• चरित्रहीन | Charitraheen

    चरित्रहीन ( Charitraheen ) “घर आकर बताता हूँ”जब जब उसने कुछ पूछना चाहाहमेशा यही उत्तर मिलाऔर फिर कभी ना वो समय आयाना ही उसे कुछ बताया गया।उसे कभी नहीं लगा किवह भी किसी की ज़िंदगी का हिस्सा है।दोनों कभी नहीं बन पायेएक दूसरे के सहभागी,बस एक दूसरे को ज़िम्मेदारी बनढोते रहे।बिना ये सोचे किएक समय…

  • साँझ | Sanjh

    ” आपने मुझे बुलाया, डॉक्टर?”” हाँ, हमने यह कहने के लिए बुलाया कि हम मिस्टर मेहरा को कल सुबह कॉटेज नंबर 13 में शिफ्ट कर रहें है “डॉक्टर शर्मा के शब्दों सुन कर अंतरा के पैर काँपने लगे l उसकी आँखे बंद हों गई l जैसे ही वह गिरने लगी कि डॉक्टर शर्मा ने लपक…

  • कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम

    कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम चलो थपकी देकर सुलाओ हमें तुमकोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम नहीं याद आये कभी माँ की हमकोवो स्वादिष्ट व्यंजन खिलाओ हमें तुम रहें जीते हम बस तुम्हें देखकर हीकभी रूप ऐसा दिखाओ हमें तुम किया प्यार तुमसे यहाँ हमने जितनावही हो सके तो जताओ हमें तुम नहीं रोक…

  • श्रृंगार | Shringaar

    श्रृंगार ( Shringaar ) बड़े गर्व से शीश झुका कर कहता निश्चल निर्जल मन, भारत मां को आज सजाए भाषाओं के आभूषण। बाजूबंद उर्दू के बांधे , हाथों में गुजराती कंगन, उड़िया के कुंडल कानों में , बलिया में  पायल की झनझन, तमिल मुद्रिका, नथ पंजाबी, आसमी बड़ी सयानी है,  पैरों में है कन्नड़ बिछुए,…

  • दरस दिखाओ मेरे कान्हा

    दरस दिखाओ मेरे कान्हा दरस दिखाओ मेरे कान्हा, छेड़ो तुम मुरली की तान।हिया बावरा तुमको चाहे, जागे कितने हैं अरमान।। तेरी जोगन तुझसे पूछे,तेरा उर है क्यों पाषाण?पथ में कंटक और अंधेरा, लगता राह नहीं आसान।।द्वार निहारूं कब आओगे, सुनो सांवरे दे दो भानदरस दिखाओ मेरे कान्हा, छेड़ो अब मुरली की तान।। भोर मनोरम साँझ…

  • बैगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना

    ये उन दिनों की बात है जब बचपन विदाई ले रहा था और तरुणाई अंगड़ाई लेने लगी थी.. जवानी सामने खड़ी थी और मैं उसे लपक कर ले लेने को उतावला सा हो रहा था। एक दिन यू ही किसी से खबर सुनी की फ़िल्म इंड्रस्टी का दिग्गज घराना कपूर परिवार के किसी सदस्य की…

  • क्या पता कौन थे कहाँ के थे

    क्या पता कौन थे कहाँ के थे आते जाते जो कारवाँ के थेक्या पता कौन थे कहाँ के थे पंछियों को मुआवज़ा क्यों नइंरहने वाले इसी मकाँ के थे इत्र से कुछ गुरेज यूँ भी हुआफूल वो भी तो गुलसिताँ के थे सब हमेशा रहेगा ऐसे हीसारे झंझट इसी गुमाँ के थे एक रस्ता था…

  • बरेली की संस्था का मुरादाबाद में आयोजन

    फ़राज़ एकेडमी मुरादाबाद ने बरेली की शुभम मेमोरियल साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के सहयोग से मुरादाबाद के पीपलसाना में एक गंगा-जमुनी कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इस अद्वितीय साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजन में गंगा-जमुनी तहज़ीब की झलक दिखाई दी। पहला दौर: गंगा-जमुनी कवि सम्मेलन कवि सम्मेलन के पहले दौर की अध्यक्षता बरेली के प्रसिद्ध शायर…

  • पयमाना हमारे आगे

    पयमाना हमारे आगे लाइये साग़रो-पयमाना हमारे आगेछोड़िये आप ये शर्माना हमारे आगेहुस्ने-मतला — क्या पियेगा कोई पयमाना हमारे आगेअब भी शर्मिंदा है मयखाना हमारे आगे हमने हर रुख से ज़माने का चलन देखा हैसोच के कहियेगा अफ़साना हमारे आगे रोक क्या पायेंगे राहों के अंधेरे हमकोशम्अ रौशन है फ़कीराना हमारे आगे हम वफ़ादार हैं उल्फ़त…

  • वो सपनों में आकर सताने लगे हैं

    वो सपनों में आकर सताने लगे हैं वो सपनों में आकर सताने लगे हैंमेरी धड़कनों को बढ़ाने लगे हैं बनाया था तिनकों से जो आशियानाअदू आके उसको जलाने लगे हैं क़यामत कहीं आ न जाए यहाँ परसितमगर को हम याद आने लगे हैं ज़माने ने ठोकर लगाई है उनकोतभी होश उनके ठिकाने लगे हैं कहीं…