Poem teri har baat

तेरी हर बात | Poem teri har baat

 

तेरी हर बात

( Teri har baat )

 

 

कभी चैत्र- बैसाख की पवित्र गरिमा लिये

कभी गर्म लू सी ज्येष्ठ- आषाढ़ की तपन लिये

 

कभी सावन-भादों सी छमाछम पावस की बूंदें लिये

कभी त्योहारों सीआश्विन-कार्तिक के मीठे नमकीन लिये

 

कभी मार्गशीर्ष-पौष की कड़कड़ाती रातों की सर्दी लिये

कभी माघ- फाल्गुन की रंगीन बहारों के रंग औ’ खुश्बू लिये

 

लगती मुझे तेरी हर बात , हर गुफ्तगू

और हर लफ्ज़ कहकशां की सी चमक लिये हुये

 

?

Suneet Sood Grover

लेखिका :- Suneet Sood Grover

अमृतसर ( पंजाब )

यह भी पढ़ें :-

ऐ जिंदगी | Poem ai zindagi

Similar Posts

  • समझो तो जग में हर कोई अपना | Samjho to

    समझो तो जग में हर कोई अपना ( Samjho to jag mein har koi apna )    समझो तो जग में हर कोई अपना समझो तो यह एक प्यारा सपना समझो जरा रिश्तो की पावन डोर समझो यह महकती सुहानी भोर प्यार के वो मधुर मधुर तराने अनमोल मोती स्नेह के बहाने अपनापन अनमोल जताकर…

  • आओ मिलकर पेड़ लगाएं | Kavita aao milkar ped lagaye

    आओ मिलकर पेड़ लगाएं ( Aao milkar ped lagaye )   आओं सभी मिल कर पेड़ लगाएं, पर्यावरण को साफ़ स्वच्छ बनाएं। पेड़ों से ही मिलती है ऑक्सीजन, जिससे जीवित है जीव और जन।। पढ़ा है मैने पर्यावरण एवं विज्ञान, वृक्षों के बिना नही कोई मुस्कान। आओ मिलकर लगाओ सब वृक्ष, अब यही रखना सभी…

  • दशहरा | Dussehra

    दशहरा! ( Dussehra )    दशहरा सदा यूँ मनाते रहेंगे, कागज का रावण जलाते रहेंगे। फूहड़ विचारों को कहाँ छोड़ पाए, रस्मों-रिवाज हम दिखाते रहेंगे। चेहरा मेरा एक दिखता जगत को, बाकी वो चेहरा छुपाते रहेंगे। भ्रष्ट रहनुमाओं से क्या मुक्ति मिलेगी, नहीं तो बजट वो चबाते रहेंगे। करते हैं पाप, तन धोते हैं गंगा,…

  • जंग का सुरूर | Jang ka Suroor

    जंग का सुरूर ( Jang ka suroor )    हर कोई नशे में चल रहा यारों, तभी तो ये जग जल रहा यारों। अश्क में उबल रही पूरी कायनात, देखो सुख का सूरज ढल रहा यारों। पिला रहे पिलानेवाले बनकर साक़ी, क्यों यूएनओ नहीं संभल रहा यारों। इजराइल,हमास,रूस,यूक्रेन,अमेरिका पे, रोज जंग का सुरूर चढ़ रहा…

  • उलझन | Hindi poetry on life

    उलझन ( Uljhan )   उलझनों ने घेरा है, कैसा काल का फेरा है। किस्मत क्यों रूठ रही, मुसीबतों का डेरा है।   जीवन की जंग लड़े, कदमों में शूल पड़े। मुश्किलें खड़ी थी द्वार, तूफानों से हम भीड़े।   रिश्ते नाते भूले हम, मर्यादाएं तोड़ चले। बुजुर्ग माता-पिता को, वृद्धाश्रम छोड़ चले।   विकास…

  • नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना | Kavita

    नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ( Naina bawre dhoondhe meet purana )   नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना पल-पल ढूंढे बीता सावन ढूंढे बीती रतिया नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ?☘️? जिन बगिया में फूल खिले थे जिनमें बीते सावन जिस घर में था संग तुम्हारा ढूंढे वोही आँगना नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ?☘️?…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *