Sunil Kumar Khurana Poetry

सुनील कुमार “खुराना” की कविताएँ | Suneel Kumar Khurana Poetry

नियम

आकाश में नहीं कोई नियम
पक्षियों में प्यार रहता कायम
आज का मानव बनाता नियम
खुद चलता नहीं अपने नियम

मानव बनाए दूसरे के लिए नियम
बारी आएं अपनी छोड़ देता नियम
नियम तो बस ईश्वर ही बनाता
मानव क्या उस पर चल पाता

ईश्वर नियम करना सबका मंगल
फिर घर-घर में हो रहा क्यों दंगल
ईश्वर नियम सदा मानव से कहता
तू प्यार से धरा पर क्यों नहीं रहता

प्यार से रहना सबसे अच्छा नियम
संतों की वाणी चलना इस पर हरदम
जब तक तू जग में बनाएंगा नियम
तब तक चलम चला होगा तेरा नियम

जाने वो कौनसा देश

प्यारा जाने वो कौन-सा देश
चलें गएं कहां तुम दूसरे देश
तुम आ जाओ अपने स्वदेश
क्यों भाया तुमको ऐसा देश

तुम्हारी याद हमें बहुत आती है
तेरी याद दिल से नहीं जाती है
ख्यालों में हर पल खो जाती हूं
आंखों में तेरा अक्स सदा पाती हूं

देख लें अब तो आ गया सावन
सावन भी हो रहा है मनभावन
अब जाने कहां चले गए हो तुम
प्यारे पिया अब कहां हो गए गुम

धरा पर अब छाई है खुशियां
पास आकर संवार दो दुनिया
मुझसे अब हवा भी कहती है
मेरे कानों में तेरे गीत गाती है

जल

सबके जीवन जल होता आधार
प्यारे जल बिना है जीवन लाचार
जल ही होता सदा जीवन का सार
जल से मानव की हो जाती हार

जल के बिना चून होता बेकार
जल बिना जीवन होता अंधकार
जल जग में होता धरा की शान
जल ही होता है जीवन की जान

प्यारे जल बिना जीवन होता कहां
जल की कीमत समझ रहता कहां
जल बिना जीवन होता अंधकार
जल से होती सदा जय-जयकार

जल से ही तू जीवन में अपने फूला
मान रख सबके जल का क्यों भूला
जल से करते हैं व्यक्ति की पहचान
याद रख जीवन में सदा तू भगवान

जल से ये धरती और आसमान
जल बिन ये धरा होती रेगिस्तान
जल बिना है सूना ये जग सारा
जल से प्यारे सबकी जीवन धारा

विक्रम संवत


देखो प्यारे नव संवत्सर की शुभ वेला आई
नव संवत्सर की वेला धरा पर खुशियां लाई
चैत्र शुक्ल पक्ष से शुरू होता नव संवत्सर
भूली बिसरी बातें छोड़ देता नए अवसर

तिथि है यह प्यारी सबके मन को भाती
जीवन के मधुर गीत सबको यह दे जाती
कहते इस दिन ब्रह्मा ने किया सृष्टि निर्माण
जाने यह दुनिया सारी मिलते ऐसे प्रमाण

संवत्सर के गर्भ में छुपे होते प्यारे सब माह
नव संवत्सर दिलों में सबके भर देता चाह
सब मिल नर और नारी गाते खुशी के गीत
नव संवत्सर में सब बन जाते सबके मीत

इस दिन पृथ्वी सूर्य का चक्कर पूरा कर लेती
प्यारी प्रकृति ही प्यारे सबके कष्टों हर लेती
सप्तर्षि संवत सबसे प्रसिद्ध प्राचीन संवत
सभी ऋषि-मुनि भी करते इसकी संगत

होली

मैं हर रोज जैसे ही अपने स्कूल जाता
मन मेरा स्कूल के बच्चों के संग भाता

स्कूल के बच्चें मेरे स्कूल की शान
स्कूल में प्यारे बच्चे ही मेरी आन

मैं खुशी से स्कूल में सेल्फी लेने लगा
बच्चों ने मुझको अबीर गुलाल लगाया

मुख मेरा ऐसा हुआ जैसे बंदर देखा
मैं ऐसे बन गया जैसे फिल्मों की रेखा

बच्चों के संग मैं भी बच्चा बन गया
बच्चों पर मुझको आ रही थी दया

खुशियों से भर गया स्कूल आंगन
होली में था बच्चों का मन पावन

बच्चों संग मैंने रंगों से खेली होली
अलबेली थी हम मस्तानों की टोली

मिलकर खुशियां मना रहे थे अपार
होली ही भारत का पवित्र त्योहार

नारी हर युग में युग निर्माता

नारी हर युग में भी युग निर्माता रही
वह सुख दुःख में सदा ही साथ रही
नारी मुश्किल में भी सदा आगे बढ़ी
वहीं दुश्मन की छाती पर सदा चढ़ी

ममता में भी सब कुछ वार किया
हर पल जीवन को नई धार दिया
नारी सदा जीवन का आधार रही
नारी नर पर सदा अपना वार रही

नारी के बिना जीवन में सार नहीं
नारी के बिना जीवन में प्यार नहीं
महिमा नारी की ये जग सारा गाता
नारी से ही जीवन में सब कुछ भाता

नारी बिना मानव का जीवन अधूरा
नारी पूरा करती मानव जीवन सारा
नारी की गाथा भी गाते वेद पुराण
नारी ही करती मानव का निर्माण

नारी शब्द में ही छिपी नारी की शान
सदा नारी रही हर युग का अभिमान
नारी ईश्वर का है जीवन में वरदान
नारी ही जीवन में सबका अरमान

बाबुल के अंगना की यादें

मैं चली बाबुल का घर छोड़
ओ मैया मुझे बाबुल का घर प्यारा लगे
कैसे भुलाऊंगी मैं बचपन की वो यादें
याद करके रोएंगी मेरी मैया आंखें
मैया याद आएगा बाबुल का वो अंगना
बाबुल की वो बातें रह जाएगी बस सपना
ओ मैया बापू मेरा कैसे रखते थे ध्यान
कैसे जीया जाए जीवन में देते थे ज्ञान
बाबुल की बाहों के वो प्यारे झूले
याद है मुझको नहीं समाऊ थी फूलें
मैया बाबुल से कहना जाए मुझको भूल
कभी थी प्यारी तेरी बगिया की वो फूल
ओ मैया तू है प्यारी ममता की देवी
बचपन में बनकर रही तू सदा मेरी सेवी
ओ मैया मेरे बाबुल के अंगना का वो कोना
हर पल था अपना हर दिन था अपना सोना
ओ मैया दिल में बसी रहेगी बस वो यादें पुरानी
यादें बनकर रह जाएगी बस बचपन की कहानी
छूट रहा है आज मैया ये बाबुल का अंगना
आंसुओं से भरें है मेरे बाबुल के नयना
ओ मैया कैसी है ये जग की पराई रीत
एक से बिछड़ना है जग में एक से है प्रीत

उड़ान

पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों में उड़ान होती है
दम रख हौसलों में हौसले व्यक्ति की पहचान होती है
आसमान में तू ऊंची उड़ान भर मंजिल मिलेगी तुझे
डर मत किसी से तू बंदे एक दिन मिलेंगे फूलों के गुच्छे

मत कर जीवन में अपने आलस्य कर्म सदा तू करता चल
तू हर पल सदा कोशिश कर हर मुश्किल का निकलेगा हल
ख्वाब तेरे एक दिन पूरे होंगे जो तूने दिल में अपने संजोए
कहता इतिहास जिसने सपने संजोए उसके सदा पूरे होएं

तू हार मत मान जीवन में अपने जीत तेरी एक दिन होगी
उठ चल कर्म कर तेरी सदा ही जग में जय-जयकार होगी
आशा की मन में ज्योत जला लक्ष्य पर दे तू अपने ध्यान
एक दिन सदा ही तेरे चर्चे होंगे गली-गली और सारे जहान

सत्य की डगर सदा तू चल खुशी का इजहार तुझे होगा
चट्टान जैसा हौसला तू रख तुझे मंजिल का दीदार होगा
अपने मन में धीरज रख समय पर तू चखेगा सब्र का फल
मुश्किलों से पार होकर ही निकलता सदा मंजिल का हल

कुछ कर गुजर जाने का मन में तू अपने दीप जला रख
सदा मंजिल पाने के लगन,उत्साह,उमंग,हौसले तेरे पंख
अपने मन का परिंदा मंजिल पाने को आंसमा में उड़ने दो
सफलता जीवन का सार तुम अपनी उड़ान मत रुकने दो


विवाह ( हाइकु )

जाने सब
होते विवाह
शुभ घड़ी

विवाह
एक संजोग
होते खुश

जिनकी
होती शादी
होते खुश

विवाह
दो दिलों
का बंधन

विवाह
भगवान का
वरदान

सब कहते
होती दुआ
बने जोड़े

आशीष
मिले रब का
हो शादी

परिणय
दो आत्माओं
एक मिलन

मन का सूना साज

देख लो मन का सूना साज
छुपे जिसमें बहुत से राज़
मन भाएं थे उसके अंदाज

प्यारे थे वो हमें कल भी
प्यारे हमें है वो आज भी
सब बातें याद हमें आज

वो सूरत थी प्यारी मोहनी
छुपी सूरत उनकी सोहनी
नाम था प्यारा उनका नाज

भाती थी उनकी हमें सब बातें
याद में उनकी कटती थी रातें
उसने संवारें थे अपने कई राज

हालें दिल ये किसको सुनाएं
अब भी दिल उसके गीत गाएं
अब भी वह मेरे सिर का ताज

अगर तुम ना होते

जीवन में मेरे अगर तुम ना होते
हमारा साथ नहीं कभी कोई देते
जीवन के मेरे सुंदर सफर ना होते

तूने सदा ही साथ दिया अपना
साथ तेरा बन गया मेरा सपना
सपने अपने ना कभी पूरे होते

इस मेरे जीवन के सुंदर सफर में
मेरा साथ दिया तूने हर डगर में
जीवन में अपने ना होते उम्दा रास्ते

किया आज मैंने मुकाम जो हासिल
मेरी किश्ती के रहें तुम सदा साहिल
साथ हमारा ना जीवन में तुम देते

ये इतिहास बन गईं अपनी कहानी
गाएंगे इसे जीवन में अपनी जुबानी
मुझमें सफलता के तुम बीज ना बोते

धागा बांधा प्रीत का

ओ भैया मेरे ओ प्यारे भैया मेरे ।
मेरे भैया एहसान मुझ पर तेरे ।।

मैंने तुझको धागा बांधा प्रीत का ।
सपना मेरा तुम हो मेरी जीत का ।।

भैया रिश्तों की बंधी तेरी मेरी डोर ।
बहन भाई का रिश्ता क्या जाने ओर ।।

मेरे भैया मांगूं अपने रब से ये दुआ ।
अपने रिश्तों से ना खेलें कभी जुआ ।।

मेरे प्यारे भैया सलामत रहें तू सदा ।
तुझ पर रब की दुआ रहें सदा फिदा ।।

भैया राखी का धागा नहीं है कच्चा ।
मेरे भैया रिश्ता है ये तेरा मेरा पक्का ।।

रिश्ता भाई बहना का जग में मिशाल ।
जिसको होते बहन-भाई वो जग में निहाल ।।

योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री हो तो योगी जैसा।
काम करें कोई योगी जैसा।।
योगी करता है क्रम में विश्वास।
योगी का है गोरखपुर निवास।।

प्रदेश में बहाएं योगी विकास की गंगा।
योगी के राज में नहीं होए कोई दंगा।।
योगी करें पूजा गोरखनाथ की।
रक्षा करें योगी नारियों के सम्मान की।।

योगी है प्रदेश में दूसरी बार मुख्यमंत्री।
चाहे सब हर बार हो योगी मुख्यमंत्री।।
योगी चाहे प्रदेश में सबका मंगल।
योगी की बात है प्रदेश में अटल।।

चोर लुटेरे प्रदेश से हो रहे बगल।
योगीराज में सबका है जीवन सरल।।
योगी ने बोई कर्मों की अच्छी फसल।
योगी की बात पर सब करें अमल।।

योगी का प्रदेश तो है सबसे निराला।
योगी को सब माने प्रदेश का उजाला।।
योगी राज में बना राम मंदिर।
इतिहास बनाने में है योगी माहिर।।

योगी ही बनें देश के सिरमौर।
प्रातः काल वेला करें पुकार चहुंओर।।
देश की जनता कर रही पुकार।
प्रधानमंत्री योगी हो अबकी बार।।

आरज़ू मेरी

बस दिल में यही है आरजू मेरी
खुश रहें सदा जिंदगी मेरी तेरी
तू है मेरे बचपन का प्यारा यार
मुझे मिलता रहा तुझसे प्यार

तूने ही मेरे जीवन को संवारा
तुम्से ही मेरे जीवन का नजारा
तूने सदा ही जान मुझपे वारा
सदा अमर रहें दोस्ताना हमारा

याद मुझको वो बचपन की बातें
साथ रहें हम सदा दिन और रातें
रब से मांगे सदा हम प्यारी दुआ
रिश्तों को नहीं बनाएं कभी जुआ

कभी ना हो जहां में हम तुम जुदा
दोस्ती की मिसाल दे हमारी खुदा
बस यही आरजू मेरी मेरे खुदा से
कभी ना हो हम तुम जुदा जहां से

सच्चे बालवीर

हम प्यारे नन्हें नन्हें बच्चे।
हम होते मन के सच्चे सच्चे।।
हमसे ही है ये सारा जहां ।
हम जहां है खुशियां वहां ।।
लिखेंगे हम भारत की तकदीर ।
हम दुश्मन का सीना देंगे चीर।।
हम भारत के सच्चे वीर।
हम ही भारत की जागीर ।।
हम काॅटेगे गुलामी की जंजीर ।
हर पल कहता अपना जमीर ।।
हम ही हैं सच्चे धर्मवीर ।
हम नन्हें प्यारे कर्मवीर।।
सोनू मोनू और कहता शकील ।
भारत को न होने देंगे जलील।।
हम ही भारत के सच्चे शूरवीर ।
दुनिया कहती सदा हमें बालवीर ।।

देखो सुहावना मौसम आया है

देखो सुहावना मौसम आया है

सबके दिल को ये मौसम भाया है

प्यारी बसंत बहार धरा पर छायी

मन को भाती प्यारी बहार भायी

रातें पतझड़ की थी बड़ी कातिल

नहीं मिला मुझे राह में कोई साहिल

याद मुझको भूली-बिसरी सब बातें

आया मौसम प्यारा सब भूल गयी

हर पौधे पर अब प्यारी कली खिली

खेतों में मन भायी सरसों पीली-पीली

देखो वसुंधरा भी लेती अब अंगड़ाई

डगर-डगर पर देखो प्यारी बहार छायी

बसंत बहार देती प्यारे सबको ज्ञान

सच की राह चल बन्दे सदा तू जान

हर मुश्किल का प्यारे जीवन में हल

सुहाना मौसम सबके जीवन में लायी

मां श्रीयादे आरती

मां तुम्हें सत् सत् नमन हमारा
मां श्रीयादे तुम ज्ञान की देवी
मां तुम्हारे गुण गाए जग सारा

मां तुम हो सबकी आराध्य देवी
तुम रही सदा प्रहलाद की सेवीं
प्रहलाद का ज्ञान से जीवन संवारा

तुम्हारी शक्ति की महिमा जग में अपार
प्रहलाद का जीवन तुमने कर दिया पार
मां तुमसे ही धरा पर ये सारा नजारा

सत् पर चलने का तुमने सदा दिया नारा
मां तुम्हारी वाणी में थी अमृत की धारा
मां दीन-दुखियों पर जीवन तुमने वारा

भारत भूमि नमन तुम्हें

मेरी भारत भूमि नमन तुम्हे हमारा
तुमसे ही ये मेरा प्यारा जीवन सारा
माटी से तेरी पैदा हुए वीर शिवाजी
तुझ पर लुटा देते हैं प्राणों की बाजी

गंगा और यमुना आंचल में सदा तेरे खेलें
वीरों ने न जाने कितने सितम यहां झेले
हे भारत भूमि तेरी महिमा जग में न्यारी
खुशबू ऐसी इसमें सबकों जान से प्यारी

कण कण में इसके हर पल प्यार बसा
सच्चे वीर जाने इसकी खुशबू का नसा
वीरों से ही इसका गुलशन सदा महका
चूम कर करते सब सदा इसको सजदा

भारत भूमि की जग में शान निराली
इस पर मनाते सब ईद और दिवाली
भारत भूमि को नमन सौ बार हमारा
जान जब-तक है करते रहेंगे जयकारा

अधूरे जीवन की कल्पना

तेरा मेरा जीवन अधूरे जीवन की कल्पना
सोच ले प्राणी क्या यहां तुझे सदा रहना
अधूरा रह कर ही हो जाता जीवन समाप्त
जीवन में प्यारे तेरे रह जाता बहुत अज्ञात

जहां में चलता सदा तू अकड़ के साथ
अंत समय में तेरे क्या लगेगा हाथ
मानव सत्य की राह पर क्या तू चल पाया
राह सत्य की छोड़ झूठ तूने सदा अपनाया

मानव जो समझें जीवन में बड़ा विद्वान
प्रभु की नजर में मानव वह बड़ा नादान
अरे बंदे जीवन तेरा कोरे कागज़ जैसा
हर पल तेरे सदा काम आए कोई दूजा

पेड़ पौधों के बिना जग में जीवन अधूरा
रे जीवन तेरा हर कोई करें इसको पूरा
शिक्षा बिना मानव जीवन की कल्पना अधूरी
जीवन तेरा जैसे मृग ढूंढें जंगल-जंगल कस्तूरी

हे मां शारदे

हे मां शारदे
हमको दे दो स्वर का वरदान
स्वर का वरदान मिलकर
मिल जाएगा सम्मान

हे सुरों की देवी
विनती है तुमसे हमारी
इच्छा कर दो हमारी पूरी
सुरों का देकर हमको ज्ञान

हे शारदे मां
विनती है तुमसे बारम्बार
लगा दो मैया खेवा हमारा पार
बढ़ा दो तुम जग में हमारा मान

हे मां हंस वाहिनी
मझधार में है हमारी नैया
पार कर दो हमारा खवैया
सुर देकर कर दो एहसान

सुभाष चन्द्र बोस

उन्हें प्यारा
भाएं था देश
ऐसे सुभाष

नहीं प्यारी
उनको गुलामी
आजाद सोच

उनका नारा
जग सारा गाता
जय हिन्द

महान नेता
रहेंगे प्रणेता
नेता जी

वीर साहसी
नहीं थें आलसी
जानता जग

देश सेवा
पार किया खेवा
आप हुए शहीद

उच्चें तेवर
जान देकर
हुआ आजाद

उनका खून
दे गया आजादी
हुए शहीद

कारगिल

मिट जाएंगे सदा देश पर हम।
जब तक तन में है हमारे दम ।।
ये देश है प्यारा हम सबका ।
नहीं झूकने देंगे सर देश का ।।

जम्मू से लेकर कन्याकुमारी तक।
मिटने ना देंगे भारत की दमक ।।
ये देश है सबकों जान से प्यारा ।
दुश्मन को देंगे हम जवाब करारा ।।

कारगिल में अमर हो गए वीर अनेक।
हर भारतीय करें सदा उनका अभिषेक।।
स्वर्ग से प्यारा हमें अपना प्यारा देश।
मिलकर रहेंगे हम नहीं करेंगे कलेश ।।

भारत की मिट्टी में सदा हरदम तुझे रहना।
“खुराना”आन बान को नहीं कभी डुबोना ।।
रक्षा करेंगे हम सब सदा जान है जब तक ।
लेखन की रौशनी से जलाते रहेंगे अलख।।

हमारी शान प्यारा हिंदुस्तान

हम सब की शान प्यारा हिंदुस्तान
भारत का सारे जग में ऊॅचा स्थान
प्यारा सबका हिंदुस्तान सबकी जान

इस पर जन्में लैला,मजनू,हीर,रांझें
मिटा गए खुद को गीत उनके गा गए
याद करेगा भारत दे गएं प्यार का पैगाम

भारत की ये प्यारी धरा उगलें सोना
यहां का महकें सदा हर कोना-कोना
सबकों को है भारत पर अभिमान

ऋषि-मुनियों की ये प्यारी तपोभूमि
वीरों को जान से प्यारी भारत भूमि
जाने कितने वीर हुए इस पर बलिदान

यहां का हर बच्चा इस पर मरने वाला
यहां सब प्राणी भारत की जपते माला
सब इस पर देते अपने प्राणों का दान

जब-जब भी दुश्मन ने ललकारा है
भारत के वीरों ने दुश्मन को फटकारा है
दुश्मन के आगे वीर सीना देते अपना तान

ये दुनिया चलती रहेगी

सदा ही ये दुनियां चलती रहेगी
मिलकर सदा तू साथ सबके चल
एक दिन जिंदगी तेरी भी थमेंगी

सदा ना रहा है यहां कोई
सांसों की डोर का पता नहीं
ना जाने कब ये रूक जाएगी

सुख और दुख जीवन के दो पहिए
खुश होकर सदा तू दोनों को सहिए
खुशियां घर आंगन सदा तेरे सजेगी

सदा ना रहा है यहां कोई मुखिया
आनी और जानी है ये दुनियां
यहां हर पल दुनिया नई बसेगी

चलो मन से चले महाकुंभ में

चलो मन से चले महाकुंभ में
तन और मन पवित्र करने चले
मेरी आस्था इस हवन कुण्ड में

गंगा जमुना और सरस्वती का संगम
मिट जाएंगे पाप सबके जन्म-जन्म
है आस्था मेरी प्यारी इसी धर्म में

सबकों मिलेगा ऋषि मुनियों का संग
सत् का देते ज्ञान मन नहीं करना भंग
धन्य होगा सबका जीवन त्रिवेणी घाट में

धर्म की नगरी प्यारी मन भाएं सबकों
कट जाएंगे पाप मिलेगा पुण्य तुमको
सबके जीवन का सार उसके कर्मों में

गंगा,जमुना,सरस्वती को कर दो अर्पण
अपना सब कुछ कर दो तुम तर्पण
सदा ही जीत होगी तेरी इस जहां में

महाकुंभ चल रहा है धर्म की नगरी
धर्म की नगरी में ठहरी सत् की गगरी
चलों सत् की डगर सदा अपने जीवन में

मकर संक्रांति

फसलें लहराती
खुशियां छा जाती
मकर संक्रांति

खाते खिचड़ी
ठंड होती तगड़ी
प्यारा त्यौहार

गर्म कपड़े
सदा सर्दी पहने
रखें बचाव

खुश रहें
जीवन में अपने
सबके साथ

सदियों पुराना
त्योहार अपना
मकरसंक्रांति

खरमास समाप्त
होती खुशियां प्राप्त
बनते काम

गंगा स्नान
करते विद्वान
मिलकर सब

मेरे राम सबके राम ( गीत )

मेरे राम मेरे राम सबके राम
राम ने खाए सबरी के बेर
मिट गए जन्म-जन्म के फेर
सबके काज संवारे राम
जग का पालन करते राम

गांधी की थी प्यारी धुन
रघुपति राघव राजा राम
आओ गाए राम की धुन
बन जाएंगे बिगड़े काम

राम नाम की धुन गाकर
गांधी हुआ सब का प्यारा
राम नाम है जीवन सागर
राम नाम जीवन के चारों धाम

राम नाम लगती प्यारी धुन
रघुपति राघव राजा राम
आओ गाए राम की धुन
तुम लो राम नाम सुबह-शाम

राम नाम भारत की है शान
राम नाम पर मिट जाए आन
एक राम है दशरथ का प्यारा
एक जगत के पालन करते राम

राम नाम से सफल हो जाए जीवन सारा
और ना भाए मुझे कोई नाम
आर्दश है सबके हमारे श्री राम
मर्यादा पुरुषोत्तम हैं श्री राम

कौशल्या के है राज दुलारे राम
लक्ष्मण के भी है प्यारे राम
पास मेरे जो बस राम के नाम
पापी भी तर जाए लेकर नाम

आओ तिलक करें उस माटी से
जिसमें खुशबू मेरे श्री राम की
प्रकृति भी धन्य हो रही है
महिमा गाकर श्री राम की
त्याग,तपस्या,शील है राम

जागो-जागो

जागो जागो रे मेरे हिन्द के निवासी
प्यारा भारत है हम सबका
हम सब हैं भारत के वासी

तू इतिहास को अपने ले पढ़
ना बन तू जीवन में अनपढ़
शिक्षा को पाकर तू बन जा विश्वासी

मात-पिता के चरणों में चारों धाम
रहेगा चरणों में उनके बनेगें बिगड़े काम
करेगा क्या तू जाकर अयोध्या और काशी

कर्म है प्यारे सबके जीवन का सार
बिना कर्म के नहीं होगा बेड़ा पार
राह ना बना तू प्यारे अंधविश्वासी

पढ़ लो मेरे प्यारे भैया और बहना
पढ़ लिख कर इतिहास बना अपना
ना बन दास भैया ना बन बहना दासी

जीवन में करने से पहले तू सोच ले
समय तुझे ना बार-बार मिले
जीवन को ना बना अपना उदासी

भारत माता की तू करले सेवा
देश सेवा से बढ़कर नहीं कोई खेवा
नाम रहेगा तेरा बनकर जग में अविनाशी

मौन अधर

जिसके रहते मौन अधर
उनके होते हैं सुंदर सफर
कर्म होते जिनके नेक
पहचानते उनको अनेक

शान्ति है जीवन का सार
सबसे कर लो तुम प्यार
जो होते जीवन में संस्कारी
दुनिया होती उनकी सारी

मौन अधर बहुत कुछ कहते
सुनते जब समय पर कहते
मौन अधर होते ज्ञान के प्रतीक
मौन अधर को करती याद तारीख

विश्व हिन्दी दिवस

प्यारी हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा
सबकी प्यारी मेरी हिंदी भाषा
सारे जग में इसकी शान निराली
भाषा प्यारी हिंदी सबकी मतवाली

हिंदी भाषा भारत की पहचान
जगत गा रहा हिंदी का यश गान
हिंदी भाषा के प्यारे होते गीत
बोलें हिंदी भाषा को बन जाए मीत

विश्व पटल पर छाई प्यारी हिंदी
विश्व के माथे की हिंदी बनी बिंदी
विश्व मनाता इसका प्यारा गौरव दिन
शोभा बढ़ाते विदेशी शब्द मिलकर भिन्न

हिंदी के शब्द होते प्यारे फूलों सा गुच्छा
कबीर, रैदास ने माना हिंदी को अच्छा
हिंदी भाषा सब भाषाओं में महान
हिंदी के गीत गाता सारा जहान

बढ़ती ठंड से निजात कैसे ?

हम पाएं बढ़ती ठंड से निजात कैसे
सब काजू बादाम पिस्ते खाएंगे जैसे
भाई-बहनों बढ़ती ठंड है अपने चरम पर
सदा ही तुम रहना इंसानियत के धरम पर

सत् कर्म भी ठंड में तुम करते रहना
पल-पल जीवन में मदद करते जाना
ठंड में सबका सदा रखना तुम ख्याल
प्रभु जी भी तुम पर हो जाएंगे दयाल

सबके ठंड से बचने का सरल तरीका
गर्म कपड़े पहनने का सदा रखना सलीका
ठंड में तुम सुबह-शाम योगा करते रहना
कटु वचन ठंड में भी किसी से मत कहना

नारी वेदना

ओ मैया मैं तेरे गर्भ में हूं
तूने जब यह जाना तो
मारने की मुझको क्यों सोच रही है
मैया बता मेरा क्या कसूर है
ओ मैया बता मेरा क्या कसूर है
समय बहुत ही है बलवान
ओ बापू मेरे जब मैं हुई जवान
सारे रखते मुझपर अपनी आंखें तान
ओ बापू मेरा क्या कसूर है
पढ़ने जब मैं स्कूल जाती हूं
जग में अपने हो या बेगाने
सबकी आंखों में मै खलती हूं
हे जग वालों बताओं मेरा क्या कसूर है
घर से मैं जब कुछ करने निकलती
भेड़ियों की आंखें सदा मुझे तकती
कुछ नर जीवन में बन जाते कुत्तें
बताओ रब मेरे मेरा क्या कसूर है
ससुराल में घर से मैं जब जाती हूं
सासू हो ननद सब ताने है मारती
ससुराल में दहेज के सब है लालची
पैदा हुई हूं मैं जग में बेटी बन
पति मेरे बताओ मेरा क्या कसूर है

सुनील कुमार “खुराना”
नकुड़ सहारनपुर
उत्तर प्रदेश भारत

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3 Comments

  1. अदभुत ! शानदार , उच्चकोटी की लेखनी का प्रदर्शन

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