Poem Hawaon Mein aa Gaye

हवाओं में आ गए | Poem Hawaon Mein aa Gaye

हवाओं में आ गए

( Hawaon mein aa gaye )

 

शोहरत मिली तो आज हवाओं में आ गए
रिश्ते भुला के ख़ास ख़लाओं में आ गए।

हमको नहीं मालूम हुआ कब ये वाकया
कब ख़्वाब से सरकार दुआओं में आ गए।

फ़िरऔन मेरा इश्क़ बनाने लगा उन्हें
बुत के सनम वो आज़ ख़ुदाओं में आ गए।

यूं तो ख़फा ताउम्र रहे अब ये मोज़ज़ा
हम आज कल दिन रात सदाओं में आ गए।

रंजिश भुला के साथ रक़ीबों का जब मिला।
फिर यूं हुआ दिलशाद फ़जाओं में आ गए।

है बेहिसी का दौर इलाही ये कौन सा
जितने ज़हर थे आज दवाओं में आ गए।

करते नयन हैं क़त्ल मिरे सुन के बात ये
हम दिलकशी की शोख़ अदाओं में आ गए।

 

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

आजमाने की खातिर | Ghazal Aazmane ki Khatir

 

 

 

Similar Posts

  • वो ख़ुद मुस्कुरा दी

    वो ख़ुद मुस्कुरा दी हिमाकत पे अपनी वो ख़ुद मुस्कुरा दीकिसी की ख़ता की किसी को सज़ा दी मुझे हौसला जब नहीं हो रहा थाउसी ने इशारों से हिम्मत बढ़ा दी मुझे फ़ैसला यूँ बदलना पड़ा थाशिकायत की उसने झड़ी सी लगा दी मैं औरों से तरजीह दूँ क्यों न उसकोमेरी साईं क़िस्मत थी उसने…

  • अश्क़ भी वो गिराने लगते हैं

    अश्क़ भी वो गिराने लगते हैं अश्क़ भी वो गिराने लगते हैंदूर जब भी हम जाने लगते हैं बातों में मुस्कराने लगते हैंहम उन्हीं के दीवाने लगते हैं जब कभी मिलते हैं सनम मुझसेतो अदा से रिझाने लगते हैं बात जिस दिन भी हो जाये उनसेदिन वही बस सुहाने लगते हैं याद आती है जब…

  • मोबाइल से | Mobile se

    मोबाइल से सारे रिश्ते ख़तम मोबाइल से,अच्छेअच्छे भसम मोबाइल से । देश भर के शरीफ़ज़ादे सब ,हो गयें बेशरम मोबाइल से । नाचती हैं हसीन बालाएं,बन गया घर हरम मोबाइल से। बैठ दिल्ली में बात गोवा की,खायें झूठी कसम मोबाइल से। भागवत आरती भजन कीर्तन,डीजिटल है धरम मोबाइल से । चिट्ठियों का गया ज़माना अब,भेजती…

  • नहीं संभलते हैं | Ghazal Nahi Sambhalte Hai

    नहीं संभलते हैं ( Nahi Sambhalte Hai ) हसीन ख़्वाब निगाहों में जब से पलते हैं क़दम हमारे हमीं से नहीं संभलते हैं इसी सबब से ज़माने के लोग जलते हैं वो अपने कौल से हरगिज़ नहीं बदलते हैं छुपाये रखते हैं हरदम उदासियाँ अपनी सितम किसी के किसी पर नहीं उगलते हैं रह-ए-हयात में…

  • याद आती है आशियाने की | Ghazal Yaad Aati Hai Aashiyane ki

    याद आती है आशियाने की ( Yaad Aati Hai Aashiyane ki ) है अदा यह भी रूठ जाने की कोई कोशिश करे मनाने की इन अदाओं को हम समझते हैं बात छोड़ो भी आने-जाने की आज छाई हुई है काली घटा याद आती है आशियाने की एक दूजे को यह लड़ाते हैं नब्ज़ पहचान लो…

  • देख लो तुम भी आईना फिर से

    देख लो तुम भी आईना फिर से देख लो तुम भी आईना फिर सेलौट ये पल न पायेगा फिर से चाहते क्या होके जुदा फिर सेबन न पाओगे तुम खुदा फिर से मुझको होना नहीं फ़ना फिर सेरात दिन माँगता दुआ फिर से यूँ न निकलो सँवर के तुम बाहरहो न जाये कहीं खता फिर…

One Comment

  1. यूं तो ख़फा ताउम्र रहे अब ये मोज़ज़ा
    हम आज कल दिन रात सदाओं में आ गए।
    बेहतरीन गज़ल। गज़लकारा को बहुत बहुत शुभकामनाएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *