स्वयं का मोल | Swayam ka Mole

स्वयं का मोल

( Swayam ka mole ) 

 

मिलन सारिता,प्रेम,लगाव आदि
बेहद जरूरी है
बावजूद इसके,आपको अपनी भी
कीमत स्वयं ही निर्धारित करनी होगी..

आपका पद,रिश्ता,भूमिका
आपको खुली छूट नही देता
आप जहां,जिस जमीन पर ,जिसके साथ
खड़े हैं ,वहां आपका कुछ मूल्य भी है…

अधिक सस्ती या सुलभ उपलब्धता
वस्तु हो या व्यक्ति
उसकी गरिमा को गिरा देता है
निगाह मे आप बहुत हल्के हो जाते हैं..

मेल आपके मन मे नही बेशक
लोगों को आपसे लाभ लेना आता है
और ऐसी स्थिति मे ,एक दिन
आपका टूट जाना संभव है..

महंगे बनोगे तो महंगे बिकोगे
अन्यथा ,शोरूम और फुटपाथ के अंतर को
समझलेना ही बेहतर होगा
हर बात समझाई नही जा सकती…

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

परिंदा | Parinda

Similar Posts

  • मेरी इच्छाओं की राख | Meri Ichchaon ki Raakh

    मेरी इच्छाओं की राख ( Meri ichchaon ki raakh )    मैं जिंदगी चाहती थी जीना जिंदगी की तरह जिंदगी जीने के तराशे कई रास्ते लेकिन सभी बंद थे मेरे लिये सिवाय एक रास्ते के जो जाता था उस देश को जहाँ उड़ान भरती थी मेरी इच्छाओं की राख और उसकी आंधियाँ वहाँ सारा दिन…

  • अहसास कवि का | Ahsaas Kavi ka

    अहसास कवि का ( Ahsaas kavi ka )    जब खिले फूल खुशबू को महकाते है हाल भंवरो का जो मंडराते है हर चमन मे उढे जब ये सैलाब सा अपने भावों को हम भी लिख जाते है वार अक्सर जो दिल पर कर जाते है भान उनको भी कुछ हम करवाते है जो करती…

  • चंद्रयान-३ | Chandrayaan-3

    चंद्रयान-३ ( Chandrayaan-3) ( 1 )  नया द्वार खोलेगा चंद्रयान देखो, बनेगा भारत की पहचान देखो। मुट्ठी में मेरे रहेगा अब चंदा, बढ़ेगा जगत में मेरा सम्मान देखो। कठिन दौर से मेरे गुजरे वैज्ञानिक, उनके भी चेहरों पे मुस्कान देखो। ख्वाहिशें हमारी सदा से हैं जिन्दा, उनके अंदर का अभिमान देखो। स्वागत करो रोली,तंदुल, श्रीफल…

  • अम्मा याद आईं | Kavita Amma Yaad Aayi

    अम्मा याद आईं ( Amma yaad Aayi )   अबकी होली में ‌ न जाने क्यों अम्मा याद आईं, मेरे पास कोई ऐसा भी नंबर होता, जो उससे भी बात हो पाती , उस देश का पता होता, जहां वो चली गई है, तो जरूर उसे, एक चिट्ठी लिखता, उसे लिखता कि, तेरे बिन यह…

  • आओ चले योग की ओर | Kavita

    आओ चले योग की ओर ( Aao chale yoga ki ore )   आओ चले योग की ओर आओ चले योग की ओर तन  मन  अपना चंगा होगा सेहत रहेगी सिरमौर   व्याधि  बीमारी  महामारी हाई-फाई हो रही भारी शुगर बीपी का मचे शोर आओ चले योग की ओर   संतुलित  सुखकर्ता  जीवन  में हर्ष…

  • Samay par kavita | कैसा यह समय है

    कैसा यह समय है ? ( Kaisa Yah Samay Hai ) शिक्षा को मारा जा रहा है अशिक्षा को बढ़ावा देकर असल को महरूम किया जा रहा चढ़ावा लेकर हिसाब बराबर किया जा रहा कुछ ले दे कर विश्वास पर हावी है अंधविश्वास गरीबों को मयस्सर नहीं अब घास देखता आसमान दिन-रात बरसे तो बने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *