Poem chakra sudarshan dhari
Poem chakra sudarshan dhari

चक्र सुदर्शन धारी

( Chakra sudarshan dhari )

 

चक्र सुदर्शन धारी केशव लीला अपरंपार तेरी
मंझधार में डूबी नैया आकर करना पार मेरी

 

मुरली मोहन माधव तेरी मधुर मनोहर शान है
सकल चराचर के रखवाले जन करे गुणगान है

 

संकट मोचन मोहिनी मूरत मुरली अधर सुहानी
कृष्ण कन्हैया दीनदयाला भजन करते सुरज्ञानी

 

आठो याम आनंद बरसे गोविंद गोविंद गाते ग्वाले
त्रिलोकी के नाथ हमारे मधुसूदन नटखट मतवाले

 

द्वारका को नाथ सांवरो हम सबको रखवालो है
यमुना तट पर मुरली की तान छेड़े बंसी वालों है

 

महक उठे फुलवारी सारी खिले चमन जब सारा
प्रेम सुधारस उर उमड़ता बहती भावों की धारा

 

वृंदावन बिहारी लाल प्यारे गोकुल के घनश्याम
यशोदा राज दुलारे माधव मोर मुकुट सुखधाम

 

मुरली की जब तान छेड़े तो गोपिया दौड़ी आए
रंग बरसे वृंदावन में मोहन सबके मन को भाए

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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