बोल नहीं जुटेंगे उनके
बड़ा झोल है मन में उनके
संरक्षण में पलने वाले
मौका खोजते कब भड़ास निकालें?
बारी जब विपक्ष की हो!
सत्ता पक्ष आते ही,
कैसे छिपा लें?
कैसे दबा दें?
नमक का कर्ज जल्द कैसे चुका दें?
भाव सदा रखें यही
चीख चीखकर कहें यही
ढ़ूंढ़ते बहाने हजार
चाहे चल जाए लाठी तलवार
नहीं रह गये अब निष्पक्ष-
जो कहलाते थे पत्रकार।
लोकतंत्र में मचेगा हाहाकार
जब चौथा खंभा ही करने लगेगा व्यापार
तो सोचों!
फिर बचेगा क्या यार?
मानव यही धर्म ‘मानव’ यही रहा है धर्म पुराना,धर्म का न कोई अलग निशाना;न देखा ‘अल्लाह’ को किसी ने,नहीं ‘गॉड’ से भी पाया किसी ने | इंसान ने ही भगवान बनाया,भगवान एक ही आद्य या अंत;अब तो मिटा दिया करो सभी,दिवार जात-पात या धर्म-पंथ | धर्म भेद को भूलाकर सभी,एक साथ रहो मिलकर अभी;धर्म कलह…
शिव शिव बोल ज्ञान पट खोल ( Shiv Shiv Bol Gyan Pat Khol ) शिव शिव बोल ज्ञान पट खोल। हर हर भज नर नाम अनमोल। बाबा भोलेनाथ जय महाकाल। गंगा जटा सोहे चंद्र सोहे भाल। त्रिनेत्र त्रिशूलधारी नीलकंठ त्रिपुरारी। भस्म रमाए शिवशंकर बाघाम्बर धारी। डम डम डमरू बाजे नटराज नृत्य धारे। बिल्व पत्र…
दीपावली पर कविता ( Diwali par kavita ) ( 2 ) आने वाला एक त्योहार, दिया जले उसमें दो चार। कुछ थे रंग बिरंगे वाले, कुछ थे कच्ची मिट्टी वाले। कुछ में घी और कुछ में धागे। बच्चे भी थे रात को जागे, दीपावली के जगमग रात में ।खुशियों का संचार है,एक दूसरे को सब…
सुन खरी-खरी! ( Sun khari-khari ) खामियाँ निकालने में साँसें तेरी नप जाएँगी, रख होश-ओ-हवास काबू में,साँसें उखड़ जाएँगी। न वक़्त है तेरे काबू में और न ही दिल है काबू में, किसी प्रतिशोध में खूबसूरत दुनिया उजड़ जाएगी। न तेरी मुट्ठी में जमीं है,न आसमां,न चाँद-सितारे, एकदिन तेरे जिस्म से ये रुह भी…
विध्यालय का पहला दिन ( First Day of School ) आया आपकी शरण में गुरुजन…| प्यार से पुकार कर, पुचकार कर सम्हाल दो । मैं आपकी शरण में गुरुजन, मुझमें सुंदर विचार दो ।। हो जरुरत फटकार दो, झाड दो लताड़ दो। अपने पन की आश-प्यार, ज्ञान का प्रकाश दो ।। हूँ अभी मैं कोरा…
गैरों की संगत ( Gairon ki sangat ) ऐ दोस्त, संभल कर चल परख कर चल समझ कर चल क्योंकि गैरों की संगत अपनों को दुश्मन बना देती है। ऐ दोस्त! समझना बड़ा मुश्किल है किसी के रुप को, पढ़ना बड़ा मुश्किल है बनावटी चेहरों को क्योंकि गुमराह सभी को अंधा बना देती…