कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम

कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम

कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम

चलो थपकी देकर सुलाओ हमें तुम
कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम

नहीं याद आये कभी माँ की हमको
वो स्वादिष्ट व्यंजन खिलाओ हमें तुम

रहें जीते हम बस तुम्हें देखकर ही
कभी रूप ऐसा दिखाओ हमें तुम

किया प्यार तुमसे यहाँ हमने जितना
वही हो सके तो जताओ हमें तुम

नहीं रोक सकती हमें बेड़ियां ये
कभी अपने घर पर बुलाओ हमें तुम

बहुत चाह थी की ज़माने से लड़कर
छुपा प्यार दिल का दिखाओ हमें तुम

चुभा दिल में जो भी है काँटा तुम्हारे
प्रखर पीर वो अब दिखाओ हमें तुम

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • आंखों में जिसका सपना है | Sapna Shayari

    आंखों में जिसका सपना है ( Aankhon mein jiska sapna hai )    आंखों में जिसका सपना है ? दूर कहीं वो मुझसे रहता है कौन करे किससे यार वफ़ा उल्फ़त में होता धोखा है छोड़ सताना तू मुझको ही उल्फ़त में ही दिल टूटा है हाल कहूँ मैं किससे दिल का दोस्त न कोई…

  • किसी के लिए | Kisi ke Liye

    किसी के लिए ( Kisi ke Liye ) कौन मरता जहाँ में किसी के लिएमर मिटे हम मगर दोस्ती के लिए तुग़लक़ी देते फ़रमान वो हैं सदामारे निर्दोष भी बंदगी के लिए ग़ैर की बाँह में प्यार को देखकरचाँद रोता रहा चाँदनी के लिए आज छाई उदासी चमन में बहुतकोई भँवरा मरा है कली के…

  • बहुत सुन चुके

    बहुत सुन चुके बहुत सुन चुके है कि घाटा नहीं हैबहीखाता फिर क्यों दिखाता नहीं है चलो दूर कुछ और भी तुम हमारेअभी प्यार का मुझको नश्शा नहीं है तुम्हारी जुबाँ अब तुम्हें हो मुबारककभी थूक कर हमने चाटा नहीं है न देखो ज़रा तुम मेरी सिम्त मुड़करअभी तक ये दिल मेरा टूटा नहीं है…

  • आते हैं लोग फ़क़त हमको गिराने के लिए

    आते हैं लोग फ़क़त हमको गिराने के लिए कोई आता ही नहीं हमको उठाने के लिएआते हैं लोग फ़क़त हमको गिराने के लिए जल न जाए कहीं काशाना मुहब्बत का येलोग बैठे हैं यहाँ आग लगाने के लिए ग़म ही ग़म हमको मिले हैं यहां पे उल्फ़त मेंचश्मे-तर दे गया है कोई नहाने के लिए…

  • अश्क़ भी वो गिराने लगते हैं

    अश्क़ भी वो गिराने लगते हैं अश्क़ भी वो गिराने लगते हैंदूर जब भी हम जाने लगते हैं बातों में मुस्कराने लगते हैंहम उन्हीं के दीवाने लगते हैं जब कभी मिलते हैं सनम मुझसेतो अदा से रिझाने लगते हैं बात जिस दिन भी हो जाये उनसेदिन वही बस सुहाने लगते हैं याद आती है जब…

  • इंतज़ार किया | Emotional Intezaar Shayari

    इंतज़ार किया ( Intezaar kia ) पूरा तेरा हरिक क़रार किया हमने पतझड़ को भी बहार किया उसके आगे किसी की क्या चलती वक़्त ने जिसको ताजदार किया ज़ख़्मी होकर भी मैं रहूँ ज़िन्दा किस हुनर से मेरा शिकार किया दुखती रग पर ही तुम ने हाथ रखा हाय क्या मेरे ग़मगुसार किया बात उसकी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *