तेरी आँखे | Teri Aankhen

तेरी आँखे

( Teri Aankhen )

देती क्या ये इशारा है तेरी आँखे
करें दिलकश नज़ारा है तेरी आँखे !

देखीं है जब से खुबसूरत निगाहों को,
हुई इश्क -ऐ -सहारा है तेरी आँखे !

मुहब्बत का मिला हमको शगन यारो,
मेरी जश्न -ऐ -बहारा है तेरी आँखों !

निशा में हो जैसे चमका अभी कोई,
हसीं लगती सितारा है तेरी आँखे !

जी करता डूब जाऊँ मैं सदा के लिए,
मुझे देती किनारा है तेरी आँखे !!

डी के निवातिया

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

बहकी-बहकी सी | Ghazal Behki Behki Si

Similar Posts

  • कभी तो देख | Kabhi to Dekh

    कभी तो देख ( Kabhi to Dekh ) नकाब जब हटे ज़रा नज़र झुकी-झुकी मिलेकभी तो देख इक नज़र के लुत्फ़-ए-मयकशी मिले सितारे चाँद चाहिए न चाँदनी भी अब हमेंफ़क़त है इश्क़ की ही ख़्वाहिशें ये बंदगी मिले सितम हज़ार करते हैं दिलों जाँ पे सभी यहाँजिसे बता दूँ दास्ताँ कोई तो आदमी मिले नज़र…

  • याद आया | Yaad Aya

    याद आया ( Yaad Aya ) आज वो गुज़रा सफ़र याद आया साथ हर चलता बशर याद आया बेच बिरसे को बसे शहरों में फिर न बेटों को वो घर याद आया दूर पल में हुए थे ग़म मेरे गर्दिशों का जो समर याद आया क़त्ल कर के जो गया हसरत का संग जैसा वो…

  • ह़ाजत तुम्हारी | Ghazal Hajat Tumhari

    ह़ाजत तुम्हारी ( Hajat Tumhari ) मयस्सर हो गर हमको उल्फ़त तुम्हारी। करेंं हर घड़ी दिल से मिदह़त तुम्हारी। न छूटेगी अब हमसे संगत तुम्हारी। हमें हर क़दम पर है ह़ाजत तुम्हारी। हमारी शिकस्ता सी इस अन्जुमन में। मसर्रत की बाइ़स है शिरकत तुम्हारी। जहां भर की दौलत का हम क्या करें,जब। ख़ुशी दिल को…

  • मज़लूम हूँ मैं | Mazloom Shayari

    मज़लूम हूँ मैं ( Mazloom hoon main )   मुझे ऐ ख़ुदा जालिमों से बचा लें कोई फ़ैसला जल्द ही अब ख़ुदा लें कभी बददुआ कुछ बिगाड़ेगी न तेरा हमेशा ही माँ बाप की बस दुआ लें फंसा देगा कोई झूठे केस में ही यहाँ राज़ दिल के सभी से छुपा लें किसी से न…

  • टूट जाता है | Ghazal Toot Jata Hai

    टूट जाता है ( Toot Jata Hai ) बिना जज्बात के रिश्ता सभी का टूट जाता है अगर मतभेद हो घर में सयाना टूट जाता है खिलौना दिल बनाकर जो किया था पेश दिलवर को कहा उसने तुम्हारा ये खिलौना टूट जाता है नही है शौक दर्पण को कि पत्थर से कभी खेले उसे मालूम…

  • हे राजन | Ghazal Hey Rajan

    हे राजन ( Hey Rajan ) हे, राजन तेरे राज में,रोजगार नही है, मुफ़लिसों को वाजिब, पगार नही है। ==================== है खास जिनके धन के अंबार लगे है, देखो गरीब तुम्हारे, गुनाहगार नही है। ==================== ये कोई दुश्मन नही है तेरे तरस करो, भूखे है शोहरत के,तलबगार नही है। ==================== भर पेट खाना,बदन को छत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *