समय बड़ा बलवान

समय बड़ा बलवान | Samay poem

समय बड़ा बलवान

( Samay bada balwan )

 

वक्त वक्त की बात है,
समय समय का फेर,
विफलता हाथ लगे,
हो जाती जब देर।

 

वक्त रहते संभल जा,
पढ़े समय की मार,
फूंक-फूंक कर रखे,
कदम घर के बाहर।

 

वक्त सभी का आता,
कालचक्र का खेल,
जंग जीतता वही,
कष्ट जो लेता झेल।

 

वक्त है कीमती सदा,
समय बड़ा बलवान,
समय समय की बात,
पल-पल को पहचान।

 

हिम्मत रखिए जो सदा,
वो सफलता पाता,
घड़ी घड़ी आस में,
वक्त बीतता जाता।

 

जो समय के संग हो,
करता वही विस्तार,
वक्त नहीं करता है,
किसी का इंतजार।

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

नसीब | Hindi Kavita Naseeb

Similar Posts

  • Hindi Poem Makarsankranti – मकर संक्रांति

    मकर संक्रांति ( 2 ) सूर्य देव ने मकर राशि में प्रवेश कर मकर संक्रांति के आने के दी है खबर सोंधी सोंधी गुड़ की वो महक कूटे जाते हुए तिल का वो संगीत मौज-मस्ती बेसुरे कंठो का गीत गंगा स्नान खिचड़ी का वो स्वाद आज होगी आकाश में पतंगबाजी रंग बिरंगी पतंग से भरा…

  • हनुमान जी | Kavita Hanuman Ji

    हनुमान जी  ( Hanuman Ji )   मैं नादान मैं नकारा आया आपके द्वार हे प्रभु हनुमान, तेरी मुआख़जा में रहूं मुवाजहा हो मेरे प्रभु हनुमान। तू नबी है क़ासिद है विष्णु का मुझे नशा तेरा नबीज़ जैसा, मैं तेरी अमानत रहूं सदा वदीअत भी हो तेरी प्रभु हनुमान। मैं फ़ाजिर हूं तेरा तलबगार हूं…

  • जीवो पे दया करें | Jivo pe Daya Karo

    जीवो पे दया करें ( Jivo pe daya karo )  जीवो पे दया करें दीनो पे करे उपकार। परोपकार श्रेष्ठ धर्म है सेवा ही सत्कार। दया क्षमा प्रेम बांट करें औरों पे उपकार। परोपकार से प्रभु प्रसन्न भर देते भंडार। परमार्थ करते चले सन्मार्ग मिल जाए। सेवा से आनंद मिले सुख समृद्धि आए। दया दान…

  • जय हनुमान | Hanuman Ji par Kavita

    जय हनुमान! ( Jai Hanuman )    आओ करें हनुमान की बातें, आओ करें श्रीराम की बातें। कैसे जली वो सोने की लंका, आओ करें उस दशानन की बातें। जनकनंदनी को रावण हरा था, बन करके साधु देखो छला था। चुरा करके सीता बला उसने पाली, आओ करें संग्राम की बातें। सीता का हनुमान पता…

  • नारी हूं मैं नारायणी | Nari Hoon Main Narayani

    नारी हूं मैं नारायणी ( Nari hoon main narayani ) नारी हूं मैं नारायणी।कहलाती हूं नारायण की अर्धांगिनी। अपनी शोभा बढ़ाने की चाह,जब नारायण के मन में आया ।तब मेरी उत्पत्ति किया गया,मुझे गया अपने से अलग कर बनाया। मैं उनकी शक्ति स्वरूपा हूं।उन्हें प्रेरणा देने वाली, उनकी प्रेरणा हूं। नहीं हूं मैं किसी की…

  • और घूंघट

    और घूंघट   शरद सिहरन चलन चटपट और घूंघट। प्राण ले लेगी ये नटखट और घूंघट।।   कुंद इंदु तुषार सघनित दामिनी तन, व्यथित पीड़ित प्रणयिनी सी काम बिन, मिल रही कुछ ऐसी आहट और घूंघट।। प्राण०   नैन पुतरी मीन सी विचरण करें, अधर फरकन चपला संचालन करे, करत बेसर अकट झंझट और घूंघट।।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *