Pyar ki Pahal

प्यार की पहल | Pyar ki Pahal

प्यार की पहल

( Pyar ki pahal )

 

आसमां में खिला कँवल कहिए
चाँद पर आप इक ग़ज़ल कहिए

जो बढ़ा दे फ़िजा मुहब्बत की
प्रेयसी के नयन सजल कहिए

बाँध दे जो नज़र से धड़कन को
प्यार की आप वो पहल कहिए

बो दिया नब्ज़ मे दर्द-ए-कसक
प्रेम की बढ़ गई फसल कहिए

अंग में चँद्रिका निशा शबनम
रेणुका संग गंगाजल कहिए

हीर रोती मयंक के उल्फ़त
डाह का इक नया महल कहिए

सम-विषम जो बना रही हमको
रेख दिल में पड़ी सरल कहिए

 

डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
( वाराणसी )

यह भी पढ़ें:-

इबादत करना | Ibadat Karna

Similar Posts

  • तूफान उठाया है

    तूफान उठाया है इस दिल के समुंदर में तूफान उठाया हैमासूम निगाहों ने जब तीर चलाया है वो दिल के दरीचों से नज़दीक लगा इतनाइक पल में उसे हमने हमराज़ बनाया है ताउम्र रहे रौशन दहलीज़ तेरे घर कीयह दीप मुहब्बत का यूँ हमने जलाया है तुमने जो किया दिल को उम्मीद से वाबस्ताइक ताजमहल…

  • नज़र नहीं आता | Nazar Nahi Aata

    नज़र नहीं आता ( Nazar nahi aata )   वो मुझे कहीं भी अब तो नज़र नहीं आता ? यूं सकून दिल को मेरे मगर नहीं आता वो सनम न जानें मेरा किस हाल में होगा कोई भी उसी की लेकर ख़बर नहीं आता ए ख़ुदा बता क्या ग़लती हुई मुझी से है क्यों मगर…

  • यूं ही रखना सदा ख़याल अपना।

    यूं ही रखना सदा ख़याल अपना। दूर जाकर भी ख़ुश जमाल अपना।यूं ही रखना सदा ख़याल अपना। जो भी है आपका ही है वल्लाह।हम को कुछ भी नहीं मलाल अपना। कुछ तो बतलाओ ऐ तबीब-ए-दिल।ह़ाल कैसे हो अब बह़ाल अपना। कौन देखेगा माहो-अन्जुम को।छत पे आ जाए गर हिलाल अपना। ह़ालत-ए-ह़ाल भूल जाओगे।हम दिखा दें…

  • गए वो दिन | Gaye Woh Din

    गए वो दिन ( Gaye Woh Din)    अजब इस दौर में हमने शरीफों का चलन देखा I डुबो के हाथ खूं में फिर बदलते पैरहन देखा II हुई बर्बाद कश्ती जो ,वजह है ना-ख़ुदा खुद ही I उजड़ता बाग़बाँ के सामने ही ये चमन देखा II किया था नाज़ जब कहते, मिरी हर शै…

  • क्यों गले से लगाया मुझे | Kyon ki Shayari

    क्यों गले से लगाया मुझे ( Kyon gale se lagaya mujhe )    ख़्वाब से जब जगाया मुझे उसने गमगीन पाया मुझे वो सितमगर बहुत देर तक देखकर मुस्कुराया मुझे कोई मंज़िल न रस्ता कोई दिल कहां लेके आया मुझे खुद न लैला बनी उसने पर एक मजनूं बनाया मुझे जब बिछड़ना जरूरी था फिर…

  • आशना होता | Ashna Hota

    आशना होता ( Ashna hota )    अगर मेरी हक़ीक़त से ज़रा भी आशना होता यक़ीनन तू भी मेरे रंग ही में ढल गया होता लुटा देता मैं अपनी ज़िन्दगी की हर ख़ुशी तुझ पर मुहब्बत से मुझे अपना कभी तो कह दिया होता ग़ुरूर-ओ-नाज़ नखरे गर दिखाना छोड़ देते तुम हमारे प्यार का आलम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *