Poem on Tabassum

तबस्सुम | Poem on Tabassum

तबस्सुम

( Tabassum ) 

 

तरोताजगी भर जाती तबस्सुम
महफिल को महकाती तबस्सुम
दिलों के दरमियां प्यारा तोहफा
चेहरों पे खुशियां लाती तबस्सुम

गैरों को अपना बनाती तबस्सुम
रिश्तो में मधुरता लाती तबस्सुम
खिल जाता दिलों का चमन सारा
भावों की सरिता बहाती तबस्सुम

घर को स्वर्ग सा सुंदर बनाती तबस्सुम
सुंदरता में चार चांद लगाती तबस्सुम
चेहरे खिल जाते हैं एक मुस्कान से
प्यार का एहसास कराती तबस्सुम

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

विधि के विधान का सम्मान करो | Geet Vidhi ke Vidhan

 

Similar Posts

  • बहुत गड़बड़ झाला है | Gadbad Jhala par Kavita

    बहुत गड़बड़ झाला है ( Bahut gadbad jhala hai )   थम सी गई आज हमारी ज़िन्दगी और ख़ामोश है सभी की ज़ुबान। छाया धरती पर यह कुदरत कहर आया जो ऐसा ये कोरोना शैतान। लगता बहुत गड़बड़ झाला है और महासंग्राम होने वाला है।।।। कहते है हवा में भी आज है ज़हर बचा नही…

  • परशुराम जयंती | Kavita Parshuram Jayanti

    परशुराम जयंती ( Parshuram Jayanti ) शस्त्र शास्त्र चिन्मयता संग,उग्र आवेश अपार नयनन छवि अद्भुत, पावक संग श्रृंगार । मात पिता रेणुका जमदग्नि, श्री हरी षष्ठ अवतार । कर शोभा शस्त्र शास्त्र, सत्य सत्व व्यक्तित्व सार । शस्त्र शास्त्र चिन्मयता संग, उग्र आवेश अपार ।। त्रिलोक अविजित उपमा, आह्वान स्तुति सद्य फलन । असाधारण ब्राह्मण…

  • शारदे मां का वंदन

    शारदे मां का वंदन ज्ञान की देवी मातु शारदे, मां मैं तुझको प्रणाम करूं,निशदिन तुझे प्रणाम करूं,तेरे चरणों में मैं शीश धरुं।जग का भाग्य बनाने वाली मां,मेरा भी जग नाम करो,इतनी बुद्धि दे देना मां शारदे,आठों पहर तेर नाम धरूं।। मां मेरी अभिलाष यही,जग में ज्ञान की ज्योति जगाऊं मैं,तेरे आशीर्वाद से मां बस जग…

  • महकेगा आंगन | Mahkega Aangan

    महकेगा आंगन! ( Mahkega aangan )    निगाहों में मेरे वो छाने लगे हैं, मुझे रातभर वो जगाने लगे हैं। दबे पांव आते हैं घर में मेरे वो , मुझे धूप से अब बचाने लगे हैं। जायका बढ़ा अदाओं का मेरे, होंठों पे उँगली फिराने लगे हैं। तन्हाई में डस रही थीं जो रातें, रातें…

  • मेरा और उसका गुमान

    मेरा और उसका गुमान   वो अपने को सरेख समझ,            मुझे पागल समझती रही, अब देख मेरी समझ,            उसके तजुर्बे बदल गए, अब मुझे ज्ञानी समझ ,         अपने को अज्ञानी समझ रही।   कुछ शब्द बोल माइक पर,        अपने को वक्ता समझती रही, अब  मंचों पर देख शब्दों का सिलसिला मेरा,…

  • दूध का क़र्ज़ | Poem in Hindi on doodh ka karz

     दूध का क़र्ज़ ( Doodh ka karz )      माँ का जगह कोई ले न सकता, दूध का क़र्ज़  उतार ना सकता। माँ ने कितनी ये ठोकर  है खाई, दूध  की लाज  रखना मेंरे भाई।।   न जानें कहां-कहां मन्नत माॅंगी, मंदिर, मस्जिद, चर्च  में  जाती। तू जग में आऐ अर्ज़ ये लगाती, पीड़ा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *