पर्यावरण | Paryaavaran par kavita
पर्यावरण
( Paryaavaran )

( Paryaavaran )


दीप जलाना होगा ( Deep jalana hoga ) बुलंद हौसला बनाना होगा तूफान से टकराना होगा मास्क जरूरी मुंह पर रखना जन-जन को समझाना होगा वक्त के मारे लोग जगत में मदद को हाथ बढ़ाना होगा दुख की गाज गिरी जिन पर ढांढस उन्हें बंधाना होगा मन का भेद मिटाना होगा सेवा…

उर्मिला ( Urmila ) हे मधुकर क्यों रसपान करे, तुम प्रिय प्रसून को ऐसे। कही छोड के तो ना चल दोगे,तुम दशरथनन्दन जैसे। हे खग हे मृग हे दशों दिशा, हे सूर्य चन्द्र हे तारे, नक्षत्रों ने भी ना देखा, उर्मिला से भाग्य अभागे। वो जनक नन्दनी के सम थी, मिथिला की राजकुमारी। निसकाम…

विश्व कविता दिवस पर ( Vishv Kavita Diwas Par ) कविता प्रकृति पदार्थ और पुरुषार्थ दिखाती कविता, जीव को ब्रह्म से आकर के मिलाती कविता।। शस्त्र सारे जब निष्फल हो जाया करते, युद्ध में आकर तलवार चलाती कविता।। पतझड़ों से दबा जीवन जब क्रंदन करता, हमारे घर में बन बसंत खिल जाती कविता।।…

रिमझिम बूंदों की बहार ( Rimjhim boondon ki bahar ) रिमझिम बूँदों की बहार आई, हरियाली चहुॅओर देखो छाई। श्रृंगार करने को आतुर धरित्री, रीति नवल अभ्यास देखो लाई। मिट्टी से सोंधी महक उठ रही, मलय सौरभ से मस्त हो रही। न भास्कर न रजनी आते गगन में, बस सावन की रिमझिम बरस रही। तन…

जलाओ न दुनिया को ! ( Jalao na duniya ko ) मोहब्बत की दुनिया बसा करके देखो, हाथ से हाथ तू मिला करके देखो। सूखे पत्ते के जैसे न जलाओ जहां को, नफ़रत का परदा हटा करके देखो। गिराओ न मिसाइलें इस कदर गगन से, उजड़ते जहां को बसा करके देखो। अमन -शान्ति से…

अब तक भी आस अधूरी है ( Ab tak bhi aas adhoori hai ) खूब कमाया धन दौलत मंशा क्या हो गई पूरी है मातपिता नैन तरसे अब तक भी आस अधूरी है दूर देश को चले गए धन के पीछे दौड़ लगाने को भूल गए लाड़ दुलार किस्मत को आजमाने को बीवी…