कान्हा बरसाना आ जाइयो | Poem on Kanha in Hindi

कान्हा बरसाना आ जाइयो

( Kanha barsana aa jaiyo ) 

कान्हा इब तो बरसाना आ जइयो
तोहे देखन को अंखियां तरस रई
इब तो नैन मिला जइयो
तोहे खातिर माखन भरियो मटको है।
गोपी ग्वालन को संग,
इब तो आकर मेरो हाथों से माखन खा जाइयो।
तोरे खातिर हम आज राधा सा श्रृंगार किए,
अधरो पर मुरली की तान बजाए है।
इब तो आकर खुद से जोड़ जइयो।
पैजनी बांधे है कान्ह, तेरो नाम की
अंखियन में काजल सजाये हैं। तुम्हरी नजर उतारन की
हम तो हाथ में माला लिए है, कान्हा तोरे नाम की।
तुम्हरे संग प्रीत में ऐसी लगन लागी।
हम नंगे पांव ही आज तोहसे मिलने को वृंदावन भागे है।
कान्हा इब तो बरसाना आ जाइयो
तोहे देखन को अंखियां तरस रई
इब तो नैन मिला जइयो।।

 

आर.वी.टीना
बीकानेर ( राजस्थान )

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