Ham Jane

हम में खोकर रहो तो हम जाने | Ham Jane

हम में खोकर रहो तो हम जाने

( Ham mein khokar raho to ham jane )

 

ऐसी होकर रहो तो हम जाने
हम में खोकर रहो तो हम जाने

साथ देने का है इरादा गर
खाके ठोकर रहो तो हम जाने

मन की कोई कहाँ है कर पाता
करना जो कर रहो तो हम जाने

इतना आसाँ नही उठाना बोझ
ख़ुद को ढोकर रहो तो हम जाने

लोग नफ़रत ही क्यों यहाँ बोतें
प्यार बोकर रहो तो हम जाने

‘ज्ञानु’ गंगा भी हो गई मैली
मन को धोकर रहो तो हम जाने

 

ज्ञानुदास मानिकपुरी
( छत्तीसगढ़ )

यह भी पढ़ें:-

मेरी ज़िन्दगी में थी ऐसी हसीना | Romantic Nazm in Hindi

 

Similar Posts

  • अहसान रहेगा | Ahsan Rahega

    अहसान रहेगा ( Ahsan Rahega ) मतला– उस पर भी अभिमान रहेगा याद जिसे अहसान रहेगा हुस्ने-मतला– जिस दिल में भगवान रहेगा उस पर जग क़ुर्बान रहेगा जिस दिल में हो तू ही तू बस उसको क्या कुछ भान रहेगा मेरे आँसू पोंछ भी दे अब मेरा भी कुछ मान रहेगा जिस पर वंशीधर मोहित…

  • नोचे वही वरक़ | Noche Wahi Varak

    नोचे वही वरक़ ( Noche wahi varak )   बाक़ी हुरूफ़ जो ये मेरी दास्तां के हैं अहसान यह भी मुझ पे किसी मेहरबां के हैं रह रह के बिजलियों को है इनकी ही जुस्तजू तिनके बहुत हसीन मेरे आशियां के हैं क़ुर्बानियाँ शहीदों की भूले हुए हैं लोग गुमनाम आज नाम उन्हीं पासबां के…

  • शिकायत न शिकवा | Ghazal Shikayat na Shikwa

    शिकायत न शिकवा ( Shikayat na Shikwa ) चलो अब रहा तुम से वादा हमारा, पलटकर ना तुमको देखेंगे दोबारा ! मुसीबत में डाले खुदी को खुद से, दिखाया मुहब्बत ने कैसा नज़ारा ! टूटे है कहाँ से कैसे हम बताये, हुआ कैसा दिल का ख़सारा ख़सारा ! नहीं है शिकायत न शिकवा किसी से,…

  • वो नहीं ज़िद ठानता | Zid Shayari

    वो नहीं ज़िद ठानता ( Wo nahi zid thanta )    वो नहीं ज़िद ठानता तो मुख़्तलिफ हालात होते इस चमन में ग़ुल भी खिलता महकते लम्हात होते। अब बहुत ही मुख़्तसर सी गुफ़्तगू होती हमारी दिन हुए कुछ इस तरह रस्म़न ज़रा सी बात होते। जीतने की थी हमें आदत मगर अब हाल है…

  • मेरी परवरिश का असर देखते हैं

    मेरी परवरिश का असर देखते हैं मेरी परवरिश का असर देखते हैंवो घर को मेरे इस कदर देखते हैं किताबों में जिनका असर देखते हैंकभी भी नहीं उनका घर देखते हैं पलट वार हमने किया ही कहाँ कबअभी तक तो उनका हुनर देखते हैं मिलेगी न हमको यहां मौत ऐसेचलो साँस को बेचकर देखते हैं…

  • दर्द में भी मुस्कराना चाहिए

    दर्द में भी मुस्कराना चाहिए हर खुशी को गुन गुनाना चाहिएदर्द में भी मुस्कराना चाहिए जो पड़ी बंजर हमारी भूमि हैअब वहां फसलें उगाना चाहिए तुम नहीं भागो नगर की ओर अबगाँव में मिलकर सजाना चाहिए खोखले हो जाये न रिश्ते सभीयार उनको भी बचाना चाहिए साथ मिलके खाई थी उसने कसमयाद अब उसको दिलाना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *