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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • मेरा गांव
    कविताएँ

    मेरा गांव | Mera Gaon

    ByAdmin November 13, 2024November 13, 2024

    मेरा गांव ( Mera Gaon ) सबका दुलारा मेरा गांव ।सबका प्यारा मेरा गांव ।थका हारा जब भी आऊं ।मुझको सहारा देता गांव । कितने ही देखे इसने बसंत ।ना था जिनका कोई अंत ।सबकी पीड़ा छुपाए सीने में ।सब पे प्यार लुटाता मेरा गांव । पीपल बरगद पहचान है इसकी ।कुआं बावड़ी सब जान…

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  • यूं ही रखना सदा ख़याल अपना।
    ग़ज़ल

    यूं ही रखना सदा ख़याल अपना।

    ByAdmin November 13, 2024November 13, 2024

    यूं ही रखना सदा ख़याल अपना। दूर जाकर भी ख़ुश जमाल अपना।यूं ही रखना सदा ख़याल अपना। जो भी है आपका ही है वल्लाह।हम को कुछ भी नहीं मलाल अपना। कुछ तो बतलाओ ऐ तबीब-ए-दिल।ह़ाल कैसे हो अब बह़ाल अपना। कौन देखेगा माहो-अन्जुम को।छत पे आ जाए गर हिलाल अपना। ह़ालत-ए-ह़ाल भूल जाओगे।हम दिखा दें…

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  • बड़ी उम्मीद से माँ ने हमारी पाला है
    ग़ज़ल

    बड़ी उम्मीद से माँ ने हमारी पाला है

    ByAdmin November 13, 2024November 13, 2024

    बड़ी उम्मीद से माँ ने हमारी पाला है बड़ी उम्मीद से माँ ने हमारी पाला हैखिलाया उसने बड़े प्यार से निवाला है झुकाया शीश है हमने उसी के चरणों मेंहमारे वास्ते अब भी वही शिवाला है जहाँ जहाँ भी बिखरने की आई थी नौबतदुआ ने माँ की हमेशा मुझे सँभाला है किसी के हुस्नो-तबस्सुम का…

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  • कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विश्व उर्दू दिवस का आयोजन
    साहित्यिक गतिविधि

    कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विश्व उर्दू दिवस का आयोजन, अल्लामा इक़बाल की जयंती पर गूंजा गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश

    ByAdmin November 13, 2024November 13, 2024

    आज कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भाषा एवं कला संकाय के अन्तर्गत चल रहे उर्दू विभाग ने विश्व उर्दू दिवस का आयोजन किया यह दिवस अल्लामा इक़बाल की जयंती पर मनाया जाता है कार्यक्रम का मंच संचालन उर्दू विभाग के शिक्षक मनजीत सिंह ने किया। गंगा जमुना तहजीब की पहचान है उर्दू भाषा पर वक्तव्य हुआ। इस…

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  • क्यूं है
    ग़ज़ल

    क्यूं है | Kyon Hai

    ByAdmin November 13, 2024November 13, 2024

    क्यूं है ( Kyon Hai ) जिस शख़्स से गिला है उससे ही प्यार क्यूं हैमुझको उसी बशर का अब इंतज़ार क्यूं है उसके बगैर सूनी लगती है दुनिया मुझकोहोता उसी से मेरा दिल खुशगवार क्यूं है जिसने कभी तो कोई वादा नहीं निभायानादान दिल को उस पर फिर ऐतबार क्यूं है खोयी रहूं सदा…

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  • बाल प्रज्ञान
    पुस्तक समीक्षा

    बाल प्रज्ञान : बालमन का सुन्दर विश्लेषण

    ByAdmin November 13, 2024November 13, 2024

    सन् 1989 में हरियाणा में जन्मे डॉ. सत्यवान सौरभ बालसाहित्य के एक सुपरिचित हस्ताक्षर हैं। साहित्यकार, पत्रकार और अनुवादक डॉ. सत्यवान सौरभ ने बच्चों के साथ ही बड़ों के लिए भी विपुल साहित्य सर्जन किया है। बाल कविता की पुस्तकों के साथ ही प्रौढ़ साहित्य में दोहा, कथा, कविता, अनुवाद, रूपान्तर, सम्पादन की कई कृतियों…

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  • Pehchan Hindi Story
    कहानियां

    पहचान | Pehchan Hindi Story

    ByAdmin November 12, 2024November 12, 2024

    आज मेरा पहला उपन्यास छप कर आया है , इसे मैंने पापा को समर्पित किया है , जो हूँ आज उन्हीं की वजह से हूँ। यूँ तो कुछ साल पहले तक मैं उनसे नफरत करता था , उन्हें पापा भी नहीं कहता था , कोशिश करता था कि उनसे बात ही न करनी पड़े ,…

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  • शालिग्राम तुलसी कहलाई हूॅ
    कविताएँ

    शालिग्राम तुलसी कहलाई हूॅ

    ByAdmin November 12, 2024November 12, 2024

    शालिग्राम तुलसी कहलाई हूॅ विष्णु की अनुयायी हूँ,मैं वृन्दा तुलसी माई हूँ।टेक वरों की माता हूँ,भाग्य विधाता हूँ।सुख की दाता हूँ,मैं रज रक्षक सबकी,भाग्य भव दाता हूँ ।हर भवन में आई हूँ,विष्णु की अनुयायी हूँमैं वृन्दा तुलसी माई हूँ।।1। दैत्य कुल में जन्मी,हरि कीर्तन की धुनी,त्रिभुवन बंदन में रमी,पतितों की हूँ तारिणी।सत्य सतीत्व को पहनीलक्ष्मी…

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  • डॉ. बीना सिंह “रागी” की कविताएं | Dr. Beena  Singh Raggi Poetry
    कविताएँ

    डॉ. बीना सिंह “रागी” की कविताएं | Dr. Beena  Singh Raggi Poetry

    ByAdmin November 12, 2024April 24, 2025

    विनम्र श्रद्धांजलि मधुर सपने लेकर पहलगाम आए सैलानीबुन रहे थे सपनों की चादर गढ़ रहे थे अपनी प्रेम कहानीहिम मंडित पर्वत के छांव पहलगाम मेरा प्यारामोहब्बत करने वालों को लगा यह सदा ही न्यारापर यह कया धमाकों से थर्राई कश्मीर की धरागूंज उठी चीख़ यह तो लाल है मेरा है हरापल भर में सुहाने सपने…

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  • हर पहर तन्हा
    ग़ज़ल

    हर पहर तन्हा | Har Pahar Tanha

    ByAdmin November 12, 2024November 12, 2024

    हर पहर तन्हा ( Har Pahar Tanha ) उनकी फ़ुर्क़त में हर पहर तन्हा।दिल ये रोता है किस क़दर तन्हा। एक दूजे की राह तकते हैं।हम इधर और वो उधर तन्हा। उनकी अदना सी एक चाहत पर।ज़ीस्त कर दी गयी बसर तन्हा। हम भी कमरे में क़ैद रहते हैं।वो भी करते हैं अब गुज़र तन्हा।…

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