Tag: कविताएँ
घर घर बजे बधाई | Krishna Janmashtami Par Kavita
घर घर बजे बधाई ( Ghar ghar baje badhai ) घर घर बजे बधाई लयबद्ध——ले के पहला पहला प्यार जन्मे जग के पालनहार ,मैया करे लाल से प्यार , नाचे गाए सब नर नार, बधाई बज रही घर-घर में।। भादो कृष्ण अष्टमी आई ,नंद बाबा घर खुशियां छाई। सखियां गावे मंगलाचार, घर-घर…
नंदलाल आयो रे बधाई | Geet
नंदलाल आयो रे बधाई ( Nandlal aayo re badhai ) आई आई शुभ घड़ी आई, वृंदावन धाम रे। यशोदा घर बजे शहनाई, कन्हैया नाम रे। लीलाधारी नटखट कान्हो, नंद घर आयो। राधा संग गोपिया नाची, कान्हो मुरली मधुर बजायो। गोकुल में बंटे मिठाई, दे रहे सब जन खूब बधाई। आयो माधव मुरली…
साथ तुम आ जाओ | Geet
साथ तुम आ जाओ ( Sath tum aa jao ) आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ मेरे यार, साथ तुम आ जाओ। मातृभूमि का वंदन करते, सीमा पर सेनानी लड़ते। रणभूमि में उतर जरा तुम, दो-दो हाथ दिखा जाओ। आ जाओ आ जाओ…… जो पत्थर के बने हुए हैं, कुछ वर्षों से तने…
राखी का त्यौहार | Kavita Rakhi ka tyohar
राखी का त्यौहार ( Rakhi ka tyohar ) बात-बात पे लड़ना, बात -बात पे झगड़ना, कभी रूठना ,कभी मनाना, कभी अड़ना; बड़ा नटखट है- भाई बहन का प्यार, देखो, आ गया ये राखी का त्यौहार ।। सतरंगी रंगों में चमक रही हैं राखियाँ, हर तरफ़ बिखरी हैं सैकड़ों मिठाइयाँ; आज पूरी तरह…
“कुर्बानियां आंदोलन के चक्रव्यूह में मिली हमें आजादी थी”
“कुर्बानियां आंदोलन के चक्रव्यूह में मिली हमें आजादी थी” क्रांतिकारियों के हृदय में भड़की आजादी की चिंगारी थी। गुलामी के प्रांगण में, रची आजादी की कहानी थी। वह तो स्वतंत्रता सेनानी की कुर्बानी थी। वह तो स्वतंत्रता सेनानी की कुर्बानी थी। लाल कुर्ती में बजाया आजादी का था बिगुल। छेड़ कर महासंग्राम चटाई अंग्रेजों को…
नाग पंचमी विशेष | Nag Panchami Par Kavita
नाग पंचमी विशेष ( Nag Panchami Par Kavita ) इक प्याले मे दूध लिए, पत्नी आई मुस्कराई। तुमको मेरे प्राण नाथ, नाग पंचमी की बधाई। पी लो हे प्रिय नटराजा के, विष तो तुमरी वाणी है। एक वर्ष में एक बार ही, विष में धार लगानी है। क्यों मै ढूंढू अन्य नाग…
यह मेरा हिंदुस्तान है | Hindi Poetry
यह मेरा हिंदुस्तान है ( Yah mera hindustan hai ) यह मेरा हिंदुस्तान है, यह मेरा हिंदुस्तान है। ध्वज तिरंगा हाथों में, ले राष्ट्रगीत गाते हैं। सरहद के सिपाही, सीमा के सभी जवान। आंधी तूफानों से भिड़, आगे बढ़ते जाते हैं। कूद पड़े मैदानों में, धरती मां के लाडले। बलिदानी राहों पर,…
हृदय मेरा पढ़ पाए | kavita
हृदय मेरा पढ़ पाए ( Hriday mera padh paye ) अन्तर्मन में द्वंद बहुत है, जाकर किसे दिखाए। ढूंढ रहा हूँ ऐसा मन जो, हृदय मेरा पढ़ पाए। मन की व्याकुलता को समझे,और मुझे समझाए। राह दिखे ना प्रतिद्वंदों से, तब मुझे राह दिखाए। बोझिल मन पर मन रख करके,हल्के से मुस्काए।…
सावन आया उमड़ घुमड़ | Geet
सावन आया उमड़ घुमड़ ( Sawan aya umad ghumad ) बरस रही है राष्ट्रधारा, सावन उमड़ा आता। रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे, उर आनंद समाता काली बदरिया उमड़ घुमड़, घूम घूम घिर आये। हरियाली से भरी धरा, सबको सावन भाये। झूम झूम मस्ती में गाते, सब मिलकर नया तराना। मंद मंद बहारें बहती,…
बचपन के दिन | kavita
बचपन के दिन ( Bachapan ke din ) पलकों पे अधरों को रख कर, थपकी देत सुलाय। नही रहे अब दिन बचपन के, अब मुझे नींद न आय। सपने जल गए भस्म बन गई, अब रोए ना मुस्काए, लौंटा दो कोई बचपन के दिय, अब ना पीड़ सहाय। किससे मन की बात कहे,…