Poem on Raksha Bandhan in Hindi

अपना रक्षा बंधन | Poem on Raksha Bandhan in Hindi

अपना रक्षा बंधन

( Apna Raksha Bandhan ) 

राखी के दिन माँ
सुबह तड़के उठ जाती थी
द्वार पर पूजने को सोन
सैवंईयो की खीर बनाती थी
लड़कियाँ घर की लक्ष्मी
होती हैं इस लिए
वह द्वार पूजा हमसे
करवाती थी
दिन भर रसोई में लग
बूआओं की पसंद का
खाना बनाने में वो
खुद को भूल जाती थी
बुआ को उपहार में देने में
वह बाज़ार से सबसे सुंदर
साड़ी चुन कर लाती थी
मेरे पास बहुत साड़ी है
कह कर वह पुरानी साड़ी
में ही सब त्यौहार मनाती थी
बहनों का भाई होने का अर्थ
वह भाई को कृष्ण-द्रौपदी
की कहानी के माध्यम से
समझाती थी।
सदैव बहनों की रक्षा करना
यह वो भाई को और
सदैव भाई का सुख दुख
में साथ निभाना यह
वो हम बहनों को समझाती थी
सूत के कच्चे धागे का
मज़बूत रिश्ता क्या होता है
वह हमको बतलाती थी
अपने भाई के इंतज़ार में
वह अक्सर सारा दिन
भूखी रह जाती थी
आते थे जब उनके भाई
माँ किसी छोटी बच्ची
जैसी ख़ुश हो जाती थी
बांध एक राखी कलाई पर
अपने भाई की ,
वह उसको लाखों के
आशीर्वाद दे देती थी
मामा के छोटे से तोहफ़े से
मानो उसकी
पूरी तिजोरी भर जाती थी
माँ का भ्राता प्रेम आज
भी बहुत याद आता है
आज भी रक्षा बंधन का
त्यौहार आता है
आज भी माँ द्वार पर
सोन पूजती है
आज भी माँ अपने भाई
के लिए राखी का थाल
सजाती हैं
पर भाई की कलाई पर
राखी बांधने को
यह हाथ वहाँ तक नहीं
पहुँच पाता है
परदेस में बसे भाई को
वो दिल से दुआएँ देती है
घर के मंदिर में विराजे
कृष्णा को राखी बांध
वह अपना रक्षा बंधन यूँ मना लेती है

 

डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पाँडे
( नीदरलैंड )

*स्वतंत्रत पत्रकार, लेखिका

यह भी पढ़ें :-

संदूकची | Sandookchi

Similar Posts

  • नटखट नन्दकिशोर | Natkhat Nandkishor

    नटखट नन्दकिशोर ( Natkhat Nandkishor ) नटखट नन्दकिशोर की दोउ अंखियन पे वारी जाऊं, नटखट नन्दकिशोर की मीठी बतियन से हारी जाऊं, कान का कुंडल मुझको भाऐ, बांसुरिया मेरा चैन चुराऐ, मोह मे उसके फंसती जाऊं, नटखट नन्दकिशोर की दोउ अंखियन पे वारी जाऊं, नटखट नन्दकिशोर की मीठी बतियन से हारी जाऊं, किया जाने कौन…

  • नई पीढ़ी न कतराए अखबार से || kavita on news

    नई पीढ़ी न कतराए अखबार से ( Nai Pidhi Na Katraye Akhbar Se )   नई पीढ़ी को अखबार नहीं भाते पढ़ने से हैं कतराते जाने क्या हो गया है इन्हें? पढ़ना ही नहीं चाहते! एक हम थे पैसे भी नहीं थे फिर भी थी एक दीवानगी अखबार के प्रति जो अहले सुबह चाय की…

  • बहना | Kavita Bahna

    बहना ( Bahna ) जीवन को महकाती बहना हर ग़म को सह जाती बहना । मां की ममता स्नेह पिता का सब हम पर बरसाती बहना ।।१। गोद लिए टहलाती बहना अक्षर ज्ञान कराती बहना । डगमग करते पाँव कभी तो उँगली पकड़ चलाती बहना ।।२। गलती पर गुर्राती बहना प्रेम सहित समझाती बहना ।…

  • बोझ स्वाभिमान का | Bojh Swabhiman ka

    बोझ स्वाभिमान का ( Bojh swabhiman ka )   भर लिए भंडार ज्ञान का सर पर लादे बोझ स्वाभिमान का दब गई बेचारी विनम्रता संशय हर बात पर अपमान का बढ़ गई अकड़ दंभ से मिलने का मन बहुत कम से आंकने लगे कीमत और की बढ़ी औकात खुद की सबसे अदब, लिहाज सब छोटे…

  • झूठी शान | Jhoothi Shaan

    झूठी शान ( Jhoothi shaan )    पिज्जा ,बर्गर खाय के, कैंसर रहे बुलाय दाल रोटी शुद्ध सब , वोका देत भुलाय मैगी,नूडल्स,फास्ट फूड,करें गरल सो काम झूठी शान देखाय के, कमाय रहयो है नाम दूध,छाछ,गन्ना नही,कोल्ड ड्रिंक्स पीवन लगे सौ के साठ,अब पचपन माहि जावन लगे दूर किए जड़ी बूटी,खाय गोली कैप्सूल जड़ जमाए…

  • वो है सबका पालनहार | Palanhar par Kavita

    वो है सबका पालनहार ( Wo hai sabka palanhar )   एक वो ही है सबका पालनहार, प्रभु परमपिता एवम् तारणहार। हर कण-कण में आप विद्यमान दुष्टों का करते हो पल में संहार।। श्री राम बनकर रावण को मारा, और कृष्ण बनकर कंस पछाड़ा। तुम्हारी माया का पाया नही पार, लिया तुमने ही नरसिंह अवतार।।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *