से दे रहे थे। 15 साल की एक छोटी बच्ची ने गुरुजी से सवाल किया:- “गुरु जी, मुझे भगवान से शिकायत है कि ईश्वर(भगवान) अच्छे लोगों को हमेशा इतने कष्ट क्यों देते हैं? अच्छे लोग व उनके परिवार वाले हमेशा कष्ट में…