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ओज भरी हुंकार | Kavita oj bhari hunkar
ByAdminओज भरी हुंकार ( Oj bhari hunkar ) मैंने लिखे गीत तराने मधुर मधुर मुस्कान लिए। अंतर्मन भाव सुहावने भारत मां की शान लिए। राष्ट्रदीप ले स्वाभिमान के भाव सजाया करता हूं। मन मंदिर में दिव्य प्रेम के दीप जलाया करता हूं। मैं कविता की हूंकारों से गीत वतन के गाता हूं।…

नया भारत | Kavita Naya Bharat
ByAdminनया भारत ( Naya Bharat ) पतझड़ का पदार्पण हुआ है हर ओर एक दुःख छाया है उजड़ गया जो उपवन उसे फिर बारिश से हमें खिलाना है अमावस की स्याह रात है एक-दूसरे के हम साथ है अंधियारा मिटाने के लिये मिलकर दीप जलाना है मझधार में फंसी है नाव हमारी फिर भी हिम्मत…

महात्मा बुध | Chhand Mahatma Buddha
ByAdminमहात्मा बुध ( Mahatma Buddha ) राजा शुद्धोधन सुत, सिद्धार्थ जिनका नाम। सत्य ज्ञान की खोज में, चल पड़े निष्काम। पुत्र पत्नी त्याग के, तज दिया राजपाट। योग साधना सीख ली, पहुंचे गंगा घाट। बोध गया बोधिवृक्ष, मिल गया सच्चा बोध। गौतम बुध हो गए, सिद्धार्थ कर शोध। वीणा के बजते…

बंजारा की दो नयी कविताएँ
ByAdminबंजारा की दो नयी कविताएँ ( 1 ) देवता कभी पत्थरों में खोजे गये और तराशे गयें देवता कभी मिट्टी में सोचे गये और ढ़ाले गयें देवता कभी प्लास्टिक में देखे गये और सांचे गयें. देवता लगातार सूखे पत्तों और कोरे कागजों पर चित्रित किये जाते रहें. मगर…अफ़सोस ! देवताओं को कभी हमने दिल में…

विकास और बाजार | Vikas aur Bazaar
ByAdminविकास और बाजार ( Vikas aur bazaar ) हमने मान लिया इंसान को भगवान और भगवान को पत्थर, पत्थर को रख कर लगा दिया बाजार और फिर शुरू हुआ विकास का क्रम, जमीने बिकने लगी औकात को देख कर लोग होने लगे बेघर सड़के चौड़ी होना शुरू हुई पेड़ कटने लगे उखड़ने लगे जड़…

एक कप चाय | Ek Cup Chai
ByAdminएक कप चाय ( Ek cup chai ) एक कप चाय को कभी कम मत आंकना। बड़े-बड़े मसले हल हो जाते सब चाय में। जरिया मेल मिलाप का बुला लेना चाय पे। रिश्तो में मिश्री सी घुल सी जाती है चाय में। एक कप चाय में खुल जाते हैं दिल के द्वार। भीनी सी…

