दीवारों के कान

दीवारों के कान | Geet

दीवारों के कान

( Geet : deewaron ke kaan )

 

कितने घर उजाड़े होंगे, सारे भेद ले जान।
सारी दुनिया ढोल पीटते, दीवारों के कान।

 

मन की बातें मन में रखना, सोच समझ ले इंसान।
राम को वन में भिजवा दें, दीवारों के कान।

 

कहीं मंथरा आ ना जाए, घर में कृपा निधान।
भाग्य बदल दे घरवालों के, दीवारों के कान।

 

संभल संभल चलना प्यारे, होठों पर धर मुस्कान।
उर के भाव कहां ले जाए, दीवारों के कान।

 

उथल-पुथल मचा सकते हैं, करते सबको हैरान।
सिंहासन तक हिला देते, दीवारों के कान।

 

दरबारों में हाजिर रहते, बन रहस्य अनजान।
परिवर्तन का कारण बनते, दीवारों के कान।

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

कृष्ण ने लिया मनुज अवतार | Geet

Similar Posts

  • सौंदर्य | Saundarya Kavita

    सौंदर्य ( Saundarya )   सौन्दर्य समाहित ना होता, तेरा मेरे अब छंदों में। छलके गागर के जल जैसा, ये रूप तेरा छंदों से। कितना भी बांध लूं गजलों मे,कुछ अंश छूट जाता है, मैं लिखू कहानी यौवन पे, तू पूर्ण नही छंदों में।   रस रंग मालती पुष्प लता,जिसका सुगंध मनमोहिनी सा। कचनार कली…

  • पिया तोहे जी भर देख लूं | Piya Tohe

    पिया तोहे जी भर देख लूं ( Piya tohe jee bhar dekh loon )   खुशियों के पल जीकर देख लूं, आ पिया तोहे जी भर देख लूं। श्रृंगार मेरा सब पिया है तुमसे, प्यार तेरा सनम पाकर देख लूं। चांद उतरा है आज जमीन पर, करवा चौथ मना कर देख लूं। प्रीतम सज रही…

  • आया मौसम बसंत का

    आया मौसम बसंत का (बंसत-पंचमी पर विशेष )   शीतल-मंद बयार बहाता आया मौसम बसंत का। अपनी खुशबू से महकाता आया मौसम बसंत का।।   कङकङाती-ठण्ड का भी अंत जैसे हो गया। कुदरत का श्रृंगार करता आया मौसम बसंत का।।   रंग-बिरंगे फूलों के संग रंग-बिरंगी तितलियां। भ्रमर कलियों पर मंडराता आया मौसम बसंत का।।…

  • रंगो का त्यौहार | Holi par Kavita in Hindi

    रंगो का त्यौहार ( Rango ka tyohar )  रंगो के पर्व पर हमको शुद्ध आत्म स्वरूप पाना हैं । नाजुक साँसो का क्या भरोसा ? पल – पल सफल बनाना हैं । आती रहेगी बाधाएं भी पथ में । हमको तनिक नहीं घबराना हैं । संसार यह झूठा सपना हैं । कोई भी यहाँ अपना…

  • 2550 वां महावीर स्वामी मोक्ष कल्याणक दिवस

    2550 वां महावीर स्वामी मोक्ष कल्याणक दिवस   नवयौवन ही में महावीर ने राज पाट सब त्याग दिया, मात पिता के विवाह प्रस्ताव को विनम्रता से मना किया, मोक्षमार्गी बन कर्मों की निर्जरा ही एक उद्देश्य रहा, अशोक वृक्ष तले केश लुंचन कर मुनि दीक्षा अंगीकार किया। बारह वर्ष का कठोर तप कर घातिया कर्मों…

  • मनभावन कविता | Manbhavan kavita

    मनभावन कविता ( Manbhavan kavita )     साहित्य विधाएं मधुरम कवि की कविताएं मधुरम उर पटल आनंद भरती मनभावन रचनाएं मधुरम   शब्द सुरीले मीठे-मीठे बहती भाव सरितायें मधुरम छंद सोरठा गीत गजल में सजे नई उपमायें मधुरम   कल्पनायें साकार होती सृजन भरी रचनाएं मधुरम भाव सिंधु से मोती बहते काव्य की धाराएं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *