बड़ी उम्मीद से माँ ने हमारी पाला है

बड़ी उम्मीद से माँ ने हमारी पाला है

बड़ी उम्मीद से माँ ने हमारी पाला है

बड़ी उम्मीद से माँ ने हमारी पाला है
खिलाया उसने बड़े प्यार से निवाला है

झुकाया शीश है हमने उसी के चरणों में
हमारे वास्ते अब भी वही शिवाला है

जहाँ जहाँ भी बिखरने की आई थी नौबत
दुआ ने माँ की हमेशा मुझे सँभाला है

किसी के हुस्नो-तबस्सुम का है करिश्मा यह
भड़क उठी जो मुहब्बत की दिल में ज्वाला है

नई सदी ने दिखाये हैं कैसे दिन हमको
गली-गली में सियासत का बोलबाला है

नशा हो कोई भी इससे बचाना दामन को
निकाला कितनों का इसने यहाँ दिवाला है

इन्हें किसी की तबाही से कुछ नहीं मतलब
गुनाहगारों ने ईमान बेच डाला है

प्रखर ये बात सभी लोग जानते हैं यहाँ
कि खानदान हमारा ये कितना आला है

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • बोलेंगे | Bolenge

    बोलेंगे ( Bolenge ) रोज़ हम इंकलाब बोलेंगे ? रोज़ ही बेहिसाब बोलेंगे ख़ूबसूरत बड़ी फ़बन इसकी देश अपना गुलाब बोलेंगे रोशनी प्यार की ही देता है देश को आफ़ताब बोलेंगे ये ही मेरी पहचान है जय हिंद जोर से ही ज़नाब बोलेंगे पूछेगा जो गवाह में जय हिंद ये ही अपना ज़वाब बोलेंगे है…

  • अपनी तकदीर | Apni Taqdeer

    अपनी तकदीर ( Apni Taqdeer ) अपनी तकदीर में जुदाई थीयार की हो रही विदाई थी आग चाहत की जो लगाई थीहमने अश्क़ो से फिर बुझाई थी हाथ हाथों में फिर आकर छूटाकैसी तेरी खुदा लिखाई थी क्यूँ करूँ याद उस सितम गर कोप्यार में जिसके बेवफाई थी एक वो ही पसंद था मुझकोअब जो…

  • ज़िन्दगी खत्म हुई | Poem Zindagi Khatam hui

    ज़िन्दगी खत्म हुई ( Zindagi khatam hui )    जिंदगी खत्म हुई उन्हें पुकारते हुए उनको जीतते हुए हमको हारते हुए क़ौल वो क़रार जो उन्हें तो याद भी नहीं बस उसी क़रार पर उमर गुज़ारते हुए । चार दिन के प्यार का चढ़ा हुआ जो कर्ज़ था हाथ कुछ बचा नहीं उसे उतारते हुए।…

  • क्या लेना | Ghazal Kya Lena

    क्या लेना ( Kya Lena )   है रौशनी तो मुझे तीरगी से क्या लेना चमक यूँ क़ल्ब में है चाँदनी से क्या लेना हर एक तौर निभाता हूँ दोस्ती सबसे मुझे जहाँ में कभी दुश्मनी से क्या लेना बुझा न पाये कभी तिश्नगी मेरे दिल की तो अब भला मुझे ऐसी नदी से क्या…

  • नज़र से सलाम | Nazar se Salam

    नज़र से सलाम ( Nazar se salam )    मेरे सुकूँ का वो यूँ इंतज़ाम करता है ज़ुबां बना के नज़र से सलाम करता है वफ़ाएं और निभाता भी इससे क्या बढ़कर वो मेरे क़ल्बो-जिगर में क़याम करता है ख़बर उसे है मुलाक़ात हो नहीं सकती मगर वो कोशिशें फिर भी मुदाम करता है दुआ…

  • श्वान-व्यथा (दर्द-ए-कुत्ता)

    श्वान-व्यथा (दर्द-ए-कुत्ता) हम इंद्रप्रस्थ के रखवाले,यह धरा हमारे पुरखों की ।हमने देखे हैं कई बार,शासन-सत्ता सुर-असुरों की ।। हमने खिलजी को देखा है,देखा है बिन तुगलक़ को भी ।देखा है औरंगज़ेब औरगज़नी, ग़ोरी, ऐबक को भी ।। तैमूर लंग जैसा घातक,नादिर शाह भी देखे हैं ।अब्दाली से अंग्रेजों तक,की सत्ता नयन निरेखे हैं ।। अब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *