Yah mera hindustan hai

यह मेरा हिंदुस्तान है | Hindi Poetry

यह मेरा हिंदुस्तान है

( Yah mera hindustan hai )

 

यह मेरा हिंदुस्तान है, यह मेरा हिंदुस्तान है।
ध्वज तिरंगा हाथों में, ले राष्ट्रगीत गाते हैं।

 

सरहद के सिपाही, सीमा के सभी जवान।
आंधी तूफानों से भिड़, आगे बढ़ते जाते हैं।

 

कूद पड़े मैदानों में, धरती मां के लाडले।
बलिदानी राहों पर, तिरंगा लहराते हैं।

 

धीर वीर पराक्रमी, भारत मां के दुलारे।
हंसते-हंसते जान, वतन पे लुटाते हैं

 

रग रग में बहती, देशप्रेम की धारा
ये मेरा हिंदुस्तान है,गीत गुनगुनाते हैं

 

बच्चे बच्चे की जुबां पे, जयहिंद ही आता है।
मातृभूमि वंदन हो, संस्कार सिखलाते हैं।

 

खुशियां लेकर आया, दिवस आजादी आया।
जश्न ए आजादी सब, महोत्सव मनाते हैं।

 

वंदन रणवीरों का, धरती मां के वीरों का।
वतन की आन पर, प्राण निज लुटाते हैं।

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

तब होगी मन में हरियाली | Geet Man mein Hariyali

Similar Posts

  • बेकाबू मन | Kavita bekaaboo mann

    बेकाबू मन ( Bekaaboo mann )     बेकाबू मन मेरा बार बार, स्मरण तुम्हारा करता है। तर जाता जनम मरण मेरा यदि,ईश्वर मे ये रमता है।   तुम मोह मेरे हरि मोक्ष रहे,मन जान नही ये पाता मेर। मन के संग प्रीत का मंथन है, हुंकार हृदय घबराता है।   आशा में तनिक निराशा…

  • मैं कितना बदल गया

    मैं कितना बदल गया नस्लें बर्बाद हो गई हमारी आज के इस व्यवहार में,हर कोई आज बिक गया रिश्वत के इस पुरस्कार में।अपनी पर ध्यान नहीं देते पर पराई पर हम देते रहे,अब वो कहां शिष्टाचार बचा है अपनों के संस्कार में।। हम तो रिश्वत से अपना ख्वाब पूरा करना चाहते हैं,आजकल हम एक दूसरे…

  • हाॅं हम है ये आदिवासी | Adivasi

    हाॅं हम है ये आदिवासी ( Han hum hai adivasi )    हाॅं हम है ये आदिवासी, खा लेते है रोटी ठंडी-बासी। रखतें हाथों में तीर-कमान लाठी, क्यों कि हम है इन वनों के ही वासी।। हाॅं हम है ये आदिवासी, बोड़ो भील कहते है सांसी। मर जाते, मार देते जो करें घाती, जंगल, ज़मीं…

  • आखिर तुम हो मेरे कौन?

    आखिर तुम हो मेरे कौन? खिलते हो मुरझाते हो,आकर रोज सताते हो।सुन्दर गीत एक सुनाकर,मन बेचैन दर्पण बनाकर ।सुधि आते हो बारम्बार,करते हो मुझपर ऐतबार।बात नहीं कर पाती तेरी,रोकूँ याद न रूकती तेरी।आखिर तुम हो मेरे कौन?? प्रति रोम-रोम स्पन्दित होती,सुधियों में आनन्दित होती।आच्छादित प्रियवर बन कर,आह्लादित उर करते मन भर।अनमोल भाव तेरा ठाकुर,तुमसे मिलन…

  • भोर की किरण | Kavita

    भोर की किरण ( Bhor ki kiran )   भोर की पहली किरण उर चेतना का भाव है उषा का उजाला जग में रवि तेज का प्रभाव है   आशाओं की जोत जगाती अंधकार हरती जग का जीने की राह दिखाकर उजियारा करती मन का   कर्मवीरों की प्रेरणा हौसलों की उड़ान है योद्धाओं की…

  • श्रीराम नाम-वंदना | Kavita

    श्रीराम नाम-वंदना ( Shri Ram Naam Vandana )   राम-नाम आनंद सुख मूल। परमशांति साधक पा जाए जपत मिटे जीवन-पथ शूल।।   घायल जटायु जपते-जपते पा गए मुनि दुर्लभ हरि धाम। पश्चाताप में जलते भरत को इसी नाम से मिला विश्राम।।   जी रही थी इसी सहारे राम मिलन को शबरी गंवार। नाम-मग्न सुतिक्ष्ण को…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *