संभल जा ज़रा

संभल जा ज़रा | Kavita sambhal ja zara

संभल जा ज़रा

( Sambhal ja zara )

ए-दोस्त

संभल जा ज़रा
पछताएगा,रोएगा
अपने किए दुष्कृत्यों पर
फिर सोच सोच कर….

अभी समय है
बच सकता है तो बच
बचा सकता है तो बचा
अपनों के अहसासों को
अपनों के अरमानों को…..

तुमसे ही तो सारी उम्मीदें हैं
तुम ही तो पालनकर्ता हो
अब तुम ही नहीं सम्भलोगे तो
बाकी सबका कौन है …?

रोक सकता है तो रोक
थाम सकता है तो थाम
उनके हाथों को
जो छुट गए हैं तुमसे
जो बिछड़ रहे हैं तुमसे…

समझ सकता है तो समझ
जान सकता है तो जान
घर से ही तो अपने हैं
तेरे बगैर घर कैसा
अपना सकता है तो अपना
मना सकता है तो मना
रूठे हुए अपनों को….

 

वे तुम्हें माफ़ कर देंगे
तू अपनी गलती स्वीकार करके तो देख
कुछ नहीं बिगड़ा है अभी
वापिस आ सकता है तो आ
तेरे लिए दरवाजे खुले हैं
देख तेरा इंतजार आज भी है….!!

 

 

कवि : सन्दीप चौबारा

( फतेहाबाद)

यह भी पढ़ें :

24+ Desh Bhakti Kavita in Hindi देश भक्ति कविता हिंदी में

 

Similar Posts

  • नवदुर्गा पर कविता | Maa Durga Kavita

    नवदुर्गा पर कविता ( Navdurga par kavita )   मां मुझको तू शक्ति दे दे जीवन के तू दुख हर ले जुड़ा रहे तुझसे यह नाता इतनी मेरी बिनती सुन ले मांगू मैं ना तुझसे कुछ मैं चरणों में शरणागत कर ले दीया जनम जो तूने मुझको दूजो की सेवा का वर दे तुझे चढ़ाऊं…

  • माँ से बना बचपन मेरा

    माँ से बना बचपन मेरा अजब निराला खेल बचपन का lदुनिया ने लिया पक्ष सक्षम का llबचपन ने लिया पक्ष माँ का lआज भी धुन माँ की लोरी की llसुनाओ , फिर से कहानी माँ की lमाँ से बना बचपन मेरा ll किसी ने पूँछा ” मुकद्दर ” क्या है ?मैं ने कहा मेरे पास…

  • यह नवल वर्ष

    यह नवल वर्ष यह नवल वर्षमन में भर देउत्साह और हर्षघटे निराशाओं का तमहों कामयाब हम स्वार्थ का दैत्यकभी छल न सकेअब मंथराकोई चाल चल न सके आशाओं के कँवल खिल जायेंनिर्धारित लक्ष्य मिल जायें हर स्वप्न संपूर्ण होकामना परिपूर्ण हो सुदृढ़ और विश्वास होसार्थक हर प्रयास हो उदय ज्ञान का आदित्य होप्रफुल्लित निरन्तर साहित्य…

  • भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी

    भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी आदर्शों पर अटल हिमालय, सी जिनकी इच्छा शक्ति,कर्त्तव्य पथ पर अडिग, अकम्प आदर्श देश भक्ति,अटल विचारों के स्वामी, सत्य पथिक विहारी थे,ऐसे अटल बिहारी करते नाम की सार्थक अभिव्यक्ति! नवयौवन में गृहत्याग समर्पित, देश को जीवन कर डाला,मानवता की सेवा करने, निस्वार्थ राजधर्म पाला,स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़, जन चेतना…

  • श्री कृष्ण मुरारी | Shri Krishna Murari

    श्री कृष्ण मुरारी ( Shri Krishna Murari )   अब तो आओ, श्री कृष्ण मुरारी भोगवाद स्याह घटाएं , आच्छादित चारों ओर । क्रूर कंस सम मानव कृत्य, धुंधली सी जीवन भोर । मंदित गुरु ज्ञान ज्योत , अपमानित गायेँ बेचारी । अब तो आओ, श्री कृष्ण मुरारी ।। हर कदम सही गलत , एक…

  • जुदाई | Judaai

    जुदाई ( Judaai )    धड़कने कभी ह्रदय से जुदा नहीं हो सकती है। परदेसी पिया जुदाई सहन नहीं हो सकती है। पलक बिछाए नयना बैठे नजरे राहें तकती है। अधर गुलाबी प्रीत बरसे पांव पायल बजती है। परदेसी पिया जुदाई काले केश घटाएं घिरती बूंदे बरसात सताती है। मन का मीत पिया परदेसी याद…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *