• कागा की क़लम से | Kaga ki Kalam Se

    जाति धर्म जनता को नहीं बाटो जाति धर्म में ,मुफ़्त रेवड़ियां नहीं बांटो जाति धर्म में! चुनावों के चक्रव्यू में फंस धंस कर ,दलगत दलदल नहीं बाटो जाति धर्म में ! लोभ मोह माया छोड़ शिक्षा मुफ़्त करो ,अमीर ग़रीब नहीं बांटो जाति धर्म में! ऊंच नीच छूआ छूत भेद भव बेकार ,मानव को नहीं…

  • नफरत भरी है जमाने में

    नफरत भरी है जमाने में नफरत भरी है जमाने मेंदर्द भरा है दिवाने मेंवह मजा नए में अब कहांजो मजा होता था पुराने में।। पैसा है तो अब प्यार हैमोहब्बत भी एक व्यापार हैइंतजार कौन करता हैजब बेवफा सरकार है।। दौर कहां अब पुराना हैदेवदास जैसा कोई दीवाना हैअब तो पैसे से दिल्लगी होतीप्यार तो…

  • भगवान पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक दिवस

    भगवान पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक दिवस धर्म मार्ग को जीवन आचरण में अपनायें ।विकट – विकटतम मार्ग से पार लगायें ।कही न रुके सदैव आगे बढ़ते जायें ।मानव जीवन से मोक्ष पायें ।प्रभु पार्श्वनाथ की तरह मंजिल पायें ।धर्म से भावना प्रबल रहती ।गलत आचरण से कोसों दूर रहते ।मन में निर्मल सरिता की भावना…

  • यह जो उर्दू ज़बान है साग़र

    यह जो उर्दू ज़बान है साग़र मीर ग़ालिब की जान है साग़रयह जो उर्दू ज़बान है साग़र उर्दू सुनते ही ऐसा लगता हैगोया बंशी की तान है साग़र बेसबब आज हिंदी उर्दू मेंहो रही खींचतान है साग़र उर्दू को माँ कहो या तुम मौसीएक ही खानदान है साग़र मेरी ग़ज़लों में उर्दू के दम सेघुल…

  • उनको मुहब्बतों में ख़ुदा कर चुके हैं हम

    उनको मुहब्बतों में ख़ुदा कर चुके हैं हम उनको मुहब्बतों में ख़ुदा कर चुके हैं हमअब अपनी मंज़िलों का पता कर चुके हैं हम इक बेवफ़ा को अपना ख़ुदा कर चुके हैं हमसब अपनी मंज़िलों को खफ़ा कर चुके हैं हम अपना ये दिल वतन पे फ़ना कर दिया है अबऔर जाँ लुटा के फ़र्ज़…

  • फालतू की राय

    “पिताजी, मैं ग्रीन सिटी के बराबर में जहाँ पर प्लॉटिंग हो रही है, वहाँ एक प्लॉट लेना चाहता हूँ। आपकी इस बारे में क्या राय है? क्या मेरा वहाँ प्लॉट लेना ठीक रहेगा?”मोहित ने अपने एडवोकेट पिता नरेश जी के ऑफिस में घुसते हुए पूछा। “ठीक है। ले लो। कोई दिक्कत नहीं।”अपने वकील मित्र राजेश…

  • दिसंबर गुज़रा

    दिसंबर गुज़रा तेरे वादे पे कहें क्या ऐ-सितमगर गुज़राराह तकते ही फ़कत अपना दिसम्बर गुज़रा जनवरी से ये नवम्बर का महीना है अबइतनी मुद्दत में इधर से न वो होकर गुज़रा काश वैसा ही गुज़र जाये महीना यह भीजितना रंगीन तेरे साथ सितम्बर गुज़रा शायरी करते हैं कहने को हज़ारों शायरमीर ग़ालिब सा न कोई…

  • अहं का नशा

    अहं का नशा नशा मदांध कर देता हैमनुष्य जन्म का मूलउद्देश्य ही भुला देता हैजो उड़ते है अहं के आसमानों मेंज़मीं पर आने में वक़्त नही लगताहर तरह का वक़्त आता है ज़िंदगी मेंवक़्त गुज़रने में वक़्त नही लगता हैंनशा जहर से ज़्यादा घातक हैअहं का नशा हावी हो ही जाता हैऔर उनके विवेक पर…

  • संत गुरु घासीदास | Sant Guru Ghasidas

    संत गुरु घासीदास छोटे-बड़े का भेद मिटाकर,सबको एक समान बनाए।संत गुरु घासीदास का संदेश,जो जग को राह दिखाए।दूसरे का धन पत्थर समझो,परस्त्री को माता मानो।सत्य की डगर पर चलकर,जीवन को उजियारा जानो। जुआ-शराब के मोह को छोड़ो,ये दुख का कारण है।पाप की राह जो चुने,वो केवल संकट का दर्पण है।संत की वाणी अपनाकर, सत्य की…

  • निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता?

    निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता? गुलिस्तां जो थे सुनसान हो गए।पंछी पेड़ों से अनजान हो गए॥ आदमी थे जो कभी अच्छे-भले,बस देखते-देखते शैतान हो गए॥ सोचा ना था कभी ज़ख़्म महकेंगे,गज़लों का यू ही सामान हो गए॥ निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता?दिल सभी के बेईमान हो गए॥ पूछते हैं काम पड़े सब हाल मियाँ,मतलबी अब…