प्यार का दें दें उसे तू फूल
प्यार का दें दें उसे तू फूल

प्यार का दें दें उसे तू फूल

 

प्यार का दें दें उसे तू फूल मौक़ा देखकर

उस हंसी के घर जाना तू आज़म पहरा देखकर

 

बात दिल की तू सभी अपनी सुना देना उसे

होश मत खो देना अपनें उसका मुखड़ा देखकर

 

हर क़दम पे ही खड़े है प्यार के  क़ातिल यहां

हर राहों पे तू ज़रा ए दोस्त चलना देखकर

 

है नज़र तुझपे निगाहों की दुश्मनों से ही भरी

तू उसी से ही मुहब्बत के बात करना देखकर

 

प्यार के दुश्मन खड़े है देख राहों में बहुत

तू ज़रा उससे मगर ए दोस्त मिलना  देखकर

 

नफ़रतों की बारिशें ही हो रही है देखले

तू ज़रा घर को ही जाना आज रस्ता देखकर

 

कर दें तू इजहार उससे प्यार अपना आज तो

तू नहीं आज़म उसे यूं आहें भरना देखकर

 

 

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शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

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