तेरी आँखे | Teri Aankhen

तेरी आँखे

( Teri Aankhen )

देती क्या ये इशारा है तेरी आँखे
करें दिलकश नज़ारा है तेरी आँखे !

देखीं है जब से खुबसूरत निगाहों को,
हुई इश्क -ऐ -सहारा है तेरी आँखे !

मुहब्बत का मिला हमको शगन यारो,
मेरी जश्न -ऐ -बहारा है तेरी आँखों !

निशा में हो जैसे चमका अभी कोई,
हसीं लगती सितारा है तेरी आँखे !

जी करता डूब जाऊँ मैं सदा के लिए,
मुझे देती किनारा है तेरी आँखे !!

डी के निवातिया

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

बहकी-बहकी सी | Ghazal Behki Behki Si

Similar Posts

  • आरज़ू के फूल | Aarzoo ke Phool

    आरज़ू के फूल ( Aarzoo ke Phool ) बिखरे हैं मेरे दिल में तेरी आरज़ू के फूलआकर समेट ले ये तेरी जुस्तजू के फूल।। ख़ुशबू हमारे वस्ल की, फ़ैली है हर जगहहर जा बिछे हुए हैं, यहाँ गुफ़्तुगू के फूल महफूज़ रक्खे दिल में तेरी चाहतें जनाबऔर याद जिसने बख़्शे ग़म-ए-सुर्ख़रू के फूल दिल का…

  • परवरदिगार दे

    परवरदिगार दे तासीरे-इश्क़ इतनी तो परवरदिगार देदेखे मुझे तो अपनी वो बाँहें पसार दे यह ज़ीस्त मेरे साथ ख़ुशी से गुज़ार देइस ग़म से मेहरबान मुझे तू उबार दे मुद्दत से तेरे प्यार की ख़्वाहिश में जी रहायह जांनिसार तुझ पे बता क्या निसार दे इतनी भी बे नियाज़ी मुनासिब नहीं कहींजो चाहता है वो…

  • लापता कर गया | Ghazal Shayari

    लापता कर गया ( Laapata kar gaya )   तंज़ के तीर सारे चला कर गया। है बिछड़ के बहुत ख़ुश बता कर गया। ज़ख़्म फिर से हमारा हरा हो गया कौन उसका यहां तज़किरा कर गया। दी रिहाई हमें इश्क़ की क़ैद से ख़त्म वो प्यार का सिलसिला कर गया। तोड़ कर दिल हमारा…

  • आपका ह़ुस्न-ए-क़यामत | Aap ka Husn-e-Qayamat

    आपका ह़ुस्न-ए-क़यामत ( Aap ka Husn-e-Qayamat ) आप का ह़ुस्न-ए-क़यामत आह हा हा आह हा। उस पे यह रंग-ए-ज़राफ़त आह हा हा आह हा। देख कर तर्ज़-ए-तकल्लुम आप का जान-ए-ग़ज़ल। मिल रही है दिल को फ़रह़त आह हा हा आह हा। फूल जैसे आप के यह सुर्ख़ लब जान-ए-चमन। उन पे फिर लफ़्ज़-ए-मुह़ब्बत आह हा…

  • नही करते | Nahi Karte

    नही करते ( Nahi karte )   वैसे किसी को बेवज़ह आहत नहीं करते गैरत कोई छेड़े तो मुरव्वत नहीं करते ॥ कोशिश यही रहती न कभी भूल कोई हो गर हो तो सीखते हैं नदामत नहीं करते ॥ इन्साफ हुआ अंध है गूंगा है ज़माना बरसर-ए-विधा भी तो हिफाज़त नहीं करते ॥ अहबाब को…

  • आँखों आँखों में दास्तान हुई | Vinay Sagar Poetry

    आँखों आँखों में दास्तान हुई ( Aankhon aankhon mein dastan hui ) आँखों आँखों में दास्तान हुई यह ख़मोशी भी इक ज़बान हुई इक नज़र ही तो उसको देखा था इस कदर क्यों वो बदगुमान हुई कैसा जादू था उसकी बातों में एक पल में ही मेरी जान हुई इस करिश्मे पे दिल भी हैरां…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *