मां की वेदना
मां की वेदना मां कोख में अपने खून से सींचती रही। अब तुम बूंद पानी देने को राजी नहीं। मां थी भूखी मगर भरपेट खिलाती रही। अब तुम इक रोटी देने को राजी नहीं। मां थी जागती रात भर गोद में सुलाती रही। अब तुम इक बिस्तर देने को…
मां की वेदना मां कोख में अपने खून से सींचती रही। अब तुम बूंद पानी देने को राजी नहीं। मां थी भूखी मगर भरपेट खिलाती रही। अब तुम इक रोटी देने को राजी नहीं। मां थी जागती रात भर गोद में सुलाती रही। अब तुम इक बिस्तर देने को…
ढ़ल रही धूप है सूरज की देखिए ढ़ल रही धूप है सूरज की देखिए! है उछल कूद ये आदमी देखिए भा गयी है आंखों को सूरज की लाली ख़ूबसूरत बड़ी दिलकशी देखिए रास्ते मंजिलों के दिखाने को ही राहों में फ़ैली है रोशनी देखिए जीतेंगे जंग रख हौसला दुश्मन से…
वक्त रुका ही नहीं कभी किसी के लिए ऊंचे नीचे पथरीले रास्ते का प्रारब्ध सफर कारवां गुजर जाने के बाद धुंधला दिखा जीवन का बहुमूल्य अंश बीत जाने पर अस्थिर और अविचर सी दशा में रुका बीते लम्हेंआंखों में कैद कुछ इस तरह हुए डूबे जैसे दरिया में हम समंदर छोड़कर…
हरे है ज़ख़्म अब तक भी दिलों पे दाग़ है बाकी हरे है ज़ख़्म अब तक भी दिलों पे दाग़ है बाकी। धुआँ- सा उठ रहा शायद कहीं पे आग है बाकी ।। नहीं ग़र भूल पाते हो करी कोशिश भुलाने की। बहुत यादें सताती है समझ लो राग है बाकी।। …
# कहानी_से_पहले_की_कहानी ★★ महाभारत के बाद मुनि वेदव्यास और श्री कृष्णजी ने धर्मराज युधिष्ठिर से राज्य के उत्थान हेतु अश्वमेध यज्ञ करने का आह्वान किया। अश्वमेध यज्ञ अर्थात विजय- पर्व,सुख समृद्धि की कामना और खुद को विजेता घोषित करने का उपक्रम। युधिष्ठिर…
है यकीं ये हम मिलेगे एक दिन है यकीं ये हम मिलेगे एक दिन! साथ में दोनों चलेगे एक दिन छोड़कर जिद वो नज़ाकत की मगर बात दिल की वो सुनेगे एक दिन मंजिलें तेरी मिलेगी प्यार की फूलों से रस्ते सजेगे एक दिन तोड़कर के फ़ासिलों की ही हदें…
गिला- शिकवा नहीं करते कभी ज़ालिम ज़माने से गिला- शिकवा नहीं करते कभी ज़ालिम ज़माने से। न बेशक बाज़ आता है अभी भी दिल दुखाने से।। सदा मस्ती में रहते है भुला के ग़म जहां भर के। बहाते अब नहीं आंसू किसी के भी रुलाने से।। नहीं अब दिल पे लेते…
ढा रहे अपने सितम ये ढा रहे अपनें सितम ये हो गया कैसा वतन ये हम मिटा देगे अदूँ को जान से प्यारा वतन ये सब मिटा देगे जहां से जुल्म को भी है लगन ये प्यार से सीचो वतन ये कर रहा है अब चमन ये है क़सम…
आज सर्दियों की धुंध भरी शाम है। मैं धीरे-धीरे चलते हुए घर लौट रहा हूँ। सड़क के किनारे लगीं पोल लाइटों से उर्जित प्रकाश कोहरे को नीली चादर की भांति खुद से लपेटे हुए है । अर्पिता के साथ बिताए पल मुझे यूं ही याद आने लगे हैं। वह कोहरे की इस नीली चादर को…
आंखों से मेरी सभी वो आज रूठे ख़्वाब है आंखों से मेरी सभी वो आज रूठे ख़्वाब है! हो गये है जिंदगी से दूर सारे ख़्वाब है टूट जाते है मंजिल पे ही पहुचने से पहले प्यार के ही कब पूरे ए दोस्त होते ख़्वाब है कब न जाने होगे सच…