Samay par Kavita

समय | Samay par Kavita

समय

( Samay ) 

 

मूल्यवान है समय की कीमत

 इसको    व्यर्थ   गवाओं   ना

 

 समय  समय पर डोले धरती

 समय  पर  सूरज  चांद  उगे

  समय  समय  पर चले हवाएं

  समय  पर   सुंदर  नाद  लगे,

 

कर सदुपयोग कर्म कर अपना

पीछे      पैर     हटाओ    ना।

 

पेड़   समय  पर  फल  देता  है

समय   समय  पर  बौरे   आम

समय -समय  पर  घोर  अधेरा

 समय -समय  पर  प्रातः  शाम,

 

  चलो समय के साथ हमेशा

  विघ्नों   से   घबड़ाओ  ना।

 

जन्म समय  पर मरण समय पर

उम्र   समय    संग    बढ़ता   है

आना   जाना  सब  कुछ  तय है

समय  ही  सब  कुछ  करता  है,

 

 छोड़ समय का साथ कभी भी

 और   कहीं   मुड़  जाओ  ना।

 

कभी   नही   वह  हार  हारता

समय  – साथ   जो  चलता  है

अपना  दो  पल का जीवन वह

समय   संग    तब    गढ़ता  है,

 

समय समय की बात निराली

  मन  को  तुम  समझाओ ना।

 

रचनाकार रामबृक्ष बहादुरपुरी

( अम्बेडकरनगर )

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