तेरे बिना

तेरे बिना

तेरे बिना

तू चली गई, मुझे तन्हा छोड़कर,
तेरी यादों में हर लम्हा जलता गया।
दिल ने अब धड़कना भी छोड़ दिया,
बस तेरे जाने के बाद सब ठहरता गया।

दीवारों से बातें अब आदत बनी,
तेरी परछाईं भी खामोश हुई।
अंधेरों में तेरी आहटें खोजूं,
पर हर राह अब सूनी हुई।

कभी हमसफ़र थे, साथ चले थे,
प्यार की राहों में हम ने वादे किए थे।
फिर क्यों छोड़ दिया एक मोड़ पर आकर,
बता, प्रेम के सपनें कय्या ग़लती किए थे?

अब लौट आओ, फिर से संभालो,
बिछड़े लम्हों पर प्यार बरसालो।
दिल अब भी तेरा इंतज़ार कर रहा है,
धड़कनों में अपनी फिर से बसा लो।

कवि : प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”
सुरत, गुजरात

यह भी पढ़ें :

Similar Posts

  • फुटपाथ पर | Footpath par

    फुटपाथ पर ( Footpath par )   कभी चल कर आगे बढ़ कर दो चार कदम सड़कों पर देखो तो, दिख जायेंगे या मिल जाएंगे कुछ ऐसे लोग फुटपाथ पर खाते पीते सोते बेफिक्र निडर होकर। फिर कभी चल कर आगे बढ़ कर दो चार कदम देखो तो गलियों में जहां बसते हैं बड़े लोग…

  • वफा के नाम पे धोखे जहां में जो भी खाते है

    वफा के नाम पे धोखे जहां में जो भी खाते है     वफा के नाम पे धोखे जहां में जो भी खाते है। निगाहों में सदा आंसू दिलों में दर्द पाते है।।   खुशी से फिर नहीं मिलते जमाने में किसी से वो। हँसेगे लोग सारे ही गमों को यूं  छुपाते है।।   पुकारो…

  • लंपी वायरस | Lumpy virus par kavita

    लंपी वायरस ( Lumpy Virus )   हजारों मवेशियों को निगल चुकीं आज यह बीमारी, बड़ी चुनौती बन गया आज लंपी वायरस यें बीमारी। ख़ासतौर राजस्थान में जिसका टूट रहा कहर भारी, संक्रमित पशु से फ़ैल रहीं दूसरे पशुओ में महामारी।। त्वचा पे गांठें बन जाना चारा ना खाकर सूख जाना, न घूमना न फिरना…

  • जीवन-भाग-2

    जीवन-भाग-2 हारना कब जितनाकब मौन रखना कबबोलना कब संतुलितहोंना कब विनम्रतापूर्वकपेश आना आदि – आदितब कहि जाकर हमइस जीवन रूपी नोकाको पार् पहुँचाने कीकोशिश कर सकते हैअतः हमनें आवेश मेंअपने आप को समनही रखा और अनियंत्रितहोकर बिना सोचें आक्रमकहोकर कुछ गलत सब्दोंका प्रयोग कर दिया तोइस जीवन रूपी नोका कोटूटने से वह डूबने से कोईभी…

  • आश्रित | Aashrit

    आश्रित ( Aashrit )   कुछ चीजों पर अपना वश नही होता दिल पर हर बार काबू नही होता मुखवटे हर बार चढाये नही जाते आंसू हर बार छिपाए नही जाते गम का चश्मा चढ़ाया नही जाता हर बार दूरियां निभाई नही जाती लफ्जों को वापस पाया नही जाता टूटा हुआ रिश्ता निभाया नही जाता…

  • बेसुरी बांसुरी | Kavita Besuri Bansuri

    बेसुरी बांसुरी ( Besuri bansuri )   क्यों बनाते हो जीवन को बेसुरी सी बांसुरी फूंक कर सांसों को देखो सुर भरी है राग री।   चार  दिनों की चांदनी है फिर अधेरी रात री। कब बुझे जीवन का दीपक कर लो मन की बात री।   जोड़ कर रख ले जितना भी धन सम्पत्ति…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *