राम वैभव | Ram Vaibhav

राम वैभव

( Ram vaibhav )

 

वैदेही अनुपमा,राम वैभव आधार

जनक दुलारी महिमा अद्भुत,
प्रातः वंदनीय शुभकारी ।
राम रमाकर रोम रोम,
पतिव्रता दिव्य अवतारी ।
शीर्ष आस्था सनातन धर्म,
सुरभि संस्कृति परंपरा संस्कार ।
वैदेही अनुपमा,राम वैभव आधार ।।

मृदु विमल अर्धांगिनी छवि,
प्रति पल रूप परछाया ।
प्रासाद सह वनवास काल,
अगाथ जप तप नेह निभाया ।
शील समर्पण त्याग उपमा,
सदा श्री अपराजिता श्रृंगार ।
वैदेही अनुपमा ,राम वैभव आधार ।।

जनमानस प्रश्न समाधान हित,
उत्तीर्ण कठिन अग्नि परीक्षा ।
शक्ति भक्ति अप्रतिम पर्याय ,
नित राम रूप सकल प्रतीक्षा ।
पुत्री वधु रूप जानकी प्रभा,
पावन गीता सम अमिय धार।
वैदेही अनुपमा ,राम वैभव आधार ।।

रामवल्लभा तो साक्षात ,
मां लक्ष्मी भव्य अवतार ।
जीवन पथ मंगल कंवल,
प्रेरणा सरित अमृत धार ।
अवश संघर्ष कर राघव संग,
नित्य शोभित बन रामायण सार ।
वैदेही अनुपमा ,राम वैभव आधार ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें:-

प्रेम की दहलीज से | Prem ki Dehleez

Similar Posts

  • आद्या से आराध्या तक | Aadya se Aaradhya Tak

    आद्या से आराध्या तक ( Aadya se aaradhya tak )   आद्या से आराध्या तक,शुभता सरित प्रवाह मनुज सौभाग्य जागृत, मंगलता घर द्वार प्रवेश । सुख समृद्धि वैभव असीम, आह्लादित सौम्य परिवेश । दर्शन कर अनूप उपमा , अनंत आशा उमंग उत्साह । आद्या से आराध्या तक,शुभता सरित प्रवाह ।। सृजन दिव्य अठखेलियां, कुल वंश…

  • टूटते हुए परिवार-बेघर स्त्रियां

    टूटते हुए परिवार-बेघर स्त्रियां टूटते हुए परिवार की कहानी बहुत दर्दनाक है,बेघर स्त्रियों की जिंदगी बहुत मुश्किल है।वह अपने परिवार से दूर हो जाती है,और अपने बच्चों को अकेला छोड़ जाती है।उसकी जिंदगी में दर्द और पीड़ा होती है। बेघर स्त्रियों की जिंदगी बहुत संघर्षपूर्ण है,वह अपने परिवार के लिए संघर्ष करती है।लेकिन उसके संघर्ष…

  • हादसे | Kavita Hadse

    हादसे ( Hadse ) आस्था या अंधविश्वास भक्ति या भीड़ बदहवास भगदड़ में छूटते अपनों के हाथ कदमों से कुचलता हर सांस माथा टेकने का तृष्ण कौन भगवान कौन भक्त मेहरानगढ़ यां हाथरस भयभीत बच्चों के शव असीमित चीखें अस्त व्यस्त ह्रदय विदारक दृश्य अनेकों दीपक हुए अस्त कैसी विडम्बना है ये वत्स रुकता नहीं…

  • औरत | Poem in Hindi on Aurat

    औरत! ( Aurat )    घर को घर देखो बनाती है औरत, रंग – बिरंगे फूल खिलाती है औरत। न जाने कितने खेले गोंद में देवता, उम्रभर औरों के लिए जीती है औरत। लाज- हया धोकर कुछ बैठे हैं देखो, कभी-कभी कीमत चुकाती है औरत। जिद पर आए तो जीत लेती है मैदान, झाँसी की…

  • घूरती निगाहें | Poem ghoorti nigahen

    घूरती निगाहें ( Ghoorti nigahen )   सिर पर तलवारों सी लगती हमको घूरती निगाहें अंगारों से वार सहती रहती अक्सर जीवन राहें   जाने क्यों भृकुटियां तनी नैनो से ज्वाला सी बरसे झील सी आंखें दिखाती तीर तलवार भाला बरछे   घूरती निगाहों का भी हौसलों से सामना कर लो बर्बादियों का कहर है…

  • मैं और वो आशा | Kavita main aur woh aasha

    मैं और वो आशा ( Main aur woh aasha )   मैं जूझ रहा तूफानों में आंधी और वीरानो में रेतीले धोरों में उंची घाटियों और चट्टानों में   एक आशा की किरण मुझे साहस संबल दे रही राह की बाधाएं मेरी पग पग पे परीक्षा ले रही     मन में आस जगाए मैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *