दिवाली पर मिष्ठान की तश्तरीअब भरी ही रहती हैरंगोली भरी दहलीज़ भीअब सूनी ही रहती है रामा श्यामा करना हमेंअब बोझ लगने लगाबुजुर्गों का आशीर्वादअब बोर लगने लगा यह काल का प्रभाव है याभविष्य पतन की दिशावर्तमान का झूठा सुख याकल के समाज की दुर्दशा दिवाली महज़ त्यौहार नहींसंस्कृति मिलन का रुप हैजीवन को अचूक…
रंगमयी झाॅंकी में रंग-पंचमी मनातें ( Rangmyi jhanki mein rang-panchami manate) आओं मिलकर हम-सब खेलें रंगों से ये होली, फाल्गुन के महिनें में करें आओं हम ठिठोली। भर भरकर मुट्ठी गुलाल फेंक रही देखो टोली, मौसम भी लगता मन मोहक जैसे हम जोली।। देश के कोनों-कोनों में अलग अनूठी पहचान, इस महिनें से झड़…
” मैं और चाय “ ( Main aur chai ) ले चाय की चुस्की लगाते थे, दोस्तों के साथ महफिल हम जमाते थे। लंबी-लंबी छोड़ कर गप्पे हम लड़ाते थे, चाय की टपरी पे आधी ज़िंदगी बिताते थे। टांग खींच कर दोस्तों की खूब मस्ती करते थे , पता ही नहीं चलता कब घंटों…
कूटने से बढ़ती है – “इम्युनिटी पॉवर” मैंने काफी बुजुर्गबुजुर्ग जी से पूछाकि पहले लोग इतनेबीमार नही होते थे ?जितने आज हो रहे है …. तो बुजुर्ग जी बोलेबेटा पहले हमहर चीज को कूटते थेजबसे हमने कूटनाछोड़ा है, तबसे हीहम सब बीमारहोने लग गए है….. मैंने पूछा :- वो कैसे ?बुजुर्ग जी मुस्कुराते हुएजैसे पहले…
न जाने कौन सी बीमारी है ( Na Jane Kaun Si Bimari Hai ) जिगर में दर्द अश्क जारी है। न जाने कौन सी बीमारी है।। शुकून लाऊं तो लाऊं कैसे, हर तरफ बहुत पहरेदारी है।। चार कंधों पर सज गया बिस्तर, क्या मेरे जाने की तैयारी है।। मुहब्बत खेल…
ज़िंदगी की रेस ( Zindagi ki race ) ज़िंदगी की रेस बहुत लंबी है, कभी धूप कभी छांव है, कभी फूलों भरी राह, तो कभी कांटों भरी राह में भी नंगे पांव है, कभी आज़ाद परिंदे सा, तो कभी हर तरफ़ बेड़ियां है, कभी हर तरफ़ खुशियों का सवेरा, तो कभी खुद से खुद…