पढ़ पाऊँ
पढ़ पाऊँ हमेशा से ही मेरी हरसत रही है ये कि मैं भी कभी देखूँ किसी को सामने बैठा कर उसकी झील सी आँखों में अपने को डुबो कर….! एक ख्वाहिश ही रही कि उसकी आँखों को पढ़ पाऊँ क्या लिखा है उसके दिल में क्या चाहत है उसकी क्या दर्द है उसकी आँखों…
थोड़ा उदास हूँ पिछले कई दिनों से मन थोड़ा #उदास रहने लगा है समझ नहीं आ रहा कि क्या करें हम एक ही बात बार-बार #मन में हर बार आ रही है कि हर बार मेरे ही साथ ऐसा क्यूँ होता है..? उन्हीं की बातों को #दिल से लगाकर विचारों की #मथनी चलती…
शायद हम बच्चे हो गए शायद हम बच्चे हो गए शायद अब हम बच्चे हो गए क्यूंकि अब बच्चे बड़े हो गए…. अब न सुबह जल्दी उठने की हड़बड़ी….. न जल्दी खाना बनाने की फरमाइशें…. न बजट की खींचातानी न कल की चिंता….. न तर्क करता कोई न…
प्रियवर मेरे तन मन प्रान महान प्रियवर। प्रात:सांध्य विहान सुजान प्रियवर।। इस असत रत सृष्टि में तुम सत्य हो, नित नवीन अनवरत पर प्राच्य हो, मेरे अंतस में तुम्हारा भान प्रियवर।।प्रात:० ललित वीणा तार तुमसे है सुझंकृत, ये षोडस श्रृंगार तुमसे है अलंकृत, प्रेयसी का मान स्वाभिमान प्रियवर।।प्रात:० प्रणयिका बन चरण…
शरद का चाँद ***** शरद का चाँद लिए दिखा आज अंबर, चांदनी में नहाया जग दिख रहा अतिसुंदर। जगमगा रहा जग सारा रौशनी में नहाकर, कभी छत तो कभी आंगन से- निहार रहा हूं नीलांबर। पछुए की छुअन से सिहरन सी हो रही है, देख चांदनी , चकोरी विभोर हो रही है। उमड़ रहा नयनों…
बारिश की बूंदें ऐसी बरसी थीं मुझ पर कल बारिश की बूंदें बरसा था मुझ पर तुम्हारा प्यार जैसे मिट गईं खलिश मिट गईं दूरियां एहसासों से मेरे कर गई साजिशें ऐसी बरसी थीं मुझ पर कल बारिश की बूंदें भीगे भीगे से शिकवे भीगी भीगी शिकायत आंसुओं से मेरे कर…