Sakaratmak Soch

सकारात्मक सोच | Sakaratmak Soch

सकारात्मक सोच

(Sakaratmak soch )

 

प्रतिपल उत्सविक प्रभा, सकारात्मक सोच से

असंभव कुछ भी नहीं,
मनुज ताकत आगे ।
बस तब तक देर है ,
जब तक डर न भागे ।
यथार्थ आकलन उबारता,
प्रगति प्रयास संकोच से ।
प्रतिपल उत्सविक प्रभा,सकारात्मक सोच से ।।

कमजोरी ताकत बन,
जब आगे बढ़ती है ।
कीर्तिमानी शिखरों पर,
नाम भव्य गढ़ती है ।
हौसली उड़ानों संग,
लक्ष्य सहज भाव बेलोच से।
प्रतिपल उत्सविक प्रभा,सकारात्मक सोच से ।।

अपूर्णता अंतर वसित,
संपूर्णता अनूप परिभाषा ।
सफलता वरण चाहना,
हर अंतर्मन अभिलाषा ।
परिश्रमी तपिशें आह्लादित,
यथार्थपरक मोहक पोज से ।
प्रतिपल उत्सविक प्रभा, सकारात्मक सोच से ।।

सहज सरस माधुर्य पथ,
सदा स्फूर्त हर कदम ।
सहर्ष आलिंगन शीर्षता ,
भाव मृदुलिका सम पदम ।
आशा उत्साह उमंग अनंत,
विमुक्त विपरीत घटकी रोंच से।
प्रतिपल उत्सविक प्रभा, सकारात्मक सोच से ।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

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