स्त्री मन सदा कुंवारा

स्त्री मन सदा कुंवारा

कोमल निर्मल सरस भाव,
अंतर अनंत मंगल धार ।
त्याग समर्पण प्रतिमूर्ति,
धैर्य संघर्ष जीवन सार ।
सृजन अठखेलियों संग,
अनामिक अविरल धारा ।
स्त्री मन सदा कुंवारा ।।

अप्रतिम श्रृंगार सृष्टि पटल,
स्नेहगार दया उद्गम स्थल ।
पूजनीय कमनीय शील युत,
नैतिक अवलंब दृष्टि सजल ।
आत्मसात नित्य यथार्थ बिंदु,
अनैतिक पथ नित्य दुत्कारा ।
स्त्री मन सदा कुंवारा ।।

अद्भुत तेज पुंज उज्ज्वल,
जग ज्योति अखंडित ।
हर युग अति गुणगान,
गरिमा महिमा शीर्ष मंडित ।
ऊर्जस्वित कर प्राण सकल ,
शक्ति भक्ति प्रेरणा जयकारा ।
स्त्री मन सदा कुंवारा ।।

संस्कृति संस्कार धर्म रक्षक,
परंपरा मर्यादा युक्त चरित्र ।
शुद्ध सात्विक राह गामिनी ,
व्यक्तित्व कृतित्व पवित्र ।
अथक श्रम उत्सर्ग साधना,
पर हित जीवन पार उतारा ।
स्त्री मन सदा कुंवारा ।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

Similar Posts

  • हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं | Bal Sahitya Rachna

    हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं ( Bal Sahitya Rachna )   हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं तुतलाती तुतलाती बोली मन के सच्चे हैं   बढ़ जाएंगे कदम हमारे खुले आसमान में अच्छे काम करेंगे हम भी भारत मां की शान में   तूफानों से टकराना तो खूब मन को…

  • छलावा

    छलावा उस धरा सेइस धरा तकउस गगन सेइस गगन तकउस जहां सेइस जहां तकउस परिवेश सेइस परिवेश तकउस गांव सेइस शहर तकका सफर…रहा नहीं आसानजिसने बदल दिएसारे अरमान…अपनों के साथजीने का सपनाबन कर…रह जाएगा सपनाजो हो नहीं सकताअब कभी अपनाअब अपनों को…नहीं दे पाते वो सम्मानजो थे कभी जीवन की जान श्याम सुंदर यह भी…

  • पुलिस स्मृति दिवस

    पुलिस स्मृति दिवस मुॅंह से आज भी बोलती है उन वीरों की तस्वीरें,देश के लिए अपनी जान गंवाए वो ऐसे थें हीरे।कोई शब्द नही है उन वीरों के लिए पास हमारे,फिर भी कविता-लिखता हूॅं मैं उदय धीरे-धीरे।। २१ अक्टूब‌र दिन था वो १९५९ की काली-रात,तीसरी बटा की कंपनी हाॅट स्प्रिंग मे थी तैनात।सीमा सुरक्षा जिम्मेदारी…

  • प्रणय उत्संग | Pranay Utsang

    प्रणय उत्संग ( Pranay Utsang )   प्रणय उत्संग,उत्सविक हावभाव जीवन पथ अभिलाष प्रभा, आनंदिका स्पर्श अनुभूति । पर वश श्रृंगार विहार, चाल ढाल सम अरुंधति । मधुर मृदुल स्वर लहरियां, उष्ण विराम शीतल छांव । प्रणय उत्संग,उत्सविक हावभाव ।। आचार विचार व्यवहारिकी, स्व पालन नैतिक संहिता । अवांछित संकीर्णता पटाक्षेप, सकारात्मक सोच अंकिता ।…

  • अपनें घर का वैद्य | Ghar ka Vaidya

    अपनें घर का वैद्य ( Apne ghar ka vaidya )   इन घरेलू नुस्खों को सब लोग आजमाकर देखना, अपने अपने घर का वैद्य आप ख़ुद ही बन जाना। हालात चाहें कैसे भी हो न बीमारियों से घबाराना, सवेरे जल्दी-उठकर हल्के व्यायाम ज़रुर करना।। खाॅंसी में काली-मिर्च और शहद मिलाकर चाटना, जलने पर मैथीदानें का…

  • अरमान 2024 के | Arman 2024 ke

    अरमान 2024 के ( Arman 2024 ke )   जीवन में सुख हर्ष हो, गुजरे कुछ यूँ साल। अब के सावन में भरें, कुएँ बावड़ी ताल।। छुएँ बुलंदी ख़्वाहिशें, पूरे हों सब ख़्वाब। अंतस में सबके सदा, खिलते रहें गुलाब।। मुखड़े पर मुस्कान हो, मन में रहे उमंग। जीवन भर उड़ते रहें, हँसी ख़ुशी के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *