सुनील कुमार “खुराना” की कविताएँ | Suneel Kumar Khurana Poetry
जग गोकुल में आनंद भयों देते सब बधाई
जग गोकुल में आनंद भयों देते सब बधाई,
सारी सृष्टि में सब खुश हैं बहना क्या भाई।
काली-काली रात में कान्हा गोकुल आएं,
गोकुल में नन्दलाल यशोदा के मन भाए,
आने से कान्हा के दूर हुई सबकी तन्हाई।
निराला रूप सब जन के मन को भाया,
सब खुशियों को कान्हा अपने संग लाया,
सब ऋषि-मुनियों ने चैन की बंसी बजाई।
गोकुल में प्यारे कान्हा आएं खुशियां लाएं,
धरा भी झूमी पक्षी भी झूमें सब गीत गाएं,
प्यारे कान्हा के दर्श करने में सबके भलाई।
गोकुल की जन्म-जन्म की पूरी हुई आस,
प्यारे कान्हा बनें गोकुल में सबके खास,
मेरे कान्हा ने ही यह सब लीला रचाई।
आजादी के दीवानें
वें आजादी के थे दीवाने,
सारी दुनिया उनको जाने।
दिल में बस उनके आग थी,
आजाद कराने की बात थी,
सारा जगत उनको ही माने।
वें खून से लिख गए कहानी,
अमर हो गयी उनकी जवानी,
कवि भी लिखते उनके गाने।
हंसते-हंसते शूली पर चढ़ गए,
वें आखरी सांस तक लड़ते रहे,
मुक्ति की बात मन में बस ठाने।
सीने पर अपने खायी गोलियां,
चैन की नसीब नहीं हुई रोटियां,
वें ही है भारत की सच्ची संतानें।
धरा पर अमर रहेंगी उनकी गाथा,
सदा रखेंगे उनके चरणों में माथा,
दुश्मन के आगे रहें बनकर चट्टानें।
रे सखा अपना भारत देश जश्ने आजादी मनाएं
आओ रे तुम मेरे संग मेरे प्यारे सखा,
अपना भारत देश जश्ने आजादी मनाएं,
सारे होकर हम संग खुशियां को मनाएं।
15 अगस्त खुशियों की सौगात लाया,
यह दिन प्यारा सबके मन को भाया,
देशभक्ति ज्योति सबके दिल में जलाएं।
आजादी की खातिर मिट गए वीर महान,
जान देकर सलामत रखा अपना जहान,
वीरों की यह सब कहानी सबकों बताएं।
बन्दे मातरम बन्दे मातरम उन्हें था प्यारा,
देश की खातिर कुर्बान किया अपना सारा,
उनके नाम को हम सब होंठों पर सजाएं।
सदा ही जान से प्यारा था उन्हें अपना देश,
आजादी के लिए न जाने कितने बदलें भेष,
देशभक्ति की गंगा में आज हम सब नहाएं।
जन्मों है नन्दलाला गोकुल पधारों
जन्मों-जन्मों की पूरी हुई हमारी आस,
सखी री चलों चलें हम गोकुल के पास,
जन्मों है नंदलाला गोकुल सभी पधारों।
ना जाने मेरा प्यारा मन भी झूम रहा,
झूम-झूम कर मतवाला दिल गा रहा,
खुशियां छाई है प्यारे गोकुल में हमारो।
सखी दिल में था जो अपने प्यारा सपना,
सखी री अब पूरा हो गया सपना अपना,
जाके सब गोकुल नन्दलाला को निहारों।
गा रही सृष्टि भी अब एक नया तराना,
सखी री लिखा जाएगा जग में फसाना,
दर्श पाकर नन्दलाला के जीवन संवारो।
नागपंचमी
नाग पंचमी का त्यौहार लगता प्यारा,
नाग पंचमी के गीत गाता जग सारा।
इस दिन पूजा करके भक्त नाग की,
खिड़की खोले सदा अपने भाग्य की।।
तूं परजीवी की हर पल कर लें सेवा,
सभ्यता का समझ सार मिलेगा मेवा।
सृष्टि में सब नर को भाता श्रावण मास,
श्रावण में पूरी हो सबकी इच्छा खास।।
प्यारा सावन का मौसम भाएं नाग को,
भोर,पपीहा,कोयल भी गाए राग को।
दूध से इसमें नाग को नहलाया जाएं,
पूजा कर सब नर मन की खुशी पाएं।।
पूजा से कालसर्प दोष सब मिट जाते,
नाग पंचमी में मन चाहा वर सब पाते।
नाग पंचमी की जग में प्यारी कहानी,
इसकी कहानी सृष्टि में है बड़ी पुरानी।।
कृष्ण जैसा दोस्त
कृष्ण और सुदामा की गाए गाथा,
दोनों में था बडा ही गहरा नाता।
कृष्ण जैसा दोस्त मुझको देकर,
मेरे रब मुझ पर कर दे मेहरबानी।।
इस सारी सृष्टि में कर्ण जैसा नहीं,
दानी कोई जाने ये सारी सृष्टि यही।
मेरे रब मुझको कर्ण जैसा दोस्त दो,
संवार दो तुम मेरे रब मेरी जिंदगानी।।
सृष्टि में जिंदगी सबकी चार दिन की,
मिल जाए सच्चा अनमोल तोहफा।
सच्चा दोस्त करता जीवन में वफ़ा,
मेरे जीवन की तुम संवार दो राजधानी।।
मेरे रब तुम मेरे बन जाओ सारथी,
सत् की राह तुम मुझको दिखलाओ।
मुश्किल में भी तुम बन जाते हो साथी,
कहती तुमको दुनिया सारी सच्चा वरदानी।।
यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे
राहों में आएं चाहे लाख मुश्किल,
लाख मुश्किल को कर देंगे अलहदा,
तेरी यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे।
तुम जैसा नहीं है कोई मेरा दोस्त,
ढाल बनकर रहे तुम सदा मेरे साथ,
सदा ही तेरी दोस्ती हम पूजेंगे।
ये दोस्ती जग में तेरी मेरी पहचान,
सदा ही रहें ये जग में तेरी मेरी आन,
तेरी मेरी दोस्ती के सब गीत गाएंगे।
सदा ही तुमने मुझको गले लगाया,
सदा दोस्ती का प्यार तुमसे पाया,
हम दोस्ती के राज अब खोलेंगे।
दोस्ती में होता तन और मन पवित्र,
मुझ पर सदा ही रहें दोस्ती का इत्र,
कर्मों को सदा ही हम अपने तोलेंगे।
मैं रब से करता सदा एक ही दुआ,
दोस्ती का सूर्य नहीं रहें कभी छूपा,
बीज प्यार के इस दोस्ती में रोपेंगे।
स्वयं मे विश्वास
स्वयं में विश्वास कर आगे बढ़,
विश्वास से मंजिल की ओर बढ़।
विश्वास की सीढ़ी पर सदा चल,
मुश्किल का निकलेगा का हल।
मन में रख लें तूं अपने शान्ति,
तेरे विश्वास से ही होगी क्रांति।
जीवन में चल विश्वास के साथ,
खुशियां होगी तेरे दोनों ही हाथ।।
बन्दें विश्वास ही जीवन का सार,
बिना विश्वास जग में होती हार।
विश्वास से मिल जाते हैं उपहार,
उपहार करते दिल को गुलज़ार।।
बन्दें विश्वास ही तो तेरा जीवन,
समझ विश्वास को सदा श्रीमन।
विश्वास से सब बन जाते मीत,
विश्वास से सदा ही होगी जीत।।
नहीं विश्वास तो होगी तेरी हार,
विश्वास से ही होगी कस्ती पार।
विश्वास से पराएं हो जाते अपने,
विश्वास से ही हो जाते पूरे सपने।।
कारगिल विजय
एक शाम उनके नाम की कर ले,
शहादत को उनकी नमन कर लें।
जान से प्यारा था उन्हें अपना देश,
तिरंगा ही उन्हें प्यारा अपना भेष,
आओ उनके नाम भजन कर लें।
जब तक तन में उनके जान थी,
वें लड़ते रहे प्यारी उन्हें आन थी,
हम देश में अपने अमन कर लें।
वें मिट गए देश पर जान देकर,
नाम अमर कर गए जान लेकर
यें गुलज़ार अपना चमन देख लें।
वें आखरी सांस तक लड़ते रहें,
सारा देश देशभक्त उनको कहें,
उनकी शहादत के गीत गा लें।
सदा देश अपना उन्हें था प्रथम,
फतह की,शत्रु को किया खत्म,
साथ अपने देश के वचन पर लें।
कारगिल युद्ध में जान गंवा दी,
अतीत के पन्नों में गल्प रचवा दी,
बन्दें देश भक्ति की लगन कर लें।
तूं ही नर है तूं ही नारी
भोले जग में तेरे रूप अनेक,
कोई कहता तुमको महाकाल।
तुमको बोले कोई अर्धनारीश्वर,
भोले तुमको ध्यावे जग में हरेक।
भोले तूं ही जग का रखवाला,
तूं नाचे गाए हैं बड़ा मतवाला।
सृष्टि में सब करते तेरी पूजा,
तुमसा नहीं जग में कोई दूजा।।
जग में भोले तूं ही नर ,तूं ही नारी,
भोले तुझमें बसी यह सृष्टि सारी।
भोले तुम ही आदि हो तुम ही अंत,
तुमसे ही यह सब ऋतु और बसंत।।
सावन में शिव बजाते डम-डम डमरू,
भक्तों के पैरों में बाजें छम-छम घूघरू।
सावन में शिव अर्धनारीश्वर बन नाचें,
प्यारे शिव ही भक्तों पर कृपा राखें।।
महादेव
महादेव मेरे तुम मुझको जान प्यारे,
मेरे भोले तुम हो जग में सबके सहारे।
सब देवो महान हो,तुम सबके स्वामी,
तुम सा ना कोई जहां में,तुम हो नामी।
करते हो पाप नाशक तुम हो जटाधारी,
जग में तुम्हारी लीला,तुम हो लीलाधारी।
मेरे भोले जहां में तेरा नाम बड़ा प्यारा,
सबके भोले. तुम ही हो सबका सहारा।
जटाओं में गंगा साजें माथे पर चांद विराजे
हाथ में त्रिशूल गले में सर्प हाथ में डमरू बाजें
श्रावण मास की जग में महिमा निराली,
मन से ध्यावे,उनकी रहती सदा दिवाली।
भोले,अर्धनारीश्वर,शिव ,नीलकंठ,महादेव,
नाम जग में अनेक,सबके कहते है इष्टदेव।
सबके प्यारे महादेव,तुम से ही यह जहान,
तुमसा नहीं यहां कोई,जग में तुम हो महान।
हरियाली तीज
सावन में सजनी साजन के गीत गाए,
ये हरियाली तीज सबके मन को भाएं।
हरियाली तीज,छोटी तीज,श्रावण तीज,
नाम अनेक कहते सब इसको हरि तीज।।
श्रावण मास में कोयल गाती गीत प्यारा,
कोयल के मधुर गीत सुने यह जग सारा।
बागों में मोर पपीहा गाए गीत और नाचें,
सृष्टि में सब कुदरत के रचाए सुंदर ढ़ांचे।।
श्रावण की हरियाली तीज में पड़ते झूलें,
हरियाली तीज में सब नर और नारी झूलें।
चहुंओर धरा पर मन को भाती हरियाली,
हरियाली तीज में सब घर छाएं खुशहाली।
हरियाली तीज में खुश होए नर और नारी,
श्रावण तीज में सब इच्छा होए पूरी सारी।
श्रावण में शिव पार्वती मिल कर गीत गाते,
अर्धनारीश्वर रूप सब नर के मन को भाते।
गीत सावन के
हरितिमा भी आयी है,
हरियाली तीज आयी है,
गीत सावन के गाओ।
रिमझिम करता है पानी,
सावन के गीत गाए रानी,
सखी सहेली तुम आओ।
बागों में कोयल भी गाएं,
मेंढ़क अपना राग सुनाएं,
तुम सावन के राग गाओ।
बागों में पड़ गए हैं झूलें,
कब आओगे,हम जब झूले,
सावन में ना तुम तरसाओ।
सावन में नाचे मोर पपीहा,
बिन साजन के तड़पे विरहा,
सजनी कहती साजन आओ।
ज्वार-भाटा
कभी हंसना इस जीवन में,
कहीं रोना है इस जीवन में,
ज्वार-भाटे जैसी है कहानी।
कभी जीवन में भी होते सुख,
कभी जीवन में किसी के दुख,
कभी हो जाती है रूत सुहानी।
कभी जीवन बन जाता आशा,
कभी बन जाता है यह निराशा,
जीवन की बस यही है कहानी।
कुछ का जीवन बन जाता अंजान,
कुछ देव जीवन में बन जाएं महान,
कुछ की गाथा गाते उम्रभर जुबानी।
कभी चलने से मिलती जाए मंजिल,
कभी लाख कौशिक से ना हो हासिल,
“खुराना” ने लिखी यें बातें बन कर ज्ञानी।
चन्द्रशेखर
देश मुझको प्यारा,
इसकी खाता हूं कसम,
देश मेरा आजाद हैं।
नाम मेरा आजाद हैं,
करता रहूंगा देश सेवा,
देश मेरा आबाद है।
मिट जाऊंगा देश पर,
जब तक तन में जान,
हम इसकी औलाद है।
कहते लोग चन्द्रशेखर,
याद करेंगे लोग उम्रभर,
नाम नहीं मेरा नौशाद है।
देश पर हो जाऊंगा बलिदान,
देश मेरा सदा रहा अभिमान,
बाजुएं अभी भी फौलाद है।
श्रावण में हरियाली तीज आयी है
( हरियाली तीज )
चहुंओर चलें रिमझिम की पुरवाई,
यह तन्हाई के सब मौसम बिसराई,
श्रावण में हरियाली तीज आयी है।
सृष्टि में प्यारे इसके नाम अनेक,
सिंधारा तीज, छोटी तीज ही एक,
प्रकृति भी चहुंओर फलदायी है।
बागों में काली कोयल राग गाए,
कोयल राग सबके मन को भाएं,
हर घर खुशियां ही खुशियां छायी है।
श्रावण मास में पड़ गए प्यारे झूलें,
इन झूलों में बच्चें और बूढ़े सब झूले,
श्रावण तीज हर घर खुशियां लायी है।
मनभावन श्रावण तीज मनाते सब,
भोले और पार्वती के गीत गाए लब,
प्यारा मौसम भी बना सुखदायी है।
श्रावण तीज लाती मनभावन पैगाम,
सजनी लिखें साजन का हाथों पर नाम,
हरियाली तीज सबके मन को भायी है।
प्रकृति का उपहार
प्रकृति का उपहार है अनमोल,
बन्दें समझ लें तूं इसका मोल।
कहीं पर झरनें करते झर झर,
बर्षा में भी मेंढ़क करते टर-टर।।
कैसी प्रकृति की जग में लीला,
कहीं इसका रंग है नीला पीला।
चहुंओर रहती फूलों की खुशबू,
कहीं रात में टिम टिम करें जुगनू।।
कहीं उच्चे पर्वत कहीं गहरी झील,
सभी नदियां सागर में जाती मिल।
अमवा पर मधुर गीत गाती कोयल,
कहीं बागों में खिलते फूल कोमल।।
प्रकृति का उपहार जग में अलबेला,
पाकर खुश रहते नहीं कोई झमेला।
नीले अम्बर में सूरज,चांद और सितारें,
सब मजहब के लोग रहें मिलकर सारे।।
बारिश की बूंदें
बारिश की बूंदें,
जब हो धरा पर,
होती है समृद्धि।
घनघोर बादल,
छाते हैं नभ में,
होती है खुशी।
टप-टप करती है,
जब बारिश की बूंदें,
देती सबकों सकून।
बारिश की बूंदों में,
बच्चे बनाएं कस्ती,
करते हैं सब मस्ती।
आसमां में बनता,
प्यारा इन्द्रधनुष,
होती जब बारिश।
बारिश की बूंदों में,
साजन बिन सजनी,
विरहा में सदा जलती।
सावन की रूत सुहानी
सावन मास धरा पर होएं पावन,
कोयल भी बागों में गाएं गायन।
प्यारा सावन का मौसम आया,
ये सावन का मौसम मन भाया।।
सावन मास में सब करते हैं मस्ती,
छम-छम बरखा में डोलेगी कस्ती।
चहुंओर है सावन की रूत सुहानी,
सावन मास की है अपनी कहानी।।
यह मौसम सब ऋतुओं में प्यारा,
सावन के गीत गाता ये जग सारा।
बच्चें भी जाते,हरिद्वार लेने कावड़,
कांवड़ से पावन होता हैं घर आंगन।।
सावन में पावस होती है बहुत भारी,
सावन में गीत गाएं,जग में सब नारी।
पावस बहाव में फसल बहती सारी।
सावन की पावस दें,सबकों खुशियां,
पाकर पावस,खुश होएं सारी दुनियां।।
भूतेश
भोले भूतों के स्वामी,
तुम ही हो अन्तर्यामी।
हाथ में डमरू बाजें,
बालों में गंगा साजें।।
क्या होते हैं भूत प्रेत,
पूजा से करते सचेत।
जो करें भूतेश पूजा,
डंका उन्ही का गूंजा।।
भोले भूतों के स्वामी,
तुम ही हो अन्तर्यामी।
तुम हो त्रिकालदर्शी,
जग के तुम प्रियदर्शी।।
तुम्हारे तन साजे भभूत,
माया तुम्हारी है अकूत।
नाम तुम्हारा महाकाल,
तुम्हारा सब मायाजाल।।
विश्व में हों युद्ध
देखो विश्व में हों रहे हैं युद्ध,
बन्दें तुम शरण लें लों बुद्ध।
युद्ध से होता है सदा नाश,
समझ लों बात तुम खास।।
समझ लें बन्दें जीवन सार,
युद्ध से सदा ही होती हार।
बिछड़ जाते हैं सब अपने,
मिट्टी में मिल जाते सपने।।
जिसकी खो गई सुध-बुध,
उसने सदा ही छेड़ा युद्ध।
सबके कर मंगल की बात,
युद्ध से हो जीवन की रात।।
बन्दें युद्ध से करलें तू तोबा,
युद्ध करना नहीं तेरी शोभा।
युद्ध से नहीं बढ़ते कोई देश,
बुद्ध देते सदा सबको संदेश।।
बारह साल की उम्र
पुराना ज़माना प्यारा था,
जब बारह साल की उम्र में।
सबके दांत दूध का टूटता था,
आज रहते हैं सब अपने मुड़ में।।
दिलों में इंसानियत थी सबके,
गली-मुहल्ले रहते थे सब चमके।
आज प्यारे जमाना बदल गया है,
नर और नारी जग में सब बेहया है।।
आज सृष्टि में बारह साल की उम्र में,
दिल टूट रहे हैं इस बेहया जमाने में।
बारह साल की उम्र में नहीं था ज्ञान,
अब इस उम्र में बच्चें शादी रहें जान।।
कितना मॉर्डन जमाना आ गया है,
सृष्टि में खत्म होती जा रही दया है।
अब संस्कार बच्चें भूलते जा रहे हैं,
बच्चे कहां अब किसी की सुन रहे हैं।।
कागज का थैला
कागज का थैला,
रूप इसका छैला।
हलका होता यह,
भार से जाता बह।।
रंग होते इसके अनेक,
प्रयोग करते इसे हरेक।
इसकी कीमत भी कम,
खो जाएं नहीं होता गम।।
सुन्दर होता इसका आकार,
लें जाते सब इसको बाजार।
दैनिक जीवन में करें प्रयोग,
प्रयोग इसका करता निरोग।
प्रदूषण से यदि तुमको बचना,
प्रयोग इसका सदा तुम्हें करना।
प्रयोग इसका संवारें पर्यावरण,
प्रयोग करना ऋषि दें उदाहरण।।
स्वरचित और मौलिक कविता
फुर्सत के पल
फुर्सत के पल होते प्यारे,
देते सबकों खुशी ये सारे।
फुर्सत के पल होते उनके,
सच्चे होते सपने जिनके।।
सच की राह अपनाएं जो,
खुश रहें जग में सदा ही वो।
जो परहित की बात करते,
उनको फुर्सत के पल मिलते।।
बन्दें फुर्सत के पल तूं निकाल,
फुर्सत के पल से होगा निहाल।
बन्दें पिकनिक पर भी तूं चलना,
स्वच्छ रहेगा स्वास्थ्य तेरा अपना।।
बन्दें इस भागदौड़ की जिंदगी में,
फुर्सत के पल रखना दिल्लगी में।
फुर्सत के पल जीवन में देते सकून,
यह सबकी सांसों में भर देते जनून।।
विचार
बन्दें रहना सदा तुम सादगी से,
नहीं दूर जाओगे तुम जिंदगी से।
सादा जीवन और उत्तम विचार,।
खुराना का है यह मुख्य विचार।।
कर लें बन्दें तूं सदा सबसे प्यार,
सदा नहीं तेरी होगी जग में हार।
बन्दें जीवन में रहना सदा सादा,
संग सबके करें,सच्चाई का वादा।।
नहीं आएगी जीवन में तेरे बाधा,
होगें उच्च विचार चेहरे पर आभा।
जिसके होते वायु में उच्च विचार,
पार पाएं सब बाधाओं की दीवार।।
बन्दें धरा पर राष्ट्रसेवा परमो धर्म,
जग में नहीं करना तुम कभी शर्म।
मेहनत का विचार जीवन में उत्तम,
मन में विचार करना वसुधैव कुटुम्ब।।
गुरु
गुरु मेरे मुझको दो कुछ ज्ञान,
ज्ञान पाकर बन जाऊं विद्वान।
गुरु बिन जीवन में ज्ञान कहां,
तुम मुझे दिल में रख लो वहां।।
आत्मा सृष्टि में सदा अविनाशी,
गुरु मेरे आत्मा तेरे बिन प्यासी।
मैं जग में हूं बड़ा मूर्ख अज्ञानी,
मेरी सिद्धि की लिख दो कहानी।।
तुम देते सदा सबको ज्ञान ज्योति,
जीवन बनाएं सबका पारस मोती।
मन का अंधकार तुम मिटाते हो,
राह में फूल सबकी खिलाते हो।।
तेरी महिमा गुरु जग में प्यारी,
तुम्हारे ज्ञान से दुनिया भी सारी।
गुरु ज्ञान से वायु में सुबह-शाम,
ज्ञान बिना सृष्टि में कहा है नाम।।
मानवता को दानवता में बांटें
मानें जो मानव जाति-पाति,वह होता मूर्ख इंसान।
मानवता को दानवता में बांटे जग में होता शैतान।।
सोच बन्दे तेरी नीची माने फिर अपना धर्म बड़ा।
तू मानवता की कांटे जड़ फिर काहे जग में बड़ा।।
नस-नस में बन्दें फैला जहर तू नर है नर को डसें।
खुद बन बैठा रब कैसी दिल में ज़ालिम सोच बसें।।
जग में कैसी तेरी रीत नहीं करता तू किसी से प्रीत।
जब आएगा अन्त समय तेरा नहीं होगी तेरी जीत।।
कहें ज्ञानी लोग यहां तुझसे बड़ा नहीं कोई ज़ालिम।
जग में रूप तेरे बनें बावन सबका मानें खुद हाकिम।
सृष्टि में धर्म-कर्म की आड़ में फैलाता सदा आडम्बर।
बन्दें जग में सोच बनी तेरी और सबसे खाता मांगकर।।
बन्दें ओछा बना तेरा कर्म सदा ही ओछी बनी तेरी सोच।
पग-पग में तेरी खोटी सोच खाता मानव को नोंच-नोंच।।
वें होते ज़ालिम लोग मानवता को बांटते मंदिर मस्जिद।
नहीं होती उनमें आत्मा वें खुद को मानें ईश्वर का वालिद।।
मन की बात मन ही जाने
मन की बातें मन ही जानें,
सच्चे लोगों की बात मानें।
मन हर पल दौड़ता रहता,
नहीं कभी भी यह रूकता,
हर पल चाहता कुछ पाने।
दूसरों से सदा ही जलता,
सदा ही रहता यह चलता,
बिरला समझ पाएं चालें।
इसके जग में रूप निराले,
कुछ नर होते मन के काले,
कुछ राज मन के होते छुपाने।
मन की बातें मन में रह जाती,
यह कहां किसी से कहीं जाती,
मन की ठाह नहीं कोई छाने।
मन कहां किसी कहीं रूकता,
ये कहां किसी के आगे झूकता,
मन से ही लोग बन जाते दीवानें।
विश्वासघात
मत कर बंदे किसी के साथ विश्वासघात,
तेरे जीवन में होगी खुशियों की बरसात।
मात-पिता गुरूजन की मान लें तू बात,
बन्दें तेरे सुख की नहीं होगी कभी रात,
मत कर बन्दें जीवन में अपने खुराफ़ात।
छोड़ दें बन्दें तू सदा जाति-पाति के बंधन,
कर लें बन्दें तूं सदा सृष्टि में सबको वंदन,
बन्दें सृष्टि में बन जा,तूं भी दूसरा सुकरात।
बन्दें जगत में चलना सदा सत्य की डगर,
सत्य की डगर से होंगे तेरे चर्चे नगर-नगर,
बन्दें नहीं कर तू किसी के साथ पक्षपात।
कबीर रैदास की वाणी भी समझाएं सार,
चल नक्शे कदम पर उनके नहीं होगी हार,
कभी नहीं कर तू जीवन में अपने प्रतिघात।
यह जीवन मिला तुझको अनमोल खजाना,
बन्दें अपने जीवन को कुसंगति मत गॅंवाना,
सत् संगति करके जीवन को कर आत्मसात।
मोबाइल
मोबाइल बन गया सबकी आन,
मोबाइल में छिपी सबकी जान।
मोबाइल बिना हर व्यक्ति अधूरा,
मोबाइल के आगे नाचे बन मयूरा।।
नर को ज्ञान की जब पड़े जरूरत,
मोबाइल पूरी करें सबकी हसरत।
अब काम नहीं चले मोबाइल बिना,
सबका प्यारा,सोनू,मोनू क्या हिना।।
नर कहां मोबाइल के बिना जिन्दा,
जिस पर नहीं है उसकी करें निंदा।
आज मोबाइल में ढूंढ़ते सभी ज्ञान,
सच मोबाइल होता गुणों की खान।।
मोबाइल लगता सबकों बडा प्यारा,
खुराना भी कहता जीवन में हमारा।
जगत में मोबाइल की शान निराली,
मोबाइल से पूछे बात,जाए न खाली।।
इन्द्रधनुष
आओ जाने धरा पर हम आज,
इन्द्रधनुष बनने का होता राज।
सूर्य के प्रकाश का प्यारा पानी,
पानी की भी होती अपनी कहानी।।
पानी की भी बूंदें राहों से गुजरती,
आसमान में सुंदर छटा झलकती।
बूंदों से होता सृष्टि में भी अपवर्तन,
आसमान में होता कभी परावर्तन।।
सूर्य का प्रकाश जब बूंदों से टकराए,
सूर्य की किरणों का रूप भी दमकाएं।
आपस में दोनों के रूप का टकराना,
इन्द्रधनुष का नभ में रूप है बन जाना।।
सृष्टि में इन्द्रधनुष सबकों लगता प्यारा,
सबके मन भाता इसका प्यारा नजारा।
इन्द्रधनुष की नभ में छटा होती निराली,
बच्चें भी इन्द्रधनुष देख-देख बजाए ताली।
आन्नद के क्षण
मेरी उम्र हो गई अब पचपन,
याद मुझको है प्यारा बचपन।
बचपन के बड़े प्यारे दिन थें,
मुझको प्यारे बहुत लगते थें।।
हर पल थे आनन्द के क्षण,
नहीं था किसी के साथ रण।
बचपन में जो बच्चे थे या बूढ़े,
हम साथ खेलते बनकर बूढ़े।।
बचपन में था हर दिन अपना,
अपना नहीं था कोई सपना।
बचपन में रहते थे हर पल खुश,
प्यार से कहते थे सब लवकुश।
हर पल बचपन में था अपना दिन,
खुशी मिलती थी हमको भिन्न भिन्न।
अब कहां मिलते वो आनन्द के क्षण,
अब ढूंढते आनन्द के क्षण कण-कण।।
समय की गति
समय बड़ा बलवान समय की गति समझ भाई,
समझें ना समय की गति उनके जीवन में खाई।
समय की कर पहचान समय फिर लौट कर न आए,
तूं समय को मत खोना समय की चाल समझ भाई।।
जिंदगी में मुश्किल आती है और बस चली जाती है,
समय की गति के साथ चल तू हर दम करना ट्राई।
समय ना जीवन में रूकता समय के साथ रख समझ,
समय की गति के साथ आगे बढ़ 21वीं सदी भी छाई।।
तूं अपने कर्मों की बों दे फसल जीवन में तेरा नाम हो,
बन्दे समय के साथ चल तेरे जीवन का स्तर होगा हाई।
जो बन्दें समय के साथ चलते वहीं युगपुरुष कहलाएं,
बस सुबह-शाम तू चल कीर्ति जग में रहेगी तेरी छाई।।
बन्दें समय की गति पग-पग पर चलती रहती,
अपने जीवन में बना लें तू,सत् कर्मों की महती।
समय के साथ चलता वहीं सृष्टि में इतिहास रचता,
रैदास की समझ वाणी,जग में तेरे जाएंगे गीत गाई।।
विषय सत्य की पुकार
सत्य की पुकार जीवन में आगे बढ़,
आगे बढ़कर मंजिल की सीढ़ी चढ़।
बन्दें कहता जीवन में यह अंधकार,
सत्य पर चलकर होगी जय-जयकार।।
सत्य की डगर चल और आगे बढ़कर,
थाम लें तू डोर रहेंगी राह तेरी सजकर।
रैदास को थी जग में सत्य की पुकार,
धरा पर अमर हो गए रैदास सारे संसार।।
जीवन में रैदास चले थें सत्य की डगर,
अमर रैदास की कहानी हर गली नगर।
सत्य की पुकार जीवन होती जब जब,
सत् कर्मों की डगर चलता रहे तब-तब।।
बन्दें मन को कर लें जीवन में पावन,
सब ऋतुएं भी लगेगी तुझको सावन।
भीम ने भी सदा जाना सत्य की पुकार,
राह कठिन थी मगर जीत में बदली हार।।
खुशी की तलाश
खुशी की तलाश में कहा आ गए हम,
पत्नी से लड़ते-झगड़ते और पीते रम।
जग में खुशी की हम सब करते तलाश,
मां-बाप को भेजकर वृद्धाश्रम होते खुश।।
खुशी की तलाश रहती जग में सभी को,
तलाश कर घर में मिलेंगी खुशी तुमको।
तूं बन्दें मां बाप की कर लें जीवन में सेवा,
खुशी की तलाश पूरी होगी,मिलेगा मेवा।।
खुशी की तलाश में कहां जाते हो तुम,
दीन-दुखियों की सेवा कर खुशी लें चूम।
तूं सारी धरा पर सजा लें प्यार के कुसुम,
मन मन्दिर में मिलेगी चाहे दुनिया लें घूम।।
खुशी की तलाश करता है,जीवन में हरदम,
बन्दें हर पल सबके कष्टों पर लगा मरहम।
सबके मंगल की बात जीवन में करता चल,
खुशियों की तलाश पूरी होगी तेरी हर पल।।
जय जगन्नाथ
कर लों कर लों तुम जगन्नाथ की पूजा,
जगन्नाथ जैसा जग में नहीं कोई दूजा।
जगन्नाथ के सारे भारत में बड़े रहस्य,
वें देते ज्ञान सभी को रखना सामंजस्य।
सदा ही जग में होती उनकी जय-जय,
होती सभी पर उनकी कृपा मंगलमय।
सबके प्यारे जगन्नाथ के दर्शन मात्र से,
सभी बन्दों के सारे दुख कटें जीवन से।
प्यारे जगन्नाथ याद दिलाए श्री कृष्ण की,
सुभद्रा की इच्छा भाई बहन के प्यार की।
भारत में छाया प्यारा जगन्नाथ का नाम,
जगन्नाथ ही सबकें बनाते बिगड़े काम।
मेरे जगन्नाथ की धुन गाएं ये दुनिया सारी,
मेरे प्रभु सभी मानुष के कष्ट मिटाएं भारी।
जगन्नाथ की वाणी सारे भारत में निराली,
आशीर्वाद उनका जाएं नहीं कभी खाली।
साइबर ठग
साइबर ठग से रहना तुम बचकर,
काम करना तुम सदा सबसे हटकर।
इस सारे जहां में मिलेंगे साइबर ठग,
बचकर रहो तुम सब जहां में पग-पग।।
साइबर ठगों का अजब निराला ढंग,
सृष्टि में जान लो तुम सब उनके रंग।
साइबर ठगों की सोच जाल में फंसाना,
काम उनका सब को ठगकर पैसे कमाना।।
जाहिल क्या ज्ञानी भी फंसें उनके जाल,
किसी के भी जीवन में बन जाते काल।
जग में डाटा चुरा कर बन जाते विद्वान,
बातों में फंस जाते अच्छे-अच्छे इंसान।।
दूसरों को ठगना साइबर ठगों का काम,
बड़ी-बड़ी वेबसाइटों को कर देते जाम।
ऑनलाइन ठगना जग में उनका काम,
बगल में उनके छूरी मुख पर उनके राम।।
बैंक कर्मी बनकर पूछते आपका नाम,
बता दो भैया तुम हमको ओटीपी आम।
बता देते हैं कहने से ओटीपी जब सब,
भैया खाता कर देते खाली न जाने कब।।
अंजाने लिंक और वेबसाइट नही खोलना,
ज्ञानी बनकर नाता उनसे तुम सदा तोड़ना।
फर्जी केवाईसी के उनके खेल समझना,
भैया झांसें में नहीं उनके तुम उलझना।।
लाटरी की फोन से देते सबकों सूचना,
मत लालच में आकर उनके नहीं झूमना।
अगर तुमसे कभी हो जाएं साइबर ठगी,
सरकारी नंबर 1930 पर करना बंदगी।।
सृष्टि में छा रहा अब डिजिटल का ही युग,
जग में ज्ञानी बनकर तुम जीओ जुग जुग।
ज्ञानी बनकर जग में नाम अपना कमाओं,
जग में बन जाओ निपुण सभी कलाओं।।
मेरे शिव भोले
मेरे शिव भोले,
दिल मेरा डोले।
सृष्टि के स्वामी,
तुम अन्तर्यामी।।
तुम हो जटाधारी,
तुमसे दुनिया सारी।
माथे तिलक साजें,
हाथ में डमरू बाजे।।
गले में सर्पों की माला,
सर पर होता सर्प काला।
जग में प्यारे हो शिव मेरे,
जग में रूप निराले तेरे।।
तुमको पूजे जग में सारे,
लगाएं जग में सब तेरे नारे।
तुम ही हो मेरे कैलाश वासी,
मेरी काट दो यम की फांसी।।
बच्चें होते मन के सच्चें
(वात्सल्य रस)
बच्चेंं होते मन के सच्चें,
लगते बच्चें सबकों अच्छे।
भोली होती उनकी सूरत,
मन को भाती उनकी मूरत।।
बोली उनकी लगती प्यारी,
मात-पिता उन पर जाएं वारी।
जीद होती उनकी बड़ी भारी,
नहीं होते चुप बात रहती जारी।।
बच्चें होते सबके बड़े नटखट,
दौड़ लगाते सब बच्चें झटपट।
चेहरा उनका सबके मन भाए,
बच्चें हर पल नाचे और गाएं।।
मात-पिता की पीठ चढ़ जाएं,
बच्चों से ही घर में खुशियां आएं।
बच्चों के बिन घर लगता सूना,
जब आएं बच्चें खुशियां होती दूना।।
पावस
देखो पावस की आई है रूत सुहानी,
भैया पावस की होती अजब कहानी।
पावस माह हर मानुष के मन भाता,
इसकी कहानी,दादी से सुनो जुबानी।।
ज्येष्ठ मास की होती बड़ी गर्मी भारी,
जीवन दुर्लभ होता चाहें नर और नारी।
पावस का होता है अजब खेल निराला,
कभी देती दुःख और कभी लगती प्यारी।।
ज्येष्ठ की दोपहरी में घुमड़ घुमड़ कर,
बादल आते हैं हवा भी करती सर-सर।
काली-काली पावस भी बरसाएं बरखा,
प्यारी पावस में मेंढ़क भी बोले टर-टर।।
कभी सूरज उगले आग कभी छाएं बादल,
बादल ऐसे जैसे गोरी की आंखों में काजल।
काले-काले बादल भी बरसाएं छम-छम जल,
पावस करती जैसे गोरी की छम-छम पायल।।
वो लड़की मुझे बहुत याद आती है
वो लड़की मुझे बहुत याद आती है,
जाने क्यों उसकी याद मुझे आती है।
वो उसका प्यारा मासूम सा चेहरा,
मैं उसके चेहरे में रहता हूं बिखरा,
दिल से उसकी याद नहीं जाती है।
जब हम पहली बार मिलें थें,
तेरे मेरे चेहरे फूल सा खिले थे,
मेरी आंखों में सूरत तेरी आती है।
मुझको याद है तेरी वो बातें,
बैचेन करती आज भी रातें,
आज भी तेरी वो बातें भाती है।
वो तेरा चेहरा और तेरी मुस्कान,
दिल में तेरे एक अजीब तुफान,
नसीब कैसा नज़रें तेरी कहर ढाती है।
मैं कैसे बताऊं हाले दिल अपना,
अब बस तुम मेरे लिए रह गई सपना,
आज भी याद तेरी मुझको सताती है।
पिकनिक
दादा-दादी बात मेरी सुनो,
सपने मेरे प्यारे तुम बुनो।
मेरे शिशक ने मुझे बताया,
बच्चों स्कूल छुट्टी के बाद।।
सब खुशी से अपनों के साथ,
घर से जाना पिकनिक पर।
अब मेरे दादा-दादी बताओ,
पिकनिक में क्या-क्या होता है।।
दादा-दादी पोते से अपने बोलें,
आओ पिकनिक के राज खोले।
दोस्तों संग बहार घूमने सब जातें,
प्रकृति के संग खूब सब मस्ती पाते।।
पिकनिक पर आंनद बहुत आता है,
पिकनिक सबके मन को भाता है।
मेरे प्यारे बेटा बात हमारी तुम सुनो,
अपने मात-पिता के संग जगह चुनो।।
प्यारी जगह चुनकर हमें तुम बताओ,
पिकनिक पर जाने की खुशी मनाओ।
हम सबके संग पिकनिक पर जाएंगे,
पिकनिक पर सब चाट-पकौड़ी खाएंगे।।
जगत कल्याण
जगत कल्याण की चलाएं रीत,
जगत कल्याण में छिपी है जीत।
सबके मंगल की कर लें तू बात,
सब खुशियां होगी बन्दें तेरे हाथ।।
बन्दें सारे जग का कर कल्याण,
जब तक तन में सदा रहेंगे प्राण।
सूरज,चांद,सितारे करते हैं मंगल,
ये सबकी करते हैं मंगल की पहल।।
धरा भी कहा हक अपना मांगती,
सृष्टि सबके मंगल की करें आरती।
सब मिल कर धरा को बनाओं स्वर्ग,
तुम सदा मुख से मीठे निकालो स्वर।।
विचारों का ही सारे जग में सब खेल,
तेरी सोच से ही होगा सबके साथ मेल।
सारे जग का कांरवा चलेगा तेरे संग में,
विश्व बंधुत्व की भावना रख सदा जग में।।
तेरी याद मैया मुझको बहुत ही आती
मेरी खातिर मैया न जाने तू कहां पर,
तूं चली गई किस -किस के दर पर,
तेरी याद मैया मुझको बहुत ही आती।
मैं मैया तेरे गर्भ से जब बहार आया,
सबसे पहले तुझको चेहरा मेरा भाया,
मेरी मां दिल से याद तेरी नहीं जाती।
तू हाथों से अपने मुझको खाना खिलाती,
अपनी पलकें राहों में मेरी तू सदा बिछाती,
न आएं थी नींद मुझे लोरी तू सदा सुनाती।
मेरी मैया जब मैं नन्हें नन्हें पेरों से चलता,
सदा ही पल-पल मैं तेरे नैनों में क्यों बसता,
मैया तू सदा मेरे दिल को बहुत ही भाती।
इस सारी धरा पर मां तेरे जैसा नहीं कोई,
छूकर किस्मत तूने जगाई जो पहले थी सोई,
मां सदा ही तू खुशियों के गीत मेरे संग गाती।
प्यारी मैया मैं मांगू रब से हर पल यही दुआ,
गर मैं फिर धरा जन्म लूं नहीं तुमसे रहूं जुदा,
सदा ही अपना प्यार तू मुझ पर रहें लुटाती।
सदा करें योग
आओ! बन्दें सब सदा करें योग,
सदा योग से रहे हम सब निरोग।
योग ही है सबके जीवन का सार,
बन्दें योग को नहीं माने कभी भार,
योग को सब मिलकर करें सब लोग।
बन्दें योग को करती ये दुनिया सारी,
योग की महिमा भी गाए दुनिया भारी,
बन्दें कर लें सदा समय का सदुपयोग।
योग को करते जो तन मन से रोज,
चेहरे पर उनके सदा ही रहता ओज,
जो करते योग उनको नहीं रहता रोग।
ऋषि मुनियों ने जानी योग की महिमा,
योग का सारे जग में निराला करिश्मा,
तूं बन्दें समझ लें जीवन का कर्मयोग।
आओ!चलाएं हम योग की ऐसी रीत,
सृष्टि में बन जाएं हम सब सबके मीत,
बन्दें मत कर जीवन में अपने कोई ढोंग।
योग ही है बन्दें सबके जीवन का भाग,
बन्दें योग की दिल में जला लें तू आग,
योग का कर लें अपने जीवन में भोग।
मात-पिता हैं ईश्वरतुल्य
धरा पर मात-पिता है ईश्वर तुल्य,
दोनों का जग में नहीं कोई मूल्य।
मात-पिता से सबका जीवन सारा,
सदा मात-पिता बच्चों से ही हारा।।
मात-पिता से बच्चों की सुबह-शाम,
मात-पिता से ही संवारते सारे काम।
मात-पिता सिखाते कैसे जीया जाएं,
मात-पिता बिना नहीं जीवन भाएं।।
बच्चों के जीवन की जीत और हार,
मात-पिता ही उठाते बच्चों का भार।
माता-पिता बिना जग में जीवन नहीं,
सच कहती रविदास की वाणी सही।।
करें जगत सतगुरू रविदास की वाणी,
कर लें मां-बाप की सेवा सुन रे प्राणी।
बन्दें मां बाप से बढ़कर नहीं कोई दूजा,
मात-पिता की सदा कर जीवन में पूजा।।
मात-पिता के चरणों में कर लें वंदन,
उनके चरणों की धूल से कर लें चंदन।
मात-पिता से जग में बढ़कर नहीं गुरु,
उनको करके वंदन कर सब काम शुरू।।
पापा की पहचान
मेरे पापा की पहचान,
मुझे याद उनकी शान।
वें विचारों के धनी थे,
बोलते जग में हनी थे।।
वें सत् की राह चलते थे,
झूठ कभी नहीं बोलते थे।
वें सबका रखते थे ध्यान,
वें हर जगह देते थे ज्ञान।।
वें सबका मंगल करतें थे,
वें नहीं किसी को ठगते थे।
सदा कर्म ही उनकी पूजा था,
उन्हें और नहीं काम दूजा था।।
सत्य अहिंसा उनकी थी डगर,
झूठ और पाप से डरते थे मगर।
मेहनत करना उनका था काम,
सदा जग गाएगा उनका नाम।।
आत्मनियंत्रण
बन्दें कर लें कर लें सदा आत्मनियंत्रण,
आत्मनियंत्रण करने से पाएगा आकर्षण।
तू आत्मनियंत्रण से पाएगा सुख और चैन,
बन्दें सृष्टि में खुशियां मिलेगी दिन और रैन।।
जग में सत्यमेव की डगर पर सदा चल बन्दें,
सृष्टि भी तेरे कर्मों से ही करेगी तुझको वन्दें।
आत्मनियन्त्रण का समझ लें जीवन में सार,
आत्मनियंत्रण से जग में नहीं होगी तेरी हार।।
काम,क्रोध,लोभ,पर नियंत्रण करती आत्मा,
सत्य अहिंसा की डगर चल सदा तुम भ्राता।
प्यारे आत्मनियंत्रण जग में जीवन की कुंजी,
सृष्टि में मानुष की होती आत्मनियंत्रण पूंजी।।
आत्मनियंत्रण से संवार लें जीवन के काज,
इस सृष्टि में भरें पड़े हैं जीवन के गहरे राज।
वीरों की भूमि के खून की तुझमें छिपी रवानी,
आत्मनियंत्रण से जीवन की लिख दे कहानी।।
मेरे पापा मेरी पहचान
जग में मेरे पापा मेरी पहचान,
पापा मुझ पर रहते मेहरबान।
पापा से ही मेरी जग में शान है,
मेरे पापा ही सदा मेरी आन है।।
पापा के नाम से पहचानते मुझे,
पापा से ही मेरे सारे काम सुलझें।
मेरे पापा ही मेरे जीवन का सार है,
मेरे पापा से ही जीवन की धार है।।
आज मुझमें छिपे हैं जो भी संस्कार,
मुझमें पापा के ही गीतों की झंकार।
जग के सुख-दुख में कैसे जीया जाएं,
पापा मेरे जीवन में सब खुशियां लाएं।।
सत्य अहिंसा की राह चलना सिखाया,
मुझे पापा ने कर्म की डगर ही दिखाया।
पापा ने ही सिखाएं सब जीवन के ढंग,
प्यारे सृष्टि की डगर चलना सत् के संग।।
आंसू
आंसू जब आंखों से आते हैं,
सभी जग में अपने भाते हैं।
आंखें सबकी कुछ बोलती है,
यह राज बड़े-बड़े खोलती है।।
आंखें भर आती है आंसू से,
जब प्यार करें अपने जानूं से।
आंखों से निकलते जब आंसू,
मन कहां रहता उस वक्त काबू।।
प्यारे यें आंखें तेरी गोल-गोल,
सबके जीवन में यह अनमोल।
बिन आंखों के जीना है बेकार,
आंखों बिना सब नर है लाचार।।
गैरों के आगे आंसू मत बहाना,
श्रेष्ठ वक्त के लिए आंसू बचाना।
बन्दें आंसू हैं जीवन का खजाना,
जमाना बुरा है इन्हें मत गंवाना।।
महाराणा प्रताप
भारत भूमि पर जन्मा एक ऐसा लाल,
भारत में दुश्मन का बनकर आया काल
भारत में अपने कर्मों की छोड़ दी छाप,
उसका नाम है प्यारा महाराणा प्रताप।।
जब-जब, तुम इस धरा पर चलते थें,
दुश्मन अपने हाथ आगे तेरे मलते थे।
युगों-युगों तक नाम रहेगा जग में तेरा,
नाम को तेरे याद करेगा ये भारत मेरा।।
जान अपनी देकर भारत की लाज बचाई,
अपने कर्मों से उसने देश की कौम जगाई।
प्यारे तेरा लहूं आया भारत देश के काम,
देश की सेवा करके कर गया देश में नाम।।
तुम खुद मिट गए भारत के संवारें काज,
एक समय था जब बचाई भारत की लाज।
इस देश की खातिर जंगलों में खाया खाना,
त्याग,तपस्या,पराक्रमी था,भारत का राणा।।
बेटी झूठें वादों में मत छलना
1 .सोच
क्या अच्छा क्या बुरा,यह सोच अपना,
सदा सोचकर ही कर,तू जग में चलना।
कुछ झूठे लोग देते झूठे प्यार का झांसा,
पास ना उनके कुछ,चमड़ी उनकी खासा।।
2.समझकर
सोच समझ कर,उन पर विश्वास कर प्यारी,
नहीं तो सपने चकनाचूर हो जाएंगे तेरे भारी।
तेरी समझ में छिपा बहना जीवन का सार,
गर नासमझी की तूने,बेड़ा नहीं होगा पार।।
3 .कर
बहना करने में ही होगी,तेरी जीत और हार,
मत आएं बहकावें,तू बन सावित्री जैसी नार।
अपनी करनी से जग में लिख दे,अपना नाम,
फूलें,अनुसूइया,रमाबाई जैसे ही हो तेरे काम।।
4.विश्वास
अच्छे घर की बेटी को तुच्छ नर फंसाते जाल में,
मत करना उन पर विश्वास,न फंसना उनकी चाल में।
झूठे वादों का लालच देकर,बहकावे अपनी बात में,
बेटी नहीं करना विश्वास,न जाने रहते किस पात में।।
कलयुग की नारी
ये कलयुग की नारी,
आज सब पर भारी।
पर्दा नहीं रहा है कोई
अब तो लाजशर्म सोई।।
पहले नर को माने थी रब,
अब वह रब बनी स्वयं सब।
अपनी नारी करती मनमर्जी,
नारी पहले सुनती थी अर्जी।।
अब नारी का मन नहीं पावन,
नारी के रूप अब हुए बावन।
अब भैया नारी से लगता डर,
कुछ बनें मसान है अब घर।।
अब लाजशर्म सब कुछ वारा,
नारी मन ऐसा नदियां की धारा।
नारी पहले थी करूणा की मूर्ति,
अब नहीं रही है नारी में सूक्ति।।
खुद को कर फना
प्यार ही बन्दें जीवन का सार,
तू सबको गले से लगा लें यार।
सबको जीवन में कर लें प्यार,
प्यार बिना सबका जीवन भार।।
बन्दें तेरा जीवन नदियां की धार,
सबकी सांसें जीवन में दिन चार।
जीवन सबका इंद्रधनुष जैसा रंग,
प्यार बिना जीवन में हो जाती जंग।।
बन्दें अपने जीवन में भर लें सात रंग,
ये सारी सृष्टि भी चलेगी बन्दें तेरे संग।
अपने हो या पराए सबको कर ले प्यार,
बन्दें प्यार से ही जीतेगा तू अपनी हार।।
बन्दें सात रंगों की है यह सारी दुनिया,
कर भला पास होगी तेरे सारी खुशियां।।
प्राणी समझकर इंद्रधनुष रंग कैसे बना,
अपनी मिटा दे हस्ती खुद को कर फना।।
बन्दें प्यार बिना धरा पर जीवन है कहां,
सृष्टि में हर पल प्यार से ही रहना तू यहां।
बन्दें सृष्टि में सबका मीत बन जा तू यहां,
याद रख तेरा अपना होगा ये सारा जहां।।
बाल श्रम
एक बहुत छोटी प्यारी लड़की है,
दूसरी को बाहों में लेती लड़की है।
लड़की कहती बहना मै तेरे साथ,
किस्मत लिखेंगे हम अपने हाथ।।
प्यारी बहना हाथ में मेरे है कलम,
सदा ही कर्म करना है हमारा धर्म।
आज बहना लेते हम दोनों कसम,
हम कर्म से जीत के जाएंगे संगम।।
मेरी बहना ये सारी सृष्टि है नवरंगी,
अपने प्यारे जीवन में भरेंगे सतरंगी।
बहना जगत में सात रंगों का ही खेल,
आपस में नही रूठेंगे सदा करेंगे मेल।।
अपने जीवन में सीखेंगे कैसे जीना है,
हमें दुःखों का कड़वा सच भी पीना है।
हम अपने जीवन में ऐसी बनाएंगे पेंटिंग,
हम बाल श्रम की नहीं करेंगे कभी सेटिंग।।
ग्रीष्म की प्रचंडता
धरा पर गर्मी की प्रचंडता,
तुम गर्मी से बचकर रहना।
गर्मी धरा पर है बहुत भारी,
गर्मी से दुखी नर और नारी।।
जहां भी देखो धरा पर,
अब जग में गर्मी भारी।
गर्मी से कैसे पाए निजात,
यही सब सोचना सबको।।
धरा पर बरस रही आग,
कैसे लें हम खेलों में भाग।
जहां भी देखो गर्मी प्यारे,
गर्मी से तरस रहें नर सारे।।
गर्मी से मचा हाहाकार प्यारे,
नहीं बचा गर्मी से कोई प्यारे।
प्यारे कर बचाव अपना गर्मी से,
सदा घर में रहना तुम नर्मी से।।
मोर का चंदा
राधा के हाथ में प्यारा चंदा,
राधा के साथ में प्यारे नन्दा।
राधा पूछे प्यारे कान्हा से,
मेरे कान्हा देखो ध्यान से।।
राधा कहती क्या है चन्दा में,
कान्हा बताएं सार है संज्ञा में।
राधा चन्दा के जैसा नहीं कोई,
हर पल यहां दुनिया रहे सोई।।
नीले रंग में छिपी होती शान्ति,
शांति ही जीवन में लाती क्रांति।
मेरा और मोर का प्यारा चंदा,
कहता चन्दा कर्म मत कर गंदा।।
राधा चन्दें को देख मेरी नज़र से,
नजर मत हटा चन्दा के शहर से।
इन्द्रधनुष के रंग समाएं सारे जग,
तुम खो नहीं जाएं इस जग के रंग।।
कान्हा को भाएं प्यारा नीला रंग
कान्हा को भाएं प्यारा नीला रंग,
मेरे कान्हा रहते नीले रंग के संग।
राधा सारा जग ही जग में नीला,
यें सब जग में प्रभु की ही लीला।।
राधा कहती क्यों भाएं नीला रंग,
कान्हा कहें इसमें समाएं सब जग।।
राधा नीले रंग में छिपा जीवन सार,
कोई बिरला ही समझे नर और नार।
राधा नील गगन से मिलती खुशियां,
राधा नील गगन से ही सारी दुनियां।।
कान्हा के सर पर रहता मोर मुकुट,
राधा के मन भाए कान्हा का त्रिकुट।
राधा देखेंगी जब रह जाओगी दंग,
आओ चांद की रौशनी में देखें ये रंग।
नीला आकाश सबको लगता प्यारा,
नीला मोर का चंदा नीला जग सारा।।
प्रदूषण से हानि
आज बताएं हम प्रदूषण से तुमको हानि,
आज मानव ने ही लिखी इसकी कहानी।
अपने विकास में नर सब कुछ भूल गया,
जीव-जंतुओं पर भी नहीं कर रहा दया,
सबके मंगल की बात कर लें तू जानी।
बन्दें सुन लें प्रदूषण से होती हानि भारी,
प्राणी समझ लें तू विद्वानों की बातें सारी,
प्राणियों पर कर लें तू अपनी मेहरबानी।
प्रदूषण से मानव की सांसों को भारी खतरा,
दुष्प्रभाव से बेकार हो रहा है खून का कतरा,
समझ क्या होती खून की कीमत राजा जानी।
प्रदूषण बन गया जीवन का बड़ा दुश्मन,
सच कहते ऋषि-मुनि,कवि और गुरूजन
हे!नर जग में क्यों करता अपनी मनमानी।
प्राणी प्रदूषण धीरे-धीरे हवा में फ़ैल रहा,
मानव खेत-खलिहानों में जहर घोल रहा,
सृष्टि में अलख जगा दे मत कर जुबानी।
मानव ने लगाए धरा पर जो उद्योग धन्धें,
गन्दा पानी,कचरा,धुआं जहर बना बन्दें,
प्रदूषण मुक्त धरा बने बन सच्चा मर्दानी।
धरा पर प्राणी की सांसें हो रही अब कम,
प्रदूषण हो कैसे कम ऐसा करो तुम श्रम,
प्रदूषण कम हो ऐसी लाओ तुम क्रांति।
प्राणी ने दूषित कर दी अब सारी नदियां,
अब कम होती जा रही सांसों की रोटियां,
धरा से प्रदूषण को मिटा कर बन जा ज्ञानी।
सृष्टि के बनाए हुए प्यारे उच्चे पहाड़ टीलें,
तू प्लास्टिक कचरे से दूषित कर रहा झीलें,
रीत कुछ ऐसी चला बन जाएं तेरी कहानी।
जल,वायु,मृदा सब में फैल गया प्रदूषण,
वृक्ष लगाओ,वृक्ष धरा के सच्चे आभूषण,
तू धरा का चुका कर भार बन जा दानी।
गंगे माता
हे गंगे माता सब जन तुझको धाता,
सब जन की प्यारी तुम ही हो माता।
मिट जाएं जन्मों-जन्मों के पाप सारे,
जो तेरी शरण में पापी भी आता।
जीवन में दर्शन तेरे हो जाते जिसको,
वे नर धरा पर मोक्ष, मुक्ति को पाता।
रहती थी सदा रविदास की कटौती में,
बताएं तुम्हें क्यों रविदास हर पल भाता।
मैया सबके मन को कर देती हो पावन
पावन मन पास रहकर सब सुख पाता।
अमर रहेंगी जग में रविदास की कहानी,
मैया जब तक रहेंगी तू जग में गंगे माता।
जग में भागीरथ के पुरखे भी तर गए,
तेरे गुण हर ऋषि-मुनि और जन गाता।
मैया पवन हो गई तेरे जल से यह धरा,
जग में गाएं गुण वहीं जो नर हो ज्ञाता।
मैया जग में देवी नदी है नाम तेरा,
युगों-युगों से बनी तुम सिर का छाता।
मैया कल-कल करती रहती हो तुम सदा,
शरण तेरी वहीं आता जो जग में हो ताता।
मानव का अंतिम लक्ष्य आनंद
बन्दें सत्य की राह चल जग में,
तू कांटें मत बो दूसरो के पग में।
मानव का अंतिम लक्ष्य है आनंद,
क्यों नहीं करता किसी को पसन्द।
ज्ञान होगा जब तुझको परमानंद,
जीवन में मिलेगा तब ही आनन्द।
तू इस रंजो गम के मेले में मत खो जाना,
किसी को जाना यहां से किसी को आना।
करनी बन्दें ऐसी कर चल यहां पर,
नाम होगा तेरा इस सृष्टि में उम्र भर।
मानव का अंतिम लक्ष्य है आनंद,
बन्दें मत कर जाति-पाति को पसंद।
कोई यहां क्या कर रहा है जग में,
कदम देख क्या तेरे सही पड़े पग में।
ना कोई लाया यहां ना कोई ले जाएगा,
जग तेरे कर्म ही एक दिन यहां गाएगा।
पल-पल जैसे मुट्ठी से रेत फिसला जाए,
आंनद यही,तू सबका मंगल करता जाए।
तू समझ मानव का अंतिम लक्ष्य आनंद,
समझ रब के सब बन्दें राह होगी बुलन्द।
यहां माने तो सब जग में बन्दें अनेक,
मान लो तो अपने जग में सब है एक।
“खुराना” भी जग में ढूंढ रहा था आनंद,
मिटाया खुद को महसूस हो रहा आनंद।
प्रदूषण से हानि
आज बताएं हम प्रदूषण से तुमको हानि,
आज मानव ने ही लिखी इसकी कहानी।
अपने विकास में नर सब कुछ भूल गया,
जीव-जंतुओं पर भी नहीं कर रहा दया,
सबके मंगल की बात कर लें तू जानी।
बन्दें सुन लें प्रदूषण से होती हानि भारी,
प्राणी समझ लें तू विद्वानों की बातें सारी,
प्राणियों पर कर लें तू अपनी मेहरबानी।
प्रदूषण से मानव की सांसों को भारी खतरा,
दुष्प्रभाव से बेकार हो रहा है खून का कतरा,
समझ क्या होती खून की कीमत राजा जानी।
प्रदूषण बन गया जीवन का बड़ा दुश्मन,
सच कहते ऋषि-मुनि,कवि और गुरूजन
हे!नर जग में क्यों करता अपनी मनमानी।
प्राणी प्रदूषण धीरे-धीरे हवा में फ़ैल रहा,
मानव खेत-खलिहानों में जहर घोल रहा,
सृष्टि में अलख जगा दे मत कर जुबानी।
मानव ने लगाए धरा पर जो उद्योग धन्धें,
गन्दा पानी,कचरा,धुआं जहर बना बन्दें,
प्रदूषण मुक्त धरा बने बन सच्चा मर्दानी।
धरा पर प्राणी की सांसें हो रही अब कम,
प्रदूषण हो कैसे कम ऐसा करो तुम श्रम,
प्रदूषण कम हो ऐसी लाओ तुम क्रांति।
प्राणी ने दूषित कर दी अब सारी नदियां,
अब कम होती जा रही सांसों की रोटियां,
धरा से प्रदूषण को मिटा कर बन जा ज्ञानी।
सृष्टि के बनाए हुए प्यारे उच्चे पहाड़ टीलें,
तू प्लास्टिक कचरे से दूषित कर रहा झीलें,
रीत कुछ ऐसी चला बन जाएं तेरी कहानी।
जल,वायु,मृदा सब में फैल गया प्रदूषण,
वृक्ष लगाओ,वृक्ष धरा के सच्चे आभूषण,
तू धरा का चुका कर भार बन जा दानी।
सूरज की किरण
सूरज की किरण मन में लाएं उमंग,
यह सब के दिलों में भर देती तरंग।
सूरज की किरणें कहती मानुष से,
मंजिल पाना सदा अपनी लगन से।।
मानुष लाख आएं तेरी राहों में कांटे,
सूक्ष्म राहों में सदा सत् को ही छांटे।
सूरज किरणें सृष्टि में रोज निकलती,
प्रातः वेला में खुशियां रोज बिखरती।।
सूरज की किरणें कहें मुझको लें चुम,
सृष्टि में कुछ ऐसा कर मच जाए धूम।
जब सूरज की किरणें धरा पर आती,
ये सब नर और नारी के मन को भाती।।
बन्दें सूरज की ये किरणें सत् की डगर,
लाख मुश्किल आएं मत छोड़ना मगर।
बन्दें समझ सूरज की किरणों का सार,
मुश्किल डगर में कभी नहीं मानना हार।।
रात के घनेरे अंधेरों में सपने मत बुनना,
बन्दें सूरज की किरणों में खुशियां चुनना।
सूरज की किरणें जीवन में लाएं उजाला,
बन्दें तू जीवन में ओढ़ना सत् का दुसाला।।
करूणामयी प्रकृति
करुणामयी प्रकृति कह रही है सबको,
धरा पर पेड़ लगाकर खुश रखो मुझको।
सुंदर धरा के ये सारे ऊंचे पहाड़ टीले,
सदा सबको कहते खुशी सबको मिले।।
करुणमयी प्रकृति कहती रहती मानव को,
बन्दें मत कर वृक्षों की कटान के तांडव को।
बन्दें तेरा वजूद छिपा मेरी ही देखभाल में,
नर समृद्धि कर पर मुझे मत कर बदहाल में।।
हे मानव धरा पर मेरा सब कुछ है तेरे लिए,
चाह बस मेरी यही सदा तू खुशी से जीएं।
समझ कर मेरी खुशी में तेरी भी खुशी है,
मेरे वजूद मिटा कर क्यों करता खुद्खुशी है।।
सच में समझा रही हूं मैं करूणामयी प्रकृति,
5 जून को वृक्ष लगाने की जग में करें जाग्रति।
हो बंदे वृक्ष लगाने की बन जाए तेरी संस्कृति,
वृक्ष लगाने के पुण्य कर्म यज्ञ में दे दें तू आहुति।।
हे मानुष करुणामयी प्रकृति पर रही पुकार है,
मुझको बचाने की क्यों नहीं भरता हुंकार है।
बंदे नहीं बन तू निष्ठुर सदा मुझको तू प्यारा है,
गाएगा गुण मेरा याद करेगा तुझे जग सारा है।।
गर्मी में बारिश की बूंदें
गर्मी का मौसम बारिश की बूंदें,
कहती बारिश कर ले मन पावन।
गर्मी का मौसम लगें प्यारा-प्यारा,
मन भाएं बारिश की बूंदों की धारा ।।
सारे तन में खून का होता दौरा,
गर्मी में नहाए काला हो या गौरा।
गर्मी में बारिश की बूंदें लगें प्यारी,
बारिश में सब खुश रहते नर-नारी।।
गर्मी और ऊपर से बारिश की बूंदें,
बच्चें खेलते आंखें खोलें और मूंदें।
गर्मी के मौसम में बारिश की फुहारें,
साजन को सजनी का प्यार पुकारे।।
स्वरचित और मौलिक कविता
जल
जल बिना जीवन लाचार,
जल ही जीवन का आधार।
तुम जल का समझ लो सार,
तुम जल को मत करो बेकार।।
जल बिना धरा पर जीना दुश्वार,
जल जीव का करता उद्धार।
जल की कीमत समझ लें भाई,
भाई क्यो तेरी आत्मा सोई।।
जल बिना मानव जीवित कहां,
तू जल की कीमत समझ यहां।
मानव शरीर जल से ही बना है,
जल से सृष्टि में वृक्षों का तना है।।
जल जीवन को करता आबाद,
मानुष कर रहा जल को बर्बाद।
जीवन में लालची मत बन बन्दें,
तू दोनों पहर जल को कर वन्दे।।
अपनेपन की रीत
तेरे दिल में होगी जब अपनेपन की रीत,
मानुष तुझसे जग में करेंगे सब ही प्रीत।
बन्दें कभी नहीं करो तुम किसी से बैर,
सृष्टि में मत मानों तुम किसी को गैर।।
धरा पर सबसे मेल रख तू बन्दें,
सदा सबकों करता चल तू वन्दे।
अपने पन से सदा होगी तेरी जीत,
अपने पन से सब बन जाएंगे मीत।।
अपनेपन की राह सदा चलता चल,
जीवन की खुशियां मिलेगी हर पल।
तू सृष्टि में सबके मंगल की बात कर,
याद करेगा जहां तुझको जीवन भर।।
मैया तेरी महिमा
मैया हाथों में तेरे माला,
गोदी में तेरी सुंदर बाला।
मैया तू देती सबको ज्ञान,
मैया तू ही जग में महान।।
सर पर तेरे मुकुट साजे,
चारों ओर तेरी धून बाजें।
मैया कानों में तेरे झुमकी,
सुर-ताल में लगाते डुबकी।।
मैया तू ही ज्ञान की देवी,
ज्ञान से अपने करती सेवी।
मैया श्वेत वस्त्र धारण करती,
तुझमें ज्ञान की गंगा बहती।।
मन में ज्ञान की ज्योति जलाती,
तू ही मैया सत की राह चलती।
मैया सबको देख तू एक नजर,
मैया तेरी महिमा जग में अमर।।
कमजोर होते जा रहे कन्धे
तेरी नज़र में तुम सा बड़ा नहीं कोई,
शिष्टता भी ना जानें तेरी आत्मा सोई,
मानुष तेरे कमजोर क्यों हो रहे कंधें।
बन्दें चकाचौंध के इस शहर में खो रहा,
जग में वैमनस्य का बन्दें तू बीज बो रहा,
तू अपने जैसा किसी को नहीं माने बन्दें।
मां-बाप को अपने कहता नहीं अपना,
पत्नी और बच्चे ही रह गए तेरा सपना,
अब तेरे क्यों होते जा रहे हैं अजीब धन्दें।
बन्दें भूल गया तू,ऋषि-मुनियों की वाणी,
कहें कबीर रैदास की वाणी,बन जा प्राणी,
मानुष फिर भी काम क्यों कर रहा है गन्दें।
नारियों को शिक्षा का अधिकार
प्राचीन काल में नारी को कहां पढ़ने देते,
उनको गर्भ में अपने ही,तुच्छ नर मार देते।
गर्भ से पैदा होती,जब अपने देश में नारी,
उसको तब भी मारने की भूल करते भारी।।
नारी शिक्षा का कोई नहीं था देश में स्कूल,
देश में नारियों को पढ़ाने का नहीं था रसूल।
देश में नारियों को कहां था पढ़ने का अधिकार,
जो बेटियों को पढ़ाते ,उनका करते थे बहिष्कार।।
जैसे ही भारत देश अंग्रेज से आजाद हुआ,
मेरे संविधान में नारियों का भी सम्मान हुआ।
जब से भारत देश का संविधान निर्मित हुआ,
तब से नर और नारी, शिक्षा पाकर गर्वित हुआ।।
आजादी से लेकर आज तक,नारी गगन चूम रही,
नारी भी अपने अधिकारों के संग सदा खड़ी रही।
अब कुछ देव मानव समझ रहें,नारियों की बात,
शिक्षा नारी का गहना,अब देते नारियों का साथ।।
तुच्छ नर और नारी बन बैठे,सबसे बड़ा भगवान,
मानवता को छोड़कर,नहीं मानें सृष्टि का विधान।
अब कुछ नर और नारी गर्भ में मार रहे बेटियों को,
ज़ालिम धर्म की आड़ में सेक रहे अपनी रोटियों को।।
नारी क्या यहां तो,पुरूषों को भी नहीं था अधिकार,
देकर शिक्षा के अधिकार,भीम बन गया शिल्पकार।
संविधान से ही नारियों को मिला शिक्षा का अधिकार,
ज़ालिम नर कर रहे,अब अच्छे संविधान का बहिष्कार।।
तम्बाकू निषेध/नशें का जहर
जीवन में हर दिन मौका है,
तम्बाकू हर पल धोखा है।
छोड़ दे तू यह नशा खोरी,
मत कर तू छीना-जोरी।।
बन्दें नशा नाश की जड़,
इस कुसंग में ना तू पड़।
तू तम्बाकू छोड़ दें प्यारे,
जग में बन जाएंगे सारे।।
नशा जीवन का जंजाल,
नशा मुक्ति की बन मशाल।
नशा कैंसर,हृदय का कारण,
रविदास की वाणी कर धारण।।
तम्बाकू से जीवन बचा अपना,
सच में ही पूरा होगा तेरा सपना।
मेरे देश फैल रहा नशें का जहर,
जहर देश में अपने ढा रहा कहर।।
यह विश्व तम्बाकू निषेध दिवस प्यारा,
सपना मेरा,नशें को छोड़ दें जग सारा।
“खुराना” बैमोल शब्दों की कर तू कविताई,
पढ़ें कविता तेरी,नशें को छोड़ दें सब भाई।।
सावन अधूरा
आओ हम साथ दोनों झूला झूले,
तू पास मेरे हम खुशियों से फूलें।
मुझको साथ तेरा लगता प्यारा,
तुम मेरे दिल की नदियां के धारा।।
अपना सब कुछ मैंने तुम पर वारा,
सदा मेरी आंखों के तुम ही हो तारा।
सावन अधूरा तुझ बिन लगता मेरा,
पल-पल भाएं मुझको चेहरा तेरा।।
आओ गाएं हम दोनों सावन के गीत,
सदा रहें हम दोनों एक दूजे के मीत।
साजन मेरे तुम ही हो खुशियां मेरी,
मांगू दुआ मैं रब से रहूं सदा ही तेरी।।
क्या रखा है ज्यादा समझदारी में
सच को सच कहने हिम्मत नहीं,
सब कमाया तेरा रह जाना यहीं,
बन्दे क्या रखा है तेरी समझदारी में।
बन्दे मानव-मानव में करता तू भेद,
हर पल गलती करता मानें ना खेद,
झूठ-फरेब बोलें तू दुनियादारी में।
जात-पात की बेड़ी में क्यों भरमाया,
तू रब के बन्दों को क्यों माने पराया,
क्या रखा है तेरी झूठी परोपकारी में।
जग में सब बने एक चाम के बन्दे,
इस सृष्टि में सब एक ही रब के बन्दे,
मंगल होगा तेरा सबकी हितकारी में।
इंसानियत से बढकर धर्म नहीं कोई,
इंसानियत को समझ,मानवता क्यों सोई,
अर्थ समझ क्या रखा है झूठी सरदारी में।
छोड़ जगत तुझे एक दिन जग से जाना,
मेला यहां किसी का जाना और आना,
फिर क्या रखा है तेरी ऐसी मक्कारी में।
खाली हाथों से ही इस जग में तू आया,
इस जग से तुझे खाली हाथों ही जाना,
फिर ऐसा क्या रखा है इस अंहकारी में।
मानुष-मानुष में प्यार नहीं जगाएं,
जग में कैसी तेरी रचना की कलाएं,
“खुराना” क्या रखा है तेरी कवितायी में।
अच्छे दिन कब आएंगे/ तब ही अच्छे दिन आएंगे
मात-पिता का मान लें कहना,
सदा ही स्कूल में तुझको जाना।
स्कूल ही खुशियों का तेरे द्वार,
स्कूल से ही सब खुशियां पाएंगे।
तू पढ़ लिखकर बन विद्वान,
तू ना बन बन्दें जग में नादान।
समझ कर बन्दें जग में तेरे,
तब ही अच्छे दिन आएंगे।।
तुम सबसे मेल रखना बन्दें,
कुसंग में नहीं पड़,काम है गन्दे।
रंक हो राजा सब को दे तू कंधे,
तब ही सब तेरे मीत बन जाएंगे।।
तू जात-पात का तोड़ दे बंधन,
सब जीव है एक बाग के चंदन।
दुआ कर,सबके घर खुशियां बरसे,
तब ही सब खुशियों के गीत गाएंगे।।
मातृभूमि का सम्मान
तन मन और धन से कर ले तू इसकी सेवा,
इसी जननी माता से ही मिला सदा तुझे मेवा।
बन्दें!कर लें कर लें,सदा मातृभूमि का सम्मान,
मातृभूमि के सम्मान से,देश में होगा तेरा मान।।
प्यारे जग में मातृभूमि ही तेरी सच्ची कर्मभूमि,
कुछ ऐसा कर प्राणी,बन जाएं ये तेरी तपोभूमि।
इसी का अन्न और जल तुमने खाया और पीया,
मातृभूमि से तुमने ये अपना सारा जीवन पाया।।
खा-पीकर तुम इसी प्यारी मातृभूमि पर बढ़ें हुए,
इसी मातृभूमि सब तुम्हारे,अपने सपने सच हुए।
हे!बन्दे इस मातृभूमि से बढ़कर,जहां में कोई नहीं,
तू इसी माटी से पैदा हुआ,इसी में मिल जाना यहीं।।
इस अपनी प्यारी मातृभूमि की कर लें तू सदा सेवा,
इस जग में प्यारी मातृभूमि से बढ़कर नहीं कोई खेवा।
सदा सुबह और शाम मातृभूमि को कर अपनी वंदन,
तू अपने माथे पर कर,मातृभूमि से ही प्यारा चंदन।।
क्या रखा है ज्यादा समझदारी में
सच को सच कहने हिम्मत नहीं,
सब कमाया तेरा रह जाना यहीं,
बन्दे क्या रखा है तेरी समझदारी में।
बन्दे मानव-मानव में करता तू भेद,
हर पल गलती करता मानें ना खेद,
झूठ-फरेब बोलें तू दुनियादारी में।
जात-पात की बेड़ी में क्यों भरमाया,
तू रब के बन्दों को क्यों माने पराया,
क्या रखा है तेरी झूठी परोपकारी में।
जग में सब बने एक चाम के बन्दे,
इस सृष्टि में सब एक ही रब के बन्दे,
मंगल होगा तेरा सबकी हितकारी में।
इंसानियत से बढकर धर्म नहीं कोई,
इंसानियत को समझ,मानवता क्यों सोई,
अर्थ समझ क्या रखा है झूठी सरदारी में।
छोड़ जगत तुझे एक दिन जग से जाना,
मेला यहां किसी का जाना और आना,
फिर क्या रखा है तेरी ऐसी मक्कारी में।
खाली हाथों से ही इस जग में तू आया,
इस जग से तुझे खाली हाथों ही जाना,
फिर ऐसा क्या रखा है इस अंहकारी में।
मानुष-मानुष में प्यार नहीं जगाएं,
जग में कैसी तेरी रचना की कलाएं,
“खुराना” क्या रखा है तेरी कवितायी में।
सहानुभूति
सहानुभूति मानुष रख सबके साथ,
तब ही खुशियां होगी तेरे दोनों हाथ।
हर किसी में नहीं होती सहानुभूति, है,
कुछ माया में डूबे रहते हैं माया पति।
सृष्टि के मानुष अपनाते जो यह गुण,
ऐसे मानुष बन जीवन में जाते निपुण।
धरा पर हर कोई,कहां यहां सच्चे मानव,
आज मानुष के भेष में,बने सब यहां दानव।
मानुष धरा पर सृष्टि की यही प्यारी सीख,
साथ देना तुम उसका,जब जाएं कोई चीख,
सहानुभूति रखते,जो मानुष जीवन में अपने,
सदा जग में पूरे हो जाते,उनके अपने सपने।
मानुष सबकी पीड़ा को समझ अपनी प्यारे,
जग में तेरे अपने,बन जाएंगे दुश्मन भी सारे।
हे!बन्दें सहानुभूति का जीवन में समझ सार,
समझ कर समझ के साथ,होगा भवसागर पार।
विषय शोख़ हवायें बहक रही हैं
शोख़ हवाएं बहक रही है,
काली घटाएं छाई रही है,
चिड़िया भी चहक रही है।
तुम जाना नहीं कभी विदेश,
तुम रहना सदा अपना देश,
सखी प्रीत के गीत गा रही है।
तू सृष्टि के मानुष सुन संदेश,
दुर्जन वृत्ति का मत रखना भेष,
ये सृष्टि भी तुझको कह रही है।
धरा पर घिर-घिर आएं जलधर,
अब झरने भी कर हैं झरझर,
आवाज़ झरनों की कह रही है।
बन्दें संग-संग मेरे सदा तू चल,
कर्म से ही निकलेगा राह का हल,
हे! मानुष शोख़ हवाएं कह रही है।
बिन पानी के बैचेन रहते पंछी,
रख छत पर पानी बात है सच्ची,
समझ प्राणी हवाएं क्या कह रही है।
हे! मानुष तू कर सबके मंगल की बात,
झोली खुशियों से भर जाएगी दिन-रात,
सबको संदेश रचना भी यही दे रही है।
हरे-भरे पेड़ का पत्ता
मैं हरे-भरे पेड़ का प्यारा पत्ता,
पास जड़ के रहती मेरी सत्ता।
मैं डाली-डाली पर सदा रहता हूं,
मैं धूप हो या सर्दी सब सहता हूं।।
मैंने मास ज्येष्ठ,साढ,सावन,भादो,कार्तिक,
देखें लोग जहां में आस्तिक और नास्तिक।
मैंने देखी इस जग की रीत निराली,
किसी की रात दीवाली,किसी की काली।।
सुख में रहते सब साथ लोग यहां,
साथ दुख में नहीं देता,किसी का ये जहां।
मानुष मतलब के सब यहां यार बने,
हाड़-मांस की काया फिर भी,
एक दूजे के सामने रहते तनें।।
बन्दें देखा मैंने चार दिन की तेरी जिंदगानी,
सदा नहीं रहा यहां कोई मत कर मनमानी।
मेरा आज रंग हरा तो कल हो जाएगा पीला,
छोड़ जगत को जाना सब यह प्रकृति की लीला।।
ये मचलता मौसम फिर से(गीत)
ये मचलता मौसम फिर से आया है,
सबके मन को यह मौसम भाया है।
चारों ओर घटाएं काली-काली घिरी,
मचलती बरखा की बूंदें धरा पर गिरी,
देखो प्यारा मौसम फिर से छाया है।
बागों में काली-काली कोयल गाना गाए,
मीठे-मीठे गीत कोयल सबको सुनाएं,
मोर पपीहा फिर से सुखद मौसम लाया है।
देखो डाली अमवा झुक गई बागों में,
भंवरें भी सुंदर गीत सुनाएं रागों में,
सब अपने है मत कर समय जाया है।
बन्दें मौसम में सर्दी हो, हो या गर्मी,
अपनी भाषा में सदा ही रखना नर्मी,
बन्दें चार दिन की तेरी ये सुंदर काया है।
खिड़की
मैं जब देखूं खिड़की से,
झोली भर जाएं मेरी खुशियों से।
बहार का मौसम लगता प्यारा,
खुशियां देता हमको सारा।।
मैं देखूं खिड़की से चाॅंद सितारे,
चॉंद सितारे लगते मुझको प्यारे।
खिड़की से जब आएं हवा का झोंका,
बात करने का मुझे हवा से मिलता मौका।।
जाने कैसे बन गई खिड़की मेरी प्यारी,
ये मुझको खुशियां देती प्यारी सारी।
खुली खिड़की से,मैं अपने सपने बुनती हूं,
कुछ करने की चाह में, मैं सपने में उड़ती हूं।।
प्राप्त: काल में जब खिड़की खोलूं,
चिड़ियों से मैं मन की बात बोलूं।
नीली पीली और काली चिड़िया रानी,
लगती मुझको वो अपनी जानी पहचानी।।
वन्य जीवों की पुकार
तुमने स्वार्थ हित में,
काट दिए सारे वृक्ष।
तुम ही बताओ,
कहां जाएं हम।।
अपने विकास में,
तूं खुश हो रहा है।
जीवन में किसी की,
तू सोचें न जाने है।।
तूने सुंदर धरा से,
पेड़ सारे कांटे।
कहा हम अपना,
अब घोंसला बनाएं।।
अब इस धरा पर,
हो गया सांस लेना दुष्कर।
बिना सांसों के सब,
कैसे जीएगे और हम।।
फूल और पत्ते ही,
है हमारा भोजन।
पेड़-पौधे ना रहेंगे,
क्या खाएंगे हम।।
आओ बताएं हम तुम्हें,
वृक्ष धरा पर तुम लगाओ।
वृक्ष लगाकर धरा को बचाओ,
तभी बसेरा यहां करेंगे हम।।
“वृक्षारोपण”
आओ हम अपनी माॅं का ऑंचल संवार लें,
मां के आंचल में एक अपना पौधा लगा लें।
सुंदर धरा भी हमको अपनी जान से प्यारी,
जिससे मिली हमें जीवन की खुशियां सारी।।
धरा पर वृक्ष ही सुन्दर धरा का होते श्रंगार,
वृक्ष बिना प्यारी धरा भी हो जाती अंगार।
वृक्ष लगाओ प्यारे तुम जीवन में एक हजार,
वृक्ष लगाओगे तो खुशियां होगी पास अपार।।
हरे-भरे पेड़-पौधे ही होते हैं सांसों का सार,
हरे-भरे पौधों से जीवन होता भवसागर पार।
हे प्राणी तू जीवन में अपने कुछ ऐसा कर,
तेरे कर्मों से जग में ये दुनिया सारी जाएं तर।।
चिपको आन्दोलन का था अपना प्यारा गुण,
प्यारी धरा को बचाने में सब बन जाए निपुण।
वृक्ष बचाने और लगाने से होगी बन्दें तेरी जीत।
सदा कर्म ही बंदे तेरी राह के बन जाएंगे मीत।।
प्यारी अपनी धरा को तुम हरा-भरा बनाओं,
वनरोपण की अलख जगाककर इसे तुम बचाओं।
मेरी प्यारी धरा का आंचल सदा हरा-भरा रहे,
धरा पर सब सज्जन और दुर्जन सदा खुश रहें।।
झर गए जो फूल
झरते फूलों से धरा भी महकें,
बगिया रहती थी,जिनसे कूल।
बैठे भी भंवरें उन पर चहकें,
डाली से झर गए जो फूल।
महकें था,जिनसे धरा का आंगन,
बहारें हर पल ऐसे थी,जैसे हो सावन,
अब बगिया में उड़ रही धूल।
महकें था,चेहरा फूल देखकर,
मन भाए था,स्पर्श उनका लेकर,
अब बिना फूलों के,जीवन बना शूल।
फूलों के खिलने से,थी दिल में उमंग,
फूलों के झर जाने से,मिट गई तरंग,
मानुष समझ न सका,फूलों का मूल।
आएगी बहारें,बगिया में एक दिन,
फिर खिलेंगे फूल,आस करती जोगिन,
प्यारी है जीवन की बगिया,मत कर भूल।
महकें था,जिनसे धरा का आंगन,
बहारें हर पल ऐसे थी,जैसे हो सावन,
अब बगिया में उड़ रही धूल।
महकें था,चेहरा फूल देखकर,
मन भाए था,स्पर्श उनका लेकर,
अब बिना फूलों के,जीवन बना शूल।
फूलों के खिलने से,थी दिल में उमंग,
फूलों के झर जाने से,मिट गई तरंग,
मानुष समझ न सका,फूलों का मूल।
आएगी बहारें,बगिया में एक दिन,
फिर खिलेंगे फूल,आस करती जोगिन,
प्यारी है जीवन की बगिया,मत कर भूल।
अपने जो पराए से
साथ उनके बचपन बीता अपना,
वो पल अब बन गए सपना।
अपने जो पराए से हो गए हैं,
कितने दूर हमसे वो हो गए हैं।
हमें साथ उनका लगें था प्यारा,
उनके साथ बीते था दिन सारा,
अब वो अपने बेगाने से हो गए हैं।
खाते-पीते थे सदा हम उनके साथ,
खुशियां थी अपने हर पल हाथ,
कैसे अब हमसे वो रूठ गए हैं।
हमको थी उनसे सदा बड़ी उम्मीद,
हमारी उनसे ही थी दीवाली और ईद,
जाने अब वो कौन से देश चले गए हैं।
हमको थे वो अपनी जान से प्यारे,
हम सदा ही उन पर थे अपना दिल हारे,
कैसे देखें उनको दूर कितनी चलें गएं है।
तेरा रूप
रानी तेरा रूप लगें मुझको प्यारा,
मैं सदा तुझ पर दिल अपना हारा।
तेरी प्यारी कमसिन सी सुंदर काया,
प्यारा तेरा रूप मेरे मन को भाया।।
कानों में तेरे कुंडल माथे पर बिंदिया,
प्यारी लागे मुझे तेरे पैरों की बिछिया।
गले में तेरे मन भाएं प्यारा सुंदर हार,
चैन छीनने मेरा तेरी अंखियों की धार।।
चैन मेरा छीने होठों की तेरे प्यारी लाली,
मेरे लिए ही बनी आंखें तेरी काली-काली।
जब नागिन सी चेहरे पर तेरी बिखरें लट,
तेरी लट आशिकौ के खोले नैनों के पट।।
शाकाहारी
मत ढूंढ जीवन को,दूसरे जीव में,
वरना तेरा जीवन,बन जाएं पीव में।
शुद्ध शाकाहारी बन,निकलेगा हल,
सृष्टि के बैमोल उपहार सब्जी,फल।।
जीवन में जो मानुष होते शाकाहारी,
पास उनके ही होती खुशियां सारी।
हे!धरा के प्राणी शुद्ध शाकाहारी बन,
तब ही होगा शुद्ध तेरा,अपना भी मन।।
नर समझकर,मत कर जीवन में हिंसा,
गौतम बुद्ध भी सार समझाएं अहिंसा।
नर सबके प्रति रखते,अपने दया भाव,
भवसागर से पार हो जाती उनकी नाव।।
साग-सब्जी फल-फूल में,अपार भंडार,
खा-पीकर इन्हे,जीवन को अपने संवार।
मानुष जैसा खाता अन्न और पीता जल,
मानुष का वैसा हो जाएं,आने वाला कल।।
हे!धरा के मानव,क्यों रहा जीवों को मार,
अंत समय आएगा तेरा,जीवन जाएगा हार।
हे! नर तू शुद्ध शाकाहारी बन,इतिहास रच,
कहते ऋषि-मुनि,धरा पर ही होगा स्वर्ग सच।।
गर्मी का मौसम है
गर्मी का मौसम लगें सबकों प्यारा,
इस मौसम में सुंदर लगें जग सारा।
गर्मी में जहां कहीं भी हो लेट जाएं,
वहीं सबको मन भर नींद आ जाएं।।
यह गर्मी का मौसम सबको सिखलाएं,
सब मौसम में सबकों जीना आ जाएं।
गर्मी में तुम सदा पानी पीते ही रहना,
सबकी कड़वी मीठी बातें सदा सहना।।
खरबूजा खाओ या तरबूज खाओ,
तुम सदा सुंदर अपनी सेहत बनाओ।
ठंडी लस्सी तुम पिओ गर्मी को भगाओ,
चेहरे पर तुम अपने प्यारी रौनक लाओ।।
जीवन में सबके एक जैसे मौसम नहीं रहते,
तुमको प्रकृति देती ज्ञान ज्ञानी भी यही कहते।
बन्दें सुख दुःख है जीवन में जैसे है गर्मी सर्दी,
मिलकर साथ चल नहीं कर जीवन में हठधर्मी।।
अश्कों की सौगात
मेरा प्यारा छोटा भाई था,
वह गले में रखता टाई था।
प्यारा रंग उसका गौरा था,
सबका प्यारा सुंदर छोरा था।।
प्यार से उसको गुड्डू कहते थे,
उसे जहां में सब प्यार करते थे।
वह सीधा-साधा और भोला था,
वह भविष्य के लिए मस्त मोला था।।
सबको प्यारी लगती थी उसकी बातें,
वह मेहनत करता सदा अपनी सब रातें।
उसका प्यारा चेहरा सबके मन भाए था,
वह जीवन में मेहनत की रोटी खाएं था।।
रास्ते से आते-आते एक्सीडेंट हो गया,
इलाज बहुत कराया ठीक ना हो पाया।
बस एक दिन मौत के ग्रास में सो गया,
घर वालों को अश्कों की सौगात दे गया।।
सकारात्मक सोच
जब सकारात्मक सोच जीवन में बनाएगा,
तू जीवन में तब ही खुशियों के गीत गाएगा।
जीवन को सफल बनाएं सकारात्मक सोच,
सकारात्मक सोच से खुशियां मिलेगी रोज।।
बन्दें आशावादी सोच ही जीवन का सार है,
आशावादी सोच जीवन को करती पार है।
जो बन्दें अपने जीवन को समझते भार है,
ऐसे बन्दों की उनके जीवन में होती हार है।।
तू बन्दें सकारात्मक सोच से देना संदेश है,
सकारात्मक सोच से ही रहना अपना देश है।
आशावादी सोच मानवता का प्यारा गुण है,
तेरे जीवन की कस्ती यही पार लगाए गुण है।।
आशावादी सोच ही जीवन का पेड़ फलदार,
तू खुशियों का सदा जीवन में होगा हकदार।
मानव-मानव की सोच में होता बड़ा ही भेद है,
समय जब हाथ निकल जाएं रह जाता खेद है।।
जीने की कला
जीने की कला सब मानव में होती कहाॅं,
हर पल मिलती खुशियां प्यारा है ये जहाॅं।
यहां सबकी सोच सोच में छिपा गहरा राज,
जीवन में सोच समझकर करना सब काज।।
आशावादी सोच जीवन में अमृत समान,
तू अपनी सोच से ही जग में बनेगा महान।
कोई सोच से अपनी राजा कोई बना रंक,
तू शब्दों से किसी को मत मार यहां डंक।।
तू हंसते गाते सबके साथ अपना दिन बीता,
तू एक दिन जाएगा इस प्यारे जहां से रीता।
सीखा यहां अपने बेगानों को जीने की चाह,
तू जग में इंसानियत की सबको दिखा राह।।
तुम किसी रूठें को अपने जीवन में मनाना,
तू इस जहां में बेगानों को भी अपना बनना।
जीवन में अपने संत कर्मों की बों लें फसल,
जीवन तेरा चमकेगा जैसे खिलता हो कमल।।
कठिन परिश्रम
कर ले बंदे कठिन परिश्रम,
जो दास से मुक्ति को पाना है।
कठिन परिश्रम के बगीचे में,
तेरी खुशियों का ठिकाना है।।
बन्दें कठिन परिश्रम,
हैं सबके जीवन का सार,
कठिन परिश्रम से ही,
बन्दें तेरी होगी जय-जयकार।
कठिन परिश्रम की डगर,
बन्दें सदा तुझे जाना है।।
बन्दें कठिन परिश्रम से,
सदा ही तेरी होगी जीत,
जग में तेरी जीत से ही,
बन जाएंगे जग में सारे तेरे मीत।
अपने कठिन परिश्रम से,
तुझे जग में छा जाना है।।
बन्दें काॅंटों भरा है,
ये सबका जीवन,
कठिन परिश्रम का,
जीवन में कर लें तू कीर्तन,
जो बन्दें करते नहीं अपने,
जीवन में कठिन परिश्रम।
सदा जीवन में ऐसे बन्दों की,
उनकी हो जाती दिशाभ्रम,
हमें सदा अपनी राहों में,
शिक्षा का दीप जलाना है।।
सावित्री जैसी पवित्रता
अब जहां में कहां रही,सावित्री जैसी पवित्रता,
जहां में धरा पर विलुप्त होती जा रही अब नैतिकता।
सावित्री माता जैसी,इस जग में नहीं जन्मी कोई नारी,
पति के प्राणों की खातिर,यमराज पर पड़ गई भारी।।
जग में जब तक ये धरती और ये आसमान रहेगा,
सावित्री देवी जग के कण-कण में तेरा नाम रहेगा।
तुमको अपने प्राणों से प्यारे थे,सत्यवान के प्राण,
उनकी मशहूर कहानी ने,विश्वास का दिया प्रमाण।।
माता तेरा विश्वास ही,सारे जग में जग बन गया मिशाल,
सारे जहां की पावन धरा पर,तेरी कहानी बन गई विशाल।
भारत की धरा पर जन्म लेकर,पावन कर दी भारत भूमि,
ये सारा जहां याद करेगा,कैसी थी तेरी जानी कर्मभूमि।।
चाय
चाय के रंग,जग में होते अनेक,
अब चाय को जग में पीते हरेक।
चाय का अपना अंदाज निराला,
चाय को पीते सर्दी हो या पाला।।
चाय पीना कुछ लोगों की होती शान,
अब चाय पीने पिलाने में छिपा मान।
अब चाय जीवन में बनी अमृत समान,
चाय की चर्चा करता,अब सारा जहान।।
अमीर हो या गरीब,सबकी बनती दवा,
जो लोग चाय को पीते,बन जाते जवां।
सर्दी में चाय की चुस्की का अपना मज़ा,
सर्दी में दो कप पीते अपनी-अपनी रजा।।
चाय का सर्दी में कुछ अलग-सा अंदाज,
“खुराना” चाय पर लिखें अपने अल्फाज़।
अब चाय पीने में कोई नहीं करता ऐतराज,
अब चाय को पीना जरूरी बताते वैद्यराज।।
पंखा
पंखा देता सबको ठंडी हवा,
गर्मी में बन जाता सबकी दवा।
सबके मन भाता प्यारा पंखा,
पंखा गर्मी में दूर करता शंका।
ये पंखा ठंडी हवा सबकों देता,
ये बदलें में कुछ भी नहीं लेता।
पंखा सबके मन को खूब भाता,
मन हवा में खुशी के गीत गाता।।
गरीब या अमीर सबको देता हवा,
कीमत इसकी जैसे रोटी का तवा।
पंखा जग में जात-पात नहीं जानें,
ये मानव-मानव में भेद नहीं मानें।।
पंखा धरा पर देता सबको ज्ञान,
मिल जुलकर रहना रखना ध्यान।
सबके साथ रखो एक समान भाव,
किसी को भूल में भी नहीं देना घाव।।
दर्पण
दर्पण-दर्पण क्यों मेरी पोल खोले,
तू सब कुछ कह देता बिना बोले।
दर्पण तुम बिना रूप होता आधा,
चेहरा देखें तुझमें गौरी हो या राधा।।
सामने जब-जब तेरे कोई आ जाता,
तू बता कैसे सबका चेहरा पढ़ पाता।
सच जग में,तेरा ही रूप ही है निराला,
तेरा चेहरा सब देखें,बाला हो या लाला।।
ए! दर्पण तुमसे सीखें मौन की भाषा,
तू हर पल जग में रहता सबकी आशा।
जब नर कोई घर से निकले,तुझको देखें,
तुम ही बच्चें हो या बूढ़े सबकी लाज राखें।।
तुम सब जीवन में सिखा जाते हो दर्पण,
तुम सबके साथ रहो,सुख दुःख में अर्पण।
बन्दें तेरा जीवन चार दिन की जिंदगानी,
जग में सच और झूठ की कर लें निगरानी।।
नारी रूप/ काया
मैं धरा की प्यारी नारी हूं,
मैं सब पर रहती भारी हूं।
मेरे जग में रूप होते अनेक,
मुझको देखते जग में हर एक।।
मैं ही धरा पर मां और बेटी हूं,
मैं ही आशिकों की स्वीटी हूं।
मुझमें सब रिश्ते भी छिपे होते,
जब देखें मुझे जाग जाते सोते।।
मेरी कमसिन होती प्यारी काया,
अमर हो जाते पाकर मेरी छाया।
मेरे प्रेमी भी मेरे केशों में खो जाते,
वो भी प्यार मुझे अन्जाने कर जाते।।
सदा मेरा जीवन है कांटों का,
मेरा जीवन धूप और छांव का।
मैं जब करती हूं अपना श्रंगार,
लोगों के दिल में हो जाती झंकार।।
भ्रष्टाचार से मुक्ति
धरा को कैसे मिलेगी भ्रष्टाचार से मुक्ति,
सबके रग-रग में बसी भ्रष्टाचार की युक्ति।
जब से इस जग में धरा की हुई उत्पत्ति,
तब से बिगड़ी धरा के मानव की नियति।।
हर जगह धरा पर करता मानव भ्रष्टाचार,
दीन-दुखियों पर मानव करता अत्याचार।
सुंदर धरा पर मानव ही मानव को डस रहा,
देखो सांप भी मानव को देखकर हंस रहा।।
धरा के मानव की कैसी अजीब बनी प्रकृति,
मानव ऋषि-मुनियों की नहीं कर रहा संगति।
शिष्टता भूलकर हर पल मानव को रहा छल,
भ्रष्टाचार करके अच्छा कहां होगा तेरा कल।।
नर धरा पर अनाचार होती नाश की निशानी,
सत्कर्म कर बन जाएं सृष्टि भी तेरी दिवानी।
तू क्या लेकर आया और क्या लेकर जाएगा,
दुराचार से कमाया धन सब यही रह जाएगा।।
तिरंगे की शान
हमको प्यारी,अपने तिरंगे की शान,
जान से प्यारा,तिरंगा हमारी आन।
हमें तिरंगा शहीदों की याद दिलाएं,
ये हम सबकी राहों में फूल खिलाएं।।
वतन के वीरों की होती शान तिरंगा,
अपने देश में वीरों नहीं करना दंगा।
तिरंगे की खातिर मिट गए वीर अनेक,
तिरंगें को प्यार करते,देश भक्त प्रत्येक।।
हम अपने तिरंगे पर सदा मिट जाएंगे,
अपना नाम जग में अमर कर जाएंगे।
तिरंगा हमारा हमको जान से प्यारा,
इसका रुप प्यारा,सब देशों से न्यारा।।
वीर सीमा पर इसकी खातिर प्राण गंवाए,
सच्चे देशभक्त ही तिरंगे की लाज बचाएं।
ये तिरंगा शहीदों के खून की याद दिलाएं,
तिरंगे पर सब देशवासी वारी-वारी जाएं।।
तपती धरती गर्म हवा
ये तपती धरती गर्म हवा है,
हर मौसम की अपनी दवा है।
लोभ लालच को छोड़ो भाई,
पेड़ से जहां में हरियाली छाई।।
तपती धरती को बचाना चाहते हो,
हर जगह पेड़ क्यों नहीं लगाते हो।
पेड़ों पर तुम क्यों कहर ढहाते हो,
वृक्ष काटकर तुम क्या जताते हो।।
भाई वृक्षों से ही जान बचेगी सबकी,
बिना वृक्षों के कहां ये धरती महकी।
बन्दें तू प्रकृति से मत कर खिलवाड़,
नर क्या बन्दे साथ नहीं देंगें तेरा गॉड।।
धरा पर बिना वृक्षों के नहीं कहीं छाया,
पेड़-पौधों से ही होती नर तेरी काया।
तू अपनी तपती धरती को बचा ले प्यारे,
एक दिन नहीं तो सब नर जीवन हारे।।
चूल्हा चौका
कह रही बेटी मेरी तू अब पढ़ लें,
पढ़कर तू अपने कल को संवार लें।
मेरी बेटी अब उम्र है,तेरी पढ़ने की,
आगे याद करेगी तू अपने बचपन की।।
मेरी बेटी कर ले,तू बस इतना ध्यान,
तू सपनों में अपने अब भर लें उड़ान।
सदा ज्ञान से होता सबका जीवन पार,
जग में शिक्षा ही है,जीवन का आधार।।
धरा पर ऋषि-मुनि देते सबकों ज्ञान,
वे कहते पढ़ने से ही होगा जग में मान।
बेटी पढ़ने में ही होगी,सदा तेरी जीत,
तेरे ज्ञान से ही होगें,जग में सदा तेरे मीत।।
मेरी प्यारी बेटी तू कहना मेरा ले अब मान,
पढ़ लिखने से ही होगी जग में तेरी शान।
सही समय तेरे लिए,यही जीवन में मौका,
पढ़ ना पायी तू करेगी सदा चूल्हा चौका।।
सब्र का फल
जब मैं था कक्षा बारह का बालक,
मैं हो गया था अपनी कक्षा में फैल।
मेरा मन फैल होने से था बहुत दुखी,
मुझे मिल गई थी,एक प्यारी चन्द्र मुखी।।
वह चंद्रमुखी थी बहुत सुंदर नारी,
चंद्रमुखी लगती थी मुझको प्यारी।
जब किताब को खोलकर याद करता,
मैं ख्यालों में उसके सदा खोया रहता।।
मेरे बाप ने मुझको बहुत समझाया,
तू बेटा यादों में रहता उसकी खोया।
तू साथ उसका बेटा अब दे छोड़,
तेरे जीवन में आएंगे,आगे नए मोड़।।
तू बात मेरी मेरे प्यारे बेटे ले मान,
ये जीवन है अनमोल,इसे तू जान।
सब्र कर जीवन में,सब कुछ तुझे मिलेगा,
तेरी कोशिश से ही इसका हल निकलेगा।।
तू मत हो जीवन में अपने उदास,
सदा सारी खुशियां होगी तेरे पास।
सदा ही मीठा होता है,सब्र का फल,
एक बार कर कोशिश,होगा तू सफल।।
भारत का गुणगान
मेरा भारत ऋषि-मुनियों की धरती,
सदा इस पर नर और नारी मरती।
इसकी चर्चा सारे जहान है,
मेरा प्यारा भारत महान है।।
कण-कण में इसकी सदा वीर जन्मे,
भारत को मिटाने पढ़ता रहा कलमें।
झलकारी बाई मिट गई भारत की शान में,
झलकारी बाई को जो ना पहचाने नादान है।।
भारत के इतिहास की जब बातें करते हैं,
अखबार भी अच्छी खबर के कहां छपते हैं।
फूले ने शिक्षा ज्योत जलाई बेटियों के मान में,
भारत में फिर भी सारे लोग अंजान है।।
मेरा भारत कैसे बन गया अंग्रेजों का गुलाम,
खोया अपना वैभव, पाया फिर वो ही मुकाम।
एक-एक वीरों ने दस-दस दुश्मन को मारा,
उन वीरों के जैसा नहीं बना कोई समान है।।
राजाराम मोहन राय ने मिटाई बाल प्रथा,सती प्रथा
भेदभाव,अशिक्षा,पर्दा प्रथा न जाने कितनी कुप्रथा
इतिहास में सती अनुसूया का अमर हो गया नाम,
भारत उनका जग में करता नाम बखान है।।
जब अंग्रेजों से मेरा देश हो गया था आजाद,
डॉ भीमराव अम्बेडकर जी को करते सब याद।
भारत का संविधान लिखकर रच दिया इतिहास,
समान अधिकार देकर हो गया भारत पर बलिदान।।
सोन चिरैया
जब मैं छोटा बच्चा था,
तब मैं बच्चा अच्छा था।
मुझे बचपन की यादें याद,
मां के सब काम थे बाद।।
मेरी मां छत पर दाने लाती,
साथ-साथ में पानी लाती।
मैं भी मां के पीछे-पीछे जाता,
सब कुछ देखकर मन भाता।।
प्यारी सोन चिरैया छत पर आती,
सोन चिरैया मेरे मन को खूब भाती।
मैं पीछे-पीछे उनके दौडें जाता,
मेरा मन सदा ही खुशी से गाता।।
मेरे आगे-आगे रहती थी सोन चिरैया,
मैया कहती पीछे पीछे दौड़े मेरा कन्हैया।
मुझको पंख उसके प्यारे-प्यारे लगते,
मेरे भईया सोन चिरैया उसको कहते।।
बरखा रानी
ये नभ में काली-काली घटाएं,
सबको प्यारा सुंदर गीत सुनाएं।
रिमझिम-रिमझिम करती बरखा,
बरखा में मन डोलता सबका।।
यह कितना प्यारा मौसम आया,
ये प्यारा मौसम मेरे मन को भाया।
चारों ओर बिखरा बरखा का पानी,
सबके मन को भाएं ये बरखा रानी।।
जब छाएं नभ में बरखा के बादल,
बरखा में भींगे मेरा मन और आंचल।
बरखा में भींगा प्यारा आंचल मेरा,
मुझको याद आए बस चेहरा तेरा।।
ये मेरा चेहरा बरखा में खिलता,
जैसे मेरा रब मुझे बरखा में मिलता।
बरखा में चलें ये ठंडी-ठंडी हवाएं,
मेरे दिल के सपनों को धीरे से जगाए।।
प्यारी बरखा हर पल मेरी जुल्फें संवारे,
मुझे बरखा में लगते जग के सुंदर नजारे।
प्यारी बरखा में भींगा मेरा कमसिन बदन,
बरखा में लगता मेरा बदन जैसे हो चन्दन।।
चुनौती
प्यारे चुनौती ही जीवन का सार,
तुम चुनौती को नहीं समझों भार।
जीवन में अगर नहीं होगी चुनौती,
जीवन बन जाएगा सुखों की कटौती।।
जीवन में चुनौती जीना सिखाती है,
चुनौती ही जग में नाम दिलाती है।
चुनौती से कुछ लोग घबरा जाते हैं,
हर कोई कहां चुनौती से पार पाते हैं।।
तू चुनौती से कभी ना घबरा बन्दें,
जब पार पाएगा,जग करेगा वन्दे।
गर तुझको जीवन में आगे बढ़ना है,
सदा सीढ़ी चुनौती की तुझे चढ़ना है।।
तू सदा क़दम-क़दम आगे बढ़ाएं जा,
तू चुनौती से जग में मत घबराएं जा।
तेरे जीवन में तेरे कर्म ही तेरी हो पूजा,
चुनौती से पार पाएं सदा हर कोई दूजा।।
ये पाक है नापाक
देखो भारत का ऑपरेशन सिंदूर हो गया सफल,
हमला कर पाकिस्तान का नक्शा दिया बदल।
दुश्मन याद करेगा,ऑपरेशन बन गई इतिहास की खबर,
ऑपरेशन सिंदूर की,सारे जहां में कहानी हो गई अमर।।
अ! ज़ालिम देश पाकिस्तान तू पाक है या नापाक,
इंसानियत का तू बड़ा दुश्मन तू बड़ा ही चालाक।
वीर सैनिक सदा तुझको तेरी भाषा में सबक सिखाएंगे,
ऑपरेशन सिंदूर की तरह तुझ पर हम गोलियां बरसाएंगे।।
देखो धर्म के नाम पर दुश्मन ने कैसे मारामारी की,
दुश्मन समझ नहीं पाए,कैसे करें सम्मान नारियों की।
भारत ने हमला करके,बर्बाद की दुश्मन की चौकी,
भारत पर गर दोबारा करेगा हमला,आगे नहीं रहेगा बाकी।।
भारत के आगे दुश्मन की नहीं कोई अपनी बिसात,
भारत के नाम की दिन और रात भविष्य में करेगा बात।
भारत के वीर सपूतों ने दुश्मन को चटा दी धूल,
दुश्मन भूलकर भी अब कभी नहीं करेगा ऐसी भूल।।
जय हनुमान
आए हैं जी हम तेरे द्वार,
हमारा कर दो बेड़ा पार,
जय हनुमान जय हनुमान।।
केसरी नंदन मां अंजनी,
तुम्हारे सदा साथ रहती रजनी,
हमें भक्ति का दे दो वरदान।।
संकट मोचन कहते तुझको,
ज्ञान दे दो आप कुछ हमको,
ज्ञान देकर कर दो एहसान।।
पवन पुत्र शक्ति बलधारी,
मैं सदा तुम होऊं बलिहारी,
दूर कर दो मेरे अवसान।।
संजीवनी बूटी पर्वत से लाएं,
लक्ष्मण के भी तुम प्राण बचाए,
कर दो हमारी जग में पहचान।।
तेरे जैसा नहीं भक्त दुनिया में कोई,
अपने ज्ञान से, जगाई दुनिया सोई,
तुम सा नहीं कोई बलवान।।
मैं भी दुनिया में, कर जाऊं कुछ ऐसा,
मेरा भी नाम हो, जग में आप जैसा,
तुम कर दो मेरे, पूरे अरमान।।
प्रकृति
देखो ये ऊंचे-उच्चे पहाड़ टीले
इन टिलो में सदा चेहरे रहते खिले
प्रकृति का यहां सुनहरा होता दृश्य
सबका मन यहां करने लगता नृत्य
ये पहाड़ टीले आसमां से करते बातें
यहां सबकी होती प्यारी सुनहरी रातें
हर पल महकते दिखें यहां के फूल
यहां के सब नर-नारी रहते सदा कूल
यहां का सुंदर नजारा सबके मन भाता
हर दिल यहां पर खुशियों के गीत गाता
पहाड़ों से होकर जो निकली नदियां
नदियों की सौगात से खुश रहें दुनिया
यहां मौसम लगें सबकों प्यारा प्यारा
यहां रब का अपना ही प्यारा नजारा
झर झर करते रहते यहां प्यारे झरने
ऋषि-मुनि करते रहते यहां पूरे सपने
जन्मदिन/अक्षय
हमारी ओर से,मुबारक हो आपको यह जन्मदिन,
यह बार-बार आएं आपके जीवन में प्यारा-सा दिन।
आप इतना छा जाओ इस सारे जहां में एक दिन,
हम भी मिलने को तरसे और कतार में लगे एक दिन।।
तुमको अपने जीवन में मिलें पल-पल खुशियां सारी,
यही कामना हमारी आपके दर पर रहे खुशियां भारी।
आपके दामन को गम भी कभी नहीं छू पाएं,
आपके जीवन में सदा ही रहें खुशियों के साएं।।
दुआओं के शिवा हम तुम्हें ओर क्या उपहार दे,
सब कुछ है आपके पास बस आप हमें भी प्यार दे।
ये दुआ हमारी खुशियां रहे, सदा आपके घर अक्षय,
माता पिता ने भी प्यार से नाम रखा तुम्हारा अक्षय।।
रेशमी दुपट्टा
ये प्यारा तेरा रेशमी दुपट्टा,
चेहरा छुपा जिसमें उजला।
जब-जब भी देखूं ये दुपट्टा,
ये घायल करता तेरा मुखड़ा।।
ये रेशमी दुपट्टा मन भाए मेरा,
तेरा दुपट्टा मुझको बनाए तेरा।
मेरे जीवन की बगिया की डाली,
तेरे रेशमी दुपट्टे में बात निराली।।
दुपट्टा तेरा बन गया मेरी शान,
रेशमी दुपट्टे में छिपी मेरी जान।
ये मल-मल का तेरा रेशमी दुपट्टा,
मैं देखूं जब,दिल जाए मेरा उछला।।
जब से देखा ये तेरा रेशमी दुपट्टा,
प्यारा मेरा दिल कही नहीं लगता।
जब-जब ये दुपट्टा चेहरे पर लहराएं,
मेरा दिल खुशियों के प्यारे गीत गाए।।
जलियांवाला बाग हत्याकांड
आओ! हम तुम्हें जलियांवाला बाग के,
हत्याकांड की सबको गाथा सुनाते हैं।
भारत में था अंग्रेजों का शासन,
अपना भारत में नहीं था कोई राजन,
वें ज़ालिम बन सब पर कोड़े बरसाते।।
आप सबको हत्याकांड की गाथा सुनाते हैं
अमृतसर का ब्रिगेडियर जनरल डायर,
कर्म थे उसके अपने सारे कायर,
उसके सारे अपने कर्म सर झुकाते हैं।।
आप सबकों हत्याकांड की गाथा सुनाते हैं
अमृतसर में था प्यार जलियांवाला बाग,
देश की खातिर लोग रहे थे जाग,
हम सब ऐसे वीरों की गाथा गाते हैं।।
आप सबको हत्याकांड की गाथा सुनाते हैं
तेरह अप्रैल उन्नीस सौ उन्नीस का दिन,
अमृतसर वालों की खुशियां जिसने ली थी छीन,
इतिहास में जलियांवाला बाग की कहानी पाते हैं।।
आप सबको हत्याकांड की गाथा सुनाते हैं
उधम सिंह था भारत माता का सबसे प्यारा लाल,
लंदन जाकर मारा जनरल डायर बन गया काल,
ऋषि-मुनि उधम सिंह के वीर सपूत की गाथा गाते हैं।
आप सबको हत्याकांड की गाथा सुनाते हैं।
सैनिक
सैनिक राष्ट्र प्रेम की अलख जगाए,
वो देश में सबकों जीना सिखलाएं,
उसको ही कहते देश में सब सैनिक।।
सीमा पर रखते सीना अपना तान,
देश से बढ़कर नहीं कोई उनकी शान,
चाह होती सदा यही उनकी दैनिक।।
देश की खातिर वें मर मिट जाते हैं,
इतिहास में नाम अमर कर जातें हैं,
देश कहता उनको सच्चा आशिक।।
उनके ही दम से सदा होती देश रौनक,
साथ निभाते बाधा होती जब औचक,
वो दुश्मन से ना डरते कभी तनिक।।
भारत माता के वो ही सच्चे लाल,
दुश्मन को मार देते बनकर वो काल,
उनसे खुश होते किसान और श्रमिक।।
नमन और वंदन करती उनको धरा,
उनके दम से भारत की बगिया हरा,
मिशाल उनकी सारे जग में नैतिक।।
गुरू की महिमा
गुरु से बड़ा नहीं जग में कोई दूजा,
जग में करें सब सदा उसकी पूजा।
गुरु की महिमा होती अपरम्पार,
कोई ना पाया जग में गुरु से पार।।
सबसे पहला गुरु जग में सबकी माता,
जिसने सबको जग में जन्म दिया।
खुद भुखे रहकर तुझको खिलाया,
जिसने सदा ही तेरा साथ निभाया।।
धरा से उंचा स्थान तेरे पिता का,
जग में दूजा गुरु भी पिता सबका।
उसके बिना सबका जीवन अधूरा,
पिता से ही पाया ये जीवन सारा।।
तीसरा गुरु मेरा जिनसे मुझे मिला ज्ञान,
उनके जैसा नहीं कोई जग में महान।
गुरु से बड़ा नहीं जग में कोई दाता,
शिष्य के अपने सोए ज्ञान को जगाता।।
पुलिस
(व्यंग कविता)
बेशक हम लेते लोगों से रिश्वत,
हमारी कोई नहीं करता इज्जत।
भैया बातें तुम क्या हमारी जानों,
वेतन हमारा कम बात हमारी मानों।।
पुलिस की यारी होती सब पर भारी,
चोर लुटेरों को देखकर पुलिस हारी।
हम सबको अपनी वर्दी का रोब दिखाएं,
हम ही सबकी धाराएं घटाएं और बढ़ाए।।
किसी से जहां में हम को क्या घबराना,
अच्छे लोगों को कभी कभी उलझाना।
हम करते-रहते अपने देश की चौकीदारी,
कभी-कभी सत्ता पक्ष से ही पुलिस हारी।।
कुछ ऊपर से कुछ नीचे से हमें कमाना,
कभी-कभी हमें गुंडों को भी पड़ता बचाना।
हमको कहते सारे लोग जनता का सेवक,
हम पर लिखते रहते अपनी कविता लेखक।।
मिट्टी के खिलौने जैसी तेरी काया
मिट्टी के खिलौने जैसी तेरी काया,
अरे ! बन्दे नादान है तू यहां जग में,
कर्म से ही तेरी गाएं जाएगी गाथा।।
तू मिट्टी के खिलौने जैसा आदमी,
एक दिन जहां से जाएगा वापसी,
दो दिन की है इस जग की छाया।।
चार दिन की तेरे जीवन की रवानी,
तेरा जीवन बन जाएगा तेरी कहानी,
जाएगा एक दिन जो यहां पर आया।।
बहती नदियां सा तेरा अपना जीवन,
निर्मल सा पावन कर ले जीवन श्रीमन,
तूने जाने कैसे ये जीवन अपना पाया।।
सत्य,अहिंसा के पथ पर सदा तू चल,
जीवन में सत्कर्मों की बोता चल फसल,
तू मत कर समय को अपने अब जाया।।
तू लिख दे अपनी कुछ ऐसी कहानी,
सारा जहां गाएं एक दिन अपनी जुबानी,
तू अपनी रचा दे कुछ ऐसी जग में माया।।
श्रमिक/श्रम
मेहनत करना मेरा काम,
मिलता नहीं मुझे आराम।
बस काम ही मेरी पहचान,
काम से ही मिलता सम्मान।।
मेरी कोई नहीं करता बात,
करता हूं काम दिन और रात।
सभी लोग करते मेरा शोषण,
समय पर नहीं मिलता पोषण।।
गर्मी होती या फिर होती सर्दी,
मेरी होती बस सदा एक ही वर्दी।
कंधों पर मेरे परिवार का बोझ,
मेरा काम मेहनत करना रोज।।
मैं सदा मेहनत की ही खाता रोटी,
मेरी इसलिए नहीं रहती चमड़ी मोटी।
मेरे अरमान दिल में ही दबे रहते,
मेरे सपने हर पल सदा आहें भरते।।
मेरे सपनों के मेले कभी नहीं सजते,
मेरे सपने सदा दिन और रात बदलते।
बस मुझमें छिपी रहती सदा सच्चाई,
मेरे रब ही देते हर पल मेरी गवाही।।
सूरज
देखो भैया हैं कितनी गर्मी ।
तन से उतर गई मेरी वर्दी ।।
देखो सूरज कितना रहा तप ।
हरि का कर रहे सब जप ।।
आसमां से बरस रही आग ।
धूप से सब रहे भागम -भाग ।।
सूरज सभी को लगता प्यारा ।
नाम लेते नर,पशु-पक्षी सारा ।।
जून में सबके मन को भाता ।
चाहे कितना ही सूरज तपता ।।
सूरज की अपनी बात निराली ।
सूरज को ध्यावें जीजा-साली ।।
सूरज आसमां से सब देख रहा ।
जैसे देखो रात में दिन हो रहा ।।
सूरज होएं इतना गर्म इतना गर्म ।
जैसे होता हाथों में बर्फ ही बर्फ ।।
हम स्कूल चले
सोनू,मोनू आओ हम स्कूल चले ,
आओ भाई हम सब स्कूल चलें ,
स्कूल चले भाई हम स्कूल चलें ।।
टीना,मीना,रीना मेरी प्यारी बहना ,
आओ साथ हमारे सबको चलना ,
स्कूल में हम सबका भविष्य पलें ।।
स्कूल जीवन का सबसे प्यारा मन्दिर ,
पढ़ लिखकर ज्ञान के बन जाएं माहिर ,
प्यारे गुरु ही सबके बन्द चक्षु को खोलें ।।
भाईयों और बहनों सुनो हमारी बात ,
स्कूल जाने से होगा हमें सब ज्ञात ,
स्कूल ही खुशियों की चाबी के ताले ।।
दादा दादी मैया बापू सब यही कहते ,
स्कूल से सब खुशियों के स्वाद चखते ,
स्कूल में ही हम सबको खुशियां मिले ।।
क.ख.ग पढ़ पढ़ लिखकर इतिहास बनाएंगे ,
स्कूल जाकर मां बाप का क़र्ज़ हम चुकाएंगे ,
जीवन अपना दिन-रात फूलें और फलें ।।
इंसानियत और प्रेम का पाठ पढ़ाऊं।
इंसानियत के दुश्मन आ तुझे मैं शब्दों की सैर कराऊं ।
मैं सबकों को इंसानियत और प्रेम का पाठ पढ़ाऊं ।।
जो व्यक्ति समझें दूसरे की बेटी को अबला नारी ।
उस नर को प्यार और मुहब्बत का पाठ पढ़ाऊं ।।
ऐसे कुछ नर धरा पर जो मानव-मानव में भेद करें ।
आओ ऐसे नर तुमको मानवता का पाठ पढ़ाऊं ।।
समझें तुच्छ नर अपने को यहां पर शहंशाह ।
कोई नहीं रहता यहां शहंशाह यह बात समझाऊं ।।
सत्य अहिंसा के पथ पर सदा तू चलते चलें ।
मैं सत् की राह सदा ही जीवन में सबको दिखाऊं।।
सबको बना लें यहां तू जग में अपना मीत ।
मैं वसुदेव कुटुम्ब का पाठ सबकों पढ़ाऊं ।।
दया प्रेम और करुणा हो सबके जीवन का सार।
मैं ऐसी दिल में सबके हर पल ज्योत जलाऊं ।।
देश मेरा सदा ही हर पल खुशियों से महकता रहें।
मैं ऐसी बगिया में खुशियों के फूल सदा ही खिलाऊं ।।
एक स्त्री पुरूष को समझ पाती जब
धरा पर जब-जब एक स्त्री पुरुष को समझ पाती ।
तभी स्त्री अपना और पुरुष जीवन सफल बनाती ।।
स्त्री को पुरुष के मन की बात को समझना में होगा ।
नहीं तो अपने जीवन में नरक उनको भोगना होगा ।।
पग-पग पर स्त्री को सच के साथ बढ़ना होगा ।
स्त्री को पुरूष की परछाई बनकर चलना होगा ।।
पुरूषों को भी स्त्री का मान-सम्मान करना होगा ।
जीवन में सदा ही एक-दूसरे को समझना होगा ।।
जब नारी को पुरूषों ने जीवन में समझा होगा ।
तब ही तो स्त्रियों ने जग में इतिहास को रचा होगा ।।
स्त्री से ही पुरूष का जग में जय-जयकार होगा ।
साथ चलेंगे जब दोनों तब ही नया इतिहास लिखा होगा ।।
आतंकवाद
दुश्मन जो करते आतंकी हमला ,
उनकी सोच में होता बड़ा ही घपला ।
आंतकी हमला बड़ा कायराना काम ,
फैलाते आतंक रब का नहीं लेते नाम ।।
सदा रहती उनके अन्दर हैवानियत ,
भूल जाते सब अपनी रूमानियत ।
नस-नस में सदा रहता उनकी खोट ,
देश की खातिर उनको देनी होगी चोट ।।
आतंकी खेलते दूसरों के खून से होली ,
वचन उनके ऐसे जैसे बंदूक की गोली ।
आतंकी का बस काम आतंक फैलाना ,
सभ्यता का नहीं होता पास कोई पैमाना ।।
दुश्मन के फन को अभी हमें कुचलना होगा ,
देश को अपने आतंकवाद मुक्त बनाना होगा ।
देश हमारा हमको प्यारा अपनी जान से प्यारा,
हमको अपने देश में आतंकवाद कभी नहीं गवारा ।।
पहलगाम हमला
पहलगाम का दृश्य देखकर ,
देखो कैसे मेरा मन ले रहा हिलोर ।
ज़ालिम दुश्मन ने मारा सबकों घेरकर ,
दुश्मन ने नहीं छोड़ा बूढ़ा,जवान,किशोर ।।
दुश्मन ने पूछा क्या आपका धर्म ,
तुम करते हो अपना कौन सा कर्म ।
दुश्मन ने पूछ-पूछ कर सबको मारा ,
अपनी कौम को बदनाम किया सारा ।।
भारत के पहलगाम की प्यारी घाटी ,
स्वर्ण से भी सुन्दर लगती प्यारी माटी ।
दुश्मन कितना घात लगाकर कब से बैठा ,
हमने जान लिया दुश्मन में कितना ऐंठा ।।
जान लेकर दूसरे की तुझको क्या मिला ,
जात-पात का अच्छा नहीं शिकवा गिला ।
दूसरे की जान को अपनी जान समझ ,
तेरे जग में सारे काज जाएंगे सुलझ ।।
नेक/विवेक
नेक विचार करते सबकी मंजिल पार,
कभी भी मुश्किल से जीवन में मत हार ।
विवेक से कर अपने जीवन को बसर,
सारे लोग जग में मानेंगे तेरा भी असर ।।
तेरे अपने जीवन में खुशी हो या दुख,
बन्दे अपनों से कभी नहीं मोड़ना मुख ।
सदा जीवन में अपने कर तू नेक काम,
सारे जग में सदा होंगा तेरा भी नाम ।।
जिन बन्दों की होती जग में नेक राह,
ऐसे बन्दों की होती सदा ही अच्छी चाह ।
नेक राह जीवन में होती मंजिल का सार,
खुशियां होगी तेरे अपने घर आंगन द्वार ।।
जग में मानव-मानव होता एक समान,
नेक विचार रख तेरा भी होगा कल्याण ।
नेक विचार से जीवन हो जाता सफल,
ऋषि-मुनियों की बातों पर कर अमल ।।
तू बन्दे जीवन में बन अपने नेक ,
तेरे काम बनेंगे सारे जग में अनेक ।
नेक दिल नेक विचार बनेंगे तेरे काम ,
नेक विचार जन्म-मरण की मुक्ति धाम ।।
सिसकियों से स्वर तक
नारी तेरी सिसकियां,कोई समझ नहीं पाया ।
नारी होती जब गर्भवती,तब से कहर ढाया ।।
नादान करें गर्भ की जांच,ढुढते कैसी काया ।
गर्भ में तुझे तेरे अपने ही,सहन नहीं पाया ।।
बन्दे जग में नारी ही बढ़ाएं,वंश की बेल ।
क्या समझे आज मानव,नारी की माया ।।
नारी से नर के जीवन की,दिन और रात ।
मानव नादान,नारी को समझ नहीं पाया ।।
बन्दे सदा ही नारी होती,ममता की देवी ।
धन दौलत में जीवन,अपना क्यों भरमाया ।।
नारी बिन जीवन पशु समान,कहते वेद पुराण ।
बन्दे नारी से ही तूने,ये अपना जीवन पाया ।।
इतिहास भी कहता,नारी पर सदा हुए जुल्म ।
मानव ने नारी को जिंदा चिता में जलाया ।।
आज की नारी अबला नहीं,बनीं वह सबला ।
आज की नारी से ही जग में विकास आया ।।
नारी : सिसकियों से स्वर तक
नारी तेरी सिसकियां,कोई समझ नहीं पाया ।
नारी होती जब गर्भवती,तब से कहर ढाया ।।
नादान करें गर्भ की जांच,ढुढते कैसी काया ।
गर्भ में तुझे तेरे अपने ही,सहन नहीं पाया ।।
बन्दे जग में नारी ही बढ़ाएं,वंश की बेल ।
क्या समझे आज मानव,नारी की माया ।।
नारी से नर के जीवन की,दिन और रात ।
मानव नादान,नारी को समझ नहीं पाया ।।
बन्दे सदा ही नारी होती,ममता की देवी ।
धन दौलत में जीवन,अपना क्यों भरमाया ।।
नारी बिन जीवन पशु समान,कहते वेद पुराण ।
बन्दे नारी से ही तूने,ये अपना जीवन पाया ।।
इतिहास भी कहता,नारी पर सदा हुए जुल्म ।
मानव ने नारी को जिंदा चिता में जलाया ।।
आज की नारी अबला नहीं,बनीं वह सबला ।
आज की नारी से ही जग में विकास आया ।।
तुम रूठा न करो
तुम रूठा न करो मेरी जान ।
तुमसे ही मेरी ये प्यारी शान ।।
तुम बिन मन मेरा नहीं लगता ।
तुम हो मेरी सुबह और शाम ।।
तेरे बिना मैं रहता हूं प्यासा ।
तुम मेरे जन्मों की हो प्यास ।।
तुम बिन मिलता नहीं कहीं चैन ।
तुम हो मेरे जीवन की शान ।।
मैं तेरे ख्यालों में खोया रहता ।
तुम से ही मेरा जग में मान ।।
तुम से ही मेरे दिल के अल्फाज़ ।
तुम ही हो मेरी कविता का ज्ञान ।।
जीवन चार दिन का रैन-बसेरा ।
तू प्यार कर ले, कहना लें मान ।।
छोड़ दें हम-तुम अपने गिले-शिकवे ।
प्यार की तेरी-मेरी बन जाएं मिशाल ।।
भीम पुकार
आ जा आ जा रे आ जा आ जा रे
तुम को पुकारे सबका प्यार ,
सब राह देखें तेरी चाहत की,
तुम को पुकारे मेरा प्यार ।
आ जा आ जा रे आ जा आ जा रे
तुम को पुकारे सबका प्यार
इतने दुखों को कोई सहन नहीं पाया ,
अब तेरे मीत क्या दुश्मन भी तेरे गुण गाया,
दुश्मन भी रहेगा तेरा सदा ही गुनहगार।
तुम को पुकारे सबका प्यार
आ जा आ जा रे आ जा आ जा रे
तुझको पुकारे सबका प्यार
वतन की मिट्टी में मिला दी अपनी हस्ती,
बेसहारों की लगा दी पार तूने कस्ती,
भारत क्या तुझको पुकारे ये संसार।
तुमको पुकारे सबका प्यार
आ जा आ जा रे आ जा आ जा रे
तुम को पुकारे सबका प्यार
इतने युगों से कोई नहीं आया,
जात-पात की बेड़ियां,कोई काट नहीं पाया,
कांटे सबके बंधन,बने मुक्ति के द्वार।
तुम को पुकारे सबका प्यार
आ जा आ जा रे आ जा आ जा रे
तुम को पुकारे सबका प्यार
बना बेदर्दी जमाना, ढूंढे मेरी निगाहें,
ढूंढे सबकी सांसें मेरा मन तुम को पुकारे,
तुमको पुकारे, करते हैं विनती बारम्बार।
तुम को पुकारे सबका प्यार
आ जा आ जा रे आ जा रे आ जा रे
तुम को पुकारे सबका प्यार
भीम तू ही है,जग में सबसे महान,
तेरी महिमा गाए धरा और आसमान,
विचार बने तेरे सबके स्वर्ग का द्वार।
तुम को पुकारे सबका प्यार
आ जा आ जा रे आ जा आ जा रे
तुम को पुकारे सबका प्यार
बेटी का दर्द
मैं अपने रब के स्वर्ग की प्यारी परी,
हर पल मेरी खुशियों से झोली थी भरी ।
सुना था मैंने भारत ऋषि मुनियों का देश ,
मैं भी पैदा होना चाहती थी ऐसे देश ।।
अपनी मां के गर्भ में जब मैं आई,
ऐसा लगा मुझको मेरी किस्मत सोई ।
जब जाना अपनों ने गर्भ में मैं छोटी परी,
तब आंखें अपनों की आंसुओं से भरी।
अपने ही मुझको गर्भ में रहे थे मार,
मेरे प्यारे रब थे जग में सहारा हमार।
प्रभु की लीला थी मैं गर्भ से हुई बहार,
कटु वचनों का मां, मुझ पर करें प्रहार।।
चेहरा देखकर मेरा सब हो गए परेशान,
जैसे चली गई उनके सांसों की जान।
मैं भी अपनों की हालत सब रही देख,
मैं सब देख रही थी रब के सारे लेख।।
मैं घर से अपने जब निकलती हूं,
मैं भेड़ियों की ऑंखों में अखरती हूं।
कुछ मेरी राह में कुत्ते आ ही जाते हैं,
कुछ नर कुत्ते बदन मेरा नोच खाते है।।
रब ने ऐसे नहीं लिखें थे मेरे लेख,
रब ने बनाएं थे मेरे सुंदर अभिलेख।
आगे ओर क्या लिखूं मैं अपनी कहानी,
किसी ओर दिन सुनना मेरी तुम जुबानी।।
बिलाल
अपनी मां का सबसे प्यारा लाल ।
कहती जिनको जनता बिलाल ।।
काम जिसके जग में निराले ।
जिसकी कौम से मंदिर शिवाले ।।
सहारनपुर में जन्मा एक नया कवि ।
उस पर दया करता प्यारा रवि ।।
दिल में रहता सदा उसके प्यार ।
दुश्मनों को भी मानता अपना यार ।।
उसने मुझमें न जाने क्या देखा।
उसने कैसे बनाया मेरा लेखा ।।
बिलाल छूएगा धरती और आसमान ।
देश भक्त देखा मैंने उसका खानदान।।
बिलाल की बातों में जाने कैसा जादू ।
देखो रूप उसका लगता जैसे साधू ।।
बिलाल करता सबके मंगल की बात ।
नहीं देखता वो किसी की जात-पात ।।
ढलता सूरज
देखो शाम हो रही है,
सूरज भी ढल रहा है ।
कहती हैं शाम सबको,
प्यारे दिन बीत रहा है ।।
देखो उगता सूरज,
सबके मन को भाता ।
देखो ढलता सूरज,
सबको कह रहा है ।।
ढलते सूरज में ,
चैन कहां पाता ।
रात में किसी को ,
चैन कहां आ रहा है ।।
प्यारे ये जीवन भी,
सुबह और शाम है ।
तू रट ले राम नाम ,
यौवन तेरा बीत रहा है ।।
ढलता सूरज कहता सबको,
समय रहते,याद कर लें रब को ।
समझ लें जीवन सार ,
हाथ क्यों मल रहा है ।।
शाम के बाद प्यारे ,
निकलेगा दिन भी ।
तेरे जीवन की होगी भोर,
तू क्या सोच रहा है ।।
स्वस्थ व खुशहाल जीवन
निर्मल तन
खुशी जीवन
होत संयोग
स्वच्छता
जीवन सार
अपना लें
खुशहाल
बनेगा जीवन
स्वस्थ बन
जीवन में
कर लें योग
होगा खुश
तेरा जलवा
होगा जग में
होएं प्रसन्न
बेहतर
होगी दुनिया
देगा खुशी
सुखी जीवन
होएं पावन
जीवन तेरा
प्रसन्नता
विचारों में
लाएं ख़ुशी
हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम
हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम -2 ।
श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम ।।
सारी धरा भी हो गई पावन -2 ।
जन्म हुआ जब अयोध्या धाम ।।
प्यारा राम नाम जीवन आधार -2 ।
राम नाम लेकर बन जाते बिगड़े काम ।।
राम नाम की महिमा जग में न्यारी -2 ।
बन्दे राम नाम ले ले तू सुबह शाम ।।
राम नाम से हो जाती जग में जीत -2 ।
सब नर मुनि जन लेते जिनका नाम ।।
राम नाम शब्द जीवन डोर -2 ।
राम तेरे जीवन की डोर लेंगे थाम ।।
राम से ही सुर सरिता का जल -2 ।
राम नाम ही सबकी सांसों का दम ।।
राम नाम लेकर पापी हो जाते पार -2 ।
तीनों लोक भी लेते जिनका नाम ।।
नियम
आकाश में नहीं कोई नियम
पक्षियों में प्यार रहता कायम
आज का मानव बनाता नियम
खुद चलता नहीं अपने नियम
मानव बनाए दूसरे के लिए नियम
बारी आएं अपनी छोड़ देता नियम
नियम तो बस ईश्वर ही बनाता
मानव क्या उस पर चल पाता
ईश्वर नियम करना सबका मंगल
फिर घर-घर में हो रहा क्यों दंगल
ईश्वर नियम सदा मानव से कहता
तू प्यार से धरा पर क्यों नहीं रहता
प्यार से रहना सबसे अच्छा नियम
संतों की वाणी चलना इस पर हरदम
जब तक तू जग में बनाएंगा नियम
तब तक चलम चला होगा तेरा नियम
जाने वो कौनसा देश
प्यारा जाने वो कौन-सा देश
चलें गएं कहां तुम दूसरे देश
तुम आ जाओ अपने स्वदेश
क्यों भाया तुमको ऐसा देश
तुम्हारी याद हमें बहुत आती है
तेरी याद दिल से नहीं जाती है
ख्यालों में हर पल खो जाती हूं
आंखों में तेरा अक्स सदा पाती हूं
देख लें अब तो आ गया सावन
सावन भी हो रहा है मनभावन
अब जाने कहां चले गए हो तुम
प्यारे पिया अब कहां हो गए गुम
धरा पर अब छाई है खुशियां
पास आकर संवार दो दुनिया
मुझसे अब हवा भी कहती है
मेरे कानों में तेरे गीत गाती है
जल
सबके जीवन जल होता आधार
प्यारे जल बिना है जीवन लाचार
जल ही होता सदा जीवन का सार
जल से मानव की हो जाती हार
जल के बिना चून होता बेकार
जल बिना जीवन होता अंधकार
जल जग में होता धरा की शान
जल ही होता है जीवन की जान
प्यारे जल बिना जीवन होता कहां
जल की कीमत समझ रहता कहां
जल बिना जीवन होता अंधकार
जल से होती सदा जय-जयकार
जल से ही तू जीवन में अपने फूला
मान रख सबके जल का क्यों भूला
जल से करते हैं व्यक्ति की पहचान
याद रख जीवन में सदा तू भगवान
जल से ये धरती और आसमान
जल बिन ये धरा होती रेगिस्तान
जल बिना है सूना ये जग सारा
जल से प्यारे सबकी जीवन धारा
विक्रम संवत
देखो प्यारे नव संवत्सर की शुभ वेला आई
नव संवत्सर की वेला धरा पर खुशियां लाई
चैत्र शुक्ल पक्ष से शुरू होता नव संवत्सर
भूली बिसरी बातें छोड़ देता नए अवसर
तिथि है यह प्यारी सबके मन को भाती
जीवन के मधुर गीत सबको यह दे जाती
कहते इस दिन ब्रह्मा ने किया सृष्टि निर्माण
जाने यह दुनिया सारी मिलते ऐसे प्रमाण
संवत्सर के गर्भ में छुपे होते प्यारे सब माह
नव संवत्सर दिलों में सबके भर देता चाह
सब मिल नर और नारी गाते खुशी के गीत
नव संवत्सर में सब बन जाते सबके मीत
इस दिन पृथ्वी सूर्य का चक्कर पूरा कर लेती
प्यारी प्रकृति ही प्यारे सबके कष्टों हर लेती
सप्तर्षि संवत सबसे प्रसिद्ध प्राचीन संवत
सभी ऋषि-मुनि भी करते इसकी संगत
होली
मैं हर रोज जैसे ही अपने स्कूल जाता
मन मेरा स्कूल के बच्चों के संग भाता
स्कूल के बच्चें मेरे स्कूल की शान
स्कूल में प्यारे बच्चे ही मेरी आन
मैं खुशी से स्कूल में सेल्फी लेने लगा
बच्चों ने मुझको अबीर गुलाल लगाया
मुख मेरा ऐसा हुआ जैसे बंदर देखा
मैं ऐसे बन गया जैसे फिल्मों की रेखा
बच्चों के संग मैं भी बच्चा बन गया
बच्चों पर मुझको आ रही थी दया
खुशियों से भर गया स्कूल आंगन
होली में था बच्चों का मन पावन
बच्चों संग मैंने रंगों से खेली होली
अलबेली थी हम मस्तानों की टोली
मिलकर खुशियां मना रहे थे अपार
होली ही भारत का पवित्र त्योहार
नारी हर युग में युग निर्माता
नारी हर युग में भी युग निर्माता रही
वह सुख दुःख में सदा ही साथ रही
नारी मुश्किल में भी सदा आगे बढ़ी
वहीं दुश्मन की छाती पर सदा चढ़ी
ममता में भी सब कुछ वार किया
हर पल जीवन को नई धार दिया
नारी सदा जीवन का आधार रही
नारी नर पर सदा अपना वार रही
नारी के बिना जीवन में सार नहीं
नारी के बिना जीवन में प्यार नहीं
महिमा नारी की ये जग सारा गाता
नारी से ही जीवन में सब कुछ भाता
नारी बिना मानव का जीवन अधूरा
नारी पूरा करती मानव जीवन सारा
नारी की गाथा भी गाते वेद पुराण
नारी ही करती मानव का निर्माण
नारी शब्द में ही छिपी नारी की शान
सदा नारी रही हर युग का अभिमान
नारी ईश्वर का है जीवन में वरदान
नारी ही जीवन में सबका अरमान
बाबुल के अंगना की यादें
मैं चली बाबुल का घर छोड़
ओ मैया मुझे बाबुल का घर प्यारा लगे
कैसे भुलाऊंगी मैं बचपन की वो यादें
याद करके रोएंगी मेरी मैया आंखें
मैया याद आएगा बाबुल का वो अंगना
बाबुल की वो बातें रह जाएगी बस सपना
ओ मैया बापू मेरा कैसे रखते थे ध्यान
कैसे जीया जाए जीवन में देते थे ज्ञान
बाबुल की बाहों के वो प्यारे झूले
याद है मुझको नहीं समाऊ थी फूलें
मैया बाबुल से कहना जाए मुझको भूल
कभी थी प्यारी तेरी बगिया की वो फूल
ओ मैया तू है प्यारी ममता की देवी
बचपन में बनकर रही तू सदा मेरी सेवी
ओ मैया मेरे बाबुल के अंगना का वो कोना
हर पल था अपना हर दिन था अपना सोना
ओ मैया दिल में बसी रहेगी बस वो यादें पुरानी
यादें बनकर रह जाएगी बस बचपन की कहानी
छूट रहा है आज मैया ये बाबुल का अंगना
आंसुओं से भरें है मेरे बाबुल के नयना
ओ मैया कैसी है ये जग की पराई रीत
एक से बिछड़ना है जग में एक से है प्रीत
उड़ान
पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों में उड़ान होती है
दम रख हौसलों में हौसले व्यक्ति की पहचान होती है
आसमान में तू ऊंची उड़ान भर मंजिल मिलेगी तुझे
डर मत किसी से तू बंदे एक दिन मिलेंगे फूलों के गुच्छे
मत कर जीवन में अपने आलस्य कर्म सदा तू करता चल
तू हर पल सदा कोशिश कर हर मुश्किल का निकलेगा हल
ख्वाब तेरे एक दिन पूरे होंगे जो तूने दिल में अपने संजोए
कहता इतिहास जिसने सपने संजोए उसके सदा पूरे होएं
तू हार मत मान जीवन में अपने जीत तेरी एक दिन होगी
उठ चल कर्म कर तेरी सदा ही जग में जय-जयकार होगी
आशा की मन में ज्योत जला लक्ष्य पर दे तू अपने ध्यान
एक दिन सदा ही तेरे चर्चे होंगे गली-गली और सारे जहान
सत्य की डगर सदा तू चल खुशी का इजहार तुझे होगा
चट्टान जैसा हौसला तू रख तुझे मंजिल का दीदार होगा
अपने मन में धीरज रख समय पर तू चखेगा सब्र का फल
मुश्किलों से पार होकर ही निकलता सदा मंजिल का हल
कुछ कर गुजर जाने का मन में तू अपने दीप जला रख
सदा मंजिल पाने के लगन,उत्साह,उमंग,हौसले तेरे पंख
अपने मन का परिंदा मंजिल पाने को आंसमा में उड़ने दो
सफलता जीवन का सार तुम अपनी उड़ान मत रुकने दो
विवाह ( हाइकु )
जाने सब
होते विवाह
शुभ घड़ी
विवाह
एक संजोग
होते खुश
जिनकी
होती शादी
होते खुश
विवाह
दो दिलों
का बंधन
विवाह
भगवान का
वरदान
सब कहते
होती दुआ
बने जोड़े
आशीष
मिले रब का
हो शादी
परिणय
दो आत्माओं
एक मिलन
मन का सूना साज
देख लो मन का सूना साज
छुपे जिसमें बहुत से राज़
मन भाएं थे उसके अंदाज
प्यारे थे वो हमें कल भी
प्यारे हमें है वो आज भी
सब बातें याद हमें आज
वो सूरत थी प्यारी मोहनी
छुपी सूरत उनकी सोहनी
नाम था प्यारा उनका नाज
भाती थी उनकी हमें सब बातें
याद में उनकी कटती थी रातें
उसने संवारें थे अपने कई राज
हालें दिल ये किसको सुनाएं
अब भी दिल उसके गीत गाएं
अब भी वह मेरे सिर का ताज
अगर तुम ना होते
जीवन में मेरे अगर तुम ना होते
हमारा साथ नहीं कभी कोई देते
जीवन के मेरे सुंदर सफर ना होते
तूने सदा ही साथ दिया अपना
साथ तेरा बन गया मेरा सपना
सपने अपने ना कभी पूरे होते
इस मेरे जीवन के सुंदर सफर में
मेरा साथ दिया तूने हर डगर में
जीवन में अपने ना होते उम्दा रास्ते
किया आज मैंने मुकाम जो हासिल
मेरी किश्ती के रहें तुम सदा साहिल
साथ हमारा ना जीवन में तुम देते
ये इतिहास बन गईं अपनी कहानी
गाएंगे इसे जीवन में अपनी जुबानी
मुझमें सफलता के तुम बीज ना बोते
धागा बांधा प्रीत का
ओ भैया मेरे ओ प्यारे भैया मेरे ।
मेरे भैया एहसान मुझ पर तेरे ।।
मैंने तुझको धागा बांधा प्रीत का ।
सपना मेरा तुम हो मेरी जीत का ।।
भैया रिश्तों की बंधी तेरी मेरी डोर ।
बहन भाई का रिश्ता क्या जाने ओर ।।
मेरे भैया मांगूं अपने रब से ये दुआ ।
अपने रिश्तों से ना खेलें कभी जुआ ।।
मेरे प्यारे भैया सलामत रहें तू सदा ।
तुझ पर रब की दुआ रहें सदा फिदा ।।
भैया राखी का धागा नहीं है कच्चा ।
मेरे भैया रिश्ता है ये तेरा मेरा पक्का ।।
रिश्ता भाई बहना का जग में मिशाल ।
जिसको होते बहन-भाई वो जग में निहाल ।।
योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री हो तो योगी जैसा।
काम करें कोई योगी जैसा।।
योगी करता है क्रम में विश्वास।
योगी का है गोरखपुर निवास।।
प्रदेश में बहाएं योगी विकास की गंगा।
योगी के राज में नहीं होए कोई दंगा।।
योगी करें पूजा गोरखनाथ की।
रक्षा करें योगी नारियों के सम्मान की।।
योगी है प्रदेश में दूसरी बार मुख्यमंत्री।
चाहे सब हर बार हो योगी मुख्यमंत्री।।
योगी चाहे प्रदेश में सबका मंगल।
योगी की बात है प्रदेश में अटल।।
चोर लुटेरे प्रदेश से हो रहे बगल।
योगीराज में सबका है जीवन सरल।।
योगी ने बोई कर्मों की अच्छी फसल।
योगी की बात पर सब करें अमल।।
योगी का प्रदेश तो है सबसे निराला।
योगी को सब माने प्रदेश का उजाला।।
योगी राज में बना राम मंदिर।
इतिहास बनाने में है योगी माहिर।।
योगी ही बनें देश के सिरमौर।
प्रातः काल वेला करें पुकार चहुंओर।।
देश की जनता कर रही पुकार।
प्रधानमंत्री योगी हो अबकी बार।।
आरज़ू मेरी
बस दिल में यही है आरजू मेरी
खुश रहें सदा जिंदगी मेरी तेरी
तू है मेरे बचपन का प्यारा यार
मुझे मिलता रहा तुझसे प्यार
तूने ही मेरे जीवन को संवारा
तुम्से ही मेरे जीवन का नजारा
तूने सदा ही जान मुझपे वारा
सदा अमर रहें दोस्ताना हमारा
याद मुझको वो बचपन की बातें
साथ रहें हम सदा दिन और रातें
रब से मांगे सदा हम प्यारी दुआ
रिश्तों को नहीं बनाएं कभी जुआ
कभी ना हो जहां में हम तुम जुदा
दोस्ती की मिसाल दे हमारी खुदा
बस यही आरजू मेरी मेरे खुदा से
कभी ना हो हम तुम जुदा जहां से
सच्चे बालवीर
हम प्यारे नन्हें नन्हें बच्चे।
हम होते मन के सच्चे सच्चे।।
हमसे ही है ये सारा जहां ।
हम जहां है खुशियां वहां ।।
लिखेंगे हम भारत की तकदीर ।
हम दुश्मन का सीना देंगे चीर।।
हम भारत के सच्चे वीर।
हम ही भारत की जागीर ।।
हम काॅटेगे गुलामी की जंजीर ।
हर पल कहता अपना जमीर ।।
हम ही हैं सच्चे धर्मवीर ।
हम नन्हें प्यारे कर्मवीर।।
सोनू मोनू और कहता शकील ।
भारत को न होने देंगे जलील।।
हम ही भारत के सच्चे शूरवीर ।
दुनिया कहती सदा हमें बालवीर ।।
देखो सुहावना मौसम आया है
देखो सुहावना मौसम आया है
सबके दिल को ये मौसम भाया है
प्यारी बसंत बहार धरा पर छायी
मन को भाती प्यारी बहार भायी
रातें पतझड़ की थी बड़ी कातिल
नहीं मिला मुझे राह में कोई साहिल
याद मुझको भूली-बिसरी सब बातें
आया मौसम प्यारा सब भूल गयी
हर पौधे पर अब प्यारी कली खिली
खेतों में मन भायी सरसों पीली-पीली
देखो वसुंधरा भी लेती अब अंगड़ाई
डगर-डगर पर देखो प्यारी बहार छायी
बसंत बहार देती प्यारे सबको ज्ञान
सच की राह चल बन्दे सदा तू जान
हर मुश्किल का प्यारे जीवन में हल
सुहाना मौसम सबके जीवन में लायी
मां श्रीयादे आरती
मां तुम्हें सत् सत् नमन हमारा
मां श्रीयादे तुम ज्ञान की देवी
मां तुम्हारे गुण गाए जग सारा
मां तुम हो सबकी आराध्य देवी
तुम रही सदा प्रहलाद की सेवीं
प्रहलाद का ज्ञान से जीवन संवारा
तुम्हारी शक्ति की महिमा जग में अपार
प्रहलाद का जीवन तुमने कर दिया पार
मां तुमसे ही धरा पर ये सारा नजारा
सत् पर चलने का तुमने सदा दिया नारा
मां तुम्हारी वाणी में थी अमृत की धारा
मां दीन-दुखियों पर जीवन तुमने वारा
भारत भूमि नमन तुम्हें
मेरी भारत भूमि नमन तुम्हे हमारा
तुमसे ही ये मेरा प्यारा जीवन सारा
माटी से तेरी पैदा हुए वीर शिवाजी
तुझ पर लुटा देते हैं प्राणों की बाजी
गंगा और यमुना आंचल में सदा तेरे खेलें
वीरों ने न जाने कितने सितम यहां झेले
हे भारत भूमि तेरी महिमा जग में न्यारी
खुशबू ऐसी इसमें सबकों जान से प्यारी
कण कण में इसके हर पल प्यार बसा
सच्चे वीर जाने इसकी खुशबू का नसा
वीरों से ही इसका गुलशन सदा महका
चूम कर करते सब सदा इसको सजदा
भारत भूमि की जग में शान निराली
इस पर मनाते सब ईद और दिवाली
भारत भूमि को नमन सौ बार हमारा
जान जब-तक है करते रहेंगे जयकारा
अधूरे जीवन की कल्पना
तेरा मेरा जीवन अधूरे जीवन की कल्पना
सोच ले प्राणी क्या यहां तुझे सदा रहना
अधूरा रह कर ही हो जाता जीवन समाप्त
जीवन में प्यारे तेरे रह जाता बहुत अज्ञात
जहां में चलता सदा तू अकड़ के साथ
अंत समय में तेरे क्या लगेगा हाथ
मानव सत्य की राह पर क्या तू चल पाया
राह सत्य की छोड़ झूठ तूने सदा अपनाया
मानव जो समझें जीवन में बड़ा विद्वान
प्रभु की नजर में मानव वह बड़ा नादान
अरे बंदे जीवन तेरा कोरे कागज़ जैसा
हर पल तेरे सदा काम आए कोई दूजा
पेड़ पौधों के बिना जग में जीवन अधूरा
रे जीवन तेरा हर कोई करें इसको पूरा
शिक्षा बिना मानव जीवन की कल्पना अधूरी
जीवन तेरा जैसे मृग ढूंढें जंगल-जंगल कस्तूरी
हे मां शारदे
हे मां शारदे
हमको दे दो स्वर का वरदान
स्वर का वरदान मिलकर
मिल जाएगा सम्मान
हे सुरों की देवी
विनती है तुमसे हमारी
इच्छा कर दो हमारी पूरी
सुरों का देकर हमको ज्ञान
हे शारदे मां
विनती है तुमसे बारम्बार
लगा दो मैया खेवा हमारा पार
बढ़ा दो तुम जग में हमारा मान
हे मां हंस वाहिनी
मझधार में है हमारी नैया
पार कर दो हमारा खवैया
सुर देकर कर दो एहसान
सुभाष चन्द्र बोस
उन्हें प्यारा
भाएं था देश
ऐसे सुभाष
नहीं प्यारी
उनको गुलामी
आजाद सोच
उनका नारा
जग सारा गाता
जय हिन्द
महान नेता
रहेंगे प्रणेता
नेता जी
वीर साहसी
नहीं थें आलसी
जानता जग
देश सेवा
पार किया खेवा
आप हुए शहीद
उच्चें तेवर
जान देकर
हुआ आजाद
उनका खून
दे गया आजादी
हुए शहीद
कारगिल
मिट जाएंगे सदा देश पर हम।
जब तक तन में है हमारे दम ।।
ये देश है प्यारा हम सबका ।
नहीं झूकने देंगे सर देश का ।।
जम्मू से लेकर कन्याकुमारी तक।
मिटने ना देंगे भारत की दमक ।।
ये देश है सबकों जान से प्यारा ।
दुश्मन को देंगे हम जवाब करारा ।।
कारगिल में अमर हो गए वीर अनेक।
हर भारतीय करें सदा उनका अभिषेक।।
स्वर्ग से प्यारा हमें अपना प्यारा देश।
मिलकर रहेंगे हम नहीं करेंगे कलेश ।।
भारत की मिट्टी में सदा हरदम तुझे रहना।
“खुराना”आन बान को नहीं कभी डुबोना ।।
रक्षा करेंगे हम सब सदा जान है जब तक ।
लेखन की रौशनी से जलाते रहेंगे अलख।।
हमारी शान प्यारा हिंदुस्तान
हम सब की शान प्यारा हिंदुस्तान
भारत का सारे जग में ऊॅचा स्थान
प्यारा सबका हिंदुस्तान सबकी जान
इस पर जन्में लैला,मजनू,हीर,रांझें
मिटा गए खुद को गीत उनके गा गए
याद करेगा भारत दे गएं प्यार का पैगाम
भारत की ये प्यारी धरा उगलें सोना
यहां का महकें सदा हर कोना-कोना
सबकों को है भारत पर अभिमान
ऋषि-मुनियों की ये प्यारी तपोभूमि
वीरों को जान से प्यारी भारत भूमि
जाने कितने वीर हुए इस पर बलिदान
यहां का हर बच्चा इस पर मरने वाला
यहां सब प्राणी भारत की जपते माला
सब इस पर देते अपने प्राणों का दान
जब-जब भी दुश्मन ने ललकारा है
भारत के वीरों ने दुश्मन को फटकारा है
दुश्मन के आगे वीर सीना देते अपना तान
ये दुनिया चलती रहेगी
सदा ही ये दुनियां चलती रहेगी
मिलकर सदा तू साथ सबके चल
एक दिन जिंदगी तेरी भी थमेंगी
सदा ना रहा है यहां कोई
सांसों की डोर का पता नहीं
ना जाने कब ये रूक जाएगी
सुख और दुख जीवन के दो पहिए
खुश होकर सदा तू दोनों को सहिए
खुशियां घर आंगन सदा तेरे सजेगी
सदा ना रहा है यहां कोई मुखिया
आनी और जानी है ये दुनियां
यहां हर पल दुनिया नई बसेगी
चलो मन से चले महाकुंभ में
चलो मन से चले महाकुंभ में
तन और मन पवित्र करने चले
मेरी आस्था इस हवन कुण्ड में
गंगा जमुना और सरस्वती का संगम
मिट जाएंगे पाप सबके जन्म-जन्म
है आस्था मेरी प्यारी इसी धर्म में
सबकों मिलेगा ऋषि मुनियों का संग
सत् का देते ज्ञान मन नहीं करना भंग
धन्य होगा सबका जीवन त्रिवेणी घाट में
धर्म की नगरी प्यारी मन भाएं सबकों
कट जाएंगे पाप मिलेगा पुण्य तुमको
सबके जीवन का सार उसके कर्मों में
गंगा,जमुना,सरस्वती को कर दो अर्पण
अपना सब कुछ कर दो तुम तर्पण
सदा ही जीत होगी तेरी इस जहां में
महाकुंभ चल रहा है धर्म की नगरी
धर्म की नगरी में ठहरी सत् की गगरी
चलों सत् की डगर सदा अपने जीवन में
मकर संक्रांति
फसलें लहराती
खुशियां छा जाती
मकर संक्रांति
खाते खिचड़ी
ठंड होती तगड़ी
प्यारा त्यौहार
गर्म कपड़े
सदा सर्दी पहने
रखें बचाव
खुश रहें
जीवन में अपने
सबके साथ
सदियों पुराना
त्योहार अपना
मकरसंक्रांति
खरमास समाप्त
होती खुशियां प्राप्त
बनते काम
गंगा स्नान
करते विद्वान
मिलकर सब
मेरे राम सबके राम ( गीत )
मेरे राम मेरे राम सबके राम
राम ने खाए सबरी के बेर
मिट गए जन्म-जन्म के फेर
सबके काज संवारे राम
जग का पालन करते राम
गांधी की थी प्यारी धुन
रघुपति राघव राजा राम
आओ गाए राम की धुन
बन जाएंगे बिगड़े काम
राम नाम की धुन गाकर
गांधी हुआ सब का प्यारा
राम नाम है जीवन सागर
राम नाम जीवन के चारों धाम
राम नाम लगती प्यारी धुन
रघुपति राघव राजा राम
आओ गाए राम की धुन
तुम लो राम नाम सुबह-शाम
राम नाम भारत की है शान
राम नाम पर मिट जाए आन
एक राम है दशरथ का प्यारा
एक जगत के पालन करते राम
राम नाम से सफल हो जाए जीवन सारा
और ना भाए मुझे कोई नाम
आर्दश है सबके हमारे श्री राम
मर्यादा पुरुषोत्तम हैं श्री राम
कौशल्या के है राज दुलारे राम
लक्ष्मण के भी है प्यारे राम
पास मेरे जो बस राम के नाम
पापी भी तर जाए लेकर नाम
आओ तिलक करें उस माटी से
जिसमें खुशबू मेरे श्री राम की
प्रकृति भी धन्य हो रही है
महिमा गाकर श्री राम की
त्याग,तपस्या,शील है राम
जागो-जागो
जागो जागो रे मेरे हिन्द के निवासी
प्यारा भारत है हम सबका
हम सब हैं भारत के वासी
तू इतिहास को अपने ले पढ़
ना बन तू जीवन में अनपढ़
शिक्षा को पाकर तू बन जा विश्वासी
मात-पिता के चरणों में चारों धाम
रहेगा चरणों में उनके बनेगें बिगड़े काम
करेगा क्या तू जाकर अयोध्या और काशी
कर्म है प्यारे सबके जीवन का सार
बिना कर्म के नहीं होगा बेड़ा पार
राह ना बना तू प्यारे अंधविश्वासी
पढ़ लो मेरे प्यारे भैया और बहना
पढ़ लिख कर इतिहास बना अपना
ना बन दास भैया ना बन बहना दासी
जीवन में करने से पहले तू सोच ले
समय तुझे ना बार-बार मिले
जीवन को ना बना अपना उदासी
भारत माता की तू करले सेवा
देश सेवा से बढ़कर नहीं कोई खेवा
नाम रहेगा तेरा बनकर जग में अविनाशी
मौन अधर
जिसके रहते मौन अधर
उनके होते हैं सुंदर सफर
कर्म होते जिनके नेक
पहचानते उनको अनेक
शान्ति है जीवन का सार
सबसे कर लो तुम प्यार
जो होते जीवन में संस्कारी
दुनिया होती उनकी सारी
मौन अधर बहुत कुछ कहते
सुनते जब समय पर कहते
मौन अधर होते ज्ञान के प्रतीक
मौन अधर को करती याद तारीख
विश्व हिन्दी दिवस
प्यारी हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा
सबकी प्यारी मेरी हिंदी भाषा
सारे जग में इसकी शान निराली
भाषा प्यारी हिंदी सबकी मतवाली
हिंदी भाषा भारत की पहचान
जगत गा रहा हिंदी का यश गान
हिंदी भाषा के प्यारे होते गीत
बोलें हिंदी भाषा को बन जाए मीत
विश्व पटल पर छाई प्यारी हिंदी
विश्व के माथे की हिंदी बनी बिंदी
विश्व मनाता इसका प्यारा गौरव दिन
शोभा बढ़ाते विदेशी शब्द मिलकर भिन्न
हिंदी के शब्द होते प्यारे फूलों सा गुच्छा
कबीर, रैदास ने माना हिंदी को अच्छा
हिंदी भाषा सब भाषाओं में महान
हिंदी के गीत गाता सारा जहान
बढ़ती ठंड से निजात कैसे ?
हम पाएं बढ़ती ठंड से निजात कैसे
सब काजू बादाम पिस्ते खाएंगे जैसे
भाई-बहनों बढ़ती ठंड है अपने चरम पर
सदा ही तुम रहना इंसानियत के धरम पर
सत् कर्म भी ठंड में तुम करते रहना
पल-पल जीवन में मदद करते जाना
ठंड में सबका सदा रखना तुम ख्याल
प्रभु जी भी तुम पर हो जाएंगे दयाल
सबके ठंड से बचने का सरल तरीका
गर्म कपड़े पहनने का सदा रखना सलीका
ठंड में तुम सुबह-शाम योगा करते रहना
कटु वचन ठंड में भी किसी से मत कहना
नारी वेदना
ओ मैया मैं तेरे गर्भ में हूं
तूने जब यह जाना तो
मारने की मुझको क्यों सोच रही है
मैया बता मेरा क्या कसूर है
ओ मैया बता मेरा क्या कसूर है
समय बहुत ही है बलवान
ओ बापू मेरे जब मैं हुई जवान
सारे रखते मुझपर अपनी आंखें तान
ओ बापू मेरा क्या कसूर है
पढ़ने जब मैं स्कूल जाती हूं
जग में अपने हो या बेगाने
सबकी आंखों में मै खलती हूं
हे जग वालों बताओं मेरा क्या कसूर है
घर से मैं जब कुछ करने निकलती
भेड़ियों की आंखें सदा मुझे तकती
कुछ नर जीवन में बन जाते कुत्तें
बताओ रब मेरे मेरा क्या कसूर है
ससुराल में घर से मैं जब जाती हूं
सासू हो ननद सब ताने है मारती
ससुराल में दहेज के सब है लालची
पैदा हुई हूं मैं जग में बेटी बन
पति मेरे बताओ मेरा क्या कसूर है
लेखक परिचय
नाम :– सुनील कुमार “खुराना”
पिता:– स्व० श्री जयपाल सिंह जी
माता:– श्रीमती नगीनी देवी जी
पत्नी:– श्रीमती बेबी रानी जी
पुत्री: साक्षी जी
पुत्री :खुशी ज्योति आर्य जी
पुत्री-:दिव्या ज्योति आर्य जी
पुत्री-:नैनसी ज्योति आर्य जी
पुत्र-:भानू प्रताप सिंह जी
दादा -: श्री चेतराम फौजी जी
दादी -:मुख्की देवी जी
ससुर-:श्री जगपाल सिंह फौजी जी
सासू-: श्रीमति चंदों देवी जी
शिक्षा:- स्नातक
विभाग:- शिक्षा विभाग
लिंग:-पुरूष
विवाहित:-हां
जन्मतिथि:- 02/05/1976
अनुभव :- 23
व्हाट्सएप्प मो० न०:-9719326142
मो० न०:- 9719326142
विपत्र:- suneelkumararya306@gmail.com
पद :- प्रधानाध्यापक
विद्यालय:- प्राथमिक विद्यालय बाधी
नियुक्ति स्थल:- सहारनपुर उत्तर प्रदेश
पत्राचार:– गांधी नगर ककराला
नकुड़ देहात
विकास खंड:- नकुड़
पिन कोड:- 247342
जनपद:- सहारनपुर
प्रदेश:- उत्तर प्रदेश।
राष्ट्रीयता:- भारत
प्रिय विषय:- हिन्दी
अभिरूचि:- नवाचार करना, कविता लेखन , गद्य लेखन,भजन (गीत) लेखन
मेरी उपलब्धियां-:
1. अब्दुल मोबिन सहायक डारेक्टर निदेशालय लखनऊ उत्तर प्रदेश से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस ऑनलाइन प्रतियोगिता 21 जून 2020 पर सम्मानित।
2. टीचर्स आफ बिहार ऑर्गेनाइजेशन से स्वतंत्र दिवस पर ऑनलाइन प्रतियोगिता 2020 में सम्मानित।
3. अन्तरराष्ट्रीय पर्यावरण पर 5 जून 2020 गुहार फाउंडेशन से ऑनलाइन सम्मानित।
4. अंतरराष्ट्रीय मूलनिवासी दिवस 2020 में 9 अगस्त 2020 में मूल निवासी संघ से सम्मानित।
5.संकल्प सर्वे भवंतु सुखिनः फाउंडेशन से 02 अगस्त 2020 में ऑनलाइन सम्मानित।
6. नवयुग कन्या महाविद्यालय राजेंद्र नगर लखनऊ से मेरा जीवन मेरा योग पर 2020 में सम्मानित।
7. रेडियो मेरी आवाज से कारगिल दिवस 2020 पर सम्मानित।
8.ACTIVELY PARTICIPATED IN THE NATIONAL WEBINAR ENTITLED “SELF -RELIANT INDIA: OPPORTUNITIES AND CHALLENGEES” 18JULY 2020
9.ACTIVELY PARTICIPATED IN THE NATIONAL WEBINAR ENTITLED “SELF RELIANT INDIA:OPPORTUNITIES AND CHALLENGEES”26 JULY 2020
SUCCESSFULLY COMPLETED ONLINE YOGA KE BIJ ON INTERNATIONAL YOGA DAY 2020 HELD ON 21 JUNE 2020 NAVODAY KRANTI KAITHAL KURUKSHETRA
10. ब्लॉक स्तरीय वार्षिक बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता 2022 में लेखा समिति सम्मान 2022 से सम्मानित
11.माय गवर्नमेंट भारत सरकार के द्वारा सरदार बल्लभभाई पटेल यूनिटी त्रिनिटी क्वीज समृद्ध भारत में पार्टिसिपेट करने पर 2023 में सम्मानित
12. नवोदय क्रांति परिवार से हिंदी दिवस 2024 पर सम्मानित।
13. आईसीटी की पाठशाला स्टेट आईसीटी अवेयरनेस फाउंडेशन से 14 जनवरी 2024 में सम्मानित।
14. डॉ दिव्या सिंहा निरंतर पब्लिकेशन से मार्च 2024 में सम्मानित।
15. नव प्रजा काव्य फाउंडेशन होली रत्न सम्मान 2024 से सम्मानित।
16. दिव्या ज्योति साहित्यिक संस्थान छत्तीसगढ़ से 2024 में होली मिलन पर सम्मानित।
17. शब्द प्रतिभा बहु क्षेत्र सम्मान फाउंडेशन नेपाल से अन्तरराष्ट्रीय हिंदी दिवस 2024 में नेबुल टैलेंट अवार्ड 2024 से सम्मानित।
18. अंतरराष्ट्रीय हिंदी संगठन नीदरलैंड से इसमें हिंदी दिवस 2024 पर सम्मानित।
19.शब्द प्रतिभा बाबा क्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल द्वारा 10 जनवरी 2024 को अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस पर हिंदी काव्य रत्न से सम्मानित
20. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2024 में शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल से अन्तरराष्ट्रीय महिला शक्ति कविता प्रतियोगिता 2024 में महिला शक्ति काव्य रत्न सम्मान 2024 में सम्मानित।
21. शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल द्वारा 21 फरवरी 2024 को मातृभाषा काव्य रत्न से सम्मानित।
22. महाकवि कालिदास साहित्यिक समूह 2024 में सम्मान पत्र से सम्मानित।
23. अपनी कविता वृद सीतापुर उत्तर प्रदेश भारत काव्य पाठ करने हेतु सम्मानित।
24. जो प्रज्ञा काव्य फाउंडेशन से बेटी रत्न सम्मान 2024 से सम्मानित।
25. राजस्थान फाउंडेशन से शब्दों की एकता की यात्रा में बेस्ट लेखक 2024 से सम्मानित।
26. प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा भारत से साहित्य की श्रीवृद्धि में सहयोग सम्मान अभिनंदन पत्र 2024 से सम्मानित।
27. हिंदी समर्थन मंच लोनी गाजियाबाद से महाकवि तुलसीदास सम्मान 2024 से सम्मानित.
28. साहित्य संगम बुक्स से प्रशस्ति पत्र 2024 से सम्मानित।
29. आईसीटी की पाठशाला ऑर्गेनाइजेशन अन्तरराष्ट्रीय पृथ्वी दिवस 2024 से सम्मानित।
30. भारतीय राष्ट्रीय कवि प्रतिभा साहित्य मां क से काव्य मनीषी सम्मान 2024 से सम्मानित।
31. वैदिक प्रकाशन से उत्कृष्ट सह लेखक सम्मान 2024 से सम्मानित।
32. दी आइडियल इंडियन बुक रिकॉर्ड 2024 में अंकित।
33. जीनियस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड 2024 में सम्मिलित।
34. अंतरराष्ट्रीय मदर्स डे 2024 पर JEC पब्लिकेशन से सम्मानित।
35. दिव्या ज्योति साहित्यिक संस्थान छत्तीसगढ़ से मातृ स्नेही कलमकार 2024 में सम्मानित।
36. अनुराग्यम् फाउंडेशन से 12 मई 2024 को मां का स्पर्श में क्षेष्ठ सम्मान से सम्मानित।
37. श्री राम साहित्यिक सेवा संस्थान अयोध्या उत्तर प्रदेश से क्षेष्ठ साहित्य शिल्पी सम्मान 2024 से सम्मानित।
38. दिव्या ज्योति साहित्यिक संस्थान रायपुर छत्तीसगढ़ से शब्द शिल्पी सम्मान 2024 से सम्मानित
39 कवि स्पर्श साहित्यिक पटल से जल दाता सम्मान 2024 से सम्मानित
40. श्री राम साहित्यिक सेवा संस्थान अयोध्या उत्तर प्रदेश से साहित्य विभूति सम्मान 20244 से सम्मानित।
41. दिव्या ज्योति साहित्यिक संस्थान रायपुर छत्तीसगढ़ से मातृ भक्त सम्मान 2024 से सम्मानित।
42. वैदिक प्रकाशन के द्वारा श्री राम रत्न सम्मान 2024 से सम्मानित।
43. वर्ल्ड रिकॉर्ड हेतु लार्जेस्ट अटेंडेंस इन वर्चुअल योगा क्लास 2024 हेतु हैबिल्ड ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा सम्मानित।
44. अयोध्या महोत्सव 2024 में सनशाइन पोएट/पोएटस आप द डे पर PROUDLY PRESENT TO HONORABLE सम्मान से सम्मानित।
45. आर्य पब्लिकेशन से स्वर्णिम प्राण प्रतिष्ठा सम्मान 2024 से सम्मानित।
46. नव प्रज्ञा काव्य फाउंडेशन से दानवीर सम्मान 2024 से सम्मानित।
47. दिव्या ज्योति संस्थान पब्लिकेशन छत्तीसगढ़ से राम लला मूर्ति स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर श्री राम भक्त सम्मान 2024 से सम्मानित
48. शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल द्वारा अंतरराष्ट्रीय हिंदी लघु प्रतियोगिता 2024 में अंतरराष्ट्रीय हिंदी लघु रत्न सम्मान से सम्मानित।
49. नव प्रज्ञा काव्य फाउंडेशन मध्य प्रदेश से मतदाता रत्न 2024 से सम्मानित।
50. दिव्यज्योति साहित्यिक संस्थान रायपुर छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय काव्य शिरोमणि सम्मान 2024 में सम्मानित।
51. दिव्यज्योति साहित्यिक संस्थान रायपुर छत्तीसगढ़ से मातृ भक्त सम्मान 2024 में सम्मानित।
52. हिंदी साहित्य मंच से मेरी मां काव्य सम्मान 2024 से सम्मानित।
53. कवि स्पर्श फाउंडेशन से विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर पर्यावरण सेवक सम्मान 2024 से सम्मानित।
54. शब्द सिदिक्षा अखिल भारतीय सुंदर साहित्य एवं संस्कृति समन्वय समिति रतलाम मध्य प्रदेश से 2024 में सम्मानित।
55. दिव्य ज्योति साहित्यिक संस्थान रायपुर छत्तीसगढ़ से अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर पर्यावरण मित्र सम्मान 2024 में सम्मानित।
56. काव्य मंच मेघदूत से विश्व दूध दिवस के अवसर पर उत्कृष्ट रचना हेतु 2024 में सम्मानित।
57.आर डी काव्यकुल फाउंडेशन से 2024 में सम्मानित।
58.श्री राम सेवा साहित्यिक संस्थान अयोध्या से 2024 में सम्मानित।
59.अन्तरराष्टीय योग दिवस 2024 पर ‘कवि स्पर्श’ साहित्यिक पटल के द्वारा विश्व योग दिवस सम्मान 2024 से सम्मानित
60.साहित्यिक मंच मेघदूत से अन्तरराष्ट्रीय पितृ दिवस 2024 पर सम्मानित।
61. हिन्दी साहित्यिक मंच अन्तरराष्ट्रीय पितृ दिवस 2024 में सम्मानित ।
62. मेघदूत सेलिब्रेशन मंच से 2024 में सम्मानित।
63. आकाशवाणी नजीबाबाद केंद्र उत्तर प्रदेश से दिनांक 09/02/2025 को प्रात:6.45 पर प्रस्तुति प्रसारण
64. दिनांक 23/03/2025 को लखनऊ में काशी हिन्दी विद्यापीठ वाराणसी से विद्या वाचस्पति मानद उपाधि प्राप्त साहित्यकार
65. यूट्यूब चैनल -: 1.activitybysuneel
2. Activity with suneel

सुनील कुमार “खुराना”
नकुड़ सहारनपुर
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