सर्दी की धूप

सर्दी की धूप | Sardi ki Dhoop

सर्दी की धूप

सर्दियों में धूप का राज,
हर गली में उसका ही बाज।
घर के आँगन में जो उतर आई,
लगता जैसे सरकार बनकर आई।

गुनगुनी धूप का खेल निराला,
कभी सीधे छत पर, कभी आँगन में पग डाला।
जहाँ तिरपाल देखा वहीं लेट गई,
फूस की छत पर तो जैसे फिक्स बैठ गई।

चाय की दुकान पर चर्चा थी भारी,
“धूप सस्ती होनी चाहिए हमारी!”
किसी ने कहा, “राशन में बँटना चाहिए,”
तो पंडित जी बोले, “यज्ञ से धूप बढ़ाई जाएगी।”

गली के कुत्ते भी छतों पर चढ़ गए,
मौसम विभाग के भरोसे लड़ गए।
“आज धूप रहेगी,” जब हुई ये घोषणा,
तो सभी रजाइयाँ बोलीं, “अब तो होना है धोखा।”

मोहल्ले की छतों पर लग गए मेले,
धूप के बहाने, सजे ढेरों ठेले।
कहीं मूँगफली, कहीं गजक का ठिकाना,
धूप में बैठा हर आदमी बना राजा सयाना।

पर सर्दी कहती, “ये धूप तो मेरी दुश्मन है,
मेरा आस्तीन का सांप, जो खुद ‘हिटमैन’ है।”
लेकिन धूप बेफिक्र, बेपरवाह,
हवा को चिढ़ाकर कहे, “मैं हूँ यहाँ शहंशाह।”

गुनगुनी धूप, तेरी यही कहानी,
सर्दियों में सबकी बन जाती तू रानी।
पर गर्मी में जब आती है तेरी जवानी,
तब सब कहते हैं, “भागो रे, आग बरसानी!”

अवनीश कुमार गुप्ता ‘निर्द्वंद’
प्रयागराज

यह भी पढ़ें :–

Similar Posts

  • कुछ तो बोलो | Kuch to Bolo

    कुछ तो बोलो ( Kuch to bolo )   किसी ने कहा सनातन को खत्म करना है हम सभी चुप रहे किसी ने कहा राम काल्पनिक हैं हम सभी चुप रहे किसी ने कहा काफिरों को जीने का हक नही हम सभी तब भी चुप रहे आखिर क्या हो गया है तुम्हे खून ही तुम्हारा…

  • Shiv Stuti | शिव-स्तुति

    शिव-स्तुति ( Shiv Stuti ) ऐसे हैं गुणकारी महेश। नाम ही जिनका मंगलकारी शिव-सा कौन हितेश।।   स्वच्छ निर्मल अर्धचंद्र हरे अज्ञान -तम- क्लेश। जटाजूट में बहती गंगा पवित्र उनका मन-वेश।।   त्रिगुण और त्रिताप नाशक त्रिशूल धारे देवेश।। त्रिनेत्र-ज्वाला रहते काम कैसे करे मन में प्रवेश।।   तमोगुणी क्रोधी सर्प, रखते वश, देते संदेश।…

  • लड़ाई लंबी है | Poem in Hindi on Ghaza War

    लड़ाई लंबी है ! ( Ladai lambi hai )    हुई मानवता तार-तार,लड़ाई लंबी है, नाच रही है मौत, लड़ाई लंबी है। एटम-बम बना खिलौना कुछ लोगों का, द्वार चक्रव्यूह तोड़,लड़ाई लंबी है। नभ,जल,थल से न बरसेंगे फूल कोई, लहू से सने हैं हाथ,, लड़ाई लंबी है। महंगाई,बेकारी पर किसी का ध्यान नहीं, बदलेगा भूगोल,लड़ाई…

  • नव वर्ष 2025 | New Year 2025

    नव वर्ष नव वर्ष की वैला में हमें खुद को सँभालना हैं ।अन्तर की शुद्धि कर आत्मा को धोना हैं । इस जग के जाल में हमको नहीं फँसना है ।नव वर्ष की वैला में हमें खुद को सँभालना हैं । राग – द्वेष के भावों को दिल से निकालना हैं ।धर्म के रस का…

  • अपनी खुशियों को पंख लगाते हैं | Kavita

    अपनी खुशियों को पंख लगाते हैं ( Apni  khushiyon ko pankh lagaate hain )   चलो अपनी खुशियों को जरा पंख लगाते हैं।?️ फिर से दोस्तों की गलियों में छुप जाते हैं।? फिर वही अल्हड़ पन? अपनाते हैं। कुछ पल के लिए अपनी जिम्मेदारियों से जी चुराते हैं।? फिर वही बचपना अपनी आंखों में लाते…

  • वो एक अकेली शेरनी | Nari shakti ki kavita

    वो एक अकेली शेरनी ( Wo ek akeli sherni )      उस वक्त लगा लेना चाहिए उस नारी का अंदाजा, निकाह या विवाह हो कितने लोग लेनें को जाता। अपनें ही व्यवहार से सबकें दिल में जगह बनाती, वो एक अकेली शेरनी कुटुंब छोड़कर संग आती।।   अगर न होती ये पाॅंचो लक्ष्मी रुपणी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *