Parivar Shayari

परिवार अपना | Parivar Shayari

परिवार अपना

( Parivar Apna )

जहाँ से निराला है परिवार अपना
इसी पे लुटाता रहूँ प्यार अपना

कदम बेटियों के पड़े घर हमारे
महकने लगा है ये संसार अपना

ये बेटे बहू कब हुए है किसी के
जो इनपे जताऊँ मैं अधिकार अपना

मजे से कटी ज़िन्दगी भी हमारी
चला संग मेरे जो दिलदार अपना

करूँ मैं दुआएं यही रात दिन अब
रहे मुस्कराता ये दिलदार अपना

खुशी से सदा झूमती वह गई है
छुपाया नही जो कभी प्यार अपना

न बरछी न भाला न तलवार है अब
अभी तक तो है प्यार हथियार अपना

हमें छोड़कर जब चली जाओगी तुम
रहेगा किसी पर न अधिकार अपना

नज़र मत लगाना खुशी को प्रखर की
उसे अब मिला है वफ़ादार अपना

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • संभालते क्यों हो | Ghazal Sambhalte Kyon Ho

    संभालते क्यों हो ( Sambhalte Kyon Ho ) हजारों ऐब वो मुझ में निकालते क्यों हैं मैं गिर रहा हूँ तो मुझको संभालते क्यों हैं दिखा है जब भी अंधेरा उन्हें मेरे घर में चिराग़ आके हमेशा वो बालते क्यों हैं किसी की बात चले या किसी से हो शिकवा हरेक तंज़ वो मुझ पर…

  • निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं

    निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं।तुम्हें अपने जलवे दिखा दूं चलो मैं। न जाओ मुझे छोड़ कर मयकदा तुम।के बदनाम हो जाओगे बाख़ुदा तुम।क़रीब आओ मेरे न यूं दूर जाओ।मुह़ब्बत की दौलत लुटा दूं चलो मैं।निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं। कहीं प्यार ऐसा न पाओगे…

  • आज़ादी ऐ वतन का | Ghazal Azadi – e – Watan Ka

    आज़ादी ऐ वतन का ( Azadi – e – Watan Ka ) बेशक वरक़ वरक़ पे ही कोई नज़र रहे उन्वान दास्तान का हम ही मगर रहे जब तक हैं लाल तेरे यहाँ मादर-ऐ-वतन फहरेगा चोटियों पे तिरंगा ख़बर रहे आज़ादी -ऐ-वतन का ये जलता रहे दिया यारो हवा के रुख पे बराबर नज़र रहे…

  • देख तो सही | Dekh to Sahi

    देख तो सही ( Dekh to Sahi ) कोई भी रह न जाए कसर देख तो सहीचल छोड़ बात चीत मगर देख तो सही रख कर मुझे वो ढूँढ रहा है यहाँ वहाँचिल्ला रहा हूँ कब से इधर देख तो सही नाज़ुक सी शै पे बार-ए-क़यामत है किसलिएयारब तरस खा सू-ए-कमर देख तो सही हैरत-ज़दा…

  • अदा के नाम पे | Ada ke Naam Pe

    अदा के नाम पे ( Ada ke Naam Pe ) अदा के नाम पे ये बेहिसाब बेचते हैंकि हुस्न वाले खुलेआम ख़्वाब बेचते हैं जिन्हें शऊर नही है बू ओर रंगत कावो काग़ज़ों के यहाँ पर गुलाब बेचते हैं अमीर लोगो की फितना परस्ती तो देखोजला के घर वो ग़रीबों का आब बेचते हैं मुहब्बतों…

  • अरमान बाकी है | Armaan Baki Hai

    अरमान बाकी है ( Armaan Baki Hai )   इक अरसे जो तेरे बगैर चली वो साँस काफी है, बिछड़ कर भी तू मेरा रहा ये एहसास काफी है, सब पूछते हैं कैसे सफ़र किया तन्हा, मैंने कहा ज़िंदा रहने केलिए आख़िरी मुलाकात काफी है, तेरे ख़्याल से ही रौशन रहीं मेरी तन्हाईयाँ सदा, तुझे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *