Kavita nasha kursi ka

सबको ही बहलाती कुर्सी | Poem in Hindi on Kursi

सबको ही बहलाती कुर्सी

 

सबको ही बहलाती कुर्सी
अपना रंग दिखाती कुर्सी

दौड़ रहे हैं मंदिर-मस्जिद
कसरत खूब कराती कुर्सी

ख्वाबों में आ-आ ललचाऐ
आपस में लड़वाती कुर्सी

पैसे से है हासिल डिग्री
कितनों को अब भाती कुर्सी

ऊँचे- नीचे दम-खम भर कर
मन-मन आग लगाती कुर्सी

:सड़को से संसद तक वादे
खूब उन्हें नचवाती कुर्सी

नौकर अफ़सर खींचे- ताने
भाव बहुत अब खाती कुर्सी

संकल्प भरे तगड़ा मन में
मानस मूल्य बताती कुर्सी

कुर्सी -कुर्सी अब सब रटते
पैसा,रुतबा लाती कुर्सी।

Dr. Sunita Singh Sudha

डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
( वाराणसी )
यह भी पढ़ें:-

खूब रोता मन | Geet Khub Rota Man

Similar Posts

  • प्यार का तोहफा | Hindi poem pyar ka tohfa

    प्यार का तोहफा ( Pyar ka tohfa )   जो हो दिलदार खास उनका स्वागत कीजिए दिल खोल खुशियां बांटो प्यार का तोहफा दीजिए   महक उठे मन का कोना सबको खुशियां दीजिए प्यार की खुशबू महकेगी हर पल महसूस कीजिए   चार दिन की जिंदगी पल पल जी लीजिए हंसी खुशी से जीवन आनंद…

  • माता की भूमिका | Kavita Mata ki Bhumika

    माता की भूमिका माता ही हमारी जान-प्राण-शक्ति, हम उनके जिगर के टुकड़े। माता की भूमिका अनुपम,अद्भुत। माता जी के बिना बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव नहीं जीवन में। मां की कारीगरी,कला-कौशल से बच्चे सफल ,जिंदगी में मुस्कान। बच्चों के लिए ही समर्पित जीवन। क्योंकि हम रहते एक मिट्टी का पुतला, माँ ही उसमें सार्गर्भित गुण…

  • मतदान | Matdan par kavita

    मतदान  ( Matdan )  ( 3 ) पलट दो सत्ता को पलट दो आवाम पर्व है लोकतंत्र का चलो चले करें मतदान लालच बुरी बला है संकट इससे कहां टला है स्वयं में स्वतंत्र बनो नहीं तुम परतंत्र बनो वोट हमारी पूंजी है समर्थ देश की कुंजी है जात धर्म मजहब से ऊपर देश हमारा…

  • चांद में चांद | Chand Kavita

    चांद में चांद  ( Chand mein chand )   दोषारोपण चाँद को स्वयं बनी चकोर है अवसर की तलाश में ताकति चहुओर है   प्रियतम रिझाने को सजने-संवरने लगी आभा लखि आपनी हुई आत्मविभोर है।   पायजेब की घुघरू छनकाती छन-छन चूड़ियाँ कलाईयों की खनक बेजोर है।   बिंदिया ललाट की चमकती सितारों सी गुलाबी…

  • जय हो | Jai Ho

    जय हो ( सूर्य नमस्कार एवं युवा दिवस विशेषांक )   जय हो, जय हो, जय युवा वर्ग, जय हो, जय हो, जय योगा पर्व। जय हो…।। सूर्य नमस्कार नित्य ही करो, जीवन में खुश सर्वदा ही रहो। योगा पर्व की सभी को बधाई, युवा दिवस की हार्दिक बधाई। जय हो…।। स्वस्थ रहो तुम निरोगी…

  • जिंदगी को महकाना | Tyohar Par Kavita

    जिंदगी को महकाना ( Zindagi ko mehkana )   त्योहारों के दिन आते ही गरीब की मुश्किलें बढ़ती जाती है अच्छे कपड़े,अच्छे भोजन नाना प्रकार के सामग्रियों की जरूरत गरीब की कमर तोड़ देती है अभावग्रस्त जीवन चूल्हे की बुझी राख भूख और बेचारगी से बिलखते बच्चे हताशा और निराशा के अंधेरे में तड़फता बिलबिलाता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *