Poem pitaron ka shraddh

पितरों का श्राद्ध | Poem pitaron ka shraddh

पितरों का श्राद्ध

( Pitaron ka shraddh )

 

 

विचारों का है प्रकटीकरण
श्राद्ध पक्ष पूर्वजों को समर्पण

पुरखों को कर दो तर्पण
कुआं ताल पर जल अर्पण

उड़द चावल से, आमंत्रण
कुशा पैती किया धारण

काले तिल मंत्र है उच्चारण
दे रहे उन्हें है निमंत्रण

अग्रजो का करें अनुकरण
पूर्वजों का यह है स्मरण

विश्वास लिए है अंतःकरण
मिली आशीष है पुष्टिकरण

भूल चूक का है निराकरण
बनाकर , कागौर देखो

स्वान गाय कौवा कन्या
दे उन्हें करें आवाहन

मंत्रोचार हवन पूजन
श्राद्ध पक्ष को करें समर्पण

भारतीय संस्कृति का यह
है निराला न्यारा दर्पण

पितरों को करें आवाहन
अपने धर्म का करें निर्वहन

पीढ़ी दर पीढ़ी करें हस्तांतरण
कागा आना है प्रमाणीकरण

वेद पुराणों मे है विवरण
पुरखों का यह अवतरण

श्वेत निर्मल है आवरण
ज्योतिपुंज सा आपका पदार्पण

❣️

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

विचारों की शुद्धता | Poem vicharo ki shuddhta

Similar Posts

  • राम दूत हनुमान | Hanuman ji kavita

    राम दूत हनुमान ( Ram doot hanuman )    शंकर भोलेनाथ के आप ग्यारवें रूद्र अवतार, मंगलवार व शनिवार ये दोनों है आपके वार। जो नर-नारी श्रृद्धा से यह लेता आपका नाम, बन जातें है बिगडे़ हुऐ उसके सारे वह काम।।   माता अंजनी के पुत्र और श्रीराम प्रभु के दूत, बचपन में सूरज को…

  • बुद्धसिस्ट | Kavita Buddhist

    बुद्धसिस्ट  ( Buddhist )   बुद्ध विशुद्ध मुक्ति का मार्ग बुद्ध विशुद्ध ज्ञान का मार्ग बुद्ध थर्म नहीं धम्म है बुद्ध में मानव सम्म है मन तन वचन तीन ताप बुद्ध मत में तीन पाप बुद्ध शर्ण गच्छामि शुद्ध संस्कार धम्म शर्ण गच्छामि शुद्ध संस्कार संघ शर्ण गच्छामि मुक्ति दाता बुद्ध विशुद्ध ज्ञान ध्यान दाता…

  • मंजिल का एहसास | Prernadayak poem

     मंजिल का एहसास ( Manzil ka ahsas )     यूं ही तो नही ये मेरे मेरे सपनों की उड़ान है, कुछ तो है मन के अंदर तो जुड़ा हुआ है इससे। कुछ तो है जो कर रहा है प्रेरित इस कदर से कि अब ये चुनोतियाँ बाधा नही बन सकती हैं।।   क्या है…

  • सावन | Swan kavita

    सावन  ( Sawan )   –> आया सावन झूमते, धरती को यूं चूमते || 1.फूल खिल रहे बगियन में, रंग बिरंगे तरह-तरह | बादलों में बिजली चमके, रिम-झिम बरसे जगह-जगह | कहीं मूसलाधार हो बारिश, टिम-टिम बरसे कहीं-कहीं | कोई कहता रुक जा मालिक, कहता कोई नहीं-नहीं | –>आया सावन झूमते, धरती को यूं चूमते…

  • खुद्दारी पे आँच आने न पाए | Khuddari par kavita

    खुद्दारी पे आँच आने न पाए! ( Khuddari pe aanch aane na paye )   दीमाग पर अंधेरा जमने न पाए, यादों का मेला ओझल होने न पाए। ख्वाहिशों का कोई अंत नहीं भाई, माता-पिता की हबेली बिकने न पाए। एक जहां है इस जहां के और आगे, उस जहां का धन राख होने न…

  • कान्हा इस युग में भी आना

    कान्हा इस युग में भी आना इस युग में भी आना कान्हा…, इस युग में भी आना … नहीं चाहिए मयुर पंख, न धुन बंसी मधुर बजाना … कान्हा ..इस युग में भी आना…। जगह जगह बिसात बिछाये, बैठे शकुनि घात लगाये, हाथ सुदर्शन चक्र लिए तुम चमत्कार दिखलाना…, कान्हा… साथ सुदर्शन लाना…, कान्हा ..इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *