Tag: Hindi Kavita
सावन सुहाना आया | छंद
सावन सुहाना आया | Chhand ( Sawan suhana aya ) ( मनहरण घनाक्षरी छंद ) सावन सुहाना आया, आई रुत सुहानी रे। बरसो बरसो मेघा, बरसाओ पानी रे। बदरा गगन छाए, काले काले मेघा आये। मोर पपीहा कोयल, झूमे नाचे गाए रे। रिमझिम रिमझिम, बरखा बहार आई। मौसम सुहाना आया, हरियाली छाई…
कुछ जाने अनजाने रिश्ते | Kavita
कुछ जाने अनजाने रिश्ते ( Kuch jaane anjaane rishte ) कुछ जाने अनजाने रिश्ते, कुछ दिल से पहचाने रिश्ते। कुछ कुदरत ने हमें दिया है, कुछ हमको निभाने रिश्ते। रिश्तो की पावन डगर पर, संभल संभल कर चलना है। सदा लुटाना प्यार के मोती, संस्कारों में हमें ढलना है। माता पिता गुरु…
ओढ़कर धानी चुनरिया | Thesahitya Special
ओढ़कर धानी चुनरिया ( Odh Ke Dhani Chunariya ) ओढ़कर धानी चुनरिया, धरा यू हरसा रही। काली घटाएं नीले अंबर, व्योम घिरकर छा रही। आ गया सावन सुहाना, गीत कोयल गा रही। वन उपवन पर्वत नदियां, भावन घटायें छा रही। मादक सरितायें बहती, सागर मिलन को जा रही। बलखाती सी बहती धारा,…
शब्द | Hindi Poetry
शब्द ( Shabd ) मेरे शब्दों की दुनिया में, आओं कभी। स्वर में कविता मेरी, गुनगुनाओ कभी। बात दिल की सभी को बता दो अभी। मेरे शब्दों की दुनिया में…….. ये जो रचना मेरी देगी जीवन तभी। लय में सुर ताल रिद्धम में बाँधो कभी। अपने भावों को इसमें मिलाओ कभी। मेरे…
तुम मेरे हो | Geet
तुम मेरे हो ( Tum mere ho ) तुम मेरे हो तुम मेरे हो, सुंदर शाम सवेरे हो। जीवन की बगिया में तुम, खिलते फूल घनेरे हो। मुस्कानों से मोती झरते, प्रेम उमड़ता सागर सा। महक जाता दिल का कोना, प्रेम भरी इक गागर सा। मधुबन मन का खिलता जाता, प्रियतम तुम…
गुरु शिष्य का भाग्य संवारते | Kavita
गुरु शिष्य का भाग्य संवारते ( Guru shishya ka bhagya sanwarte ) किस्मत का ताला खुल जाता, गुरु शिष्य का भाग्य विधाता। ज्ञान ज्योति जगा घट घट में, अंतर्मन उजियारा लाता। शिल्पकार मानव निर्माता, शत शत वंदन हे गुण दाता। बुरे मार्ग से हमें बचाओ, प्रगति का मार्ग दिखलाओ। गढ़कर नित नये…
तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से | Kavita
तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से ( Tumhe chaha adhik sare jahan se ) तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से। मुकद्दर मैं मगर लाऊ कहां से।। ऐ मेरी जाने गजल तू ही बता, कौन हंसकर हुआ रूखसत यहां से।। किसी भी चीज पे गुरुर न कर, हाथ खाली ही आया है वहां से।। मैं …
जल बिन | Kavita
जल बिन ( Jal Bin ) इकदिन समंदर भी सूख जाएगा व्यर्थ पानी बहाया जा रहा घर-घर लगाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा जहां थी जरूरत सभी को इक गिलास पानी की वहां चलाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा पानी का कीमत इक दिन जाकर मैं मछलियों से पूछा, वो…
शटर उठा दो | Kavita
शटर उठा दो ( Shatar utha do ) मेरे ख्याल रूपी ब्रेड पे बटर लगा दो। दिल का बन्द है दुकान तुम शटर उठा दो। मिला के नयन नयनों से यू आँखे चार कर लो। पनीर तल के रखा है कि तुम मटर मिला दो। पुलाव बन रही ख्यालों में थाली लगा…
पुत्री की वेदना शराबी पिता से | Kavita
पुत्री की वेदना शराबी पिता से ( Putri ki vedna sharabi pita se ) पापा मेरी किताब , मेरे अरमान है, मेरी खुशी है, मेरा भविष्य है, सब बेच मेरी खुशियों का शराब पी गए, पापा मां का मंगलसूत्र सुहाग है मांग का सिंदूर है, सब बेच उनके अरमानों का …