Tag: Hindi Kavita
संसय | Kavita
संसय ( Sansay ) मन को बाँध दो दाता मेरे,मेरा मन चंचल हो जाता है। ज्ञान ध्यान से भटक रहा मन,मोह जाल मे फंस जाता है। साध्य असाध्य हो रहा ऐसे, मुझे प्रेम विवश कर देता है। बचना चाहूं मैं माया से पर, वो मुझे खींच के ले जाता है। वश में…
बंधु अपने दिल की सुन | Geet
बंधु अपने दिल की सुन ( Bandhu apne dil ki soon ) चल राही तू रस्ता चुन, बंधु अपने दिल की सुन। बंधु अपने दिल की सुन,बंधु अपने दिल की सुन। अपनी धुन में बढ़ता जा, उन्नति शिखर चढ़ता जा। आंधी से तूफानों से, हर मुश्किल से लड़ता जा। हौसला करके बुलंद, गा मस्ती…
प्रतिशोध | Pratishodh
प्रतिशोध ( Pratishodh ) मै हार नही सकता फिर ये, जंग जीत दिखलाऊंगा। फिर से विजयी बनकर के भगवा,ध्वंजा गगन लहराऊगा। मस्तक पर चमकेगा फिर सें, चन्दन सुवर्णा दमकांऊगा। मै सागर जल तट छोड़ चुका पर,पुनः लौट कर आऊँगा। जी जिष्णु सा सामर्थवान बन, कुरूक्षेत्र में लौटूंगा। मैं मरा नही हूँ अन्तर्मन…
फिजाओं में जहर घोला जा रहा है | Kavita
फिजाओं में जहर घोला जा रहा है ( Fizaon mein jahar ghola ja raha hai ) हवाओं में जहर घोला जा रहा है जंगलों को जड़ से काटा जा रहा है शहरों में ऑक्सीजन है नहीं फिर भी आलीशां महल बनाया जा रहा है। हम भला इंसाफ अब क्या करेंगे लगा के…
सशक्त बनो हे नारी तुम | Kavita
सशक्त बनो हे नारी तुम ( Sashakt bano he nari tum ) उठो नारी आंसू पौंछो खुद की कीमत पहचानो लाज का घूंघट ढाल बना लो अहंकार का तिलक लगा लो स्वाभिमान की तान के चादर खुद में खुद को सुदृढ बना लो उठो नारी आंसू पौंछो खुद की कीमत पहचानो ?☘️ अपनी शक्ति…
मेघा | Kavita
मेघा ( Megha ) बरस रे टूट कर मेघा, हृदय की गाद बह जाए। सूक्ष्म से जो दरारे है, गाद बह साफ हो जाए। बरस इतना तपन तन मन का मेरे शान्त हो जाए, नये रंग रुप यौवन सब निखर कर सामने आए। दिलों पे जम गयी है गर्द जो, उसको बहा देना।…
इस महफिल में न यादों की खुशबू आती है | Kavita
इस महफिल में न यादों की खुशबू आती है ( Is mehfil mein na yaadon ki khushboo aati hai ) ना पुराने इश्क पर चर्चा होती है। ना अब किसी की टांग खींची जाती है। ए मेरे दोस्त लगता है सब जिम्मो तले छोटी सी झपकी लेने चली जाती है। आओ ना यारों फिर…
पर्वत प्रदेश में पावस | Kavita
पर्वत प्रदेश में पावस ( Parvat Pradesh Mein Pavas ) पावसी बूंदे पड़ते ही पर्वत झूमने है लगते.. पेड़ पौधे फूल सभी मुस्कुराने है लगते .. चट्टानों पर छा जाती है चाहुओर हरियाली मानो उपवन में कोई मोर नाचने है लगते। रिमझिम बूंदें है गाती भीगती है चोटियां… छनन छनन खलल खलल गाती…