Bal Diwas ki Kavita

बाल दिवस | Bal Diwas ki Kavita

बाल दिवस

( Baal Diwas ) 

 

राष्ट्र धरा आह्लादित ,बाल मन सुरभि स्पंदन से

हर्ष आनंद जीवन पर्याय,
अंतर स्नेह अविरल धार ।
अपनत्व अथाह सींचन,
उरस्थ स्वप्निल मूर्त आकार ।
मान सम्मान मर्यादा सीख,
धर्म कर्म नैतिकता वंदन से ।
राष्ट्र धरा आह्लादित,बाल मन सुरभि स्पंदन से ।।

अग्र कदम चाल ढाल बिंब,
परिवार समाज शुभ्र भविष्य ।
विलोपन नैराश्य तमस मूल,
समाधान प्रश्न उत्तर संशय ।
आत्म विश्वास मुख निखार,
शिक्षा दीक्षा मृदुल मंडन से ।
राष्ट्र धरा आह्लादित,बाल मन सुरभि स्पंदन से ।।

सृजन अनंत नव अवसर,
दिव्य प्रतिभा चरम बिंदु ।
प्रेरणा पुंज संपूर्ण परिवेश,
सदाचार सहयोग भाव सिंधु ।
चिंतन मानवता ओतप्रोत,
विमुक्ति जाति पांति क्रंदन से ।
राष्ट्र धरा आह्लादित, बाल मन सुरभि स्पंदन से ।।

नैतिक कर्तव्य अधिकार बोध,
पर्यावरण संचेतना अनिवार्य ।
आशा उमंग उल्लास साहस,
आदर्श चरित्र निर्माण आचार्य ।
दर्शन मनप्रीत अठखेलियां,
निज संस्कृति संस्कार अभिनंदन से ।
राष्ट्र धरा आह्लादित,बाल मन सुरभि स्पंदन से ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें :-

गोवर्धन पूजा | Govardhan Puja

Similar Posts

  • उन्वान | Unwan

    उन्वान ( Unwan )    वो पन्ना किताब का सोचा था मुकम्मल हो गया चंद लफ्ज़ों की कमी थी उसकी बस तकमील को लम्हों की स्याही ऐसी कुछ बिखरी पन्ना नया अल्फाज़ वही मगर उन्वान ही बदल गया.. लेखिका :- Suneet Sood Grover अमृतसर ( पंजाब ) यह भी पढ़ें :- बिन तुम्हारे | Bin Tumhare

  • सबसे जुदा अपनी अदा | Sabse juda apni ada | Kavita

    सबसे जुदा अपनी अदा ( Sabse juda apni ada )   सबसे जुदा अपनी अदा लगे मनभावन सी। इठलाती बलखाती और बरसते सावन सी।   हंसता मुस्कुराता चेहरा अंदाज निराला है। खुशियों में झूमता सदा बंदा मतवाला है।   मदमस्त चलता चाल मनभावन से नजारे हैं। सारी दुनिया से हटकर नखरे उसके न्यारे हैं।  …

  • मुझे हक है | Poem Mujhe Haq Hai

     मुझे हक है ( Mujhe Haq Hai )   दिल के सारे राज जानूं कैसी दिल की धड़कन है। मनमंदिर में पूजन कर लूं दीपक ले मेरा मन है।   सुबह शाम जब देखूं दिल में होती धक धक है। तेरा प्रेम मेरी जिंदगी है प्रियतम मेरे मुझे हक है।   डगर डगर पे तेरे…

  • आया सावन | Sawan Poem

    आया सावन ( Aya Sawan )    आया सावन झूम के,आकुल धरती द्वार ! सुन कर तपते ताप से, उसकी मन मनुहार !! आलिंगन में भर लिया, उसका हर विस्तार सिंचित करने लग गया, शीतल मधुर फुहार !! अग जग में व्यापित हुआ,भीना मधुर सुवास भावावेशित पवन का, उमड़ा नव विस्तार !! सूरज संकोचित हुआ,…

  • सुकून | Sukoon

    सुकून ( Sukoon )    यादें भी काफूर हुईं,उम्मीदें भी जाती रहीं खाक के सिवा,धरती भी अपनी रही नही चाहा था जिसे,वो भी दिल से पराई हुई हो क्या बात दिल की ,तिश्नगी अब रही नही बदलते चमन की खुशबू मे,रंगत नही होती सुना है यार की,वो मंजिल भी पूरी हुई नही तलाशे सुकु कब…

  • चाॅंद पर उतरा विज्ञान | Chand Par Utra Vigyan

    चाॅंद पर उतरा विज्ञान ( Chand par utra vigyan )    आज हमारे हिन्दुस्तान ने इतिहास ऐसा ये रच दिया, अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर चन्द्रयान लैंडिंग कर दिया। टिकी हुई थी विश्व की नज़रें इस दिन चंद्र के सामने, हमनें भी फिर क़लम उठाकर रचना एक रच दिया।। इसरो के वैज्ञानिकों ने ये नामुमकिन कार्य…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *