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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • कुमार के मुक्तक
    मुक्तक

    कुमार के मुक्तक | Kumar ke muktak

    ByAdmin October 21, 2020September 24, 2024

    कुमार के मुक्तक ( Kumar ke muktak )  १ बहते   हुए  जल   पे  कभी  काई नहीं आती, बिना  उबले   दूध  पर   मलाई   नहीं  आती। थोङी  बहुत  शायरी  तो  सभी  कर  लेते  हैं, “कुमार”दर्द से गुजरे बिन गहराई नहीं आती। २ कौन कहता है कि दुःख में, कोई अपना नहीं होता। सितारे होते है कुछ लोग…

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  • बोल कर तो देखो
    कविताएँ

    बोल कर तो देखो

    ByAdmin October 21, 2020December 30, 2020

    बोल कर तो देखो   सुनो- तुम कुछ बोल भी नहीं रहे हो यहीं तो उलझन बनी हुई है कुछ बोल कर दूर होते तो चल सकता था…..     अब बिना बोले ही हमसे दूर हो गए हो ये ही बातें तो दिमाग में घर कर बैठी है अब निकालूँ भी तो कैसे कोई…

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  • वक्त  कुछ  इस तरह गुजारा है
    शेरो-शायरी

    वक्त कुछ इस तरह गुजारा है

    ByAdmin October 20, 2020December 30, 2020

    वक्त  कुछ  इस तरह गुजारा है     वक्त  कुछ  इस तरह गुजारा है । दर्द  जीने  का  इक  सहारा है ।।   जो  नही  हम जुबां से कह पाए। आंसुओं  से  किया  इशारा  है ।।   जिंदगी  में  सभी  से जीता जो । बाद  तक़दीर  से   वो  हारा है ।।   सामने  हम   कभी  …

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  • बढ़ती बेरोज़गारी
    शेरो-शायरी

    बढ़ती बेरोज़गारी

    ByAdmin October 20, 2020December 30, 2020

     बढ़ती बेरोज़गारी     रोज़ ही देखो बढ़ती बेरोज़गारी  क़त्ल मुफ़लिस के करती बेरोज़गारी   सोता भूखे पेट नहीं मासूम बच्चा जो नहीं इतनी होती बेरोज़गारी   आटा कैसे मैं ख़रीदूँगा भला अब बढ़ गयी यारों इतनी बेरोज़गारी   कैसे दूँ बिजली का बिल मैं भला ये दिल में ही आहें भरती बेरोज़गारी   बेटी…

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  • साफ दिल ग़र है तेरा छलेंगे तुझे
    शेरो-शायरी

    साफ दिल ग़र है तेरा छलेंगे तुझे

    ByAdmin October 20, 2020December 30, 2020

    साफ दिल ग़र है तेरा छलेंगे तुझे   साफ दिल ग़र है तेरा छलेंगे तुझे। लोग अपने-पराये मिलेगे तुझे।।   वक्त पे काम आते नहीं ये कभी। आँख- सी फेर आगे बढेगे तुझे।।   अनसुना सा करेगे हर बात को। काम कर देंगे ऐसा कहेंगे तुझे।।   बाद में काम अपना निकल जाए जब। लांघ…

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  • मोहाली जैसे छोटे से शहर से निकल अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले पेंटर हरि सिंह
    निबंध

    मोहाली जैसे छोटे से शहर से निकल अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले पेंटर हरि सिंह

    ByAdmin October 20, 2020December 30, 2020

    हर कलाकार की तरह हरि सिंह की ख्वाहिश थी कि वह अपने विधा में शोहरत हासिल कर बुलंदियों को छुएं और दुनिया में अपनी कामयाबी का झंडा गाड़े। हरि सिंह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार आर्टिस्ट के रूप में ख्याति मिली है और अब इनका नाम विश्वस्तरीय प्रदर्शनियों के अत्युत्कृष्ट प्रर्दशन में भी दर्ज…

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  • कहीं ग़म कहीं पे ख़ुशी है
    शेरो-शायरी

    कहीं ग़म कहीं पे ख़ुशी है

    ByAdmin October 20, 2020December 30, 2020

    कहीं ग़म कहीं पे ख़ुशी है     कहीं ग़म कहीं पे ख़ुशी है! कहीं पे हंसी तो नमी है   कोई जीवन अच्छा गुजारे कहीं ग़म भरी जिंदगी है   मुहब्बत को कोई निभाये कहीं दिल में ही बेरुख़ी है   कोई रिश्ता दिल से निभाता कहीं हर घड़ी बेदिली है   कहीं पे …

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  • और क्रंदन
    कविताएँ

    और क्रंदन

    ByAdmin October 20, 2020December 30, 2020

    और क्रंदन     थकित पग में अथक थिरकन  और क्रंदन। आंसुओं का बरसा सावन और क्रंदन।।   हृदय से उस चुभन की आभास अब तक न गयी। सिंधु में गोते लगाये प्यास अब तक न गयी ।।   बढ़ रही जाने क्यूं धड़कन और क्रंदन । थकित बालक समझ मुझको धूल ने धूलित किया…

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  • याद करते थे भुलाने में लगे
    शेरो-शायरी

    याद करते थे भुलाने में लगे

    ByAdmin October 20, 2020December 30, 2020

    याद करते थे भुलाने में लगे     याद करते थे भुलाने में लगे! वो पराया अब बनाने में लगे   सच बताकर वो ही सबसे झूठ को दाग दामन से मिटाने में लगे   दोष क्या दूँ मैं औरो को देखिए घर मेरा अपनें ही जलाने में लगे   दिल दुखाकर वो वफ़ा में…

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  • जो बीत गयी वो बात नहीं
    शेरो-शायरी

    जो बीत गयी वो बात नहीं

    ByAdmin October 20, 2020December 30, 2020

    जो बीत गयी वो बात नहीं   जो बीत गयी वो बात नहीं जो गुजर चुकी वो रात नहीं   मैं खाली हूँ अपनें पन से क्यों इश्क़ करुं मैं बेमन से   मैं टूट रहा लम्हा लम्हा हाँ जीता रहूंगा मैं तन्हा   अब तू भी नहीं तेरा साथ नहीं अब दर्द नहीं ज़ज्बात…

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