Shri Guru Charan

श्री गुरु चरण | Shri Guru Charan

श्री गुरु चरण

( Shri Guru Charan ) 

 

श्री गुरु चरण कमल नित वंदन

मुदित मना मानस मुनियों सा,
ध्यान चिंतन उत्तम ज्ञान ।
नीतिमान निष्कपट सुनिष्ठ,
सतत निरत नैतिक आह्वान ।
प्रेरणा पुंज व्यक्तित्व कृतित्व,
चरित सुरभित सदृश चंदन ।
श्री गुरु चरण कमल नित वंदन ।।

शमन दमन अंधविश्वास आडंबर,
शुभ सुख दायक शक्ति निधान ।
अनंत स्नेह सिक्त शिष्यगण,
अविरल तत्पर विद्या दान ।
सकारात्मक सोच दृष्टिकोण,
समस्या समाधानिक मंथन ।
श्री गुरु चरण कमल नित वंदन ।।

लावण्य प्रभा मुख मंडल शोभित,
ओजस्वी आत्म विश्वासी मुस्कान ।
समाहार ललित कला हास्य,
प्रयुक्ति चित्रांकन लेखन मृदुगान ।
उरस्थ उद्गम पावन नेह धारा,
नीलांजना सम दृष्टि स्पंदन ।
श्री गुरु चरण कमल नित वंदन ।।

सेवांजलि अर्पित राष्ट्र जन्मधरा,
सुशोभित सदा यशस्वी पहचान ।
निः श्रेयस निश्छल मनुज छवि,
करस्थ ईश तुल्य अनुपम वरदान ।
उज्ज्वल उन्नत दिव्य कर्म साधना,
निज संस्कृति संस्कार अभिनंदन ।
श्री गुरु चरण कमल नित वंदन ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें :-

मतदान का महाकाज | Matdan ka Mahakaj

Similar Posts

  • हमारे अटल जी

    हमारे अटल जी जो अटल रहा,अटल है उसका क्या बखान लिखूं,जिसे अमरत्व प्राप्त हो उसका जीवनदान लिखूं।जिसने भारतीय भाषाओं को जग में मान देकर,प्रति करूं खुद को समर्पित थोड़ा सा ज्ञान लिखूं।। अटल जी की प्रतिभाओं को सारा जग जानता है,कोई ऐसा लाल नहीं,जो इस लाल को न पहचानता है।जिसने पूरे ब्रह्मांड को अपना ही…

  • मेरी माता रानी | Kavita Meri Mata Rani

    मेरी माता रानी ( Meri mata rani )    सुख और समृद्धि सबको प्रदान करती है वही, मेरी माता रानी के बराबर यहां पर कोई नही। किया असुरों का विनाश दिया भक्तों का साथ, उनके जैसी शक्ति आज किसी के पास नही।। एक हाथ त्रिशूल रखती दूसरे में कमल रखती, कभी ज्ञान बाॅंटती कभी ताण्डव…

  • करगिल जंग | Kargil Jung

    करगिल जंग! ( Kargil Jung )   युद्ध के उस रंग में, दुश्मन के साथ जंग में, बहादुरी दिखा रहे थे हमारे रणबाँकुरे। टाइगर हिल हो या हो द्रास की वो पहाड़ियों, फिर से उसको हासिल कर रहे थे रणबाँकुरे। एटम-बम को जो गहना पहनाकर वो बैठे हैं, अधोपतन का उत्तर वो दे रहे थे…

  • कला संस्कृति | Kavita Kala Sanskriti

    कला संस्कृति ( Kala Sanskriti ) मेरे तेरे होने का कोई प्रणाम चाहिए। कला और संस्कृति का कोई आधार चाहिए। बिना आधार के क्या बचा पाएंगे संस्कृति को। जो हमारे पूर्वजो की बहुत बड़ी धरोहर है।। कला का संस्कृति पर बड़ा उपकार होता है। संस्कृति के चलते ही कला उदय होता है। दोनों के मिलन…

  • नियति | Poem niyati

    नियति ( Niyati )   नियति ने क्या खेल रचाया हे ईश्वर ये कैसी माया कहर बन कोरोना आया कांपी दुनिया घर बैठाया   नीति नियम तोड़े न जाते कुदरत का पार न पाते डोर थामे ऊपर वाला कठपुतली सा नाच नचाते   सुखों का सागर उमड़े कहीं दुखों की गिरती गाज विधि का विधान…

  • फागुन का रंग | Poem Fagun ka Rang

    “फागुन का रंग” ( Fagun ka Rang )    वर्षा बीती शरद गया, आई बसंत बहार। रंगीला मौसम हुआ ,फागुन का त्योहार।। बूढ़ जवान हरे हुए ,बाल हृदय उमंग । तन मन सब मदमस्त हुआ, चढ़ा फाग का रंग।। मस्तानों की टोली सजी, करे खूब हुड़दंग। नाचे गाए मस्ती में, खूब चढ़ी है भंग।। हाथ…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *