• कब ख़ुशी की यहां जली बीड़ी!

    कब ख़ुशी की यहां जली बीड़ी!     कब  ख़ुशी की यहां जली बीड़ी! रोज ग़म की जलती रही बीड़ी   बुझ जाती है जलने से पहले ही जो जलाता  हूँ प्यार की बीड़ी   नफ़रतों की जली यहां ऐसी सब ख़ुशी  ख़ाक कर गयी  बीड़ी   छोड़ दें  पीना दोस्त इसको तू कर रही …

  • रक्षक

    रक्षक जन्म लेकर जब वह आंख खोलती है देख कर दुनिया जाने क्या सोचती है   भरकर बाहों में है प्यार से उठाता शायद इसे ही मां कहा जाता   चारों तरफ है लोगों की भीड़ किससे कौन सा रिश्ता नाता   कोई भाई, चाचा कोई तो कोई मेरा पिता कहलाता मैं तो ढूंढूं उसे…

  • नशा सिगरेट का

    नशा सिगरेट का     इस तरह घर जाऊं अपनें ऐ यारों चढ़ गया मुझको नशा सिगरेट का   जिंदगी कर देगी तेरी ख़ाक ये मत रख लब पे सिलसिला सिगरेट का   जिस्म ये बेजार कर देगी तेरा छोड़ दें तू रास्ता सिगरेट का   जल गये यादों भरे ख़त मेज पे कल कागज…

  • ज़माने की चालों से तुम बचके चलना

    ज़माने की चालों से तुम बचके चलना     ज़माने की चालों से तुम बचके चलना। सिखाएंगे तुमको सदा रँग बदलना।।   हमें दिल लगाने की दौलत मिली  है । कि सारी उमर फिर पड़ा ग़म में जलना।।   यहां बेवफाई का आलम न पूछो। मिटा दिल के अरमां पड़ा है तङफना।।   ये हसरत…

  • कान मेरे उसकी चूडियां खनक गयी

    कान मेरे उसकी चूडियां खनक गयी     कान मेरे उसकी चूडियां खनक गयी प्यार में उसके दिल की धड़कन बहक गयी   आख़री थी निशानी उसकी पास में हाथ से वो भी तो अंगुठी छनक गयी   आ रही है सदा जिंदगी में ग़म की सूली पे ही ख़ुशी अपनी सब लटक गयी  …

  • प्यार के किस्से पुराने हो गए

    प्यार के किस्से पुराने हो गए     प्यार के किस्से पुराने हो गए। वक्त के हम भी निशाने हो गए ।।   जिंदगी भर साथ रहना था हमें। दूर रहते अब ज़माने हो गए।।   किस तरफ तक़दीर लेकर आ गई। लुट चुके से हम खजाने हो गए।।   क्या सुनाएं जिंदगी की दास्तां।…

  • दर्द ग़म

    दर्द ग़म (हाइकु )   1 दिल मेरा बेज़ार है जिंदगी से ही ख़ुशी आजकल दरकार है    2 नींद लूटी इश्क़ ने ऐसी मेरी देखिए  आंखें अब  बेदार है   3 थी जहां हर रोज बस प्यार की बातें ही प्यार अब वो खार है 4   फूलों की मानिंद हर पल मुस्काता  था…

  • निद्रा

    निद्रा     शांत क्लांत सुखांत सी पुरजोर निद्रा। धरती हो या गगन हो हर ओर निद्रा।।   विरह निद्रा मिलन निद्रा सृष्टि निद्रा प्रलय निद्रा, गद्य निद्रा पद्य निद्रा पृथक निद्रा विलय निद्रा, आलसी को दिखती है चहुंओर निद्रा।।धरती०   सुख भी सोवे दुख भी सोवै सोना जग का सार है, सोना ही तो…

  • उस हंसी के जैसा देखा चांद है

    उस हंसी के जैसा देखा चांद है     उस हंसी के जैसा देखा चांद है! वो फ़लक पे आज निकला चाँद है   रोशनी है इसलिए मेरी गली हाँ इधर से दोस्त गुजरा चाँद है   क्यों न दीवाना बने उसका दिल ये हू ब हू वो चेहरा लगता चाँद है   इसलिए दीदार…

  • नवरात्र

    नवरात्र (नवरात्र पर विशेष )     भूलो मत अपना नाता । माता-पिता जिसे भुला दे बालक जग में चैन कहां पाता।।   ममतामयी तुम करूणामयी तुम प्रेम तुम्हारा विख्याता। कपूत को भी गले लगाती शरण तुम्हारी जो आता ।।   रक्तबीज हो या महिषासुर सामने तेरे जो जाता। महाकाली के तेज के आगे कोई…