Suna di Hamne

सुना दी हमने | Suna di Hamne

सुना दी हमने

( Suna di Hamne )

शम्अ उल्फ़त की जला दी हमने
पर सज़ा दिल को सुना दी हमने

राह हमदम की सजा दी हमने
उनकी दुनिया ही बसा दी हमने

रोशनी की थी जिन्होंने शब भर
उन चरागों को दुआ दी हमने

बन गया ग़ैर ज़माना लेकिन
यार की यारी निभा दी हमने

दौर-ए-हिज़्रा में भी ख़ुश है रजनी
दर्द-ए-दिल को न दवा दी हमने

रजनी गुप्ता ‘पूनम चंद्रिका’

लखनऊ, उत्तर प्रदेश

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • ऐसी कोई सरकार आ जाये | Aisi Koi Sarkar

    ऐसी कोई सरकार आ जाये हमारे मुल्क में ऐसी कोई सरकार आ जाये सभी के हाथ में अच्छा सा कारोबार आ जाये खुली सड़को पे पीते हैं शराबी बोतलें लेकर इलाक़े का भला ऐसे में थानेदार आ जाये वबा की मार से हर रोज़ ही इंसान मरते हैं करोना की दवा इस बार तो दमदार…

  • महाकुंभ

    ग़ज़ल ( महाकुंभ विशेष) आस्था की है लगी डुबकी सदा देखाभक्ति के नव रंग में सबको रँगा देखा कुंभ मेला को इलाहाबाद के पथ परसंत नागा साधुओं से नित भरा देखा भीड़ का उमड़ा हुजूम जयघोष हैं करतेधूल से घुटने पावों तक को सना देखा सूर्य तक उठता नदी जल अंजली में योंआचमन में हाथ…

  • अस्मत | Asmat

    अस्मत ( Asmat ) हर तरफ एक कोहराम मचा है, लगता है हर दिल में आग लगा है। नरभक्षी जैसे झपट रहे एक दूसरे पर, मानो इंसान के अंदर का जानवर जगा है। सभी शामिल हो गए फरेबी भीड़ में, अब किसी का साफ नहीं गिरेबान बचा है। अपने ही अपनों का हक़ खाने लगा…

  • लौट आ अब तू कहाँ है | Laut aa Ab

    लौट आ अब तू कहाँ है ( Laut aa ab tu kahan hai )    तू दिखा यूं मत गुमाँ है और भी देखो मकाँ है फूल दूँ कैसे उसे अब वो नहीं अब दरमियाँ है दिल यहाँ लगता नहीं अब वो हुआ जब से निहाँ है उस हसीं से तू मिला दे ये ख़ुदा…

  • कोई अपना यार नहीं | Koi Apna Yaar Nahin

    कोई अपना यार नहीं ( Koi apna yaar nahin )   कोई अपना यार नहीं तन्हा हूँ दिलदार नहीं हूँ सच्चा में भरा वफ़ा कोई मैं अय्यार नहीं देखें है वो रोज़ मुझे उल्फ़त की इज़हार नहीं फ़ैले कैसे उल्फ़त फ़िर फ़ूल भरा गुलज़ार नहीं जानें वो गुम कहाँ हुआ उसका हो दीदार नहीं देता…

  • बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँ

    बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँ बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँतेरी आँखों में सागर देखती हूँ हुई मा’दूम है इंसानियत अबहर इक इंसान पत्थर देखती हूँ पता वुसअत न गहराई है जिसकीवो सहरा दिल के अंदर देखती हूँ हुनर ज़िंदा रहेगा है ये तस्कींमैं हर बच्चे में आज़र देखती हूँ न ग़ालिब और कोई…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *