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पिता के संग | Pita ke sang
ByAdmin
पिता के संग ( Pita ke sang ) पिता के संग देखे है कई रंग जीवन की आंख मिचोली वक्त के भिन्न रंग दिल में दबे पिता के अरमान आँखों में सजे सपने भूतकाल की जमीं गर्द भविष्य के उजले सवेरे की उम्मीद बांहों में खेलने से लेकर उनके काँधे तक पहुंचने का सफर जिंदगी…

मंजिल का एहसास | Prernadayak poem
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मंजिल का एहसास ( Manzil ka ahsas ) यूं ही तो नही ये मेरे मेरे सपनों की उड़ान है, कुछ तो है मन के अंदर तो जुड़ा हुआ है इससे। कुछ तो है जो कर रहा है प्रेरित इस कदर से कि अब ये चुनोतियाँ बाधा नही बन सकती हैं।। क्या है…

उलझन | Hindi poetry on life
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उलझन ( Uljhan ) उलझनों ने घेरा है, कैसा काल का फेरा है। किस्मत क्यों रूठ रही, मुसीबतों का डेरा है। जीवन की जंग लड़े, कदमों में शूल पड़े। मुश्किलें खड़ी थी द्वार, तूफानों से हम भीड़े। रिश्ते नाते भूले हम, मर्यादाएं तोड़ चले। बुजुर्ग माता-पिता को, वृद्धाश्रम छोड़ चले। विकास…

कोहरा | Hindi Poem kohara
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कोहरा ( Kohara ) कोहरे की चादर में लिपटी सुबह अठखेलियां सी करती हमारे हिस्से का सूरज भी ज़ब्त कर खुश होती है पगली है नादान है हमें तो चेहरों पर गिरती धुंध भी भा जाती है खुशी से सराबोर कर जाती है… लेखिका :- Suneet Sood Grover अमृतसर ( पंजाब ) यह भी पढ़ें…

धरती की पुकार | Kavita dharti ki pukar
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धरती की पुकार ( Dharti ki pukar ) जब धरती पे काल पड़ जाए हिमपात भूकंप आए वृक्ष विहीन धरा पे बारिश कहीं नजर ना आए ज़र्रा ज़र्रा करें चित्कार सुनो सुनो धरती की पुकार सागर व्योम तारे सुन लो सारे जग के सुनो करतार अनाचार अत्याचार पापाचार का बढ़े पारावार संस्कार…

हवा का झोंका | Jhonka Hawa ka
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हवा का झोंका ( Hawa ka jhonka ) काश कोई हवा का झोका, उसे छूकर आता। उसकी खुशबू को खुद को समेटे, मैं महसूस कर पाता उसको, इन हवाओं में । मैं एक बार फ़िर, खो जाता, उसकी यादों की रंगीन फिजाओं में। मेरी आंखों के सामने छा जाता , उसका किसी हवा के…

पिता के संग | Pita ke sang
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मंजिल का एहसास | Prernadayak poem
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उलझन | Hindi poetry on life
ByAdmin
उलझन ( Uljhan ) उलझनों ने घेरा है, कैसा काल का फेरा है। किस्मत क्यों रूठ रही, मुसीबतों का डेरा है। जीवन की जंग लड़े, कदमों में शूल पड़े। मुश्किलें खड़ी थी द्वार, तूफानों से हम भीड़े। रिश्ते नाते भूले हम, मर्यादाएं तोड़ चले। बुजुर्ग माता-पिता को, वृद्धाश्रम छोड़ चले। विकास…

कोहरा | Hindi Poem kohara
ByAdmin
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धरती की पुकार | Kavita dharti ki pukar
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धरती की पुकार ( Dharti ki pukar ) जब धरती पे काल पड़ जाए हिमपात भूकंप आए वृक्ष विहीन धरा पे बारिश कहीं नजर ना आए ज़र्रा ज़र्रा करें चित्कार सुनो सुनो धरती की पुकार सागर व्योम तारे सुन लो सारे जग के सुनो करतार अनाचार अत्याचार पापाचार का बढ़े पारावार संस्कार…

हवा का झोंका | Jhonka Hawa ka
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हवा का झोंका ( Hawa ka jhonka ) काश कोई हवा का झोका, उसे छूकर आता। उसकी खुशबू को खुद को समेटे, मैं महसूस कर पाता उसको, इन हवाओं में । मैं एक बार फ़िर, खो जाता, उसकी यादों की रंगीन फिजाओं में। मेरी आंखों के सामने छा जाता , उसका किसी हवा के…

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